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  • खरमास 2026: 15 मार्च से मांगलिक कार्यों पर विराम, अप्रैल-मई में विवाह के शुभ मुहूर्त

    खरमास 2026: 15 मार्च से मांगलिक कार्यों पर विराम, अप्रैल-मई में विवाह के शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में ग्रहों की चाल और शुभ मुहूर्त का अत्यंत महत्व माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित गिरिधर गोपाल चौबे के अनुसार जब सूर्य देव बृहस्पति गुरु की राशि मीन में प्रवेश करते हैं तब खरमास का आरंभ होता है। साल 2026 में यह गोचर 14 मार्च की मध्य रात्रि को तड़के 3:07 बजे होगा और 15 मार्च से मीन संक्रांति के साथ ही खरमास शुरू हो जाएगा।

    खरमास की अवधि में विवाह गृह प्रवेश मुंडन और नए व्यापार जैसी मांगलिक गतिविधियों पर रोक रहती है। पंडित चौबे बताते हैं कि इस समय पूजा पाठ दान और तप अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं। सूर्य जब गुरु की राशियों धनु या मीन में होते हैं तो उनका तेज और प्रभाव विवाह जैसे भौतिक सुखों वाले कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।

    विवाह के लिए शुक्र और गुरु ग्रह का उदय और शुभ स्थिति जरूरी है। गुरु को कन्या की कुंडली में पति का कारक और शुक्र को वर की कुंडली में पत्नी और दाम्पत्य सुख का प्रतीक माना जाता है। यदि ये ग्रह अस्त हों तो विवाह संपन्न नहीं किया जाता। इस वर्ष 28 फरवरी को शुक्र के मीन राशि में प्रवेश के बाद स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

    विवाह के लिए शुभ नक्षत्र जैसे रोहिणी मृगशिरा और रेवती शुभ तिथि और अनुकूल लग्न का संयोग होना आवश्यक है। रविवार सोमवार बुधवार गुरुवार और शुक्रवार को विशेष रूप से विवाह के लिए अनुकूल दिन माने जाते हैं।

    खरमास की समाप्ति 14 अप्रैल 2026 को होगी जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर मेष संक्रांति मनाएंगे। इसके तुरंत बाद विवाह जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू किए जा सकते हैं। मिथिला पंचांग के अनुसार अप्रैल में 17 20 26 और 30 तारीखें और बनारसी पंचांग के अनुसार 15 16 20 21 25–30 अप्रैल की तिथियां विवाह के लिए अति शुभ हैं। मई माह में मिथिला पंचांग के अनुसार 1 6 8 10 और 13 मई और बनारसी पंचांग के अनुसार 1–8 12 और 13 मई को विवाह के विशेष योग बन रहे हैं।

    ग्रीष्मकाल में भी शुभ संयोग मिलते हैं। जून में 19 24–26 28 और 29 जून और जुलाई में 1 2 3 6 9 12 मिथिला पंचांग और 1 2 6–8 11 12 बनारसी पंचांग को विवाह के लिए अनुकूल मुहूर्त हैं। इसके बाद देवशयनी एकादशी के आसपास से पुनः मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा।

    पंडित चौबे कहते हैं कि जातकों को अपनी कुंडली के अनुसार स्थानीय विद्वान से सलाह लेकर ही लग्न तय करना चाहिए ताकि ग्रहों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हो। इस प्रकार 15 मार्च से 14 अप्रैल 2026 तक खरमास रहेगा और इसके बाद अप्रैल मई के बीच विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए कई श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध हैं।

  • मंगल का कुंभ राशि में महागोचर: ग्रहों के अनूठे संयोग से चमकेगी इन 4 राशियों की किस्मत, बरसेगा धन और वैभव

    मंगल का कुंभ राशि में महागोचर: ग्रहों के अनूठे संयोग से चमकेगी इन 4 राशियों की किस्मत, बरसेगा धन और वैभव


    नई दिल्ली/भोपाल। अंतरिक्ष में ग्रहों की चाल एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। आगामी 23 फरवरी 2026 को सुबह 7:27 बजे ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक माना जाने वाला मंगल ग्रह कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंभ राशि में पहले से ही ग्रहों का एक दुर्लभ जमावड़ा लगा हुआ है। वर्तमान में यहाँ सुख-वैभव के प्रदाता शुक्र, बुद्धि के देवता बुध और छाया ग्रह राहु विराजमान हैं। ऐसे में मंगल का आगमन न केवल ‘अंगारक योग’ जैसी स्थितियां बनाएगा, बल्कि शुक्र और मंगल की युति आर्थिक समृद्धि के द्वार भी खोलेगी। ज्योतिष में मंगल की ऊर्जा और शुक्र के ऐश्वर्य का मिलन भौतिक सुखों में वृद्धि करने वाला माना जाता है।

    इस गोचर का सबसे सकारात्मक प्रभाव मिथुन राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा। मिथुन राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। इन्हें न केवल परिवार का भरपूर सहयोग मिलेगा, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी नए और सुनहरे अवसर प्राप्त होंगे। धन आवक के नए स्रोत खुलने से बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी और प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। हालांकि, इन जातकों को सलाह दी गई है कि वे अति उत्साह में अपनी सेहत को नज़रअंदाज न करें और व्यर्थ के विवादों से दूरी बनाए रखें।

    वहीं, वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मंगल का यह परिवर्तन कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता लेकर आ रहा है। नौकरीपेशा लोगों को अपने वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा और पदोन्नति मिल सकती है। प्रोफेशनल लाइफ में आपका दबदबा बढ़ेगा और सामाजिक दायरे में भी विस्तार होगा। इस दौरान बनने वाले नए संपर्क भविष्य में बड़े आर्थिक लाभ का कारण बन सकते हैं। दोस्तों की मदद से आपके रुके हुए कठिन कार्य भी आसानी से पूरे हो जाएंगे।

    मकर राशि के जातकों के लिए यह गोचर आत्मविश्वास और जोश का संचार करने वाला साबित होगा। विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए यह समय बेहद अनुकूल है, उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आशातीत सफलता मिलेगी। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर आपका झुकाव बढ़ेगा। शिक्षा या ट्रेनिंग के सिलसिले में की गई यात्राएं सुखद और परिणामी रहेंगी। कुल मिलाकर मकर राशि वालों के लिए यह सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समय है।

    अंततः, चूंकि यह गोचर कुंभ राशि में ही हो रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों को इसका सीधा और सर्वाधिक लाभ मिलना तय है। कारोबारियों के लिए नए व्यावसायिक समझौते लाभकारी सिद्ध होंगे और समाज में आपकी प्रतिष्ठा में चार चांद लगेंगे। मान-सम्मान की प्राप्ति के साथ-साथ आपका स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहेगा। हालांकि, मंगल की तप्त ऊर्जा को संतुलित करने के लिए ज्योतिषियों ने कुंभ राशि वालों को पर्याप्त जल सेवन करने की सलाह दी है। ग्रहों का यह अद्भुत मेल अगले कुछ दिनों तक इन चार राशियों के जीवन में खुशहाली और सफलता की नई इबारत लिखेगा।

  • बुध गोचर 2025: बुध ग्रह 29 दिसंबर को करेंगे धनु राशि में प्रवेश बनेगा बुधादित्य योग..

    बुध गोचर 2025: बुध ग्रह 29 दिसंबर को करेंगे धनु राशि में प्रवेश बनेगा बुधादित्य योग..


    ग्वालियर। वर्ष 2025 के अंतिम गोचर की घड़ी नजदीक आ रही है और इस बार बुध ग्रह 29 दिसंबर को धनु राशि में प्रवेश करने वाले हैं। बुध ग्रह का यह गोचर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बुधादित्य योग का निर्माण करेगा जो कई राशियों के लिए लाभकारी साबित होगा। बुध ग्रह को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है और इसका प्रभाव बुद्धि निर्णय क्षमता व्यापार और नौकरी पर गहरा असर डालता है।

    बुध ग्रह और उसका महत्व


    बुध ग्रह सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है और सूर्य के सबसे करीब रहने वाला ग्रह है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध का प्रभाव हमारे विचार संवाद व्यापार और निर्णय क्षमता पर पड़ता है। जब बुध अपनी वक्री गति में होता है या किसी विशेष राशि में प्रवेश करता है तो इसका असर सभी राशियों पर पड़ता है। बुध का गोचर जीवन में नए अवसर ज्ञान और फैसले लेने की क्षमता में सुधार ला सकता है।इस बार बुध 29 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 14 मिनट पर गुरु की राशि धनु में प्रवेश करेंगे। धनु राशि एक अग्नि तत्व की राशि है जो ऊर्जावान और आत्मविश्वास से भरी होती है। बुध का इस राशि में प्रवेश बुधादित्य योग का निर्माण करेगा जो विशेष रूप से मेष सिंह धनु और कुंभ राशि के जातकों के लिए शुभ रहेगा।

    बुधादित्य योग का प्रभाव
    बुधादित्य योग तब बनता है जब बुध और सूर्य एक ही राशि में होते हैं। इस योग के प्रभाव से बुध के सभी सकारात्मक गुण जैसे बुद्धिमत्ता व्यापारिक निर्णय की क्षमता संचार कौशल में वृद्धि होती है। इस योग के प्रभाव से विशेष रूप से मेष सिंह धनु और कुंभ राशि के जातकों को नए अवसर और सफलता मिलने के योग हैं।

    राशियों पर प्रभाव

    मेष राशि:
    बुध का गोचर मेष राशि के जातकों के लिए शुभ साबित हो सकता है। यह समय आपकी सोच और निर्णय क्षमता को तेज़ करेगा जिससे कार्य में सफलता मिल सकती है। विशेष रूप से करियर और नौकरी के मामले में आप बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

    सिंह राशि:
    सिंह राशि के जातकों के लिए यह गोचर लाभकारी रहेगा। बुधादित्य योग उनके लिए व्यवसाय और व्यापार में अच्छे अवसर लेकर आएगा। साथ ही यह समय शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में भी उन्नति का है।

    धनु राशि:
    धनु राशि के जातकों के लिए यह गोचर अपने आप में खास होगा क्योंकि बुध इसी राशि में प्रवेश कर रहे हैं। यह समय आपके जीवन में स्थिरता और सफलता का संकेत दे रहा है। करियर के लिहाज से यह समय अनुकूल रहेगा और आपको हर क्षेत्र में उन्नति के अवसर मिलेंगे।

    कुंभ राशि:
    कुंभ राशि के जातकों के लिए भी बुध का गोचर एक सकारात्मक प्रभाव डालेगा। आपकी सोच में स्पष्टता आएगी और जो भी निर्णय आप लेंगे वे सही साबित होंगे। इसके अलावा यह समय आपके व्यक्तिगत जीवन में भी खुशी और संतुलन लाने वाला है।

    ज्योतिषाचार्य का परामर्श


    ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि बुध का गोचर सभी राशियों पर असर डालता है लेकिन मेष सिंह धनु और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय खास रूप से लाभकारी रहेगा। बुध के इस गोचर के दौरान यदि कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना है या नए व्यापार की शुरुआत करनी है तो यह समय शुभ रहेगा।

    इसके अलावा जो लोग शिक्षा और मानसिक विकास के क्षेत्र में प्रयासरत हैं उनके लिए भी यह समय अनुकूल होगा। बुध के इस गोचर के दौरान कुछ उपाय जैसे हरे रंग की वस्तुएं धारण करना या बुध ग्रह को प्रसन्न करने के लिए बुद्धि वर्धक मंत्रों का जाप करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
    2025 के अंत में बुध ग्रह का गोचर न केवल ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि यह विभिन्न राशियों के लिए नई संभावनाओं और अवसरों का संकेत भी है। मेष सिंह धनु और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ रहेगा। इस दौरान बुधादित्य योग से उन्हें न केवल मानसिक शांति मिलेगी बल्कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा।