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  • भारत-यूके आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, CETA लागू होने से व्यापार, निवेश और इनोवेशन के खुलेंगे बड़े अवसर: पीयूष गोयल

    भारत-यूके आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, CETA लागू होने से व्यापार, निवेश और इनोवेशन के खुलेंगे बड़े अवसर: पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में दोनों देश लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दोनों देश ऐसा सहयोगी वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो व्यापार, निवेश, नवाचार और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करे। उनका कहना है कि आगामी समय में लागू होने वाला व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाएगा।

    लंदन दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने यूके के बिजनेस एवं ट्रेड सेक्रेटरी पीटर काइल के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और गहरा बनाने, निवेश बढ़ाने तथा नई व्यापारिक संभावनाओं पर विचार किया गया। गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, पारदर्शिता और भविष्य की साझा सोच लगातार मजबूत हो रही है, जो इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत है।

    उन्होंने कहा कि 15 जुलाई 2026 से भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) लागू होने के बाद दोनों देशों के उद्योगों, निवेशकों और कारोबारियों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, निवेश को प्रोत्साहन देना और आर्थिक सहयोग को व्यापक आधार प्रदान करना है।

    अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारत और यूनाइटेड किंगडम के उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों में रोजगार सृजन, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विकास को भी नई दिशा देगा। उन्होंने कारोबारी समुदाय से आग्रह किया कि वे इस समझौते के माध्यम से उपलब्ध होने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं।

    गोयल ने कहा कि भारत और यूके के बीच संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक दायरे से कहीं आगे निकल चुके हैं। दोनों देश तकनीक, नवाचार, निवेश, रक्षा, उन्नत विनिर्माण, आवश्यक खनिजों और रणनीतिक क्षेत्रों में भी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी दोनों देशों की भूमिका मजबूत होगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि यूनाइटेड किंगडम वैश्विक वित्त, अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में नई संभावनाएं पैदा कर सकती है। मजबूत आर्थिक सहयोग से उद्योगों के लिए बाजार का विस्तार होगा और निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा।

    पीयूष गोयल ने विश्वास जताया कि व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता भारत और यूके के संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाएगा। उनका कहना है कि दोनों देश साझा हितों और दीर्घकालिक विकास के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी व्यापार, निवेश, तकनीक, नवाचार और रणनीतिक सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगी तथा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, लेकिन टैरिफ बढ़त के बिना लागू नहीं होगा समझौता: पीयूष गोयल

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, लेकिन टैरिफ बढ़त के बिना लागू नहीं होगा समझौता: पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति होने के बावजूद इसके क्रियान्वयन पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच समझौते की रूपरेखा लगभग तय हो चुकी है, लेकिन भारत तब तक इसे लागू नहीं करेगा जब तक उसे अपने प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में स्पष्ट और प्रभावी टैरिफ लाभ प्राप्त नहीं हो जाता।

    लंदन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार कार्यक्रम के दौरान गोयल ने कहा कि किसी भी मुक्त व्यापार समझौते का मूल उद्देश्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर बाजार पहुंच हासिल करना होता है। भारत चाहता है कि उसे अमेरिका के साथ व्यापार में ऐसी टैरिफ व्यवस्था मिले, जिससे वह चीन, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार और फिलीपींस जैसे देशों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी स्थिति में आ सके।

    उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच इस समझौते की बुनियादी सहमति इसी वर्ष फरवरी में बन गई थी। दोनों देशों ने समझौते की व्यापक रूपरेखा पर सहमति जताई थी और उसके बाद से तकनीकी, कानूनी तथा टैरिफ संबंधी विवरणों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। गोयल के अनुसार समझौते को लेकर किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं है, बल्कि अब केवल उन शर्तों को सुनिश्चित किया जा रहा है जो भारत के व्यापारिक हितों को मजबूत करें।

    व्यापार मंत्रालय का मानना है कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और ऐसे समय में किसी भी समझौते का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब उससे निर्यातकों को प्रत्यक्ष आर्थिक फायदा प्राप्त हो। इसी कारण भारत अमेरिका के साथ ऐसी टैरिफ संरचना चाहता है जो उसके उद्योगों और निर्यातकों को अन्य प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बढ़त प्रदान करे।

    फरवरी में हुई अंतरिम सहमति के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर कुछ श्रेणियों में शुल्क दरों को कम करने पर सहमत हुआ था। इसके साथ ही कुछ अतिरिक्त शुल्कों में राहत देने पर भी चर्चा हुई थी, जिससे भारतीय निर्यातकों को फायदा मिल सकता था। उस समय प्रस्तावित व्यवस्था को भारत के लिए लाभकारी माना गया था क्योंकि इससे कई एशियाई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर व्यापारिक स्थिति बनने की संभावना थी।

    हालांकि इसके बाद अमेरिका में कानूनी और नीतिगत परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला। अमेरिकी न्यायिक प्रक्रिया और टैरिफ प्राधिकरण से जुड़े निर्णयों के कारण व्यापार नीति को लेकर कुछ नई अनिश्चितताएं सामने आईं। इसी दौरान अस्थायी टैरिफ व्यवस्था लागू की गई, जिसकी समयसीमा जुलाई के अंत तक निर्धारित है। भारत अब उस अवधि के बाद बनने वाली अंतिम टैरिफ संरचना का इंतजार कर रहा है।

    इसके समानांतर अमेरिका ने कुछ व्यापारिक मामलों को लेकर जांच प्रक्रियाएं भी शुरू की हैं, जिनके निष्कर्ष भविष्य की शुल्क व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। भारत इन सभी पहलुओं का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर रहा है ताकि किसी भी समझौते का दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख उसके बदलते आर्थिक आत्मविश्वास को दर्शाता है। सरकार अब केवल व्यापार समझौते करने पर जोर नहीं दे रही, बल्कि ऐसे समझौते चाहती है जो भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और निवेशकों को वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करें। आने वाले हफ्तों में अमेरिका की अंतिम टैरिफ नीति और जांच संबंधी निष्कर्ष सामने आने के बाद दोनों देशों के बीच इस बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है।

  • नई दिल्ली में व्यापार वार्ता को मिली रफ्तार, भारत-अमेरिका ने संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की दिशा में बढ़ाए कदम

    नई दिल्ली में व्यापार वार्ता को मिली रफ्तार, भारत-अमेरिका ने संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की दिशा में बढ़ाए कदम

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने, निवेश बढ़ाने तथा आर्थिक सहयोग के नए अवसरों पर व्यापक चर्चा की गई। आगामी टैरिफ समयसीमा से पहले वार्ता में तेजी आने को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के बीच हुई बैठकों में व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने व्यापार वार्ता में हुई प्रगति का आकलन करते हुए उन क्षेत्रों की पहचान की, जहां आपसी सहयोग को और मजबूत बनाया जा सकता है। चर्चा का मुख्य उद्देश्य ऐसा समझौता तैयार करना है, जिससे दोनों देशों को समान रूप से लाभ मिल सके और आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्राप्त हो।

    बैठकों के बाद गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और व्यापार वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया तथा व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए संभावनाओं पर चर्चा हुई। उन्होंने वार्ता प्रक्रिया में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और दोनों देशों की टीमों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।

    भारत और अमेरिका लंबे समय से ऐसे व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं जो दोनों देशों के उद्योगों, निर्यातकों और निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर सके। वर्तमान दौर की बातचीत में बाजार पहुंच, व्यापारिक बाधाओं को कम करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    इस दौरान अमेरिकी प्रतिनिधियों और भारतीय अधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चाएं हुईं, जिनमें आर्थिक साझेदारी के भविष्य को लेकर व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया गया। दोनों देशों ने यह संकेत दिया है कि वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर पर्याप्त इच्छाशक्ति मौजूद है। यही कारण है कि समझौते को लेकर उम्मीदें पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दे रही हैं।

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार विस्तार कर रहे हैं। दोनों देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और तकनीक, विनिर्माण, ऊर्जा, कृषि तथा सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। प्रस्तावित समझौते को इसी व्यापक आर्थिक सहयोग का अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

    अमेरिकी पक्ष ने भी इस वार्ता को दोनों देशों के लिए लाभकारी बताते हुए कहा है कि मजबूत व्यापार समझौता न केवल आर्थिक अवसरों का विस्तार करेगा, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। अधिकारियों का मानना है कि समझौते के जरिए निवेश प्रवाह बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी निर्भरता और विश्वास में वृद्धि होगी।

    आगामी टैरिफ समयसीमा को देखते हुए दोनों देशों के बीच बातचीत का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में नई दिल्ली में हुई हालिया बैठकों को व्यापार समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में दोनों पक्ष लंबित मुद्दों पर कितनी जल्दी सहमति बनाकर समझौते को अंतिम रूप दे पाते हैं।

  • भारत की डिजिटल ताकत का फ्रांस में प्रदर्शन, गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा शुरू; पीयूष गोयल बोले- वैश्विक पहुंच का बड़ा पड़ाव

    भारत की डिजिटल ताकत का फ्रांस में प्रदर्शन, गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा शुरू; पीयूष गोयल बोले- वैश्विक पहुंच का बड़ा पड़ाव


    नई दिल्ली ।
    भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत करते हुए फ्रांस के प्रमुख रिटेल केंद्रों में प्रवेश कर लिया है। फ्रांस के नीस मैसेना स्थित प्रतिष्ठित गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा की शुरुआत के साथ भारतीय डिजिटल भुगतान नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नई पहचान मिली है। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने इसे भारत की डिजिटल क्षमताओं और तकनीकी नवाचार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    यूपीआई सेवा शुरू होने के बाद अब भारतीय पर्यटक और ग्राहक फ्रांस के इस प्रसिद्ध रिटेल स्टोर में सीधे यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। इससे न केवल भुगतान प्रक्रिया अधिक आसान और सुरक्षित होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सीमापार डिजिटल लेनदेन को सरल बनाने और वैश्विक भुगतान प्रणाली में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    पीयूष गोयल ने इस अवसर पर कहा कि फ्रांस के प्रमुख रिटेल गंतव्यों में से एक गैलरीज लाफायेट में यूपीआई का लॉन्च होना भारत की तकनीकी प्रगति और विश्वस्तरीय डिजिटल भुगतान समाधान की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि यूपीआई के वैश्विक विस्तार की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी और इससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

    इस पहल को सफल बनाने में डिजिटल भुगतान क्षेत्र की कंपनियों और तकनीकी साझेदारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की साझेदारियां वैश्विक स्तर पर सहज, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल भुगतान व्यवस्था विकसित करने में मदद करेंगी। साथ ही इससे विदेशी बाजारों में भारतीय फिनटेक समाधानों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे।

    भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग के संदर्भ में भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, औद्योगिक, तकनीकी और नवाचार आधारित सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यूपीआई का विस्तार इसी मजबूत होते संबंध का एक नया उदाहरण माना जा रहा है।

    फ्रांस दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के साथ भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारत में उपलब्ध निवेश अवसरों, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार आधारित विकास मॉडल पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने फ्रांसीसी उद्योग जगत से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान भी किया।

    यात्रा के दौरान मंत्री ने यूरोप के प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र Sophia Antipolis का भी दौरा किया। यह केंद्र शोध, तकनीक और उद्योग के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है, जहां हजारों तकनीकी कंपनियां अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार केंद्र भविष्य की अर्थव्यवस्था को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली को वैश्विक मान्यता दिलाने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और सीमा-पार वित्तीय लेनदेन को भी नई गति देगा। आने वाले वर्षों में अन्य देशों और प्रमुख वैश्विक बाजारों में भी यूपीआई की पहुंच बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

  • भारत-फ्रांस तकनीकी साझेदारी को नई रफ्तार, इनोवेशन और निवेश के जरिए वैश्विक विकास का साझा रोडमैप तैयार

    भारत-फ्रांस तकनीकी साझेदारी को नई रफ्तार, इनोवेशन और निवेश के जरिए वैश्विक विकास का साझा रोडमैप तैयार


    नई दिल्ली ।
    भारत और फ्रांस के बीच तकनीक, नवाचार और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में संबंध लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फ्रांस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के नेतृत्व में द्विपक्षीय संबंधों ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय गति प्राप्त की है और अब यह साझेदारी भविष्य की प्रौद्योगिकियों तथा नवाचार आधारित विकास पर केंद्रित होती जा रही है।

    फ्रांस में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और बैठकों के दौरान गोयल ने उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों और नवाचार क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग केवल व्यापारिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उभरती तकनीकों, अनुसंधान, स्टार्टअप विकास और सतत आर्थिक प्रगति जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुका है। दोनों देशों के बीच बढ़ती भागीदारी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने यूरोप के प्रमुख विज्ञान और तकनीकी केंद्र सोफिया एंटीपोलिस का भी भ्रमण किया। उन्होंने इसे यूरोप की सिलिकॉन वैली बताते हुए कहा कि यह केंद्र इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि किस प्रकार अनुसंधान, प्रतिभा और उद्योग एक साथ मिलकर नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं। यहां हजारों कंपनियां अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत हैं और वैश्विक स्तर पर नई तकनीकों के विकास में योगदान दे रही हैं।

    गोयल ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से उभरते नवाचार और विनिर्माण केंद्रों में शामिल हो चुका है। देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार विस्तार कर रहा है और नई तकनीकों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उन्होंने फ्रांसीसी कंपनियों और निवेशकों को भारत में निवेश बढ़ाने, तकनीकी सहयोग स्थापित करने और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं में भागीदारी करने का निमंत्रण दिया।

    मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत का नवाचार ढांचा वैश्विक भागीदारी को प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के विकास, ज्ञान साझेदारी और अनुसंधान सहयोग के माध्यम से दोनों देश न केवल अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकते हैं। उनके अनुसार, तकनीकी क्षेत्र में संयुक्त प्रयास आने वाले वर्षों में नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगे।

    फ्रांस के शहर नीस में आयोजित बैठकों के दौरान भी भारत और फ्रांस के बीच नवाचार तथा निवेश सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा हुई। इस दौरान स्थानीय प्रशासन, उद्योग जगत, निवेश संस्थानों और नवाचार क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न संभावित साझेदारियों पर विचार-विमर्श किया गया। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को व्यावहारिक परियोजनाओं में बदलना और दीर्घकालिक निवेश अवसरों को बढ़ावा देना था।

    नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम ने भी व्यापक ध्यान आकर्षित किया। इस आयोजन में देश के विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े स्टार्टअप और प्रमुख संस्थानों ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वैश्विक निवेशकों और वेंचर कैपिटल प्रतिनिधियों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि भारत का नवाचार और स्टार्टअप क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विश्वास अर्जित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और फ्रांस के बीच बढ़ता तकनीकी सहयोग भविष्य में आर्थिक विकास, अनुसंधान साझेदारी और वैश्विक नवाचार नेटवर्क को नई मजबूती प्रदान कर सकता है।

  • वैश्विक सीफूड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, अगले पांच वर्षों में निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप

    वैश्विक सीफूड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, अगले पांच वर्षों में निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप

    नई दिल्ली । भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात क्षेत्र ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है और अब देश इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की तैयारी में जुट गया है। केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में समुद्री उत्पादों के निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में निर्यात क्षमता बढ़ाने, वैश्विक बाजारों तक पहुंच मजबूत करने और मूल्य संवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय समुद्री उत्पाद निर्यात कार्यशाला के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात पिछले दस वर्षों में लगभग 70 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वैश्विक सीफूड व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब चार प्रतिशत है, जिसे आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार, उद्योग, निर्यातक और किसानों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक निर्यात पर निर्भर रहने के बजाय रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देना समय की मांग है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऐसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। इसके साथ ही हाल के वर्षों में विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से खुले नए बाजारों का लाभ उठाने की रणनीति पर भी बल दिया गया।

    मत्स्य पालन क्षेत्र के आंकड़े भी इस विकास यात्रा को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। देश में मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के लगभग 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में करीब 198 लाख टन तक पहुंच चुका है। उत्पादन में यह वृद्धि न केवल घरेलू मांग को पूरा करने में सहायक रही है बल्कि निर्यात क्षमता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात लगभग 8.46 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

    समुद्री निर्यात में फ्रोजन झींगा अब भी सबसे प्रमुख उत्पाद बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग लगातार बनी हुई है, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिल रही है। सरकार इस क्षेत्र में ट्रेसबिलिटी, गुणवत्ता नियंत्रण और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निवेश और सहायता उपलब्ध करा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात वृद्धि के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। कोल्ड चेन नेटवर्क, आधुनिक लॉजिस्टिक्स, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, रोग प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन मानकों का पालन जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सुधार आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से कार्यशाला में उद्योग प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और किसानों ने विभिन्न चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की।

    समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में परिवहन और एयर कार्गो अवसंरचना की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उच्च मूल्य वाले उत्पादों को तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और आधुनिक कार्गो सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचा, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियां भारत को वैश्विक सीफूड व्यापार में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती हैं।

    आने वाले वर्षों में यदि उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार विस्तार की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो भारत न केवल अपने निर्यात लक्ष्य को हासिल कर सकता है बल्कि वैश्विक समुद्री उत्पाद व्यापार में एक प्रमुख शक्ति के रूप में भी उभर सकता है।

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को मिल सकती है नई रफ्तार, जुलाई तक पहले चरण पर हस्ताक्षर की उम्मीद

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को मिल सकती है नई रफ्तार, जुलाई तक पहले चरण पर हस्ताक्षर की उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत मिले हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और समझौते के पहले चरण पर जुलाई तक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इस बयान को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

    भारत और अमेरिका दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं तथा पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। ऐसे में प्रस्तावित व्यापार समझौते को आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के लागू होने से व्यापारिक प्रक्रियाएं अधिक सुगम होंगी और दोनों देशों के कारोबारियों को नए अवसर प्राप्त होंगे।

    हाल के समय में दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है। इन बैठकों में व्यापारिक बाधाओं को कम करने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि बातचीत में पर्याप्त प्रगति हुई है और अब केवल कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।

    पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि दोनों देशों की टीमें समझौते से जुड़े शेष बिंदुओं को अंतिम रूप देने के लिए लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जुलाई के मध्य तक पहले चरण को पूरा किया जा सकता है। उनके अनुसार यह समझौता केवल व्यापारिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि भविष्य में व्यापक आर्थिक सहयोग की मजबूत नींव भी तैयार करेगा।

    प्रस्तावित समझौते से भारतीय निर्यातकों को विशेष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और बेहतर बाजार पहुंच मिलने पर निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही निवेश, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

    अमेरिका के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव और वैकल्पिक उत्पादन केंद्रों की तलाश के बीच भारत एक प्रमुख आर्थिक भागीदार के रूप में उभर रहा है। ऐसे में व्यापारिक सहयोग का विस्तार दोनों देशों के रणनीतिक हितों के अनुरूप माना जा रहा है।

    विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और अमेरिका का बढ़ता सहयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दोनों देश तकनीक, ऊर्जा, रक्षा, विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में पहले से ही साझेदारी बढ़ा रहे हैं। व्यापार समझौता इन संबंधों को और मजबूती प्रदान कर सकता है।

    सरकार का मानना है कि पहले चरण की सफलता भविष्य में अधिक व्यापक और विस्तृत व्यापार समझौते का मार्ग प्रशस्त करेगी। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर समझौते पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी। साथ ही यह दोनों देशों की उस साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाएगा, जिसके तहत वे व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास के नए अवसरों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

    आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को भी नई दिशा देने में सहायक साबित हो सकती है।

  • महिला किसानों की मेहनत को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार, झारखंड से आमों का पहला निर्यात ब्रिटेन रवाना

    महिला किसानों की मेहनत को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार, झारखंड से आमों का पहला निर्यात ब्रिटेन रवाना


    नई दिल्ली ।
    भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए झारखंड से पहली बार ताजे आमों का वाणिज्यिक निर्यात शुरू हो गया है। राज्य के सिमडेगा जिले में उत्पादित आम्रपाली किस्म के आमों की पहली खेप यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना की गई है। इस पहल को किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में कार्यरत महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उत्पादित आम्रपाली आमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। लगभग 1.5 मीट्रिक टन आमों की पहली खेप को कोलकाता के माध्यम से यूनाइटेड किंगडम भेजा गया। इस उपलब्धि ने राज्य के बागवानी क्षेत्र और स्थानीय किसानों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं।

    इस निर्यात की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी रही है। किसान उत्पादक कंपनी से जुड़े समूहों ने गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, फसल प्रबंधन और निर्यात मानकों के अनुरूप खेती को अपनाकर यह उपलब्धि हासिल की है। इससे न केवल महिला किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व वाले कृषि उद्यमों को भी नई पहचान मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की लगातार बढ़ती मांग का लाभ अब उन राज्यों को भी मिलने लगा है, जो अब तक निर्यात गतिविधियों में अपेक्षाकृत पीछे रहे हैं। झारखंड से शुरू हुआ यह निर्यात राज्य के किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगा और उन्हें घरेलू बाजार पर पूरी तरह निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी।

    इस सफलता के पीछे किसानों को निर्यात संबंधी जानकारी, गुणवत्ता मानकों और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं से परिचित कराने के लिए किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। किसानों और निर्यातकों के बीच समन्वय स्थापित कर उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की गई, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम पहली निर्यात खेप के रूप में सामने आया है।

    कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि इसी प्रकार गुणवत्ता, पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान दिया जाए तो झारखंड के अन्य फल एवं कृषि उत्पाद भी वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। इससे राज्य में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से क्षेत्र के किसान आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं, भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी अधिक ध्यान दिया जाएगा। इससे कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी स्वीकार्यता मजबूत होगी।

    झारखंड से आमों का यह पहला निर्यात केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं बल्कि ग्रामीण किसानों, विशेषकर महिला कृषकों की क्षमता और संभावनाओं का प्रमाण भी है। यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के साथ भारत के बढ़ते कृषि निर्यात अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले समय में इससे राज्य के अन्य किसान समूहों को भी वैश्विक बाजारों से जुड़ने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।

  • वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय ऑटो सेक्टर चमका, मई में 4.4 लाख वाहन बिके..

    वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय ऑटो सेक्टर चमका, मई में 4.4 लाख वाहन बिके..

    नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था की गति को नई मजबूती प्रदान की है। मई 2026 में यात्री वाहन बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होने के बाद केंद्र सरकार ने इसे देश की बढ़ती आर्थिक क्षमता, मजबूत उपभोक्ता विश्वास और विनिर्माण क्षेत्र की सफलता का संकेत बताया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की विकास यात्रा निरंतर गति पकड़ रही है और विभिन्न क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।

    मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में बताया कि मई 2026 के दौरान देश में लगभग 4.4 लाख यात्री वाहनों की बिक्री हुई। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 23 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार संबंधी चुनौतियों का माहौल बना हुआ है।

    पीयूष गोयल के अनुसार इस उपलब्धि में देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विशेष रूप से मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने बाजार में मजबूत प्रदर्शन करते हुए बिक्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। इन कंपनियों की बेहतर बिक्री ने पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग को सकारात्मक दिशा दी है।

    मंत्री ने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं का घरेलू स्तर पर निर्मित वाहनों पर बढ़ता भरोसा देश के विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का सकारात्मक परिणाम बताते हुए कहा कि इस पहल ने देश में औद्योगिक उत्पादन, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी अधिक सक्षम बनाया है।

    उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र में दिखाई दे रही यह प्रगति केवल बिक्री के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक संरचना में हो रहे व्यापक बदलावों की भी झलक प्रस्तुत करती है। तकनीकी नवाचार, उत्पादन क्षमता में विस्तार और उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रय शक्ति जैसे कारकों ने इस क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान की है।

    इस बीच देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने भी मई महीने में नया रिकॉर्ड कायम किया है। कंपनी ने घरेलू बाजार में डीलरों को 1,90,337 यात्री वाहन भेजे, जो उसके इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिक्री मानी जा रही है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही कंपनी ने अप्रैल में स्थापित अपने पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती वाहन बिक्री से जुड़े आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग की मजबूती का संकेत देते हैं। यदि आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रहता है तो ऑटोमोबाइल क्षेत्र देश के आर्थिक विकास में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मजबूत मांग, बढ़ते निवेश और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के बीच भारत का ऑटो उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

  • भारत-कनाडा व्यापारिक रिश्तों में मजबूती की दिशा में कदम, पीयूष गोयल ने बताया यात्रा को सफल

    भारत-कनाडा व्यापारिक रिश्तों में मजबूती की दिशा में कदम, पीयूष गोयल ने बताया यात्रा को सफल

    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने अपने हालिया कनाडा दौरे को भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और सकारात्मक बताया है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति प्रदान की है, जिससे भविष्य में साझेदारी के और मजबूत होने की उम्मीद है।

    केंद्रीय मंत्री ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कनाडा में हुई उच्च स्तरीय बैठकों ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया है। इस दौरान उनकी मुलाकात कनाडा के शीर्ष नेतृत्व, व्यापार जगत के प्रतिनिधियों और निवेश से जुड़े प्रमुख हितधारकों से हुई, जहां भविष्य की आर्थिक संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    दौरे के दौरान Piyush Goyal ने कनाडा के प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठकें कीं, जिनमें द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और निवेश के नए अवसरों को विकसित करने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा के बीच मौजूदा आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों की सरकारें साझा रूप से काम कर रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार लगभग 8.5 अरब डॉलर का है, जिसे वर्ष 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत को गति देने पर भी जोर दिया गया है, ताकि व्यापारिक बाधाओं को कम किया जा सके और निवेश के नए रास्ते खोले जा सकें।

    कनाडा यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने निवेश गोलमेज बैठकों में भाग लिया और विभिन्न उद्योग जगत के नेताओं के साथ संवाद किया। उन्होंने भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम, तकनीकी नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीनटेक, एग्रीटेक और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

    इसके अलावा उन्होंने ओंटारियो के प्रीमियर के साथ भी बैठक की, जिसमें विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक सहयोग को केवल व्यापार तक सीमित न रखते हुए उसे दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी साझेदारी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और यदि दोनों देश मिलकर काम करें तो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक साझेदारी का मॉडल तैयार किया जा सकता है। उन्होंने अपनी यात्रा को सफल बताते हुए कहा कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक नई ऊर्जा और दिशा लेकर आया है।

    कुल मिलाकर यह दौरा भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में व्यापार और निवेश के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।