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  • PoK में विरोध के बीच तीसरे चरण का मतदान टला, PML-N ने 24 सीटें जीतीं और सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची.

    PoK में विरोध के बीच तीसरे चरण का मतदान टला, PML-N ने 24 सीटें जीतीं और सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची.

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच 10 अगस्त को होने वाले विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। तीसरे चरण में 11 सीटों पर मतदान होना था। चुनाव टलने से पहले दो चरणों में पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज यानी PML-N ने कुल 24 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन नतीजों के बाद पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई थी, लेकिन तीसरे चरण की प्रक्रिया रुकने से चुनावी घटनाक्रम फिलहाल प्रभावित हुआ है।

    PoK विधानसभा में कुल 45 सीटें हैं। पहले दो चरणों में PML-N के पक्ष में आए नतीजों ने पार्टी को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि, तीसरे चरण के मतदान से पहले क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन और तनाव की स्थिति बनी हुई थी। इसी कारण सोमवार को होने वाला मतदान टालने का फैसला लिया गया।

    चुनावी प्रक्रिया के दौरान हिंसा की घटनाएं भी सामने आई थीं। पहले चरण के चुनाव के दौरान अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 19 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई। कई स्थानों पर मतदान केंद्रों के आसपास झड़पों और विरोध प्रदर्शन की खबरें आईं। प्रदर्शनकारियों की ओर से चुनावी प्रक्रिया में धांधली के आरोप भी लगाए गए।

    जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC इस आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। संगठन के समर्थकों ने सरकार की नीतियों और चुनावी व्यवस्था को लेकर विरोध दर्ज कराया है। संगठन की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में लोगों की मौत हुई। हालांकि, इन आरोपों को संबंधित घटनाक्रम के संदर्भ में जांच और स्वतंत्र पुष्टि की जरूरत है।

    JAAC की मांगें केवल महंगाई और स्थानीय सुविधाओं से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं हैं। संगठन अब PoK को अधिक स्वायत्तता और राजनीतिक अधिकार देने की मांग भी उठा रहा है। उसकी प्रमुख मांग विधानसभा की 45 सीटों में से 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की है।

    ये 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहते हैं। JAAC का तर्क है कि PoK से बाहर रहने वाले लोगों को क्षेत्र की सरकार चुनने की प्रक्रिया में इस तरह की भूमिका नहीं मिलनी चाहिए। संगठन का मानना है कि आरक्षित सीटों के कारण स्थानीय मतदाताओं के राजनीतिक प्रभाव में कमी आती है।

    भारत ने PoK में चल रही चुनावी प्रक्रिया को मान्यता देने से इनकार किया है। भारत का आधिकारिक रुख है कि पाकिस्तान के पास उस क्षेत्र में राजनीतिक प्रक्रिया संचालित करने का अधिकार नहीं है, जिसे भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। भारत ने PoK में होने वाले चुनावों को पाकिस्तान के कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश के तौर पर खारिज किया है।

    इस बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और PML-N अध्यक्ष नवाज शरीफ का बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा था कि यदि उनकी पार्टी PoK में जीत हासिल करती है तो वह शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे। हालांकि, PoK के मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार प्रधानमंत्री का चुनाव विधानसभा के मुस्लिम सदस्यों में से होता है।

    PoK विधानसभा का सदस्य बनने के लिए संबंधित व्यक्ति का स्थायी निवासी होना और मतदाता सूची में नाम होना आवश्यक है। नवाज शरीफ इस चुनाव में किसी विधानसभा सीट से उम्मीदवार नहीं हैं। ऐसे में केवल PML-N अध्यक्ष होने या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सहमति से वह सीधे PoK के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।

    फिलहाल तीसरे चरण के मतदान के स्थगित होने से चुनावी प्रक्रिया की अगली तारीख स्पष्ट नहीं है। विरोध प्रदर्शनों, सुरक्षा स्थिति और राजनीतिक मांगों के बीच चुनाव आयोग तथा संबंधित प्रशासन के सामने मतदान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है। वहीं PML-N पहले दो चरणों के परिणामों के आधार पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन अंतिम चुनावी तस्वीर तीसरे चरण की 11 सीटों पर मतदान के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

  • PoK चुनाव पर पाकिस्तान में बढ़ा सियासी घमासान, PML-N ने बहुमत का दावा किया तो बिलावल ने उठाए गंभीर सवाल

    PoK चुनाव पर पाकिस्तान में बढ़ा सियासी घमासान, PML-N ने बहुमत का दावा किया तो बिलावल ने उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। मतगणना पूरी होने से पहले ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने साधारण बहुमत हासिल कर सरकार बनाने का दावा कर दिया है। दूसरी ओर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर शिकायतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और विवादित सीटों पर दोबारा मतदान कराने की मांग की है।

    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्ला ने दावा किया कि 45 सदस्यीय विधानसभा में उनकी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन मिल चुका है। उनके अनुसार दूसरे चरण में पीएमएल-एन ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की है और मुजफ्फराबाद क्षेत्र की सात सीटों में से चार पर सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि पार्टी कुल 23 सीटों तक पहुंच गई है, जिससे उसे साधारण बहुमत प्राप्त हो गया है। वहीं पीपीपी के हिस्से में मुजफ्फराबाद की तीन सीटें आने का दावा किया गया।

    इन दावों के बीच बिलावल भुट्टो जरदारी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव के दूसरे चरण में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका आरोप है कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग के समक्ष कई शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई करता तो उसकी विश्वसनीयता बनी रहती। बिलावल ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी चुनाव परिणामों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी और जिन निर्वाचन क्षेत्रों में धांधली के आरोप हैं वहां पुनर्मतदान की मांग करेगी।

    चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली। मतदान केंद्रों तक चुनाव कर्मियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचाया गया। सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस के साथ पंजाब और सिंध से अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई। इसके बावजूद कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने सड़कें अवरुद्ध कर मतदान प्रक्रिया का विरोध किया। कुछ इलाकों में मतदान प्रभावित होने की भी खबरें सामने आईं।

    प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा की 12 विवादित सीटों को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। संगठन का कहना है कि इन सीटों के जरिए राजनीतिक समीकरण प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। चुनाव के पहले चरण के दौरान भी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे पूरे क्षेत्र में पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ था।

    पीओके की 45 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव तीन चरणों में कराए जा रहे हैं। पहले चरण में मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद और शरणार्थी सीटों पर वोट डाले गए। तीसरे चरण का मतदान पुंछ डिवीजन की नौ सीटों पर निर्धारित है। इस बीच भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित पाकिस्तान के कब्जे वाले सभी क्षेत्र भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं तथा वहां कराया जा रहा चुनाव भारत के दृष्टिकोण से वैध नहीं माना जाता। ऐसे में चुनावी परिणामों के साथ-साथ राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।

  • PoK चुनाव में PML-N और PPP आमने-सामने, JAAC के बहिष्कार और विरोध प्रदर्शनों के बीच आज पहले चरण का मतदान

    PoK चुनाव में PML-N और PPP आमने-सामने, JAAC के बहिष्कार और विरोध प्रदर्शनों के बीच आज पहले चरण का मतदान

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के साथ राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 45 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान तीन चरणों में कराया जा रहा है। चुनाव ऐसे समय हो रहे हैं जब क्षेत्र में पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक असंतोष और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं। चुनावी प्रक्रिया के केंद्र में 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को लेकर विवाद है, जिसने स्थानीय राजनीति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    पहले चरण में मीरपुर डिवीजन की सीटों पर मतदान हो रहा है, जबकि दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद डिवीजन के साथ 12 शरणार्थी सीटों पर मतदान निर्धारित है। अंतिम चरण में पुंछ डिवीजन की सीटों पर चुनाव होंगे। प्रशासन ने सभी चरणों के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के साथ चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की तैयारी की है।

    क्षेत्र में जारी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। संगठन ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए अपने समर्थकों से मतदान में हिस्सा नहीं लेने की अपील की है। संगठन का आरोप है कि मौजूदा चुनावी व्यवस्था स्थानीय जनता के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कराए जा रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखना आवश्यक है।

    चुनाव से पहले कई स्थानों पर प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। कई इलाकों में यातायात बाधित रहा, जबकि कुछ स्थानों पर संचार सेवाओं और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर देखने को मिला। सीमावर्ती क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ने की जानकारी सामने आई है।

    इस चुनाव का सबसे बड़ा विवाद विधानसभा की 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को लेकर है। ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं, जो भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान जाकर बसे थे। सरकार इन सीटों को ऐतिहासिक और संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा मानती है। वहीं, JAAC का दावा है कि इस व्यवस्था से स्थानीय मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका सीमित होती है और चुनावी संतुलन प्रभावित होता है। संगठन का यह भी आरोप है कि इन सीटों का राजनीतिक लाभ अक्सर पाकिस्तान की प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों को मिलता है।

    चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं ने क्षेत्र में जनसभाएं कर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र को अपना दूसरा घर बताते हुए कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह विकास कार्यों की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाना चाहेंगे। दूसरी ओर, PPP नेतृत्व ने भी विकास, प्रशासनिक सुधार और क्षेत्रीय मुद्दों को चुनावी अभियान का प्रमुख विषय बनाया।

    दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी मानी जाने वाली PML-N और PPP इस चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजनीतिक रणनीति पर भी प्रभाव डाल सकते हैं। अब सभी की नजर पहले चरण के मतदान, आगामी चरणों की प्रक्रिया और चुनाव परिणामों पर बनी हुई है, जिनसे क्षेत्र की राजनीतिक दिशा तय होने की उम्मीद है।