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  • जेड प्लांट की पत्तियां पीली पड़ना माना जाता है अशुभ, जानिए वजह और तुरंत करने वाले जरूरी उपाय

    जेड प्लांट की पत्तियां पीली पड़ना माना जाता है अशुभ, जानिए वजह और तुरंत करने वाले जरूरी उपाय

    नई दिल्ली । घर में पौधे रखना वास्तु शास्त्र में शुभ माना जाता है। इनसे घर की सुंदरता बढ़ने के साथ वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने की भी मान्यता है। जेड प्लांट भी ऐसे पौधों में शामिल है, जिसे वास्तु और फेंगशुई में शुभ तथा समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि घर में हरा-भरा जेड प्लांट सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक होता है। वहीं, इसके अचानक पीले पड़ने या खराब होने को कुछ वास्तु मान्यताओं में शुभ संकेत नहीं माना जाता।

    जेड प्लांट की पत्तियों का पीला पड़ना धन से जुड़ी परेशानियों का संकेत माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, अगर पौधा अपनी हरियाली खोने लगे तो इसे घर में आर्थिक स्थिति से जुड़ी बाधाओं के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, पौधे की पत्तियों का पीला होना उसके रखरखाव से जुड़ी वजहों से भी हो सकता है, इसलिए पौधे की देखभाल पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    वास्तु मान्यताओं में जेड प्लांट के पीले पड़ने को घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने से भी जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि नकारात्मक वातावरण बढ़ने पर घर में तनाव और आपसी कलह की स्थिति बन सकती है। इसलिए पौधे के खराब होने पर घर की साफ-सफाई और आसपास के वातावरण पर भी ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

    अगर जेड प्लांट को घर की पूर्व दिशा में रखा गया है और उसकी पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं, तो इसे परिवार से जुड़ी परिस्थितियों के लिहाज से भी सतर्क रहने का संकेत माना जाता है। कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी या रिश्तों में मनमुटाव की ओर संकेत कर सकती है।

    जेड प्लांट की सही जगह और देखभाल को लेकर भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार इसे पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। अगर पौधे को मुख्य द्वार के पास रखा गया है तो वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मुख्य द्वार के आसपास गंदगी या जूते-चप्पल रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    जेड प्लांट को तेज और सीधी धूप में रखने से भी बचना चाहिए। इसे हल्की धूप में करीब तीन से चार घंटे रखने की सलाह दी जाती है। पौधे में पानी डालते समय भी सावधानी जरूरी है। जब गमले की ऊपर की मिट्टी सूखी दिखाई दे, तभी पानी देना चाहिए। जरूरत से ज्यादा पानी पौधे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    अगर पौधे की कुछ पत्तियां पूरी तरह पीली या खराब हो चुकी हैं, तो उन्हें धीरे से काटकर हटा देना चाहिए। साथ ही पौधे की मिट्टी, रोशनी और पानी देने की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। इस तरह जेड प्लांट की नियमित देखभाल करके उसे स्वस्थ और हरा-भरा रखने की कोशिश की जा सकती है।

  • Plant Vastu: छत पर पौधे लगाने से पहले जान लें वास्तु के ये जरूरी नियम, सही दिशा और देखभाल से बनी रहे सकारात्मकता

    Plant Vastu: छत पर पौधे लगाने से पहले जान लें वास्तु के ये जरूरी नियम, सही दिशा और देखभाल से बनी रहे सकारात्मकता


    नई दिल्ली ।
    घर की छत को पौधों और गमलों से सजाकर खूबसूरत बनाने का चलन बढ़ा है। कई लोग छत पर अलग-अलग तरह के पौधे लगाकर उसे छोटे गार्डन का रूप देते हैं। वास्तु शास्त्र में भी पौधों को लेकर कई नियम बताए गए हैं। इनके अनुसार पौधों की दिशा, आकार, संख्या और रखरखाव का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि सही दिशा में लगाए गए पौधे घर के वातावरण में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि से जुड़ी ऊर्जा बनाए रखने में सहायक होते हैं।

    छत पर गमले रखने से पहले सबसे जरूरी बात उनकी दिशा को लेकर बताई गई है। वास्तु के अनुसार छोटे, हल्के और फूल वाले पौधों को पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में रखना शुभ माना जाता है। तुलसी, गेंदा, पुदीना और अन्य औषधीय पौधों को भी इन दिशाओं में रखने की सलाह दी गई है।

    वहीं, बड़े और ऊंचे पौधों के लिए दक्षिण और पश्चिम दिशा को उपयुक्त माना गया है। भारी गमलों वाले पौधों को भी इन दिशाओं में रखने की बात कही गई है। वास्तु के अनुसार दक्षिण और पश्चिम दिशा में भारी वस्तुएं रखने से स्थिरता बनी रहने की मान्यता है और इसे नकारात्मक ऊर्जा को रोकने से भी जोड़ा जाता है।

    छत के बीच के हिस्से को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वास्तु में इस स्थान को ब्रह्मस्थान कहा जाता है और इसे खुला तथा साफ रखना बेहतर माना जाता है। इसलिए छत के बिल्कुल बीच में भारी गमला या बड़ा पौधा रखने से बचने की सलाह दी गई है।

    पौधों के चुनाव में भी सावधानी जरूरी बताई गई है। छत पर कैक्टस या दूसरे कांटेदार पौधे लगाने से बचने की सलाह दी गई है। गुलाब को इसका अपवाद बताया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार कांटेदार पौधों को तनाव और नकारात्मकता से जोड़ा जाता है।

    इसके अलावा छत को जरूरत से ज्यादा गमलों से भरने से भी बचना चाहिए। बहुत अधिक संख्या में गमले रखने या भारी गमलों की भीड़ लगाने को वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना गया है। पौधों के बीच पर्याप्त खुली जगह रखना बेहतर बताया गया है। इससे छत पर पौधों को व्यवस्थित रखने में भी आसानी रहती है।

    सूखे, टूटे या मुरझाए पौधों को लंबे समय तक छत पर नहीं रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र में ऐसे पौधों को नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए पौधों की नियमित देखभाल करने और किसी पौधे के सूखने या खराब होने पर उसे तुरंत हटाने की सलाह दी गई है।

    छत पर पौधे लगाते समय केवल वास्तु नियमों का ही नहीं, बल्कि पौधों की जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी बताया गया है। ऐसे पौधों का चुनाव करना चाहिए जिन्हें पर्याप्त धूप मिल सके और जिनकी देखभाल आसानी से की जा सके। बहुत अधिक फैलने वाले या भारी होने वाले पौधों को लगाने से पहले उनकी बढ़त और छत पर पड़ने वाले भार का ध्यान रखना चाहिए। इस तरह पौधों की दिशा, संख्या, आकार और नियमित देखभाल पर ध्यान देकर छत को व्यवस्थित रखा जा सकता है।