Tag: PM

  • Census 2027 : पहली बार डिजिटल डेटा कैप्चर के साथ स्व-गणना की सुविधा, PM ने दर्ज किए अपने विवरण

    Census 2027 : पहली बार डिजिटल डेटा कैप्चर के साथ स्व-गणना की सुविधा, PM ने दर्ज किए अपने विवरण


    नई दिल्ली।
    विश्व के सबसे बड़े जनगणना अभियान (World’s Largest Census Campaign) ‘जनगणना-2027’ (Census 2027 first Phase) के प्रथम चरण की 1 अप्रैल से शुरुआत हो गई। इस चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना हो रही है। यह पूरी तरह डिजिटल डेटा कैप्चर (Digital Data Capture) के साथ स्व-गणना (Self-calculation) की सुविधा वाली भारत की पहली जनगणना है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अपने आवास पर अपने अपने विवरण दर्ज किए। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए फॉर्म में विवरण दर्ज करने के फोटो भी साझा किए।

    पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर फोटो साझा करते हुए लिखा, “मैंने अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है। आज जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो रही है, जो मकानों की सूची बनाने और आवास संबंधी कार्यों से जुड़ा है। यह पहली बार है जब जनगणना के लिए डेटा संग्रह डिजिटल माध्यमों से किया जा रहा है। यह भारत के लोगों को अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करने का अधिकार भी देता है। मैं भारत के लोगों से अपील करता हूँ कि वे अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करें और जनगणना की प्रक्रिया में भाग लें।”


    राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति ने भी लिया हिस्सा

    प्रधानमंत्री के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने भी जनगणना 2027 के लिए आज ‘स्व-गणना’ पहल में भाग लिया और अपने अपने आवास संबंधी जानकारी दर्ज की। बाद में मुर्मु ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में जनगणना 2027 के लिए सरकार की ‘स्व-गणना’ पहल में भाग लिया। राष्ट्रपति ने गृह सचिव गोविंद मोहन, भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पोर्टल पर अपने आवास का विवरण स्वयं दर्ज किया। उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी अपने आवास पर अपने अपने विवरण दर्ज किए। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए फॉर्म में विवरण दर्ज करने के फोटो भी साझा किए।


    आज से स्व-गणना प्रक्रिया 08 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में शुरू

    जनगणना की इस राष्ट्रीय प्रक्रिया में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना की। बता दें कि प्रारंभिक चरण में आज से स्व-गणना प्रक्रिया 08 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में शुरू की गई है, जिनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और राजधानी दिल्ली के नई दिल्ली नगरपालिका परिषद एवं दिल्ली छावनी बोर्ड क्षेत्र शामिल हैं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार पहले दिन इन स्थानों से लगभग 55,000 परिवारों ने पहले ही दिन इस सुविधा का लाभ उठाया।


    16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध

    स्व-गणना एक सुरक्षित और वेब आधारित सुविधा है, जो 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। पहली बार उत्तरदाताओं को प्रगणकों के आने से पहले अपनी सुविधानुसार ऑनलाइन विवरण भरने का विकल्प उपलब्ध है। प्रगणक पिछली जनगणनाओं की तरह सभी आवंटित हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों में घर-घर जाएंगे, जबकि उसके पूर्व स्व-गणना एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में काम करेगी। स्व-गणना में भाग लेने के लिए व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर और बुनियादी क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके एसई.सीईएनएसयूएस.जीओवी.इन पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं। सफलतापूर्वक फॉर्म सबमिट करने पर एक यूनीक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी जनरेट हो जाती है, जिसे बाद में प्रगणक के फील्ड विजिट के दौरान उनसे पुष्टि करने के लिए साझा किया जाएगा।


    कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए

    मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के चरण के दौरान आवास की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और उपलब्ध परिसंपत्तियों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इन महत्वपूर्ण संकेतकों को दर्ज करने के लिए जनवरी 2026 में प्रथम चरण के लिए कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए हैं, जो साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण, नीति निर्धारण और लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार प्रदान करते हैं।


    01 अप्रैल से 30 सितंबर तक मकान गणना

    मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का चरण 01 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 के बीच पूरे देश में संचालित किया जाएगा। इस छह माह की अवधि में प्रत्येक राज्य और संघ राज्य क्षेत्र, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की अवधि में इस क्षेत्रीय कार्य को पूरा करेंगे। पहली बार, घर-घर सर्वेक्षण से पहले 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि स्व-गणना के लिए प्रदान की गई है, जिससे लोग प्रगणक के आने से पहले अपने विवरण डिजिटल रूप से स्वयं दर्ज कर सकते हैं।

    जनगणना शासन के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है, जो अगले दशक के लिए भारत की विकास योजना का आधार प्रदान करती है। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत एकत्रित सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रखे जाते हैं। जनगणना 2027 के लिए उपयोग किए जा रहे डिजिटल उपकरण उच्च स्तरीय डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन और बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण से युक्त हैं।

  • प्रदेश में देश का आईजीबीसी नेस्ट प्लस रेटिंग से प्रमाणित पहला प्रधानमंत्री आवास

    प्रदेश में देश का आईजीबीसी नेस्ट प्लस रेटिंग से प्रमाणित पहला प्रधानमंत्री आवास


    भोपाल!
    मध्यप्रदेश के प्रधानमंत्री आवास (Prime Minister’s Residence) को देश के आईजीबीसी एनईएसटी प्लस रेटिंग में सबसे पहले प्रमाणित होने की ऐतिहासिक उपलब्धि मिली है। यह देश का पहला प्रधानमंत्री आवास है, जिसे यह उपलब्धि हासिल हुई है।

    मध्यप्रदेश को यह गौरव गुना जिले के आरोन क्षेत्र की ग्राम पंचायत पतलेश्वर के हितग्राही श्री प्राणचंद के प्रधानमंत्री आवास के कारण मिला है। यह प्रमाणन ग्रामीण क्षेत्रों में सतत, पर्यावरण-अनुकूल एवं ऊर्जा-दक्ष आवास निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। इस प्रधानमंत्री आवास में ऊर्जा संरक्षण, जल दक्षता, बेहतर आंतरिक पर्यावरण गुणवत्ता तथा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग जैसे ग्रीन बिल्डिंग मानकों को प्रभावी रूप से अपनाया गया है।

    गुना कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने बताया कि जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक दुबे और अन्य अधिकारियों द्वारा विभिन्न स्तरों पर बेहतर कार्य किया जा रहा है। जिले में विकास कार्यों को बेहतर अंजाम दिये जाने के लिये नवाचार भी किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल ग्राम पंचायत पतलेश्वर और आरोन नगर के लिए, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की है। यह उपलब्धि अब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बनने वाले नवीन आवासों को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल एवं भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • जापान की संसद में महिला शौचालयों की कमी, पीएम तक दिखीं परेशान

    जापान की संसद में महिला शौचालयों की कमी, पीएम तक दिखीं परेशान

    ताइपे। जापान की संसद में इन दिनों महिला सांसदों को शौचालयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। महिला सांसदों ने इसे लेकर अपनी आवाज भी उठाई है। यह मामला उस वक्त और भी ज्यादा सुर्खियों में आ गया, जब देश की पहली प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने भी इन महिला सांसदों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई।
    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जापानी संसद के मुख्य सदन के पास अभी केवल दो शौचालय क्यूबिकल हैं, जो कि 73 महिला सांसदों के लिए अपर्याप्त हैं। इसके अलावा अगर पूरे संसद भवन की बात करें तो केवल 9 महिला शौचालय हैं, जिनमें केवल 22 क्यूबिकल है। इस मामले पर प्रदर्शन का हिस्सा डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद यासुको कोमियामा ने फेसबुक पर डाले अपने पोस्ट में कहा कि यह समस्या सिर्फ महिला सांसदों तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद परिसर में काम करने वाली महिला पत्रकार और कर्मचारी भी परेशान हैं।

    आपको बता दें जापान की संसद भवन की इमारत करीब 90 साल पुरानी है। इसका निर्माण 1936 में किया गया था। उस वक्त महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं था। इस वजह से वहां पर महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है।

    फिलहाल 2024 में हुए आम चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ है कि 73 महिला सांसद चुनकर आई हैं।

    जापानी मीडिया के मुताबिक कोमियामा ने कहा, “यदि प्रशासन सच में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए गंभीर है तो मुझे उम्मीद है कि इस मामले पर हम उनकी समझ और सहयोग की उम्मीद कर सकते हैं।” जापानी न्यूज आउटलेट आसाही शिंबुन के मुताबिक जापान की निचले सदन के अध्यक्ष ने अधिक महिला शौचालयों के प्रस्ताव पर विचार करने का वादा किया है।

    गौरतलब है कि जापान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर लड़ाई लंबी है। कार्य स्थल पर बराबरी हासिल करने के लिए महिलाओं को एक लंबे संघर्ष का सामना करना पड़ा है। जापानी सरकार ने वर्ष 2020 में समाज के सभी क्षेत्रों में 30 फीसदी नेतृत्व के पदों पर महिलाओं को नियुक्त करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अंदरूनी विरोध के चलते इसे चुपचाप एक दशक के लिए आगे बढ़ा दिया गया था।

  • महाराष्ट्र निकाय चुनाव में BJP-महायुति की ऐतिहासिक जीत…. PM बोले- जनता को धन्यवाद

    महाराष्ट्र निकाय चुनाव में BJP-महायुति की ऐतिहासिक जीत…. PM बोले- जनता को धन्यवाद


    मुम्बई।
    महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों (Maharashtra Local Body Elections) में भाजपा-महायुति गठबंधन (BJP-Mahayuti alliance) की ऐतिहासिक जीत ने एक बार फिर राज्य में विकास की लहर को मजबूत कर दिया है। जनता ने नगर परिषदों और नगर पंचायतों में भारी बहुमत से महायुति को समर्थन दिया, जिससे भाजपा ने कई नए रिकॉर्ड अपने नाम किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने इस जीत पर महाराष्ट्र की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह जनकेंद्रित विकास में उनकी अटूट आस्था का प्रमाण है।

    पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा कि महाराष्ट्र विकास के साथ मजबूती से खड़ा है। नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव में भाजपा और महायुति को आशीर्वाद देने के लिए महाराष्ट्र की जनता का आभारी हूं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि यह जनकेंद्रित विकास के हमारे दृष्टिकोण में विश्वास को दर्शाता है। हम राज्य भर के प्रत्येक नागरिक की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नई ऊर्जा के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने जमीनी स्तर पर किए गए अथक परिश्रम के लिए भाजपा और महायुति के पदाधिकारियों की सराहना की।


    भाजपा ने बनाया रिकॉर्ड

    वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने कहा कि भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनावों में रिकॉर्ड बनाया है, जिसमें 48 प्रतिशत पार्षद पार्टी के चिह्न पर जीते हैं और पार्टी के उम्मीदवार 129 नगर परिषदों के अध्यक्ष चुने गए हैं। उन्होंने नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में महायुति गठबंधन की सफलता का श्रेय भाजपा के संगठन और सरकार के विकास एजेंडे को दिया। फडणवीस ने कहा कि 48 प्रतिशत पार्षद भाजपा के चिह्न पर निर्वाचित हुए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। भाजपा ने 3300 पार्षदों के निर्वाचित होने के साथ एक और रिकॉर्ड बनाया है।

    अब तक प्राप्त रुझानों और परिणामों के अनुसार, भाजपा ने इस वर्ष 129 नगर परिषदों (45 प्रतिशत) में जीत हासिल की है, जो 2017 के 94 की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। महायुति ने कुल 288 नगर परिषदों में से 215 नगर परिषदों (74.65 प्रतिशत) में जीत दर्ज की है।