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  • बरसात में डेंगू का खतरा बढ़ा, प्लेटलेट्स ही नहीं, ये संकेत भी बताते हैं बीमारी हो रही गंभीर

    बरसात में डेंगू का खतरा बढ़ा, प्लेटलेट्स ही नहीं, ये संकेत भी बताते हैं बीमारी हो रही गंभीर


    नई दिल्ली।
    बरसात (Rain) के दिनों में मच्छरों (Mosquitoes) के कारण होने वाली डेंगू (Dengue) जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते दिनों हुई बारिश और जगह-जगह जल जमाव के कारण राजधानी दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में डेंगू के मामले बढ़ने लगे हैं।

    दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में इस साल अब तक डेंगू के 272 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले दर्ज हो चुके हैं। इतना ही नहीं पिछले एक सप्ताह में डेंगू के 26, मलेरिया के 15 और चिकनगुनिया के दो नए मामले सामने आए हैं।

    राजधानी दिल्ली पहले से ही स्वाइन फ्लू का प्रकोप झेल रही है ऐसे में डेंगू के मामलों ने डबल अटैक कर दिया है। एडीज एजिप्टी मच्छरों के कारण होने वाली ये बीमारी कुछ लोगों में गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। इन्हीं खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को मच्छरों से बचाव को लेकर अलर्ट रहने की सलाह दे रहे हैं।


    गंभीर हो सकती है डेंगू की बीमारी

    डेंगू का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में प्लेटलेट्स काउंट घूमने लगता है। डेंगू के टेस्ट में इसका कम होना चिंता बढ़ाने लगता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि डेंगू की गंभीरता सिर्फ प्लेटलेट्स काउंट से तय नहीं होती।

    कई बार मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। शरीर प्लेटलेट्स की रिपोर्ट से पहले ही खतरे के संकेत देता है। डॉक्टर कहते हैं, अगर आपको तेज बुखार के साथ लगातार पेट में तेज दर्द, उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आने, बहुत ज्यादा सुस्ती जैसी परेशानी हो रही है तो इसे बिल्कुल इग्नोर न करें। ये भी इशारा करते हैं कि बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।


    डेंगू में पेट की दिक्कतों पर भी दें ध्यान

    बुखार के साथ या बुखार कम होने के बाद भी अगर अचानक तेज पेट दर्द शुरू हो जाए तो इसे बिल्कुल हल्के में न लें। पेट में दर्द गंभीर डेंगू का संकेत हो सकता है। डेंगू के मरीजों को उल्टी होने की भी दिक्कत रहती है। बार-बार उल्टी होने की स्थिति में अगर मरीज पानी और दूसरे तरल पदार्थ ठीक से नहीं ले रहा है तो इससे शरीर में डिहाइड्रेशन की दिक्कत बढ़ सकती है।


    नाक या मसूड़ों से खून आना

    नाक या मसूड़ों से खून आना डेंगू का गंभीर संकेत हो सकता है। कुछ लोगों में उल्टी या मल में भी खून दिखाई दे सकता है। डॉक्टर कहते हैं, गंभीर स्थिति में डेंगू अत्यधिक रक्तस्राव का कारण बनता है। इसलिए डेंगू के मरीज में किसी भी तरह का असामान्य रक्तस्राव दिखाई दे तो इसे सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने का सामान्य असर मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।


    थकान-कमजोरी की दिक्कत

    गंभीर डेंगू में शरीर से तरल पदार्थ निकलने के कारण खून का संचार प्रभावित हो सकता है। इससे लो ब्लड प्रेशर और शॉक जैसी समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है। इस स्थिति में मरीज को अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होती है। लगातार बढ़ती कमजोरी को सिर्फ बुखार के बाद की थकान मानना सही नहीं है। अगर डेंगू के मरीज की अचानक सांस फूलने लगे या सांस लेने में दिक्कत हो तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।


    क्या कहते हैं डॉक्टर?

    डॉक्टर कहते हैं, डेंगू को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि बुखार उतर जाने पर अक्सर लोग मान लेते हैं कि बीमारी ठीक हो गई। हालांकि कई बार डेंगू के गंभीर संकेत अक्सर बुखार कम होने के 24 से 48 घंटे बाद दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बुखार उतरने के बाद भी मरीज की सेहत पर लगातार ध्यान देते रहें। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आने, बहुत ज्यादा सुस्ती, बेचैनी या सांस लेने में परेशानी जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डेंगू में प्लेटलेट्स की जांच महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स काउंट से ही बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती।

  • बरसात के मौसम में बढ़ा बुखार का खतरा, जानिए कब सामान्य फीवर है और कब तुरंत डेंगू की जांच कराना बन जाता है जरूरी

    बरसात के मौसम में बढ़ा बुखार का खतरा, जानिए कब सामान्य फीवर है और कब तुरंत डेंगू की जांच कराना बन जाता है जरूरी

    नई दिल्ली । मानसून के आगमन के साथ देश के कई हिस्सों में बुखार और संक्रमण से जुड़े मामलों में तेजी देखी जाती है। बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह मच्छरों और वायरस जनित बीमारियों के फैलने के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करता है। ऐसे समय में अधिकांश लोगों को होने वाला बुखार सामान्य वायरल संक्रमण का परिणाम होता है, लेकिन कई मामलों में यही बुखार डेंगू जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसलिए केवल बुखार को देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय उसके साथ दिखाई देने वाले अन्य लक्षणों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

    सामान्य मौसमी बुखार की शुरुआत प्रायः हल्के लक्षणों के साथ होती है। इसमें हल्का या मध्यम बुखार, शरीर में दर्द, गले में खराश, हल्की खांसी, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। पर्याप्त आराम, पर्याप्त पानी पीने, हल्का भोजन और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवाओं से अधिकांश लोगों की स्थिति दो से तीन दिनों में बेहतर होने लगती है। इस दौरान भूख कम लगना और सामान्य कमजोरी महसूस होना भी आम बात है, लेकिन गंभीर लक्षण आमतौर पर नहीं दिखाई देते।

    इसके विपरीत डेंगू का बुखार अक्सर अचानक और तेज तापमान के साथ शुरू होता है। मरीज को तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में अत्यधिक पीड़ा महसूस हो सकती है। कई मामलों में शरीर पर लाल रंग के छोटे-छोटे दाने दिखाई देने लगते हैं, जो डेंगू का महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं। बीमारी बढ़ने पर अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, मसूड़ों या नाक से खून आना और प्लेटलेट्स की संख्या में कमी जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि बुखार लगातार तीन दिन से अधिक बना रहे, बार-बार तेज हो जाए, शरीर पर दाने उभर आएं या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। ऐसे मामलों में रक्त जांच और प्लेटलेट्स की निगरानी से बीमारी की समय पर पहचान संभव होती है, जिससे जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मानसून के दौरान बीमारी से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छरों का प्रजनन न हो सके। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का उपयोग करें और स्वच्छ भोजन व पर्याप्त पानी का सेवन करें। यदि बुखार हो जाए तो स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित रहता है, क्योंकि समय पर सही उपचार ही डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।