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  • गुलवीर की ऐतिहासिक दौड़ पर प्रधानमंत्री का सलाम, बॉक्सिंग और जूडो के पदक विजेताओं को भी दी बधाई

    गुलवीर की ऐतिहासिक दौड़ पर प्रधानमंत्री का सलाम, बॉक्सिंग और जूडो के पदक विजेताओं को भी दी बधाई


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। भारत ने एक ही दिन में सात स्वर्ण सहित कुल 16 पदक जीतकर अपनी खेल प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया। इस शानदार सफलता के बीच सबसे अधिक चर्चा लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह की रही, जिन्होंने पुरुषों की 10000 मीटर स्पर्धा में रजत और 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से बधाई देते हुए इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुलवीर सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने कहा कि गुलवीर एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स की दो स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। साथ ही वह पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में भारत के लिए कॉमनवेल्थ पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट भी बने हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि पूरे भारतीय एथलेटिक्स के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

    गुलवीर सिंह के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलीट अब विश्व स्तर की लंबी दूरी की प्रतियोगिताओं में भी मजबूती से अपनी पहचान बना रहे हैं। लगातार दो अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतना उनकी फिटनेस, धैर्य, रणनीति और मानसिक मजबूती का प्रमाण है। खेल विशेषज्ञ भी इसे भारतीय ट्रैक एंड फील्ड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने केवल एथलेटिक्स ही नहीं बल्कि भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन की भी सराहना की। पुरुषों की 90 प्लस किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि पूरे टूर्नामेंट में उनके साहस, संघर्ष और दृढ़ संकल्प ने सभी को प्रभावित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि नरेंद्र भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

    पुरुषों की 80 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले अंकुश पंघाल की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उनकी ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास शानदार रहा। उन्होंने कहा कि अंकुश की सफलता आने वाले समय में देश के हजारों युवा मुक्केबाजों को प्रेरित करेगी और भारतीय बॉक्सिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

    प्रधानमंत्री ने महिलाओं की 63 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली उन्नति शर्मा को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उन्नति का समर्पण, अनुशासन और संघर्ष साफ दिखाई दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह भविष्य में भी इसी तरह लगातार बेहतर प्रदर्शन कर भारत को गौरवान्वित करती रहेंगी।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि देश अब केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है बल्कि एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, जूडो और अन्य स्पर्धाओं में भी लगातार अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। खिलाड़ियों की मेहनत, बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था और सरकार व खेल संस्थाओं के सहयोग का असर अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर साफ दिखाई देने लगा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से खिलाड़ियों को मिली बधाई उनके मनोबल को और मजबूत करेगी। अब भारतीय खिलाड़ियों की नजरें आगामी एशियाई खेलों और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं पर हैं, जहां वे इसी शानदार प्रदर्शन को दोहराकर देश के लिए और अधिक पदक जीतने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे।

  • 270 रन की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री मोदी का सलाम लॉर्ड्स में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रचा नया इतिहास

    270 रन की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री मोदी का सलाम लॉर्ड्स में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रचा नया इतिहास


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 136वें एपिसोड में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक उपलब्धि की खुलकर सराहना की। लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ मिली शानदार टेस्ट जीत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय नारी शक्ति ने एक बार फिर पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। प्रधानमंत्री ने इस जीत को भारतीय खेल इतिहास का गौरवशाली अध्याय बताते हुए खिलाड़ियों की मेहनत समर्पण और जुझारूपन की प्रशंसा की।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स के मैदान पर अपना पहला टेस्ट मैच जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1983 में इसी ऐतिहासिक मैदान पर भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने पहला विश्व कप जीतकर दुनिया को चौंका दिया था और अब उसी मैदान पर भारतीय महिला टीम ने शानदार जीत दर्ज कर देश का सम्मान बढ़ाया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि केवल एक मैच जीतने तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारतीय महिला खिलाड़ियों की बढ़ती ताकत और आत्मविश्वास का प्रतीक भी है।

    लॉर्ड्स में खेले गए इस एकमात्र टेस्ट मुकाबले में भारतीय टीम ने हर विभाग में इंग्लैंड पर अपना दबदबा बनाए रखा। पहली पारी में भारत ने 285 रन बनाए जिसके जवाब में इंग्लैंड की टीम केवल 170 रन पर सिमट गई। इसके बाद भारतीय टीम ने दूसरी पारी में सात विकेट पर 341 रन बनाकर पारी घोषित की और इंग्लैंड के सामने 457 रन का विशाल लक्ष्य रखा। लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम दूसरी पारी में भी भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और 186 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह भारत ने 270 रन के बड़े अंतर से ऐतिहासिक जीत अपने नाम कर ली।

    इस मुकाबले में कई रिकॉर्ड भी बने जिन्होंने भारतीय जीत को और यादगार बना दिया। तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट मैच में पांच विकेट लेने वाली पहली महिला गेंदबाज बनीं। वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने 113 रन की शानदार पारी खेलते हुए लॉर्ड्स में महिला टेस्ट क्रिकेट का पहला शतक लगाने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किया। इन दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने भारतीय जीत की मजबूत नींव रखी और पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु की उपलब्धि का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने जापान ओपन का खिताब जीतने पर सिंधु को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। सिंधु जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं। उन्होंने फाइनल मुकाबले में जापान की अकाने यामागुची को सीधे गेमों में हराकर यह प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया। साथ ही यह दो वर्षों के अंतराल के बाद उनका पहला बीडब्ल्यूएफ खिताब भी रहा।

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत और पीवी सिंधु की शानदार उपलब्धि ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय महिला खिलाड़ी विश्व खेल मंच पर लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। प्रधानमंत्री की ओर से मिली यह सराहना देशभर की युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का संदेश है जो भविष्य में भारत का नाम रोशन करने का सपना देख रही हैं।

  • PM मोदी ने विदेशी नेताओं को दिए भारतीय विरासत से जुड़े उपहार, झलकी अनोखी ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’

    PM मोदी ने विदेशी नेताओं को दिए भारतीय विरासत से जुड़े उपहार, झलकी अनोखी ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति में भारतीय संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को विशेष स्थान मिलता रहा है। विदेश दौरों के दौरान विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं को दिए गए उनके उपहार न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराते हैं, बल्कि देश के हस्तशिल्प, लोक कलाओं और पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक मंच पर भी पहचान दिलाते हैं।

    इंडोनेशियाई संसद की स्पीकर पुआन महारानी को प्रधानमंत्री मोदी ने ओडिशा की प्रसिद्ध इकट (बंधा) कला से तैयार रेशमी वस्त्र भेंट किया। संबलपुर, नुआपटना और बरगढ़ के बुनकरों द्वारा तैयार यह हैंडलूम कला अपनी जटिल टाई-एंड-डाई तकनीक, आकर्षक डिजाइनों और जीवंत रंगों के लिए प्रसिद्ध है और ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जाती है।

    ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने वहां के गवर्नर-जनरल को बिहार के मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग भेंट की। प्राकृतिक रंगों से तैयार इस लोक कला में मोर, वृक्ष और प्रकृति के विविध रूपों का चित्रण है, जो समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश देता है।

    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की पत्नी को कश्मीर की पारंपरिक कढ़ाई से सजी शुद्ध ऊन की स्टोल भेंट की गई। घाटी की प्राकृतिक सुंदरता से प्रेरित महीन फूलों की कढ़ाई वाली यह स्टोल कश्मीर की सदियों पुरानी वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एंथनी अल्बनीज को दो विशेष उपहार भी दिए। पहला, जनजातीय ढोकरा कला से निर्मित धातु की नाव, जिसे प्राचीन ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार किया गया है। आदिवासी जीवन को दर्शाने वाली यह कलाकृति एकता, सहयोग और सामूहिक प्रगति का संदेश देती है।

    दूसरे उपहार के रूप में उन्हें इंडियन प्रीमियम कॉफी बॉक्स भेंट किया गया, जिसमें भारत के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों की चुनिंदा प्रीमियम कॉफी शामिल है। यह भारतीय कॉफी उद्योग की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान को दर्शाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के विपक्ष के नेता को प्रधानमंत्री ने राजस्थान की पारंपरिक लकड़ी नक्काशी कला से तैयार हस्तनिर्मित जालीदार हाथी भेंट किया। एक ही लकड़ी के टुकड़े से बनाई गई यह कलाकृति भारतीय शिल्पकारों की बारीक कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण है। भारतीय संस्कृति में हाथी बुद्धिमत्ता, समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल को प्रधानमंत्री मोदी ने संगमरमर पर अर्ध-कीमती पत्थरों की जड़ाई से तैयार मार्बल इनले वर्क बॉक्स भेंट किया। यह भारत की प्रसिद्ध पीएत्रा ड्यूरा (Pietra Dura) कला का उत्कृष्ट नमूना है, जो भारतीय कारीगरों की सूक्ष्म शिल्पकला को प्रदर्शित करता है।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को प्रधानमंत्री मोदी ने दो खास उपहार दिए। पहला, हिमालयी संस्कृति और सम्मान का प्रतीक पारंपरिक उत्तराखंडी (पहाड़ी) टोपी, जबकि दूसरा भारतीय महिला हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों के हस्ताक्षर वाली हॉकी स्टिक, जिसे न्यूजीलैंड में आयोजित एफआईएच हॉकी महिला नेशंस कप में भारत की ऐतिहासिक जीत की स्मृति में भेंट किया गया।

    इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने उन्हें छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की प्रसिद्ध ढोकरा ‘ट्री ऑफ लाइफ’ (जीवन वृक्ष) मूर्ति भी भेंट की। ‘लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार यह कलाकृति भारत की प्राचीन धातु शिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।

    न्यूजीलैंड के विपक्ष के नेता क्रिस हिपकिंस को उत्तर प्रदेश के लखनऊ की प्रसिद्ध जरी-जरदोजी वॉल हैंगिंग भेंट की गई। धातु के तारों, मोतियों, सीक्विन और अन्य सजावटी तत्वों से सजी यह कलाकृति भारतीय कढ़ाई कला की समृद्ध विरासत, रचनात्मकता और उत्कृष्ट शिल्प कौशल को दर्शाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विदेशी नेताओं को दिए गए ये उपहार केवल औपचारिक स्मृति चिह्न नहीं हैं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प, लोक कलाओं और देश के कारीगरों की प्रतिभा को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम भी हैं।

  • मोदी 3.0 के पहले कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, क्या युवाओं, महिलाओं और OBC को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व?

    मोदी 3.0 के पहले कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, क्या युवाओं, महिलाओं और OBC को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व?


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के पहले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट विस्तार 5 जुलाई या 11 जुलाई के बाद कभी भी हो सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई टीम में किन चेहरों को जगह मिलेगी और किन मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव हो सकता है।

    नई सोशल इंजीनियरिंग पर हो सकता है जोर
    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए युवाओं, महिलाओं और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को अधिक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई जा सकती है। माना जा रहा है कि इसके जरिए सरकार विकसित भारत-2047 के विजन, महिला सशक्तिकरण और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए व्यापक राजनीतिक संदेश देना चाहती है।

    युवा नेतृत्व को मिल सकता है अवसर
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते रहे हैं। मौजूदा लोकसभा में 30 वर्ष से कम आयु का एक सांसद, 31 से 40 वर्ष के बीच 15 सांसद और 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 39 सांसद हैं।

    वर्तमान केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 50 वर्ष या उससे कम आयु के मंत्रियों की हिस्सेदारी लगभग 24 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में पहली मोदी सरकार के मंत्रिमंडल की औसत आयु 62 वर्ष थी, जो 2019 में घटकर 60 वर्ष और 2021 के पुनर्गठन के बाद 58 वर्ष रह गई। वर्ष 2024 में भी मंत्रिपरिषद की औसत आयु 58 वर्ष है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार और अधिक युवा सांसदों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

    क्या महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी?
    प्रधानमंत्री मोदी कई मंचों से महिलाओं को देश की प्रमुख शक्ति बताते रहे हैं। वर्तमान में संसद में एनडीए के 58 महिला सांसद हैं, जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल में केवल सात महिला मंत्री हैं। इनमें दो कैबिनेट मंत्री और पांच राज्य मंत्री शामिल हैं, जो कुल मंत्रियों का लगभग 10 प्रतिशत हैं।

    फिलहाल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, रक्षा खडसे, शोभा करंदलाजे, अनुप्रिया पटेल, सावित्री ठाकुर और निमूबेन बंभानिया मंत्रिपरिषद का हिस्सा हैं। वर्ष 2021 के मंत्रिमंडल विस्तार में महिला मंत्रियों की संख्या 11 तक पहुंची थी, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों और आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस बार मंत्रिमंडल में नए महिला चेहरों को शामिल किया जा सकता है।

    OBC और SC वर्ग पर भी रह सकती है नजर
    मंत्रिमंडल विस्तार में ओबीसी प्रतिनिधित्व भी प्रमुख मुद्दा माना जा रहा है। विपक्ष लगातार जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सरकार को घेरता रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पिछड़े वर्ग के एक हिस्से में बदले राजनीतिक समीकरणों को भी सरकार ध्यान में रख सकती है।

    वर्तमान मंत्रिपरिषद में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं, जो कुल मंत्रियों का लगभग 38 प्रतिशत हैं। इसके अलावा 10 मंत्री अनुसूचित जाति (एससी), पांच अनुसूचित जनजाति (एसटी) और पांच मंत्री अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ओबीसी, एससी और महिला नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है। ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने की भी संभावना जताई जा रही है, जो युवा होने के साथ-साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हों।

    आधिकारिक घोषणा का इंतजार
    हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि प्रदर्शन के आधार पर कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल हो सकता है, कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है और कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है। अब सभी की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

  • वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ा मान, खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास में योगदान के लिए पीएम मोदी को मिला प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल

    वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ा मान, खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास में योगदान के लिए पीएम मोदी को मिला प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल


    नई दिल्ली । भारत की कृषि नीतियों और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा और किसानों के कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान वैश्विक स्तर पर कृषि और खाद्य प्रबंधन के क्षेत्र में दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में माना जाता है। इस उपलब्धि के बाद देशभर में खुशी का माहौल है और इसे भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस सम्मान को देश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बड़े और प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन में सुधार लाने और आधुनिक तकनीक को खेती से जोड़ने के लिए लगातार काम किया गया है। यही कारण है कि आज भारत कृषि क्षेत्र में तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है और दुनिया भारत के मॉडल को गंभीरता से देख रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में रिसर्च, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया गया है। खासतौर पर मोटे अनाज यानी श्री अन्ना को वैश्विक पहचान दिलाने में भारत की भूमिका बेहद अहम रही है। सरकार अब इस दिशा में और तेजी से काम कर रही है ताकि किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिल सके। कृषि अनुसंधान संस्थानों को भी आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जिससे खेती को अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाया जा सके।

    कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में वैश्विक खाद्य सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने वाला देश बन सकता है। इसके लिए पूर्वी भारत समेत कई क्षेत्रों में कृषि विकास को नई दिशा देने का काम किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि छोटे और सीमांत किसानों तक नई तकनीक, रिसर्च और आधुनिक संसाधनों का लाभ पहुंचे ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। इसके साथ ही खेती की गुणवत्ता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान ऐसे समय में आया है जब भारत कृषि उत्पादन, खाद्यान्न निर्यात और किसानों के हितों से जुड़े कई बड़े फैसलों के कारण वैश्विक स्तर पर चर्चा में है। पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष फोकस किया गया है। इसका असर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दिखाई देने लगा है।

    इस सम्मान को केवल प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि देश के करोड़ों किसानों के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की कृषि नीतियों को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलेगी। साथ ही भारतीय कृषि उत्पादों और रिसर्च को भी नई पहचान हासिल होगी। देश के किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह देखा जा रहा है और इसे भारत के कृषि भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

  • हैदराबाद हाउस में हाई-प्रोफाइल मुलाकात! PM मोदी और वियतनाम राष्ट्रपति आमने-सामने, क्या होंगे बड़े समझौते?

    हैदराबाद हाउस में हाई-प्रोफाइल मुलाकात! PM मोदी और वियतनाम राष्ट्रपति आमने-सामने, क्या होंगे बड़े समझौते?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत और भारत-बांग्लादेश रिश्तों को लेकर एक नया दिलचस्प मोड़ सामने आया है। बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने पश्चिम बंगाल में BJP की संभावित जीत पर खुशी जताई है और इसे दोनों देशों के रिश्तों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है।

    BNP के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होता है, तो भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से अटका तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौता आगे बढ़ सकता है। उन्होंने सीधे तौर पर ममता बनर्जी सरकार को इस समझौते में सबसे बड़ी बाधा बताया। उनका कहना है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार और बांग्लादेश, दोनों ही इस समझौते को अंतिम रूप देना चाहते थे, लेकिन राज्य स्तर पर सहमति नहीं बन पाई।

    बीएनपी BNP नेताओं को उम्मीद है कि अगर सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार बनती है, तो भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई गति आएगी और सीमा व जल विवाद जैसे मुद्दों पर प्रगति हो सकती है। दरअसल, पश्चिम बंगाल की भौगोलिक स्थिति दोनों देशों के रिश्तों में अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी सीमा इसी राज्य की लगती है।

    इस पूरे विवाद के केंद्र में है तीस्ता नदी, जो हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश पहुंचती है। इस नदी पर दोनों देशों के करोड़ों लोगों की आजीविका निर्भर है। बांग्लादेश लंबे समय से इस नदी के 50% पानी की मांग करता रहा है, जबकि भारत भी अपने हिस्से को लेकर संतुलन बनाए रखना चाहता है।

    तीस्ता जल बंटवारे को लेकर प्रयास कई बार हुए, लेकिन हर बार सहमति बनने से पहले ही मामला अटक गया। 2011 में एक प्रस्ताव तैयार हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 37.5% और भारत को 42.5% पानी देने की बात थी, लेकिन उस समय भी ममता बनर्जी के विरोध के चलते समझौता आगे नहीं बढ़ पाया।

    राज्य सरकार का तर्क रहा है कि तीस्ता नदी में पहले ही पानी का प्रवाह कम हो चुका है और अगर अतिरिक्त पानी साझा किया गया, तो उत्तर बंगाल में सिंचाई और पीने के पानी का संकट गहरा सकता है। यही वजह है कि राज्य स्तर पर इस मुद्दे पर लगातार आपत्ति जताई जाती रही है।

    गौरतलब है कि भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 54 साझा नदियां हैं, लेकिन अब तक सिर्फ गंगा और कुशियारा नदी पर ही औपचारिक समझौते हो पाए हैं। तीस्ता नदी का मुद्दा अब भी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा लंबित जल विवाद बना हुआ है।

    कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल की राजनीति का असर सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत-बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों पर भी पड़ता है। अब देखना हगा कि आने वाले समय में सियासी समीकरण बदलते हैं या फिर तीस्ता का यह विवाद यूं ही अधूरा रह जाता है।

  • पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का बड़ा कदम: आज लोकसभा में देंगे बयान, ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत की 'सुरक्षा कवच' रणनीति तैयार!

    नई दिल्ली:  पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारत सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर दो बजे लोकसभा में एक महत्वपूर्ण वक्तव्य देने वाले हैं। माना जा रहा है कि पीएम मोदी ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी इस भीषण संघर्ष से वैश्विक स्तर पर पैदा हुए ऊर्जा संकट और इसके भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर संसद को संबोधित करेंगे। इस संबोधन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार सुबह ही प्रधानमंत्री ने संसद भवन परिसर में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ एक बड़ी बैठक की, जिसमें मौजूदा हालातों की विस्तृत समीक्षा की गई।

    इससे पहले रविवार शाम को प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण पेट्रोलियम, बिजली, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और खाद सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ने वाले अपेक्षित प्रभावों पर गहन चर्चा की गई। कैबिनेट सचिव ने एक विशेष प्रेजेंटेशन के जरिए वैश्विक स्थिति और भारत सरकार द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि युद्ध का प्रभाव केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि मध्यम और दीर्घकालिक भी हो सकता है। ऐसे में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को इस झटके से बचाने के लिए तत्काल और दूरगामी, दोनों तरह के जवाबी उपायों पर काम शुरू कर दिया है।

    आम आदमी की बुनियादी जरूरतों, जैसे भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा को लेकर सरकार ने विस्तृत आकलन किया है। विशेष रूप से किसानों के लिए खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पिछले कुछ वर्षों में खाद का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए जो कदम उठाए गए थे, उनसे फिलहाल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी। साथ ही, भविष्य में उपलब्धता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की भी तलाश शुरू कर दी गई है। ऊर्जा के मोर्चे पर राहत की बात यह है कि सभी पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे देश में बिजली की कमी होने की आशंका नहीं है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस संकट से निपटने के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole-of-Government) के दृष्टिकोण पर बल दिया है। उन्होंने मंत्रियों और सचिवों के एक विशेष समूह के गठन का निर्देश दिया है, जो सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगा। पीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस बदलते वैश्विक घटनाक्रम के बीच भारतीय नागरिकों को कम से कम असुविधा होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि युद्ध की आड़ में आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी को रोका जा सके। केमिकल, फार्मास्यूटिकल और औद्योगिक कच्चे माल के आयात के लिए नए और विविध स्रोतों की पहचान की जा रही है, ताकि भारतीय उद्योगों की गति धीमी न पड़े। आज लोकसभा में पीएम का बयान इस पूरी रणनीति का खाका देश के सामने रखेगा।

  • मिडिल ईस्ट संकट के बीच अन्ना हजारे ने भारत से वैश्विक शांति की भूमिका निभाने का आग्रह किया

    मिडिल ईस्ट संकट के बीच अन्ना हजारे ने भारत से वैश्विक शांति की भूमिका निभाने का आग्रह किया

    नई दिल्ली। समाजसेवी अन्ना हजारे ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भारत से शांति और संवाद की पहल करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि वर्तमान समय में दुनिया अत्यंत चिंताजनक परिस्थितियों से गुजर रही है। विभिन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव और संघर्ष से सामान्य नागरिकों का जीवन असुरक्षित हो रहा है। विशेषकर महिलाओं, बच्चों और परिवारों पर इसका असर पीड़ादायक है।

    अन्ना हजारे ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा अहिंसा और शांति की रही है। हमारे देश ने विश्व को संवाद और शांति का मार्ग दिखाने का प्रयास किया है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्र की ओर से मानवता और शांति का संदेश देना अत्यंत आवश्यक है।

    उन्होंने पत्र में लिखा, “आज दुनिया को हथियारों की नहीं, बल्कि विश्वास और संवाद की जरूरत है। युद्ध से केवल विनाश होता है, जबकि संवाद से समाधान और स्थिरता की राह निकलती है। इसलिए मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि भारत तटस्थ और जिम्मेदार भूमिका निभाते हुए वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद को बढ़ावा दे।”

    अन्ना हजारे ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने कई वैश्विक मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभाई है। इसलिए इस संवेदनशील समय में यदि भारत मानवता और शांति के पक्ष में आगे आता है, तो यह पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानवता के हित और निरपराध नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत को शांति का मार्ग आगे बढ़ाना चाहिए।

    पिछले एक हफ्ते में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमले किए, जिनमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई उच्च सैन्य अधिकारी मारे गए। बदले में ईरान ने मिडिल ईस्ट के कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। यह संघर्ष अब भी जारी है और वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर रहा है।

    अन्ना हजारे का पत्र इस बात पर जोर देता है कि इस जटिल वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका न केवल तटस्थ बल्कि सक्रिय रूप से शांति और संवाद को बढ़ावा देने वाली होनी चाहिए। उनका मानना है कि भारत यदि इस समय जिम्मेदार पहल करता है, तो यह न केवल वैश्विक स्थिरता के लिए बल्कि मानवता के हित में भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।

  • देवालयों में VIP कल्चर पर उठे सवाल, पुजारी महासंघ ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ‘समान प्रवेश कानून’ की मांग

    देवालयों में VIP कल्चर पर उठे सवाल, पुजारी महासंघ ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ‘समान प्रवेश कानून’ की मांग


    उज्जैन। देश के प्रमुख देवालयों में बढ़ते वीआईपी कल्चर और सुरक्षा के नाम पर पुजारियों व आम श्रद्धालुओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर अब खुलकर विरोध सामने आने लगा है। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने इसे सनातन परंपरा और मंदिरों की मर्यादा के लिए गंभीर संकट बताया है। इसी कड़ी में महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री महाकालेश्वर मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंदिरों में “वीआईपी प्रवेश प्रतिबंधित कानून” बनाने की मांग की है।

    महेश शर्मा ने पत्र में कहा है कि आज देश के कई प्रमुख मंदिरों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इस हद तक बढ़ा दी जाती है कि नित्य पूजा-अर्चना करने वाले पुजारी, पुरोहित और सेवक भी अपने ही गर्भगृह, पूजा कक्ष और आवासीय क्षेत्रों से बाहर कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन के महाकाल मंदिर से लेकर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर तक ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो सनातन परंपराओं के खिलाफ हैं।

    पुजारी महासंघ ने हाल ही में वृंदावन में हुए एक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के दौरे के दौरान पुजारियों, उनके परिवारों और महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। महासंघ का आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर मंदिरों की आंतरिक व्यवस्था को पूरी तरह दरकिनार कर दिया जाता है, जिससे न केवल पूजा पद्धति बाधित होती है, बल्कि पुजारियों के सम्मान को भी ठेस पहुंचती है।

    इस मुद्दे पर महासंघ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी तीखे सवाल किए हैं। पत्र में पूछा गया है कि यदि भविष्य में सत्ता परिवर्तन होता है और कोई अन्य मुख्यमंत्री गोरखनाथ पीठ में दर्शन करने पहुंचे तथा सुरक्षा का हवाला देकर योगी आदित्यनाथ या उनके संतों को मठ से बाहर कर दिया जाए, तो क्या वे इसे स्वीकार करेंगे। महासंघ ने तर्क दिया कि यदि यह स्थिति स्वयं के लिए अनुचित मानी जाती है, तो बांके बिहारी मंदिर में पुजारियों के साथ हुआ व्यवहार भी पूरी तरह गलत है।

    अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि जब तक कोई व्यक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन है, उसे पद के प्रोटोकॉल के साथ मंदिरों में प्रवेश नहीं करना चाहिए। यदि वे दर्शन करना चाहते हैं, तो एक सामान्य श्रद्धालु की तरह कतार में लगकर दर्शन करें। इससे मंदिरों की परंपरा, पूजा पद्धति और आध्यात्मिक वातावरण सुरक्षित रहेगा।

    महासंघ का कहना है कि मंदिर किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव या सत्ता प्रदर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, समानता और श्रद्धा का केंद्र हैं। वीआईपी कल्चर के कारण आम भक्तों में असंतोष बढ़ रहा है और पुजारियों का आत्मसम्मान भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस विषय में हस्तक्षेप कर समान प्रवेश कानून बनाने की अपील की है, ताकि देवालयों की मर्यादा और सनातन परंपरा अक्षुण्ण रह सके।

  • प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात दौरा: धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे

    प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात दौरा: धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम से गुजरात दौरे की शुरुआत करेंगे। वे शाम 8 बजे सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र का जाप करने वाले भक्तों के साथ शामिल होंगे। इसके बाद मंदिर परिसर में आयोजित विशेष ड्रोन शो का अवलोकन करेंगे, जो धार्मिक और सांस्कृतिक समर्पण का प्रतीक माना जा रहा है।

    सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और शौर्य यात्रा

    11 जनवरी को प्रधानमंत्री सुबह 9:45 बजे ‘शौर्य यात्रा’ में भाग लेंगे, जिसमें उन वीर योद्धाओं को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इसके बाद सुबह 10:15 बजे मंदिर में दर्शन और पूजा होगी। सुबह 11 बजे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होगा।

    राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन

    सोमनाथ के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री राजकोट के लिए रवाना होंगे। वहां वे कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए आयोजित ‘वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन’ में शामिल होंगे। दोपहर 1:30 बजे वे सम्मेलन के व्यापार शो और प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे, इसके बाद दोपहर 2 बजे मारवाड़ी विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन होगा और प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।

    अहमदाबाद मेट्रो का उद्घाटन

    राजकोट से प्रधानमंत्री अहमदाबाद जाएंगे। शाम 5:15 बजे महात्मा मंदिर मेट्रो स्टेशन पर सेक्टर 10A से महात्मा मंदिर तक अहमदाबाद मेट्रो के चरण 2 के शेष खंड का उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना शहर की परिवहन सुविधा को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    अहमदाबाद में जर्मन चांसलर से द्विपक्षीय बैठक

    12 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी अहमदाबाद में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात करेंगे। सुबह 9:30 बजे दोनों नेता साबरमती आश्रम का दौरा करेंगे और 10 बजे साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लेंगे। इसके बाद 11:15 बजे महात्मा मंदिर, गांधीनगर में द्विपक्षीय वार्ता होगी। यह बैठक भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की 25 वर्ष की प्रगति की समीक्षा करेगी।

    तीन दिवसीय दौरे का महत्व

    प्रधानमंत्री मोदी का यह तीन दिवसीय दौरा धार्मिक स्थलों, क्षेत्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जोड़ने वाला माना जा रहा है। सोमनाथ और अहमदाबाद में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में उद्योग और व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह दौरा गुजरात की सामाजिक, आर्थिक और कूटनीतिक महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करने में सहायक होगा।