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  • चित्रकूट में पीएम स्वनिधि योजना की समीक्षा, एडीएम ने बैंकों और निकायों को लक्ष्य पूरा करने के दिए सख्त निर्देश

    चित्रकूट में पीएम स्वनिधि योजना की समीक्षा, एडीएम ने बैंकों और निकायों को लक्ष्य पूरा करने के दिए सख्त निर्देश

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडरों तक इसका लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चित्रकूट में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए कि वे समन्वय बनाकर पात्र वेंडरों की पहचान करें तथा विशेष शिविर लगाकर उन्हें शीघ्र ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी करें। प्रशासन का उद्देश्य योजना के निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल करना और छोटे कारोबारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

    जिला प्रशासन के निर्देश पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता एडीएम न्यायिक एवं परियोजना निदेशक डूडा अरुण कुमार ने की। बैठक में सभी नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों, विभिन्न बैंक शाखाओं के प्रबंधकों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान पीएम स्वनिधि योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए लंबित मामलों का भी आकलन किया गया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

    बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि नगर निकाय अपने सीमा विस्तारित क्षेत्रों के साथ-साथ सब्जी और फल मंडियों में विशेष कैंप आयोजित करें। इन शिविरों के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र स्ट्रीट वेंडरों की पहचान कर उनका ऑनलाइन आवेदन कराया जाए, ताकि प्रथम चरण के ऋण का लाभ जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जा सके। प्रशासन का मानना है कि मौके पर ही आवेदन प्रक्रिया पूरी होने से लाभार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और योजना का दायरा तेजी से बढ़ेगा।

    बैंक शाखा प्रबंधकों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए कि नगर निकायों की ओर से भेजे गए ऑनलाइन आवेदनों का शीघ्र परीक्षण कर समय पर ऋण स्वीकृत किया जाए। इसके साथ ही स्वीकृत मामलों में जल्द ऋण वितरण सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि बैंक और नगर निकायों के बीच बेहतर समन्वय से योजना के लक्ष्य आसानी से पूरे किए जा सकते हैं।

    बैठक के दौरान योजना की वर्तमान प्रगति पर भी चर्चा हुई और उन क्षेत्रों की पहचान की गई, जहां अभी अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं हो पाए हैं। अधिकारियों ने ऐसे इलाकों में विशेष अभियान चलाने तथा पात्र लाभार्थियों को योजना की जानकारी देकर उन्हें आवेदन के लिए प्रेरित करने पर बल दिया। इसके अलावा आवेदन प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं के त्वरित समाधान के भी निर्देश दिए गए।

    प्रशासन ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए स्वरोजगार को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के माध्यम से बिना किसी बड़ी औपचारिकता के कार्यशील पूंजी के रूप में ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे छोटे कारोबारी अपने व्यवसाय का विस्तार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को आगे के चरणों में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने की सुविधा भी मिलती है।

    बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी संबंधित विभाग नियमित रूप से योजना की प्रगति की निगरानी करेंगे और लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन ने अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों से अपेक्षा जताई कि वे संयुक्त प्रयासों के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र स्ट्रीट वेंडरों को योजना से जोड़ते हुए उन्हें समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएं, ताकि उनका रोजगार मजबूत हो और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सके।

  • पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    नई दिल्ली । देश में असंगठित क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण और शहरी गरीब तबके के लिए चलाई जा रही पीएम स्वनिधि योजना लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज कर रही है। इस योजना के तहत अब तक 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जा चुका है, जिससे रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के कारोबार में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ी है। योजना के तहत किए गए प्रयासों का व्यापक असर यह रहा है कि लाभार्थियों द्वारा अब तक 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

    इस योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी, जिसका उद्देश्य छोटे और असंगठित व्यापारियों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना था। समय के साथ यह योजना केवल ऋण सुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल समावेशन और वित्तीय साक्षरता का एक मजबूत माध्यम बन गई है। इसके तहत लाभार्थियों को तीन चरणों में ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को विस्तार दे सकें। योजना की खास बात यह है कि इसमें सरकारी गारंटी के साथ ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बैंकों और लाभार्थियों दोनों का जोखिम कम होता है।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस योजना के लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थी पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़े हैं, जो देश में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके साथ ही लाभार्थियों की औसत आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार देखा गया है। कई लाभार्थियों ने बेहतर आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक अपनी पहुंच को भी मजबूत किया है।

    डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इस योजना में कैशबैक प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं, जिसके तहत लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन पर वित्तीय लाभ दिया जाता है। इससे छोटे व्यापारी भी डिजिटल ट्रांजैक्शन अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं और देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। लगभग 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जो इस योजना की सामाजिक समावेशिता को दर्शाता है, जबकि बड़ी संख्या में लाभार्थी वंचित और कमजोर वर्गों से आते हैं।

    सरकार ने इस योजना की उपलब्धियों को देखते हुए इसके विस्तार की घोषणा की है, जिसके तहत इसे अब मार्च 2030 तक जारी रखा जाएगा। इससे अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को योजना का लाभ मिल सकेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। साथ ही, यूपीआई आधारित क्रेडिट कार्ड सुविधा भी योजना के अगले चरण में शामिल की गई है, जिससे छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सकेगी।

    कुल मिलाकर पीएम स्वनिधि योजना देश में सूक्ष्म ऋण प्रणाली और डिजिटल भुगतान के विस्तार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह न केवल आर्थिक मजबूती का माध्यम बन रही है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भी प्रभावी साबित हो रही है।