Tag: PiyushGoyal

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को मिल सकती है नई रफ्तार, जुलाई तक पहले चरण पर हस्ताक्षर की उम्मीद

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को मिल सकती है नई रफ्तार, जुलाई तक पहले चरण पर हस्ताक्षर की उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत मिले हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और समझौते के पहले चरण पर जुलाई तक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इस बयान को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

    भारत और अमेरिका दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं तथा पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। ऐसे में प्रस्तावित व्यापार समझौते को आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के लागू होने से व्यापारिक प्रक्रियाएं अधिक सुगम होंगी और दोनों देशों के कारोबारियों को नए अवसर प्राप्त होंगे।

    हाल के समय में दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है। इन बैठकों में व्यापारिक बाधाओं को कम करने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि बातचीत में पर्याप्त प्रगति हुई है और अब केवल कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।

    पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि दोनों देशों की टीमें समझौते से जुड़े शेष बिंदुओं को अंतिम रूप देने के लिए लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जुलाई के मध्य तक पहले चरण को पूरा किया जा सकता है। उनके अनुसार यह समझौता केवल व्यापारिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि भविष्य में व्यापक आर्थिक सहयोग की मजबूत नींव भी तैयार करेगा।

    प्रस्तावित समझौते से भारतीय निर्यातकों को विशेष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और बेहतर बाजार पहुंच मिलने पर निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही निवेश, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

    अमेरिका के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव और वैकल्पिक उत्पादन केंद्रों की तलाश के बीच भारत एक प्रमुख आर्थिक भागीदार के रूप में उभर रहा है। ऐसे में व्यापारिक सहयोग का विस्तार दोनों देशों के रणनीतिक हितों के अनुरूप माना जा रहा है।

    विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और अमेरिका का बढ़ता सहयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दोनों देश तकनीक, ऊर्जा, रक्षा, विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में पहले से ही साझेदारी बढ़ा रहे हैं। व्यापार समझौता इन संबंधों को और मजबूती प्रदान कर सकता है।

    सरकार का मानना है कि पहले चरण की सफलता भविष्य में अधिक व्यापक और विस्तृत व्यापार समझौते का मार्ग प्रशस्त करेगी। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर समझौते पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी। साथ ही यह दोनों देशों की उस साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाएगा, जिसके तहत वे व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास के नए अवसरों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

    आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को भी नई दिशा देने में सहायक साबित हो सकती है।

  • महिला किसानों की मेहनत को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार, झारखंड से आमों का पहला निर्यात ब्रिटेन रवाना

    महिला किसानों की मेहनत को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार, झारखंड से आमों का पहला निर्यात ब्रिटेन रवाना


    नई दिल्ली ।
    भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए झारखंड से पहली बार ताजे आमों का वाणिज्यिक निर्यात शुरू हो गया है। राज्य के सिमडेगा जिले में उत्पादित आम्रपाली किस्म के आमों की पहली खेप यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना की गई है। इस पहल को किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में कार्यरत महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उत्पादित आम्रपाली आमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। लगभग 1.5 मीट्रिक टन आमों की पहली खेप को कोलकाता के माध्यम से यूनाइटेड किंगडम भेजा गया। इस उपलब्धि ने राज्य के बागवानी क्षेत्र और स्थानीय किसानों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं।

    इस निर्यात की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी रही है। किसान उत्पादक कंपनी से जुड़े समूहों ने गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, फसल प्रबंधन और निर्यात मानकों के अनुरूप खेती को अपनाकर यह उपलब्धि हासिल की है। इससे न केवल महिला किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व वाले कृषि उद्यमों को भी नई पहचान मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की लगातार बढ़ती मांग का लाभ अब उन राज्यों को भी मिलने लगा है, जो अब तक निर्यात गतिविधियों में अपेक्षाकृत पीछे रहे हैं। झारखंड से शुरू हुआ यह निर्यात राज्य के किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगा और उन्हें घरेलू बाजार पर पूरी तरह निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी।

    इस सफलता के पीछे किसानों को निर्यात संबंधी जानकारी, गुणवत्ता मानकों और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं से परिचित कराने के लिए किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। किसानों और निर्यातकों के बीच समन्वय स्थापित कर उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की गई, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम पहली निर्यात खेप के रूप में सामने आया है।

    कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि इसी प्रकार गुणवत्ता, पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान दिया जाए तो झारखंड के अन्य फल एवं कृषि उत्पाद भी वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। इससे राज्य में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से क्षेत्र के किसान आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं, भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी अधिक ध्यान दिया जाएगा। इससे कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी स्वीकार्यता मजबूत होगी।

    झारखंड से आमों का यह पहला निर्यात केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं बल्कि ग्रामीण किसानों, विशेषकर महिला कृषकों की क्षमता और संभावनाओं का प्रमाण भी है। यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के साथ भारत के बढ़ते कृषि निर्यात अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले समय में इससे राज्य के अन्य किसान समूहों को भी वैश्विक बाजारों से जुड़ने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।

  • वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय ऑटो सेक्टर चमका, मई में 4.4 लाख वाहन बिके..

    वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय ऑटो सेक्टर चमका, मई में 4.4 लाख वाहन बिके..

    नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था की गति को नई मजबूती प्रदान की है। मई 2026 में यात्री वाहन बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होने के बाद केंद्र सरकार ने इसे देश की बढ़ती आर्थिक क्षमता, मजबूत उपभोक्ता विश्वास और विनिर्माण क्षेत्र की सफलता का संकेत बताया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की विकास यात्रा निरंतर गति पकड़ रही है और विभिन्न क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।

    मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में बताया कि मई 2026 के दौरान देश में लगभग 4.4 लाख यात्री वाहनों की बिक्री हुई। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 23 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार संबंधी चुनौतियों का माहौल बना हुआ है।

    पीयूष गोयल के अनुसार इस उपलब्धि में देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विशेष रूप से मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने बाजार में मजबूत प्रदर्शन करते हुए बिक्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। इन कंपनियों की बेहतर बिक्री ने पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग को सकारात्मक दिशा दी है।

    मंत्री ने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं का घरेलू स्तर पर निर्मित वाहनों पर बढ़ता भरोसा देश के विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का सकारात्मक परिणाम बताते हुए कहा कि इस पहल ने देश में औद्योगिक उत्पादन, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी अधिक सक्षम बनाया है।

    उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र में दिखाई दे रही यह प्रगति केवल बिक्री के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक संरचना में हो रहे व्यापक बदलावों की भी झलक प्रस्तुत करती है। तकनीकी नवाचार, उत्पादन क्षमता में विस्तार और उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रय शक्ति जैसे कारकों ने इस क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान की है।

    इस बीच देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने भी मई महीने में नया रिकॉर्ड कायम किया है। कंपनी ने घरेलू बाजार में डीलरों को 1,90,337 यात्री वाहन भेजे, जो उसके इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिक्री मानी जा रही है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही कंपनी ने अप्रैल में स्थापित अपने पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती वाहन बिक्री से जुड़े आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग की मजबूती का संकेत देते हैं। यदि आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रहता है तो ऑटोमोबाइल क्षेत्र देश के आर्थिक विकास में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मजबूत मांग, बढ़ते निवेश और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के बीच भारत का ऑटो उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

  • भारत-कनाडा व्यापारिक रिश्तों में मजबूती की दिशा में कदम, पीयूष गोयल ने बताया यात्रा को सफल

    भारत-कनाडा व्यापारिक रिश्तों में मजबूती की दिशा में कदम, पीयूष गोयल ने बताया यात्रा को सफल

    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने अपने हालिया कनाडा दौरे को भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और सकारात्मक बताया है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति प्रदान की है, जिससे भविष्य में साझेदारी के और मजबूत होने की उम्मीद है।

    केंद्रीय मंत्री ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कनाडा में हुई उच्च स्तरीय बैठकों ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया है। इस दौरान उनकी मुलाकात कनाडा के शीर्ष नेतृत्व, व्यापार जगत के प्रतिनिधियों और निवेश से जुड़े प्रमुख हितधारकों से हुई, जहां भविष्य की आर्थिक संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    दौरे के दौरान Piyush Goyal ने कनाडा के प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठकें कीं, जिनमें द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और निवेश के नए अवसरों को विकसित करने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा के बीच मौजूदा आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों की सरकारें साझा रूप से काम कर रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार लगभग 8.5 अरब डॉलर का है, जिसे वर्ष 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत को गति देने पर भी जोर दिया गया है, ताकि व्यापारिक बाधाओं को कम किया जा सके और निवेश के नए रास्ते खोले जा सकें।

    कनाडा यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने निवेश गोलमेज बैठकों में भाग लिया और विभिन्न उद्योग जगत के नेताओं के साथ संवाद किया। उन्होंने भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम, तकनीकी नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीनटेक, एग्रीटेक और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

    इसके अलावा उन्होंने ओंटारियो के प्रीमियर के साथ भी बैठक की, जिसमें विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक सहयोग को केवल व्यापार तक सीमित न रखते हुए उसे दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी साझेदारी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और यदि दोनों देश मिलकर काम करें तो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक साझेदारी का मॉडल तैयार किया जा सकता है। उन्होंने अपनी यात्रा को सफल बताते हुए कहा कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक नई ऊर्जा और दिशा लेकर आया है।

    कुल मिलाकर यह दौरा भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में व्यापार और निवेश के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • भारत और कनाडा के बीच मजबूत होंगे व्यापारिक संबंध, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर तेज हुई बातचीत

    भारत और कनाडा के बीच मजबूत होंगे व्यापारिक संबंध, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर तेज हुई बातचीत


    नई दिल्ली । भारत और कनाडा के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने की कोशिशों ने अब गति पकड़ ली है। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को लेकर बातचीत तेज करने और वर्ष 2026 के अंत तक इसे अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जताई है। इस पहल को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह समझौता व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।

    भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध मौजूद रहे हैं, लेकिन अब दोनों देश इन्हें अधिक व्यापक और आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी उद्देश्य से उच्चस्तरीय स्तर पर कई दौर की चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें आर्थिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बातचीत के दौरान व्यापार, निवेश, तकनीक, कृषि और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

    दोनों देशों का मानना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में मजबूत साझेदारी समय की आवश्यकता बन गई है। यही कारण है कि व्यापार समझौते को केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि इसे बहुआयामी आर्थिक संबंधों के रूप में विकसित करने की रणनीति तैयार की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता तय समयसीमा के भीतर पूरा होता है तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

    हाल के संवादों में दोनों पक्षों ने व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक आसान बनाने और निवेश के नए अवसर तलाशने पर भी जोर दिया। आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि इस तरह के समझौते से व्यापारिक बाधाएं कम हो सकती हैं और कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार और कनाडा की संसाधन क्षमता को देखते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं काफी मजबूत मानी जा रही हैं।

    कृषि, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से उद्योग जगत को भी लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा दोनों देशों के व्यवसायों के लिए निवेश और विस्तार के नए अवसर भी तैयार हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक साझेदारी केवल व्यापार बढ़ाने का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों की नींव भी मजबूत करती है।

    वैश्विक स्तर पर कई देश नए आर्थिक गठजोड़ और व्यापारिक सहयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में भारत और कनाडा का यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इस समझौते से जुड़ी बातचीत और उसकी प्रगति पर उद्योग जगत, निवेशकों और आर्थिक विशेषज्ञों की नजर बनी रह सकती है।

    फिलहाल दोनों देशों के बीच सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं और यह माना जा रहा है कि यदि बातचीत इसी गति से आगे बढ़ती रही तो आने वाले समय में भारत और कनाडा के आर्थिक रिश्ते एक नए और मजबूत दौर में प्रवेश कर सकते हैं।

  • वैश्विक व्यापार में भरोसे के लिए पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से सर्वसम्मति की अपील..

    वैश्विक व्यापार में भरोसे के लिए पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से सर्वसम्मति की अपील..


    नई दिल्ली:  Piyush Goyal ने कैमरून के Yaounde में आयोजित विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मंत्रीस्तरीय बैठक (MC14) के दूसरे दिन भारत का नेतृत्व करते हुए सर्वसम्मति आधारित फैसलों पर जोर दिया उन्होंने कहा कि किसी भी देश पर ऐसे नियम नहीं थोपे जाने चाहिए जिनसे वह सहमत न हो

    गोयल ने मौजूदा गतिरोध को खत्म करने और सदस्य देशों के बीच भरोसा दोबारा बनाने की जरूरत बताई उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीओ में चर्चाएं पूरी तरह पारदर्शी, समावेशी और सदस्य देशों के नेतृत्व में होनी चाहिए और अगर संस्थागत ढांचे में बिखराव हुआ तो वैश्विक व्यापार प्रणाली कमजोर हो जाएगी

    भारत ने समान अवसर (level playing field) बनाए रखने की बात की और कहा कि उरुग्वे दौर से उत्पन्न असमानताओं को दूर करना जरूरी है साथ ही खाद्य सुरक्षा, पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH), स्पेशल सेफगार्ड मैकेनिज्म (SSM) और कपास जैसे लंबित मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही गई

    डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र की कमजोर स्थिति पर भारत ने चिंता जताई और कहा कि सही तरीके से फैसले नहीं होंगे तो नियम लागू नहीं हो पाएंगे और इसका सबसे अधिक असर छोटे देशों पर पड़ेगा इसके अलावा पारदर्शिता के नाम पर व्यापारिक जवाबी कार्रवाई या घरेलू नीतियों को चुनौती देने के प्रयासों पर सावधानी बरतने को कहा गया

    बैठक में Rajesh Aggarwal ने डब्ल्यूटीओ सुधारों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और स्पष्ट लक्ष्य तय करने की आवश्यकता पर बल दिया

    पीयूष गोयल ने इस दौरान अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात भी की जिसमें व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई

    यह डब्ल्यूटीओ सम्मेलन 26 मार्च से शुरू होकर 29 मार्च तक चलेगा और इसमें वैश्विक व्यापार की दिशा तय करने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील: तेल खरीदने की रणनीति पर गोयल ने दिया स्पष्टीकरण

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील: तेल खरीदने की रणनीति पर गोयल ने दिया स्पष्टीकरण


    नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका से तेल खरीदना भारत के रणनीतिक हित में है, क्योंकि इससे देश को स्रोत में विविधता मिलती है। वहीं, रूसी तेल को लेकर उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए कहा कि इस मामले में विदेश मंत्रालय अधिक उपयुक्त जवाब दे सकता है।

    तेल खरीद निर्णय खरीददारों पर निर्भर

    गोयल ने कहा, अमेरिका से कच्चा तेल, एलएनजी या एलपीजी खरीदना रणनीतिक हित में है। लेकिन यह फैसला घरेलू खरीदार खुद ही लेते हैं। ट्रेड डील यह तय नहीं करती कि कौन किससे क्या खरीदेगा। उन्होंने बताया कि व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच कारोबार को आसान बनाना और विशेष पहुंच प्रदान करना है। गोयल ने कहा, “एफ़टीए का मतलब ही होता है कि प्रतिस्पर्धियों की तुलना में विशेष पहुंच मिले। जब हम पर 18 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क है, तो हमें दूसरे विकासशील देशों पर बढ़त मिलती है।

    500 अरब डॉलर का व्यापार भी कोई चुनौती नहीं
    मीडिया से बातचीत में गोयल ने कहा कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने में सक्षम है। उन्होंने इसे अत्यंत रूढ़िवादी आंकड़ा बताया। इसके अंतर्गत ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला शामिल हैं। गोयल ने कहा, “तेल, एलएनजी, एलपीजी और कच्चे तेल के अलावा केवल विमानन क्षेत्र के लिए ही कम से कम 100 अरब डॉलर से अधिक की आवश्यकता होगी।

    डील का रणनीतिक महत्व
    साथ ही उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत अमेरिका से लगभग 300 अरब डॉलर मूल्य के ऐसे सामान आयात कर सकता है, जो अब तक अन्य देशों से खरीदे जा रहे थे। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को गति देने और प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिलाने के लिए किया गया है।