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  • शनिवार को पीपल के पेड़ के पास करें ये 4 धार्मिक उपाय, पितृ दोष से राहत की ज्योतिषीय मान्यता

    शनिवार को पीपल के पेड़ के पास करें ये 4 धार्मिक उपाय, पितृ दोष से राहत की ज्योतिषीय मान्यता

    नई दिल्ली: पितृ दोष को लेकर ज्योतिष में कई तरह की मान्यताएं बताई गई हैं। माना जाता है कि पितृ दोष के कारण जीवन में काम रुकने, आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव जैसी स्थितियां बनी रह सकती हैं। शनिवार का दिन पितरों और शनिदेव से जुड़े उपायों के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीपल के पेड़ के पास कुछ उपाय किए जाते हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से कम से कम सात शनिवार तक इन उपायों को करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन की परेशानियां कम हो सकती हैं। इन उपायों को आस्था और श्रद्धा के अनुसार करने की बात कही गई है।

    शनिवार की शाम सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक जलाने के बाद पितरों का स्मरण कर सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद ‘ॐ सर्व पितृ प्रशनो भवः ओम’ मंत्र का 108 बार जाप करने की मान्यता बताई गई है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है और आर्थिक स्थिति में सुधार के रास्ते खुल सकते हैं। दीपक जलाते समय मन में श्रद्धा और शांत भाव रखने को भी महत्वपूर्ण माना गया है। शनिवार की शाम पीपल के पेड़ की जड़ में सरसों के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने की भी परंपरा है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार को सात बार हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से हनुमान जी और शनिदेव की कृपा मिलने के साथ पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है। नियमित रूप से यह उपाय करने से मन को शांति मिलने और नकारात्मक विचारों से राहत मिलने की बात कही जाती है। इसी तरह शनिवार को पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करने का भी धार्मिक महत्व बताया गया है। परिक्रमा के दौरान पीपल के तने पर सूत या सफेद धागा लपेटने की परंपरा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पीपल की पूजा से शनि के साथ राहु और केतु से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद मिल सकती है। इन्हीं ग्रहों को पितृ दोष से जोड़कर भी देखा जाता है।

    शनिवार की सुबह स्नान और पूजा के बाद एक लोटे में साफ जल लेकर उसमें थोड़े काले तिल मिलाने और इसे पीपल के पेड़ की जड़ में अर्पित करने की भी मान्यता है। जल चढ़ाते समय पितरों का ध्यान कर उनकी शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता में काले तिल का पितृ कर्म में विशेष महत्व बताया गया है। पीपल को जल अर्पित करने और पितरों का स्मरण करने से उनकी कृपा मिलने की मान्यता है। इसे आर्थिक परेशानी और जीवन की रुकावट दूर करने वाला उपाय भी माना जाता है। इन उपायों में नियमितता को विशेष महत्व दिया गया है और अपनी सुविधा व श्रद्धा के अनुसार किसी एक उपाय को लगातार सात शनिवार तक करने की बात कही गई है।

    पूजा के दौरान पीपल के पेड़ की स्वच्छता और आसपास के वातावरण का ध्यान रखने की सलाह दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपाय करते समय मन में श्रद्धा बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इन सभी उपायों का आधार ज्योतिष और धार्मिक मान्यताएं हैं। इसलिए इन्हें आस्था और व्यक्तिगत विश्वास के अनुसार ही अपनाने की बात कही गई है। पितृ दोष से जुड़े इन उपायों को धार्मिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है और इनके परिणामों के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण का दावा नहीं किया गया है।

  • 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या का महायोग स्नान दान और इन उपायों से मिलेगी सुख समृद्धि की सौगात

    14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या का महायोग स्नान दान और इन उपायों से मिलेगी सुख समृद्धि की सौगात


    नई दिल्ली । 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ रही है। मंगलवार के साथ अमावस्या का संयोग बनने के कारण इसे भौमवती अमावस्या कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि स्नान दान पितरों के तर्पण और भगवान हनुमान की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा जीवन में सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार आषाढ़ अमावस्या की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी सरोवर या घर पर गंगाजल मिले जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर पितरों का स्मरण किया जाता है। जिन लोगों के लिए संभव हो वे तिल और जल से पितरों का तर्पण भी कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    चूंकि इस बार अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है इसलिए भगवान हनुमान की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन हनुमान मंदिर में जाकर सिंदूर चमेली का तेल लाल फूल और गुड़ चने का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से मानसिक शांति साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।

    आषाढ़ अमावस्या पर दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र तिल गुड़ फल या दक्षिणा का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। गाय को हरा चारा खिलाना और पक्षियों को दाना पानी देना भी शुभ माना जाता है। इन कार्यों को सेवा और करुणा की भावना से करने की परंपरा रही है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन एक सरल उपाय भी किया जाता है। शाम के समय दो या तीन लौंग के साथ कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं किया जाता है। मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक वातावरण बनता है। हालांकि इसे धार्मिक आस्था का हिस्सा माना जाता है और इसके आध्यात्मिक महत्व को ही प्रमुखता दी जाती है।

    आषाढ़ अमावस्या के दिन क्रोध झूठ और अनावश्यक विवाद से बचने की सलाह दी जाती है। सात्विक भोजन करना ईश्वर का स्मरण करना और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना इस दिन के शुभ कार्यों में शामिल माना गया है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत रखकर दिनभर पूजा पाठ और दान पुण्य करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भौमवती अमावस्या आत्मचिंतन सेवा और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए स्नान दान तर्पण और हनुमान जी की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने तथा सुख समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है। हालांकि इन मान्यताओं को आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।