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  • सीमित सैलरी में घर चलाना है आसान तो अपनाएं ये बजट टिप्स, खर्च संभालने के साथ हर महीने बढ़ेगी आपकी बचत

    सीमित सैलरी में घर चलाना है आसान तो अपनाएं ये बजट टिप्स, खर्च संभालने के साथ हर महीने बढ़ेगी आपकी बचत


    नई दिल्ली । बढ़ती महंगाई के दौर में सीमित सैलरी में घर का खर्च चलाने के साथ बचत करना कई लोगों के लिए चुनौती बन गया है। कई बार महीने के अंत तक पैसे खत्म हो जाते हैं और यह समझना मुश्किल हो जाता है कि रकम कहां खर्च हुई। ऐसी स्थिति में बेहतर वित्तीय योजना और खर्च का सही प्रबंधन जरूरी हो जाता है। सैलरी कितनी भी हो, यदि आय और खर्च का पहले से हिसाब रखा जाए तो घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए भी रकम बचाई जा सकती है। इसके लिए बजट बनाने और खर्च को प्राथमिकता देने की आदत अपनाना जरूरी है।

    सैलरी को व्यवस्थित करने के लिए 50-30-20 का नियम अपनाया जा सकता है। इसके तहत आय का 50 प्रतिशत हिस्सा जरूरी खर्चों के लिए रखा जाता है। इसमें घर का किराया, राशन, बिजली-पानी के बिल, बच्चों की स्कूल फीस और ईएमआई जैसे खर्च शामिल किए जा सकते हैं। आय का 30 प्रतिशत हिस्सा इच्छाओं और जीवनशैली से जुड़े खर्चों के लिए रखा जा सकता है, जिसमें बाहर खाना, खरीदारी, घूमना-फिरना और मनोरंजन शामिल हैं। बाकी 20 प्रतिशत रकम भविष्य के लिए बचत या निवेश में लगाई जा सकती है। इस राशि को सेविंग्स अकाउंट, एफडी, म्यूचुअल फंड या अन्य निर्धारित विकल्पों में रखा जा सकता है।

    महीने की शुरुआत में ही पूरा बजट तैयार करना भी जरूरी है। सैलरी मिलते ही किराना, दूध, सब्जियों और दूसरी जरूरी चीजों पर होने वाले अनुमानित खर्च को तय कर लें। इससे पूरे महीने के दौरान पैसों के इस्तेमाल पर नजर बनी रहती है और गैर-जरूरी खर्च को नियंत्रित करना आसान होता है। साथ ही ‘पहले बचत, फिर खर्च’ का सिद्धांत अपनाना उपयोगी हो सकता है। आमतौर पर लोग महीने भर खर्च करने के बाद बची रकम को बचाने की सोचते हैं, लेकिन ऐसा हमेशा संभव नहीं हो पाता। इसलिए सैलरी आते ही बचत और निवेश के लिए निर्धारित राशि अलग कर लेना बेहतर तरीका माना जाता है।

    घरेलू खर्च में छोटी-छोटी बचत भी महीने के बजट पर असर डाल सकती है। बाजार या सुपरमार्केट जाने से पहले जरूरी सामान की सूची तैयार करने से अनावश्यक खरीदारी से बचा जा सकता है। बिजली और पानी की खपत को नियंत्रित करने से भी नियमित खर्च कम किया जा सकता है। इसके अलावा बाहर खाने और ऑनलाइन खाना मंगाने की संख्या सीमित करना भी बजट को संभालने में मदद कर सकता है। घर में बने भोजन को प्राथमिकता देने से खर्च को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इस तरह रोजमर्रा की आदतों में थोड़े बदलाव करके महीने के कुल खर्च को व्यवस्थित किया जा सकता है।

    अचानक आने वाले खर्चों के लिए इमरजेंसी फंड बनाना भी जरूरी है। मेडिकल खर्च या दूसरी आकस्मिक जरूरत के समय यह रकम आर्थिक दबाव कम कर सकती है। इसके लिए धीरे-धीरे बचत करके कम से कम तीन से छह महीने के घरेलू खर्च के बराबर आपातकालीन कोष तैयार करने की सलाह दी जाती है। इससे अचानक जरूरत पड़ने पर उधार लेने की स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है। सही बजट, नियमित बचत, नियंत्रित खर्च और आपातकालीन फंड के जरिए सीमित सैलरी में भी घर का वित्तीय प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

  • AC खरीदने का प्लान हैं तो चुकाने पड़ सकते हैं ज्यादा दाम… SBI की ये सेवा भी हो रही महंगी

    AC खरीदने का प्लान हैं तो चुकाने पड़ सकते हैं ज्यादा दाम… SBI की ये सेवा भी हो रही महंगी


    नई दिल्ली।
    दो ऐसी खबरें हैं, जो आपको थोड़ा परेशान कर सकती हैं। अगर आप रूम एयर कंडीशनर (Room Air Conditioner) खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आने वाले समय में आपको ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं, स्टेट बैंक (State Bank) के करोड़ों ग्राहकों के लिए मोबाइल ऐप या इंटरनेट बैंकिंग (Mobile app or internet banking) के जरिए तत्काल भुगतान सेवा (IMPS) महंगे होने जा रही है।

    ब्रोकरेज फर्म इक्विरस की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 से लागू होने वाले नए स्टार-रेटिंग नियमों और लगातार बनी हुई कमोडिटी महंगाई के चलते एसी की कीमतों में 7–8 फीसदी तक बढ़ोतरी होने की संभावना है।

    नए मॉडल्स की कीमतों में इजाफा होने के आसार
    रिपोर्ट में कहा गया है कि नए नियम लागू होने के बाद कंपनियां अपने नए मॉडल्स की कीमतों में इजाफा करेंगी। इसके अलावा अप्रैल–मई 2026 के दौरान कीमतों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे पूरे उद्योग में दामों का नया स्तर तय होगा और कंपनियों के मुनाफे पर बना दबाव कुछ हद तक कम होगा।

    उपभोक्ताओं के लिहाज से इसका मतलब यह है कि नए स्टार-रेटेड मॉडल्स पहले से महंगे होंगे। इसी आशंका के चलते बाजार में पहले ही खरीदारी का रुझान दिखने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर में डीलर्स और ग्राहक बड़ी संख्या में पुराने स्टार-रेटिंग वाले मॉडल्स का स्टॉक कर रहे हैं, ताकि नए नियम लागू होने से पहले खरीदारी की जा सके।

    रिपोर्ट में भारतीय रूम एयर कंडीशनर उद्योग के पिछले दो वर्षों के उतार-चढ़ाव का भी जिक्र किया गया है। कैलेंडर वर्ष 2024 में जहां उद्योग ने करीब 40 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की थी, वहीं 2025 उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। खराब मौसम, जीएसटी बदलाव से जुड़ी बाधाएं, चैनल पर अधिक स्टॉक और आक्रामक ग्राहक सहायता योजनाओं के कारण मांग में अस्थिरता बनी रही और मुनाफे पर दबाव पड़ा।

    आईएमपीएस के जरिए राशि भेजना होगा महंगा
    देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के करोड़ों ग्राहकों के लिए मोबाइल ऐप या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) महंगे होने जा रही है। 15 फरवरी से आईएमपीएस के जरिए ज्यादा रकम भेजने पर चार्ज देना होगा।

    अभी तक यह सेवा ज्यादातर मामलों में मुफ्त थी। बैंक ने साफ किया है कि 25 हजार रुपये तक आईएमपीएस के जरिए ऑनलाइन से पैसे भेजना पहले की तरह बिल्कुल मुफ्त रहेगा, जिससे आम ग्राहकों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन उससे ज्यादा की धनराशि भेजने पर शुल्क लगेगा।

    बैंक के नए नियमों के हिसाब से ऑनलाइन चैनल के जरिए 25,000 से ज्यादा रकम भेजने पर शुल्क देना होगा। जैसे-जैसे रकम बढ़ेगी, शुल्क भी बढ़ता जाएगा। आईएमपीएस के जरिए 25 हजार से एक लाख रुपये तक भेजने पर दो रुपये शुल्क और उसके ऊपर जीएसटी देनी होगा।

    इसी तरह से एक से दो लाख पर छह फीसदी सेवा शुल्क और ऊपर से जीएसटी अतिरिक्त लगेगी। वहीं, दो से पांच लाख रुपये की धनराशि आईएमपीएस के माध्यम से ट्रांसफर करने पर 10 शुल्क और जीएसटी देना होगा। अगर ग्राहक शाखा से आईएमपीएस करता है तो वहां पहले से ही चार्ज लगता आ रहा है जो आगे भी जारी रहेगा।

    बैंक की तरफ से कहा गया कि वेतन खातों और पेंशन खाताधारकों को आईएमपीएस शुल्क से छूट मिलती रहेगी, जिनमें शौर्य फैमिली पेंशन खाते समेत कई खास खाते शामिल हैं।