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  • ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भारत से मांगी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति, पाइपलाइन के जरिए बढ़ेगा ईंधन सहयोग

    ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भारत से मांगी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति, पाइपलाइन के जरिए बढ़ेगा ईंधन सहयोग


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में बिजली और गैस की कमी के बीच ऊर्जा संकट लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। इस स्थिति से निपटने के लिए बांग्लादेश ने भारत से सीमा पार पाइपलाइन के जरिए डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति करने की अपील की है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ ईंधन सुरक्षा को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

    बांग्लादेश के पावर, एनर्जी और मिनरल रिसोर्सेज मंत्री इकबाल हसन महमूद ने भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के साथ बैठक के बाद ऊर्जा सहयोग को चर्चा के प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश पहले से ही पाइपलाइन के माध्यम से भारत से डीजल आयात करता है और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उसने भारत से इसकी आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है।

    बांग्लादेश इस समय बिजली उत्पादन के लिए जरूरी ईंधन और गैस की उपलब्धता को लेकर दबाव का सामना कर रहा है। ऊर्जा की मांग पूरी करने के लिए डीजल की पर्याप्त आपूर्ति महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में भारत से अतिरिक्त ईंधन मिलने पर बांग्लादेश की घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है और बिजली उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार महत्वपूर्ण हुआ है। दोनों देशों के बीच बिजली के आदान-प्रदान के साथ ईंधन आपूर्ति और सीमा पार ऊर्जा संपर्क से जुड़ी व्यवस्थाएं भी विकसित हुई हैं। इसी सहयोग के तहत भारत से बांग्लादेश तक डीजल पहुंचाने के लिए सीमा पार पाइपलाइन का इस्तेमाल किया जाता है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया। बांग्लादेश की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत के साथ ऊर्जा संबंध दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े हैं। पड़ोसी देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए सहयोग को आगे बढ़ाना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए डीजल आपूर्ति ने बांग्लादेश की ईंधन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है। अप्रैल की शुरुआत में इस पाइपलाइन के माध्यम से भारत से बांग्लादेश को करीब 5,000 टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति शुरू हुई थी। उस समय पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के बीच ईंधन आयात पर दबाव बढ़ने की आशंका थी। ऐसे माहौल में पाइपलाइन के जरिए आपूर्ति को बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

    मौजूदा बिजली और गैस संकट के बीच बांग्लादेश की अतिरिक्त डीजल मांग से दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों का महत्व और बढ़ गया है। यदि भारत की ओर से अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराई जाती है, तो इससे बांग्लादेश को बिजली उत्पादन और परिवहन समेत कई क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    ऊर्जा सहयोग के साथ दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी इस समय चर्चा के केंद्र में हैं। सीमा पार बिजली और ऊर्जा संपर्क को मजबूत करने से क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति देने की संभावना है। बांग्लादेश की ताजा अपील ऐसे समय आई है जब वह अपनी तत्काल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भरोसेमंद ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है।

  • अभी भी दूषित पानी पीने को मजबूर शहरवासी, जबलपुर की 80 प्रतिशत पाइपलाइन नालों में डूबी

    अभी भी दूषित पानी पीने को मजबूर शहरवासी, जबलपुर की 80 प्रतिशत पाइपलाइन नालों में डूबी


    जबलपुर। प्रदेश के पहले नगर निगम होने का गौरव रखने वाला जबलपुर नगर निगम आज भी अपने नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रहा है। नर्मदा तट पर बसा यह शहर जो कभी अपनी स्वच्छता और सुंदरता के लिए जाना जाता था आज अपने नागरिकों को दूषित और बदबूदार पानी पीने के लिए मजबूर है।

    वर्षों से नगर निगम द्वारा शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन शहर की करीब 80 प्रतिशत पाइपलाइनें नालों में डूबी हैं जिससे पानी में गंदगी और अशुद्धता बढ़ रही है। नर्मदा का पानी भले ही शहर तक पहुंचता है लेकिन पाइपलाइन की खराब स्थिति के कारण वह पानी जैसे ही घरों तक पहुंचता है वह दूषित हो जाता है।

    वर्ष 1950 में जबलपुर नगर निगम की स्थापना के बाद नगर निगम ने कई बार पेयजल व्यवस्था में सुधार के दावे किए। लेकिन अब तक किसी भी सरकार या प्रशासक द्वारा यह समस्या पूरी तरह से हल नहीं हो पाई है। एशियन डेवलपमेंट बैंक  और अमृत योजना जैसी  परियोजनाओं के तहत नगर निगम को करोड़ों रुपये मिले लेकिन शहर के पानी की गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।शहर की बढ़ती आबादी के साथ पानी की खपत भी बढ़ी है लेकिन पाइपलाइन की पुरानी और जर्जर अवस्था के कारण पानी में कई तरह की गंदगी समाहित हो जाती है। साथ ही नालों और सीवेज सिस्टम के पास से गुजरने वाली पाइपलाइनें शहरवासियों के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बन चुकी हैं।

    नागरिकों का कहना है कि उन्हें कभी-कभी पानी की गंध और रंग देखकर यह डर लगता है कि क्या उनका स्वास्थ्य इससे प्रभावित होगा। शुद्ध पेयजल की समस्या न केवल शहरवासियों के जीवन में परेशानी का कारण बन रही है बल्कि इससे संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
    शहरवासी लगातार नगर निगम से शुद्ध पानी की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार और प्रशासन की तरफ से इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अब यह देखना बाकी है कि क्या सरकार इस समस्या का समाधान कर पाएगी ताकि जबलपुर के नागरिकों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल मिल सके।