Tag: Piyush Mishra

  • भोपाल में सजेगा अनुभव और हुनर का मंच, MCU के अभ्युदय 2026 में पीयूष मिश्रा समेत 50 पूर्व छात्र करेंगे संवाद

    भोपाल में सजेगा अनुभव और हुनर का मंच, MCU के अभ्युदय 2026 में पीयूष मिश्रा समेत 50 पूर्व छात्र करेंगे संवाद


    भोपाल । भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सोमवार से तीन दिवसीय सत्रारंभ कार्यक्रम अभ्युदय 2026 का आगाज होने जा रहा है। इस बार आयोजन को मैं और मेरा विश्वविद्यालय थीम के साथ खास रूप दिया गया है। कार्यक्रम के पहले दिन 18 अगस्त को बॉलीवुड और रंगमंच के चर्चित अभिनेता लेखक गीतकार और गायक पीयूष मिश्रा विद्यार्थियों से रूबरू होंगे। वह सुबह 10:30 बजे विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।

    अभ्युदय 2026 को इस बार केवल नए सत्र के स्वागत कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है बल्कि इसे विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के बीच संवाद का बड़ा मंच बनाया गया है। विश्वविद्यालय के मीडिया हेड डॉ. पवित्र श्रीवास्तव के अनुसार आयोजन की सबसे खास बात यह रहेगी कि एमसीयू के करीब 35 वर्षों के इतिहास में पढ़कर निकले लगभग 50 पूर्व विद्यार्थी पहली बार एक साथ सत्रारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे। अलग अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके ये पूर्व छात्र नए विद्यार्थियों से सीधे संवाद करेंगे और उन्हें पढ़ाई के साथ करियर की दिशा समझने में मदद करेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान पूर्व विद्यार्थियों के लिए दस अलग अलग संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में पूर्व छात्र अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा करेंगे। साथ ही मीडिया और संचार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच रोजगार और करियर की नई संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। इससे नए विद्यार्थियों को यह समझने का मौका मिलेगा कि विश्वविद्यालय में हासिल की गई शिक्षा को व्यावहारिक दुनिया में किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

    अभ्युदय 2026 की एक और खासियत इसका अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव है। इस बार एमसीयू के पूर्व विद्यार्थी अमेरिका ब्रिटेन कनाडा ऑस्ट्रेलिया दुबई सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका सहित सात देशों से कार्यक्रम से जुड़ेंगे। विदेशों में अपनी पेशेवर पहचान बनाने वाले ये पूर्व छात्र भी नए विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। इनमें प्रिंट मीडिया टेलीविजन डिजिटल मीडिया मीडिया मैनेजमेंट विज्ञापन जनसंपर्क प्रशासन और राजनीति जैसे अलग अलग क्षेत्रों में काम कर रहे पूर्व विद्यार्थी शामिल हैं।

    पहले दिन पीयूष मिश्रा की मौजूदगी भी विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण रहेगी। अभिनेता के साथ साथ लेखक गीतकार और गायक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पीयूष मिश्रा युवाओं के बीच अपने अनुभव साझा करेंगे। उनका रचनात्मक सफर और रंगमंच से लेकर सिनेमा तक का अनुभव विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है। उनके संवाद के जरिए विद्यार्थियों को रचनात्मक क्षेत्रों में करियर की चुनौतियों और संभावनाओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

    तीन दिनों तक चलने वाले अभ्युदय 2026 का समापन 20 अगस्त को होगा। समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद रजनीश होंगे। खास बात यह है कि वह भी एमसीयू के पूर्व विद्यार्थी रहे हैं। ऐसे में आयोजन का समापन भी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों के बीच जुड़ाव की भावना को मजबूत करने वाला होगा।

    कुल मिलाकर अभ्युदय 2026 नए विद्यार्थियों के लिए केवल सत्रारंभ कार्यक्रम नहीं बल्कि अनुभवों से सीखने और करियर की नई दिशाओं को समझने का अवसर बनने जा रहा है। वरिष्ठ कलाकारों से संवाद और देश विदेश में सक्रिय पूर्व छात्रों की मौजूदगी के जरिए विश्वविद्यालय इस आयोजन को अपने 35 वर्षों के सफर और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

  • नसीरुद्दीन शाह पर कंगना का पलटवार, ‘लोमड़ी’ कहकर साधा निशाना, पीयूष मिश्रा के समर्थन में उतरीं

    नसीरुद्दीन शाह पर कंगना का पलटवार, ‘लोमड़ी’ कहकर साधा निशाना, पीयूष मिश्रा के समर्थन में उतरीं


    नई दिल्ली। नसीरुद्दीन शाह और पीयूष मिश्रा के बीच चल रहे बयानबाजी के विवाद में अब अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत भी कूद पड़ी हैं। कंगना ने पीयूष मिश्रा के बयान का समर्थन करते हुए नसीरुद्दीन शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को लोमड़ी तक कह दिया और कहा कि उन्हें गर्व है कि वह जिस देश की रोटी खाती हैं उसके लिए आवाज उठाती हैं और जरूरत पड़ने पर उसके लिए लड़ती हैं। कंगना की इस टिप्पणी के बाद बॉलीवुड से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है।

    दरअसल पूरा मामला छात्र आंदोलनों और फिल्म इंडस्ट्री की कथित चुप्पी से जुड़ा है। नसीरुद्दीन शाह ने छात्र प्रदर्शन के दौरान बॉलीवुड कलाकारों के छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आने पर सवाल उठाया था। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की तुलना ऐसे कुत्ते से की थी जिसके मुंह में हड्डी हो और वह भौंक नहीं सकता। नसीरुद्दीन शाह की इस टिप्पणी के बाद पीयूष मिश्रा ने भी उन पर पलटवार किया और झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी चुप्पी को लेकर सवाल खड़े किए।

    अब कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर पीयूष मिश्रा के रुख का समर्थन करते हुए नसीरुद्दीन शाह को निशाने पर लिया। कंगना ने कहा कि आज के समय में किसी को कुत्ता कहना भी तारीफ माना जा सकता है क्योंकि कुत्ते अपनी वफादारी और मासूमियत के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर कोई किसी न किसी का कुत्ता है, लेकिन उन्हें इस बात पर गर्व है कि वह अपने देश के लिए बोलती हैं और उसकी रखवाली करती हैं।

    कंगना ने नसीरुद्दीन शाह पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि नसीर साहब देश की रोटी खाते हैं लेकिन पड़ोसी देश के लिए लड़ते हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी तुलना नसीरुद्दीन शाह से करते हुए कहा कि वह उनकी तरह लोमड़ी बनने के बजाय कुत्ता बनना पसंद करेंगी। कंगना की इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज होने की संभावना है और लोग अपने-अपने तरीके से इस विवाद पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

    इससे पहले पीयूष मिश्रा ने भी नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने झारखंड के छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए पूछा था कि अगर फिल्म इंडस्ट्री के कुछ कलाकार छात्रों के समर्थन में आवाज नहीं उठा रहे थे तो दूसरे कलाकार कहां थे। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के कुत्ते और हड्डी वाले बयान को आधार बनाकर उनसे ही सवाल किया कि जब छात्र विरोध कर रहे थे तब वे आवाज उठाने के लिए आगे क्यों नहीं आए।

    पीयूष मिश्रा ने अपने बयान में छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की प्राथमिकताओं पर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने दिल्ली और मुंबई में हुए छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ छात्र विरोध प्रदर्शन से ज्यादा पिज्जा और बर्गर पर ध्यान दे रहे थे। उनके इस बयान ने भी विवाद को और हवा दी।

    अब कंगना रनौत के नसीरुद्दीन शाह पर सीधे हमले के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक तथा व्यक्तिगत रंग लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां कंगना ने देश और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट किया है, वहीं दूसरी ओर नसीरुद्दीन शाह की पुरानी टिप्पणी को लेकर बहस जारी है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर दोनों पक्षों की ओर से और बयान सामने आने की संभावना बनी हुई है।

  • अनुराग कश्यप का गुस्सा बना ‘गुलाल’, 8 साल की मेहनत के बाद बनी कल्ट फिल्म..

    अनुराग कश्यप का गुस्सा बना ‘गुलाल’, 8 साल की मेहनत के बाद बनी कल्ट फिल्म..


    नई दिल्ली: बॉलीवुड के ऑफ-बीट और बोल्ड निर्देशक अनुराग कश्यप हमेशा अपनी कहानियों के लिए चर्चित रहे हैं। लेकिन उनकी एक खास फिल्म ऐसी है जो उनके जीवन के गुस्से और समाज में व्याप्त असमानताओं का नतीजा बनी। यह फिल्म है गुलाल जिसे बनाने में पूरे 8 साल लगे और यह आज भी दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में शामिल है।

    गुलाल की कहानी की शुरुआत हुई साल 2001 में। उस वक्त अनुराग कश्यप जीवन के ऐसे पड़ाव पर थे जब उन्हें हर चीज़ पर गुस्सा आता था। उन्होंने कहा कि उस साल सेंसर बोर्ड ने उनकी फिल्म को पांच सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था और उन्हें महसूस हुआ कि वे हर चीज़ से नाराज हैं-चाहे वह नए राज्य बनना हो या प्यार में पड़ने की घटनाएं। इसी गुस्से और असंतोष ने उन्हें गुलाल बनाने की प्रेरणा दी।फिल्म की कहानी उन्हें तब मिली जब अभिनेता पंकज सारस्वत ने उन्हें राजा चौधरी से मिलवाया। राजा ने कॉलेज पॉलिटिक्स पर लिखी एक कहानी साझा की जिसे अनुराग ने पृष्ठभूमि देने का निर्णय लिया। इसके लिए वे जयपुर गए और वहां कई राजपरिवारों के सदस्यों से मुलाकात की। इन मुलाकातों ने फिल्म की कहानी को वास्तविकता और इतिहास से जोड़ने में मदद की।

    गुलाल की रिसर्च में अनुराग कश्यप ने इतिहासकार शारदा द्विवेदी रोमिला थापर और कई अन्य लेखकों के लेख पढ़े। उन्होंने भारत गणराज्य में राजपूतों की भूमिका और पटियाला रिपोर्ट जैसी ऐतिहासिक जानकारियों को फिल्म की कहानी में समाहित किया। इस तरह फिल्म की पटकथा तैयार हुई।फिल्म का संगीत भी खास रहा। जब अनुराग कश्यप फिल्म लिख रहे थे तब पीयूष मिश्रा ने संगीत की दुनिया में अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने फिल्म के लिए ऐसे गाने लिखे जो आज भी याद किए जाते हैं। शुरुआत में प्रोड्यूसर नहीं मिलने की वजह से फिल्म का निर्माण अटक गया लेकिन बाद में जी मोशन पिक्चर्स ने फिल्म को उठाया और आखिरकार यह रिलीज हो सकी।

    गुलाल बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही लेकिन इसके बावजूद इसने दर्शकों के बीच कल्ट फिल्म का दर्जा पा लिया। इसकी कहानी राजनीति और संगीत आज भी फिल्म प्रेमियों को आकर्षित करते हैं। IMDb पर इस फिल्म को 8 रेटिंग मिली है जो इसे और भी खास बनाती है।गुलाल सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि अनुराग कश्यप के गुस्से शोध और जुनून का परिणाम है। 8 साल की मेहनत और सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर तीव्र नजर ने इसे भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया।