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  • बेंगलुरु में आध्यात्मिक मंच से पीएम मोदी का संदेश: समाज और युवा शक्ति ही भारत की असली ताकत

    बेंगलुरु में आध्यात्मिक मंच से पीएम मोदी का संदेश: समाज और युवा शक्ति ही भारत की असली ताकत


    नई दिल्ली । बेंगलुरु में आयोजित एक आध्यात्मिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास, समाज की भूमिका और युवाओं की शक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। यह अवसर केवल एक सार्वजनिक आयोजन नहीं था, बल्कि विचारों और संस्कृति के संगम का एक ऐसा मंच बन गया जहां भारत के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक दृष्टिकोण सामने आया। पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल शांत, आध्यात्मिक और ऊर्जा से भरा हुआ दिखाई दिया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब किसी कार्य के पीछे स्पष्ट उद्देश्य और सेवा की भावना होती है, तो उसके परिणाम हमेशा सकारात्मक होते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की असली ताकत उसकी सरकार नहीं, बल्कि उसका समाज होता है। समाज जितना अधिक सक्रिय और जागरूक होता है, देश उतनी ही तेजी से प्रगति करता है।

    अपने विचार रखते हुए उन्होंने युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि आज का भारत तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव के केंद्र में युवा हैं। विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में जो नए अवसर बन रहे हैं, उनमें भारतीय युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। देश कई क्षेत्रों में केवल भागीदारी ही नहीं कर रहा, बल्कि नेतृत्व की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

    प्रधानमंत्री ने भारत की विविधता को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं होते हुए भी भारत एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। यह एकता किसी दबाव से नहीं, बल्कि एक साझा सोच और भावना से बनी है, जिसमें दूसरों के लिए जीने की प्रवृत्ति प्रमुख है।

    उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक समय में भारत ने तकनीकी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। डिजिटल क्रांति ने देश को नई दिशा दी है और आज भारत डिजिटल भुगतान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। इसके साथ ही स्टार्टअप संस्कृति तेजी से बढ़ रही है और युवा उद्यमी नए विचारों के साथ आगे आ रहे हैं।

    अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जहां युवा वैज्ञानिक नई उपलब्धियों को हासिल कर रहे हैं। यह सब इस बात का संकेत है कि देश एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां तकनीक और मानव संसाधन दोनों मिलकर विकास की गति को आगे बढ़ा रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने समाज की भागीदारी को किसी भी बड़े परिवर्तन की नींव बताया। उन्होंने कहा कि जब लोग स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी लेते हैं, तभी कोई भी आंदोलन या विकास सफल हो सकता है। इसलिए समाज की सक्रिय भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    कार्यक्रम में आध्यात्मिकता और आधुनिक विकास का अनोखा संगम देखने को मिला, जहां एक ओर परंपरा और संस्कृति का संदेश था, वहीं दूसरी ओर भविष्य की तकनीकी दिशा का संकेत भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। यह आयोजन इस विचार को मजबूत करता है कि भारत का विकास केवल आर्थिक या तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

  • लोकसभा में बोले PM मोदी, 'परिसीमन में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं, ये मेरी गारंटी', विपक्ष ने उठाए कई सवाल

    लोकसभा में बोले PM मोदी, 'परिसीमन में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं, ये मेरी गारंटी', विपक्ष ने उठाए कई सवाल


    नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र की शुरुआत गुरुवार को जोरदार हंगामे और तीखी बहस के साथ हुई। जैसे ही सरकार की ओर से संबंधित विधेयक सदन में पेश किए गए विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे देश के भविष्य और महिलाओं की भागीदारी से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया।

    महिला शक्ति को लेकर नीयत पर जोर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय राष्ट्रीय दृष्टिकोण से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं केवल फैसलों को ही नहीं बल्कि सरकार की नीयत को भी परखेंगी। अगर नीयत में खोट होगी तो देश की नारी शक्ति उसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से अपील की कि वे इस पहल का समर्थन करें और विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।

    विपक्ष को पीएम की चेतावनी
    प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग इस मुद्दे में राजनीति तलाश रहे हैं उन्हें इतिहास से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब जब महिलाओं को अधिकार देने के प्रयासों का विरोध हुआ है उसका खामियाजा विरोध करने वालों को उठाना पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सभी दल मिलकर आगे बढ़ते हैं तो इसका लाभ पूरे लोकतंत्र को मिलेगा न कि किसी एक पार्टी को। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा “यह मेरी गारंटी है मेरा वादा है कि हर राज्य को न्याय मिलेगा।” साथ ही उन्होंने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से न देखें और देशहित में सहयोग करें।

    निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी जरूरी

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की आधी आबादी अब निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार है। उन्होंने याद दिलाया कि पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण पहले ही दिया जा चुका है और अब समय आ गया है कि उन्हें संसद और विधानसभाओं में भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने कहा कि लाखों महिलाएं जमीनी स्तर पर काम कर चुकी हैं और अब वे नीति निर्धारण में अपनी भूमिका चाहती हैं।

    विकसित भारत की परिभाषा में महिला भागीदारी अहम

    प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत केवल बुनियादी ढांचे या आर्थिक आंकड़ों से नहीं बनेगा बल्कि इसमें महिलाओं की बराबर भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश इस दिशा में पहले ही काफी देर कर चुका है और अब और देरी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे इस अवसर को गंवाएं नहीं।

    देश की दिशा तय करने वाला कदम

    पीएम मोदी ने इस विधेयक को देश के भविष्य के लिए निर्णायक बताते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास शासन व्यवस्था को अधिक संवेदनशील बनाएगा और इससे निकला परिणाम देश की राजनीति को नई दिशा देगा।

    विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल

    समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है लेकिन इसे लागू करने के तरीके पर आपत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर जनगणना और परिसीमन को इससे जोड़कर इसे लागू करने में देरी कर रही है। उनका कहना था कि अगर जातीय जनगणना के आंकड़े सामने आएंगे तो आरक्षण की मांग और बढ़ेगी जिससे सरकार बचना चाहती है।

    महिला प्रतिनिधित्व पर भाजपा से जवाब मांग

    अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला करते हुए पूछा कि जिन राज्यों में उनकी सरकारें हैं वहां कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी अभी भी सीमित है और भाजपा को पहले अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त स्थान देना चाहिए।

    मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर विवाद

    सदन में मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण को लेकर भी तीखी बहस हुई। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि अगर मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा तो यह अधूरा कदम होगा। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि वे अपनी पार्टी में मुस्लिम महिलाओं को टिकट दे सकते हैं सरकार को इससे कोई आपत्ति नहीं है।

    परिसीमन को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप

    भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह परिसीमन को लेकर खासकर दक्षिण भारत में भ्रम फैला रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया संविधान के तहत हो रही है और इससे किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि परिसीमन के बाद कुछ राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ सकती है जिससे उनका प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा।

    सरकार का दावा किसी राज्य को नुकसान नहीं

    केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन को बताया कि प्रस्तावित बदलावों से लोकसभा की कुल सीटों में वृद्धि होगी और महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मिलेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी राज्य की वर्तमान स्थिति को नुकसान नहीं होगा और सभी को समान रूप से लाभ मिलेगा।

    महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की मांग

    कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है। उनका सुझाव था कि इस कानून को तुरंत लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

    तीनों विधेयकों पर आगे की प्रक्रिया

    लोकसभा में इन विधेयकों पर चर्चा शुरू हो चुकी है और मतदान 17 अप्रैल को शाम 4 बजे कराया जाएगा। सरकार ने इस पर विस्तृत चर्चा के लिए पर्याप्त समय निर्धारित किया है। शुरुआती वोटिंग में विधेयकों को पेश करने के पक्ष में बहुमत मिला जिससे आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया।

    हंगामे के बीच जारी रही कार्यवाही


    सदन में पूरे दिन हंगामे का माहौल बना रहा। विपक्ष ने जहां सरकार पर गंभीर आरोप लगाए वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे ऐतिहासिक सुधार बताया। अब सभी की नजरें आगामी मतदान पर टिकी हैं जो इस पूरे मुद्दे की दिशा तय करेगा।

  • विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पीएम मोदी ने महिला नेतृत्व को बताया देश की प्रगति का आधार

    विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पीएम मोदी ने महिला नेतृत्व को बताया देश की प्रगति का आधार


    नई दिल्ली। राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है तो पूरा शासन तंत्र अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और जनहितकारी बनता है। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व केवल सामाजिक बदलाव का प्रतीक नहीं है बल्कि यह एक मजबूत और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था की नींव भी है, जिससे देश के विकास को नई दिशा मिलती है।

    प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में इसे सभी राजनीतिक दलों की सहमति से पारित किया गया था, जो भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी और अधिक प्रभावी और निर्णायक बने, ताकि नीति निर्माण में उनका योगदान और मजबूत हो सके।

    अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भारत की प्रगति का सबसे बड़ा आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पदों से लेकर पंचायत स्तर तक महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और अपने दायित्वों को अत्यंत कुशलता और समर्पण के साथ निभा रही हैं। यह बदलाव न केवल शासन व्यवस्था को मजबूत कर रहा है बल्कि समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।

    प्रधानमंत्री ने पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। कई राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी लगभग आधी तक पहुंच चुकी है, जो भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक सशक्त बना रही है।

    उन्होंने कहा कि विभिन्न अध्ययनों में यह स्पष्ट हुआ है कि जहां निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है वहां व्यवस्था अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बनती है। जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं इसका सशक्त उदाहरण हैं, जहां महिलाओं की सक्रिय भूमिका ने ग्रामीण जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है।

    प्रधानमंत्री ने जनधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले करोड़ों महिलाएं बैंकिंग व्यवस्था से दूर थीं, लेकिन अब करोड़ों बैंक खाते खुलने से उनकी आर्थिक भागीदारी में बड़ा बदलाव आया है। इससे महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिली है और वे देश की विकास यात्रा का मजबूत हिस्सा बनी हैं।

    उन्होंने मुद्रा योजना और स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं उद्यमिता और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल रही है।

    प्रधानमंत्री ने मातृत्व अवकाश को बढ़ाकर 26 सप्ताह किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह निर्णय महिलाओं के कार्यस्थल पर सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने स्किल इंडिया मिशन और ड्रोन दीदी जैसी पहलों को महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बताते हुए कहा कि महिलाएं अब कृषि, तकनीक और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला नेतृत्व वाला विकास भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुका है, जिससे न केवल महिलाओं का जीवन बदल रहा है बल्कि पूरे समाज की दिशा और सोच भी बदल रही है।