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  • Pitru Paksha 2026: अचानक सपने में दिखे पितर और मांगने लगे पानी या भोजन तो क्या है इसका मतलब जानिए धार्मिक मान्यता

    Pitru Paksha 2026: अचानक सपने में दिखे पितर और मांगने लगे पानी या भोजन तो क्या है इसका मतलब जानिए धार्मिक मान्यता


    नई दिल्ली। पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का स्मरण करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसी वजह से इस अवधि में आने वाले सपनों को लेकर भी लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। स्वप्न शास्त्र में पूर्वजों से जुड़े सपनों के अलग अलग अर्थ बताए गए हैं। हालांकि इन अर्थों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    अगर पितृ पक्ष के दौरान सपने में कोई पूर्वज मुस्कुराते हुए दिखाई दें तो धार्मिक मान्यता में इसे शुभ संकेत माना जाता है। कहा जाता है कि पूर्वजों का प्रसन्न अवस्था में दिखाई देना उनके आशीर्वाद और संतुष्टि का प्रतीक हो सकता है। ऐसी मान्यता है कि इससे व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और परिवार के बुजुर्गों के आशीर्वाद का भाव मिलता है।

    इसके विपरीत यदि सपने में पूर्वज रोते हुए या दुखी दिखाई दें तो इसे धार्मिक मान्यताओं में चिंता का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति को पितरों की ओर से ध्यान आकर्षित करने वाला संकेत बताया जाता है। मान्यता के अनुसार परिवार को अपने पूर्वजों का स्मरण करना चाहिए और उनकी शांति के लिए श्राद्ध तर्पण तथा दान जैसे धार्मिक कर्म करने चाहिए।

    कई लोगों को सपने में अपने पूर्वज भोजन या पानी मांगते हुए भी दिखाई देते हैं। स्वप्न शास्त्र से जुड़ी मान्यताओं में इसे महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के नाम से तर्पण करने और अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन या दान देने की परंपरा बताई जाती है। ब्राह्मण भोजन कराने की परंपरा का भी उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं में मिलता है।

    कभी कभी सपने में व्यक्ति अपने किसी दिवंगत परिजन के साथ बातचीत करता हुआ दिखाई देता है। स्वप्न शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार ऐसे सपने किसी आने वाली उलझन या जीवन में चल रही चिंता से जोड़कर देखे जाते हैं। हालांकि ऐसे सपने आने पर डरने की जरूरत नहीं मानी जाती। धार्मिक दृष्टि से इस समय पितरों का स्मरण करना और उनके निमित्त दान तर्पण जैसे कर्म करना शुभ माना जाता है।

    पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों से जुड़े सपनों को लेकर लोगों की आस्था काफी गहरी होती है। किसी को अपने दिवंगत माता पिता दिखाई देते हैं तो किसी को दादा दादी या परिवार के दूसरे बुजुर्ग सपने में नजर आते हैं। इन सपनों का वास्तविक कारण व्यक्ति की यादें भावनाएं और मानसिक स्थिति भी हो सकती है। इसलिए इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर नहीं लेना चाहिए।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष का मूल उद्देश्य अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। ऐसे में सपने में पूर्वज दिखाई दें तो घबराने के बजाय अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार उनका स्मरण करना तर्पण करना तथा जरूरतमंदों की सहायता करना एक सकारात्मक भाव माना जाता है।

  • पितृपक्ष में ट्रेनों की भीड़ से मिलेगी राहत: गया के लिए 12 स्पेशल सेवाएं, AC-स्लीपर-जनरल कोच की सुविधा

    पितृपक्ष में ट्रेनों की भीड़ से मिलेगी राहत: गया के लिए 12 स्पेशल सेवाएं, AC-स्लीपर-जनरल कोच की सुविधा


    जबलपुर । पितृपक्ष के दौरान गया जाकर पिंडदान और तर्पण करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ और नियमित ट्रेनों में दबाव को देखते हुए पश्चिम मध्य रेल ने गया के लिए 12 स्पेशल ट्रेन सेवाएं चलाने का फैसला लिया है। इनमें रानी कमलापति से गया और जबलपुर से गया के बीच स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए AC स्लीपर और जनरल श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे।

    रानी कमलापति से गया के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या 01661 रानी कमलापति-गया स्पेशल 27 सितंबर 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर रवाना होगी। यह ट्रेन अगले दिन दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर गया पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 01662 गया-रानी कमलापति स्पेशल 30 सितंबर 5 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर गया से रवाना होगी और अगले दिन शाम 4 बजकर 15 मिनट पर रानी कमलापति पहुंचेगी।

    रानी कमलापति से गया जाने वाली ट्रेन को कई प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव दिया गया है। इसमें नर्मदापुरम इटारसी पिपरिया नरसिंहपुर जबलपुर सिहोरा रोड कटनी मैहर सतना मानिकपुर प्रयागराज छिवकी मिर्जापुर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन भभुआ रोड सासाराम डेहरी-ऑन-सोन और अनुग्रह नारायण रोड शामिल हैं। इससे रास्ते में आने वाले शहरों के यात्रियों को भी गया जाने के लिए अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    इसी तरह जबलपुर से गया के बीच भी स्पेशल ट्रेन सेवा उपलब्ध रहेगी। गाड़ी संख्या 01701 जबलपुर-गया स्पेशल 29 सितंबर 4 अक्टूबर और 9 अक्टूबर को रात 9 बजकर 25 मिनट पर जबलपुर से रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर गया पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 01702 गया-जबलपुर स्पेशल 28 सितंबर 3 अक्टूबर और 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर गया से चलेगी और अगले दिन सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर जबलपुर पहुंचेगी।

    जबलपुर-गया स्पेशल ट्रेन का ठहराव सिहोरा रोड कटनी मैहर सतना मानिकपुर प्रयागराज छिवकी मिर्जापुर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन भभुआ रोड सासाराम डेहरी-ऑन-सोन और अनुग्रह नारायण रोड पर रहेगा।

    रेलवे के मुताबिक पितृपक्ष में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। पिंडदान और तर्पण के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्रियों के कारण इस दौरान ट्रेनों में काफी भीड़ रहती है। इसी को देखते हुए पश्चिम मध्य रेल ने अतिरिक्त ट्रेनें चलाने का फैसला किया है ताकि यात्रियों को सफर के दौरान परेशानी कम हो और नियमित ट्रेनों पर भी दबाव घटाया जा सके।

    पश्चिम मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मधुर वर्मा ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान यात्रियों की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। रेलवे ने श्रद्धालुओं और यात्रियों से अपील की है कि वे इन अतिरिक्त ट्रेनों की सुविधा का लाभ उठाएं। ऐसे में गया जाने वाले यात्रियों के लिए यह स्पेशल ट्रेनें काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं।