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  • आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी फिर ED के निशाने पर 15 अफसरों की टीम ने खंगाले दस्तावेज कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई

    आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी फिर ED के निशाने पर 15 अफसरों की टीम ने खंगाले दस्तावेज कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई


    उत्तर प्रदेश । समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बुधवार सुबह रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी समेत आजम खान और जौहर ट्रस्ट से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई। जानकारी के मुताबिक ED की टीम कई वाहनों से यूनिवर्सिटी पहुंची और वहां मौजूद दस्तावेजों तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की। छापेमारी के दौरान यूनिवर्सिटी के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। खास बात यह रही कि कार्रवाई के बीच यूनिवर्सिटी में नियमित कक्षाएं भी चलती रहीं और छात्रों को पहचान पत्र की जांच के बाद प्रवेश दिया गया।

    ED की यह कार्रवाई रामपुर तक सीमित नहीं रही। सहारनपुर और दिल्ली समेत कुल 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें जौहर ट्रस्ट से जुड़े लोगों और परिसरों के अलावा सहारनपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गुप्ता का कार्यालय और आवास भी शामिल है। ED की टीम इन जगहों पर वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड और अन्य कागजात खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत की जा रही है।

    जांच एजेंसियों के सामने मुख्य सवाल कथित तौर पर सरकारी ठेकों से मिले पैसों के इस्तेमाल को लेकर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी ठेकों से प्राप्त धनराशि किन लोगों या कंपनियों के माध्यम से जौहर यूनिवर्सिटी अथवा उससे जुड़े ट्रस्ट तक पहुंची। आरोपों की जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि इस रकम का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी की संपत्तियां तैयार करने या अन्य गतिविधियों में किस तरह किया गया। हालांकि छापेमारी अभी जांच का हिस्सा है और कार्रवाई पूरी होने के बाद ही ED की ओर से सामने आने वाली जानकारी से तस्वीर और स्पष्ट होगी।

    जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में रही है। 15 जुलाई को रामपुर के जिलाधिकारी ने यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को ढहाने का आदेश दिया था। प्रशासन की ओर से आरोप लगाया गया था कि इन इमारतों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के बिना कराया गया। हालांकि बाद में मुरादाबाद के कमिश्नर आन्जनेय सिंह की अदालत ने जिलाधिकारी के इस आदेश पर रोक लगा दी। इस मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

    ED की कार्रवाई के बीच यूनिवर्सिटी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई ताकि छापेमारी के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। यूनिवर्सिटी में छात्रों को पहचान पत्र देखकर प्रवेश दिया गया जबकि अभिभावकों को गेट से ही वापस लौटाया गया। दूसरी तरफ आजम खान के आवास पर इस कार्रवाई के दौरान कोई छापेमारी नहीं हुई और वहां सामान्य स्थिति बनी रही।

    आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले भी हो चुकी है। जुलाई 2019 में ED ने यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसरों में तलाशी अभियान चलाया था और दस्तावेज जब्त किए थे। इसके बाद सितंबर 2023 में आयकर विभाग और ED ने आजम खान के आवास तथा जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ठिकानों पर लगातार तीन दिनों तक छापेमारी की थी। उस कार्रवाई के बाद संदिग्ध बैंक लेनदेन से संबंधित जानकारी सामने आने पर ED की ओर से समन भी जारी किए गए थे।

    आजम खान इस समय रामपुर जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ कई मामले दर्ज रहे हैं और उनके वकील के मुताबिक दोहरे पैन कार्ड मामले को छोड़कर अन्य मामलों में उन्हें राहत मिल चुकी है या वे बरी हो चुके हैं। फिलहाल दोहरे पैन कार्ड मामले में अदालत की सजा के बाद वह जेल में हैं और जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील की गई है।

    ED की ताजा कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब आजम खान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बयानबाजी तेज है। हाल ही में शिवपाल यादव ने जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद कहा था कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें गृहमंत्री बनाया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ऐसे में ED की कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

    फिलहाल जांच एजेंसी की टीम अलग अलग ठिकानों पर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। छापेमारी से जुड़े पूरे मामले में ED की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि एजेंसी को किन वित्तीय लेनदेन या संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और इस कार्रवाई के बाद आजम खान तथा जौहर ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

  • ऑपरेशन त्रिशूल के तहत 7 सालों में भारत लाए गए 274 भगोड़े, 17 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

    ऑपरेशन त्रिशूल के तहत 7 सालों में भारत लाए गए 274 भगोड़े, 17 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिशूल के तहत बड़ी सफलता प्राप्त करने का दावा किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बीते सात वर्षों में 36 विभिन्न देशों से कुल 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है। इन भगोड़ों में आतंकवाद, वित्तीय धोखाधड़ी, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध, हत्या और पोक्सो जैसे अति गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं।

    गृह मंत्रालय के अनुसार विदेशों में पहचान बदलकर रह रहे अपराधियों को खोजने के लिए डिजिटल फुटप्रिंट, सैटेलाइट इनपुट और जियो-लोकेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 70 भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया गया, जबकि वर्ष 2026 में जुलाई महीने तक 45 अन्य अपराधियों को भारत वापस लाने में सफलता मिली है।

    आर्थिक अपराधों पर लगाम लगाने के लिए चलाए गए इस अभियान के तहत धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अलावा लगभग 18,762 करोड़ रुपये की राशि भी रिकवर की जा चुकी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य अपराध से अर्जित अवैध कमाई को पूरी तरह से कुर्क कर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करना है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराधियों को घेरने के लिए इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की दर में भी अप्रत्याशित तेजी आई है। अकेले वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि पिछले तीन सालों में यह संख्या 401 तक पहुंच गई है। वैश्विक पुलिस संस्थाओं के साथ बेहतर तालमेल के कारण भगोड़ों की गिरफ्तारी अब पहले से काफी सुगम हो गई है।

    अभियान को और अधिक धार देने के लिए जनवरी 2026 में एक विशेष खुफिया समन्वय समूह का गठन किया गया था, जो विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले मामलों पर काम कर रहा है। इसके साथ ही देश में लागू नए और संशोधित आपराधिक कानूनों ने आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी अदालती प्रक्रिया चलाकर न्याय सुनिश्चित करने का रास्ता साफ कर दिया है।

  • काजोल के 52वें जन्मदिन पर जानिए करियर के अनसुने किस्से, नेगेटिव रोल से रचा इतिहास और बनीं करण की लकी चार्म

    काजोल के 52वें जन्मदिन पर जानिए करियर के अनसुने किस्से, नेगेटिव रोल से रचा इतिहास और बनीं करण की लकी चार्म

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिशूल के तहत बड़ी सफलता का दावा किया है। सरकार के अनुसार पिछले सात वर्षों में 36 देशों से कुल 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। इन अपराधियों में आतंकवाद, संगठित अपराध, आर्थिक अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में वांछित आरोपी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत कानूनी व्यवस्था के कारण प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार विदेशों में अलग-अलग पहचान के साथ छिपे अपराधियों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट इनपुट, डिजिटल फुटप्रिंट, प्रोफाइल ट्रैकिंग और जियो-लोकेशन जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कई बड़े अपराधियों को भारत लाया गया। सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 में सबसे अधिक 70 भगोड़ों का प्रत्यर्पण हुआ, जबकि वर्ष 2026 में जुलाई तक 45 अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।

    सरकार ने यह भी जानकारी दी कि धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत भगोड़े अपराधियों से जुड़ी 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 18,762 करोड़ रुपये की राशि भी वापस लाई गई है। अधिकारियों के अनुसार आर्थिक अपराधों से अर्जित अवैध संपत्ति पर कार्रवाई को इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है ताकि अपराध से अर्जित लाभ को समाप्त किया जा सके और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो।

    इंटरपोल के सहयोग से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में भी उल्लेखनीय तेजी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 नोटिस जारी हुए हैं, जिनमें वित्तीय अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध, हत्या, मादक पदार्थों की तस्करी, यौन अपराध और साइबर अपराध जैसे मामले प्रमुख रहे। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सहयोग से भगोड़ों की तलाश और गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण मदद मिली है।

    जनवरी 2026 में खुफिया समन्वय को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक विशेष समूह का गठन भी किया गया, जो विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने और प्राथमिकता वाले मामलों में कार्रवाई तेज करने का कार्य कर रहा है। सरकार के अनुसार जटिल मामलों में तकनीकी निगरानी और कूटनीतिक प्रयासों के संयोजन से प्रत्यर्पण प्रक्रिया को गति मिली है। इसी क्रम में कई चर्चित मामलों में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

    सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों और संशोधित कानूनी प्रावधानों ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया है। अब कुछ मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाने की व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित नहीं होती। केंद्र का दावा है कि आधुनिक तकनीक, वैश्विक सहयोग, खुफिया समन्वय और सख्त कानूनी ढांचे के माध्यम से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक मजबूत बनाया गया है तथा भविष्य में भी ऐसे अभियानों को प्राथमिकता के साथ जारी रखा जाएगा।

  • इंदौर नगर निगम घोटाला: 103.42 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट

    इंदौर नगर निगम घोटाला: 103.42 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट


    इंदौर । इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित 103.42 करोड़ रुपये के फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 32 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में दाखिल की है। इस मामले में ठेकेदारों के अलावा नगर निगम, लोकल फंड ऑडिट और रेजिडेंट ऑडिट कार्यालय के कई अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

    ईडी ने यह शिकायत 24 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में प्रस्तुत की। अदालत ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं और मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित कर दी है।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी बिल, नकली वर्क ऑर्डर, फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन की निकासी की। जांच में यह भी सामने आया कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर नगर निगम से लगभग 103.42 करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया, जिसे बाद में विभिन्न माध्यमों से इस्तेमाल किया गया। ईडी इस पूरे लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मानते हुए इसकी वित्तीय परतों की भी जांच कर रही है।

    चार्जशीट में शामिल दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सरकारी धन की निकासी के लिए व्यवस्थित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की जांच की गई और उन्हें आरोपी बनाया गया।

    अब विशेष पीएमएलए अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों की कानूनी समीक्षा होगी। मामले को इंदौर नगर निगम से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है और आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

  • दिल्ली, यूपी और पंजाब में ईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाई, संजीव अरोड़ा से जुड़े परिसरों की तलाशी से बढ़ी सियासी हलचल

    दिल्ली, यूपी और पंजाब में ईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाई, संजीव अरोड़ा से जुड़े परिसरों की तलाशी से बढ़ी सियासी हलचल

    नई दिल्ली । कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय ने आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। मंगलवार सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्थित कुल छह परिसरों को जांच के दायरे में लिया गया। एजेंसी की यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जारी जांच का हिस्सा बताई जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी की टीमों ने पंजाब के लुधियाना और जालंधर, उत्तर प्रदेश के बरेली तथा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के कई स्थानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जिन परिसरों की तलाशी ली जा रही है उनमें आवासीय संपत्तियों के साथ-साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। अधिकारियों ने दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच की प्रक्रिया शुरू की है ताकि मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके।

    जांच का केंद्र कथित तौर पर हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन बताए जा रहे हैं। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विभिन्न कारोबारी गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध धन के उपयोग के संकेत मौजूद हैं या नहीं। इसी उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, बैंकिंग दस्तावेजों और अन्य कारोबारी अभिलेखों की भी पड़ताल की जा रही है।

    दिल्ली और नोएडा क्षेत्र में भी जांच एजेंसी की टीमें सक्रिय रहीं। यहां कई स्थानों पर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की गई। हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से छापेमारी को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। ऐसे में जांच के दायरे, बरामद सामग्री अथवा आगे की कार्रवाई को लेकर एजेंसी की ओर से औपचारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

    इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने व्यापारिक समुदाय से घबराने की आवश्यकता न होने की बात कही और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

    संजीव अरोड़ा पहले भी केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में आ चुके हैं। पिछले महीने उनके चंडीगढ़ स्थित आधिकारिक आवास पर लंबी तलाशी कार्रवाई के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उस समय वह पंजाब सरकार में विद्युत, उद्योग और वाणिज्य विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

    अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए उनके विभागों का पुनर्वितरण कर अन्य मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंप दी थी। अब ताजा छापेमारी ने एक बार फिर इस मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में ला दिया है।

    फिलहाल जांच एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है। मामले में आगे की कार्रवाई और एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट पर राजनीतिक दलों, कारोबारी जगत और आम जनता की नजर बनी हुई है।

  • मनी लॉन्ड्रिंग मामला सामने आया पूर्व अधिकारी जगदीश सरवटे कोर्ट में पेश जांच जारी

    मनी लॉन्ड्रिंग मामला सामने आया पूर्व अधिकारी जगदीश सरवटे कोर्ट में पेश जांच जारी


    जबलपुर। जबलपुर में आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश प्रसाद सरवटे अब कानूनी विवाद में घिर गए हैं। पीएमएलए विशेष न्यायालय में उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की चार्जशीट दाखिल की है। ईडी भोपाल जोनल ऑफिस ने अदालत में अभियोजन की शिकायत पेश की और अदालत के आदेश पर आरोपी खुद अदालत में पेश हुए।

    सरवटे पर आरोप है कि उन्होंने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की और अवैध कमाई को सफेद करने का प्रयास किया। जांच में प्रदेश के भोपाल मंडला उमरिया और सिवनी जिलों में कुल 11.81 करोड़ की संपत्ति चिन्हित की गई। फरवरी 2026 में अदालत के आदेश पर इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया। मामला अभी जांचाधीन है और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

    मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में आरोपी द्वारा अवैध और वैध स्रोतों से संपत्ति अर्जित करना और उसे सफेद करना गंभीर अपराध माना जाता है। ईडी की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी अधिकारियों के वित्तीय लेनदेन की निगरानी और जवाबदेही बेहद आवश्यक है।

    पूर्व अधिकारी के खिलाफ यह मामला प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की अहमियत को उजागर करता है। अधिकारियों की संपत्ति की जांच और कुर्की यह संकेत देती है कि कानून के पालन में किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी। अदालत में मामले की सुनवाई लगातार जारी है और मीडिया और आम जनता की नजरें इस पर टिकी हैं।

    जगदीश सरवटे ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया का पालन किया। अब पीएमएलए कोर्ट में सुनवाई जारी है और अदालत से निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप सही पाए जाते हैं या नहीं। फिलहाल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क है और जांच पूरी होने तक आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

    मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले से यह साफ हो गया है कि वित्तीय पारदर्शिता और कानून का पालन हर सरकारी अधिकारी के लिए अनिवार्य है। ईडी की कार्रवाई यह संदेश देती है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और कोई भी अधिकारी कानून के दायरे से बाहर नहीं है।

  • भोपाल में नकली डेयरी उत्पादों का बड़ा खुलासा, मिल्क मैजिक ब्रांड से जुड़े किशन मोदी गिरफ्तार, 20 करोड़ से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

    भोपाल में नकली डेयरी उत्पादों का बड़ा खुलासा, मिल्क मैजिक ब्रांड से जुड़े किशन मोदी गिरफ्तार, 20 करोड़ से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मिलावटी डेयरी उत्पादों के बड़े कारोबार का खुलासा हुआ है। जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालक किशन मोदी को प्रवर्तन निदेशालय ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई PMLA 2002 के तहत की गई है।

    जांच में सामने आया है कि आरोपी कंपनी मिल्क मैजिक ब्रांड के तहत मिलावटी डेयरी उत्पादों का निर्माण और निर्यात कर रही थी। आरोप है कि असली मिल्क फैट की जगह पाम ऑयल और अन्य हानिकारक रसायनों का उपयोग कर नकली डेयरी प्रोडक्ट्स तैयार किए जा रहे थे। इतना ही नहीं इन उत्पादों को असली और गुणवत्तापूर्ण दिखाने के लिए फर्जी लैब परीक्षण रिपोर्ट का सहारा लिया गया।

    ED के अनुसार इन मिलावटी उत्पादों का निर्यात कई विदेशी देशों में किया गया जिनमें बहराइन हांगकांग सिंगापुर ओमान कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। इस अवैध कारोबार के जरिए कंपनी ने करीब 20.59 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की जिसे एजेंसी ने अपराध की आय माना है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए ED ने 14 मार्च 2026 को आरोपी किशन मोदी को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय भोपाल के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने आगे की पूछताछ और जांच के लिए उन्हें 18 मार्च 2026 तक ED की रिमांड पर भेज दिया है। इस दौरान एजेंसी आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क सहयोगियों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।

    प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कंपनी लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों के सहारे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पाद भेज रही थी। इससे न केवल उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ हुआ बल्कि देश की खाद्य निर्यात साख पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों पर लगाम लगाई जा सके। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।

  • इंदौर में ED की बड़ी कार्रवाई नगर निगम के ARO राजेश परमार की 1.06 करोड़ की संपत्तियां कुर्क आय से 175 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा

    इंदौर में ED की बड़ी कार्रवाई नगर निगम के ARO राजेश परमार की 1.06 करोड़ की संपत्तियां कुर्क आय से 175 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा


    मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार अब केंद्रीय जांच एजेंसी के शिकंजे में हैं। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए परमार और उनके परिवार के नाम दर्ज 1.06 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। जांच में सामने आया है कि उनके पास मौजूद संपत्ति उनकी ज्ञात वैध आय से 175 प्रतिशत अधिक है।

    यह मामला मूल रूप से आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। ईओडब्ल्यू ने राजेश परमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। जांच के दौरान साल 2007 से 2022 तक की आय और संपत्ति का विस्तृत आकलन किया गया।

    ईडी की जांच में सामने आया कि इस 15 वर्ष की अवधि में राजेश परमार ने करीब 1.66 करोड़ रुपये की संपत्तियां अर्जित कीं। जब इन संपत्तियों की तुलना उनकी आधिकारिक सैलरी और अन्य वैध आय स्रोतों से की गई तो यह अंतर चौंकाने वाला निकला। एजेंसी के अनुसार यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से लगभग 175 प्रतिशत अधिक पाई गई। जांच एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि अपराध से अर्जित संदिग्ध आय लगभग 1.21 करोड़ रुपये हो सकती है।

    अटैच की गई संपत्तियों में मकान प्लॉट और जमीन शामिल हैं जो राजेश परमार और उनके परिजनों के नाम दर्ज हैं। इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है ताकि जांच के दौरान इनका हस्तांतरण या विक्रय न किया जा सके। ईडी का कहना है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत इन संपत्तियों को स्थायी रूप से जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से अवैध तरीके से अर्जित नकदी को सीधे निवेश करने के बजाय पहले बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया। ईडी के अनुसार बड़ी मात्रा में नकद राशि को स्वयं और परिवार के सदस्यों के खातों में जमा कराया गया। इसके बाद बैंक ट्रांसफर के जरिए इन्हीं पैसों से अचल संपत्तियां खरीदी गईं। एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य धन के वास्तविक स्रोत को छिपाना और उसे वैध कमाई के रूप में दिखाना था।

    प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई को इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी पहल माना जा रहा है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और संबंधित दस्तावेजों तथा वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी द्वारा अभियोजन की कार्रवाई भी की जा सकती है।