Tag: POCSO Act Bhopal

  • भोपाल: राष्ट्रीय स्तर के हारमोनियम वादक ने की खुदकुशी; नाबालिग मंगेतर से रेप केस में जेल से आने के बाद था तनाव में, पिता की प्रतिष्ठा का था गम

    भोपाल: राष्ट्रीय स्तर के हारमोनियम वादक ने की खुदकुशी; नाबालिग मंगेतर से रेप केस में जेल से आने के बाद था तनाव में, पिता की प्रतिष्ठा का था गम



    भोपाल। राजधानी के बिलखिरिया थाना क्षेत्र में एक प्रतिभाशाली हारमोनियम वादक विवेक तिवारी (24) ने मंगलवार देर रात अपने घर में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। विवेक हाल ही में अपनी नाबालिग मंगेतर के साथ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के गंभीर मामले में जेल से जमानत पर बाहर आया था। बुधवार सुबह अस्पताल से मिली सूचना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    प्रतिष्ठा का बोझ: पुजारी पिता और ‘राष्ट्रीय सम्मान’ का साया
    विवेक तिवारी केवल एक सामान्य युवक नहीं था, बल्कि हारमोनियम वादन में उसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका था।विवेक के पिता गांव के मंदिर में पुजारी हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि विवेक इस बात को लेकर गहरे मानसिक तनाव में था कि उसके ऊपर लगे ‘रेप’ के आरोपों से उसके पुजारी पिता की समाज में प्रतिष्ठा धूमिल हुई है।करीब 6 महीने जेल में रहने के बाद विवेक मात्र 20 दिन पहले ही रिहा हुआ था। घर लौटने के बाद से ही वह गुमसुम और तनावग्रस्त रहने लगा था।यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब नवंबर 2025 में विवेक के खिलाफ उसकी नाबालिग मंगेतर के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ। दोनों परिवारों के बीच सहमति थी कि लड़की के बालिग होते ही दोनों का विवाह कर दिया जाएगा, लेकिन इससे पहले ही मामला पुलिस तक पहुँच गया।

    पारिवारिक विवाद

    रेप की शिकायत के बाद जब पीड़िता के माता-पिता विवेक के घर पहुँचे, तो वहां जमकर विवाद हुआ। इस दौरान विवेक की माँ और बहन पर पीड़िता के परिजनों के साथ मारपीट और धमकी देने का भी मामला दर्ज किया गया था।

    पुलिस कार्रवाई: सुसाइड नोट गायब, कमरा सील
    बिलखिरिया टीआई उमेश चौहान के अनुसार, घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।पुलिस ने विवेक के कमरे को सील कर दिया है और एफएसएल (FSL) टीम की मौजूदगी में कमरे की विस्तृत तलाशी ली जाएगी।फिलहाल परिजनों की स्थिति बयान देने योग्य नहीं है। पुलिस जल्द ही उनके और पीड़िता के परिवार के विस्तृत बयान दर्ज कर आत्महत्या के वास्तविक कारणों की पुष्टि करेगी।

  • भोपाल सुसाइड: रेप केस में फंसे हारमोनियम वादक ने तोड़ा दम, जमानत के बाद डिप्रेशन में था नेशनल अवार्ड विनर

    भोपाल सुसाइड: रेप केस में फंसे हारमोनियम वादक ने तोड़ा दम, जमानत के बाद डिप्रेशन में था नेशनल अवार्ड विनर


    भोपाल। राजधानी के बिलखिरिया थाना क्षेत्र में एक प्रतिभाशाली हारमोनियम वादक विवेक तिवारी (24) ने मंगलवार देर रात अपने घर में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। विवेक हाल ही में अपनी नाबालिग मंगेतर के साथ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में जेल से जमानत पर बाहर आया था। बुधवार सुबह अस्पताल से मिली सूचना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    प्रतिष्ठा का बोझ: पुजारी पिता और ‘राष्ट्रीय सम्मान’ का साया
    विवेक तिवारी केवल एक सामान्य युवक नहीं था, बल्कि हारमोनियम वादन में उसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका था।

    पिता की साख: विवेक के पिता गांव के मंदिर में पुजारी हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि विवेक इस बात को लेकर गहरे मानसिक तनाव में था कि उसके ऊपर लगे ‘रेप’ के आरोपों से उसके पुजारी पिता की समाज में प्रतिष्ठा धूमिल हुई है।करीब 6 महीने जेल में रहने के बाद विवेक 20 दिन पहले ही रिहा हुआ था। घर लौटने के बाद से ही वह गुमसुम और तनावग्रस्त रहने लगा था।

    मामले की पृष्ठभूमि: नवंबर 2025 में दर्ज हुआ था केस
    यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब नवंबर 2025 में विवेक के खिलाफ उसकी नाबालिग मंगेतर के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ।दोनों परिवारों के बीच सहमति थी कि लड़की के बालिग होते ही दोनों का विवाह कर दिया जाएगा, लेकिन इससे पहले ही मामला पुलिस तक पहुँच गया।रेप की शिकायत के बाद जब पीड़िता के माता-पिता विवेक के घर पहुँचे, तो वहां विवाद हुआ। इस दौरान विवेक की माँ और बहन पर पीड़िता के परिजनों के साथ मारपीट और धमकी देने का भी मामला दर्ज किया गया था।

    पुलिस कार्रवाई: सुसाइड नोट गायब, कमरा सील
    बिलखिरिया टीआई उमेश चौहान के अनुसार, घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने विवेक के कमरे को सील कर दिया है और एफएसएल (FSL) टीम की मौजूदगी में कमरे की विस्तृत तलाशी ली जाएगी।फिलहाल परिजनों की स्थिति बयान देने योग्य नहीं है, जल्द ही उनके और पीड़िता के परिवार के बयान दर्ज कर आत्महत्या के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा।

  • भोपाल मासूम कांड: फांसी के फंदे और दोषी के बीच आया सुप्रीम कोर्ट; 'तिहरी मौत' की सजा पर फिलहाल लगी रोक

    भोपाल मासूम कांड: फांसी के फंदे और दोषी के बीच आया सुप्रीम कोर्ट; 'तिहरी मौत' की सजा पर फिलहाल लगी रोक



    भोपाल। राजधानी के शाहजहांनाबाद इलाके में 5 साल की मासूम से दरिंदगी और फिर उसकी हत्या करने वाले दोषी अतुल निहाले की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने अतुल की याचिका को स्वीकार करते हुए निचली अदालतों द्वारा दिए गए ‘डेथ सेंटेंस’ के क्रियान्वयन (अमल) पर स्टे दे दिया है। अब न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय बेंच इस जघन्य मामले में दोषसिद्धि के तमाम कानूनी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगी।

    स्पेशल कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: एक नहीं, तीन बार फांसी
    यह मामला कानून के इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भोपाल की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 18 मार्च 2025 को अतुल निहाले को तीन अलग-अलग धाराओं में फांसी की सजा सुनाई थी। नए कानून (BNS) के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में यह पहला ऐसा मामला था, जहाँ किसी दोषी को ‘तिहरी फांसी’ और साथ में दो बार उम्रकैद की सजा मिली थी। अदालत ने इसे ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ (Rarest of Rare) मामला करार देते हुए कहा था कि यदि मौत से भी बड़ी कोई सजा होती, तो आरोपी उसका भी पात्र होता।

    हाईकोर्ट की टिप्पणी: ‘कल्पना ही रूह कंपा देने वाली है’
    जबलपुर हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कहा था कि 5 साल की मासूम ने जिस अमानवीय पीड़ा को सहा, उसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप जाती है। कोर्ट ने माना था कि समाज में बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसे दरिंदों को जीने का कोई हक नहीं है।

    खौफनाक वारदात: पानी की टंकी में मिला था मासूम का शव
    यह खौफनाक वारदात 24 सितंबर 2024 को हुई थी। आरोपी अतुल ने घर से किताबें लेने नीचे आई मासूम को अगवा किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर चाकू से वार कर उसकी हत्या कर दी। हैवानियत की हद तो तब पार हो गई जब उसने बच्ची के शव को तीन दिनों तक अपने घर के बाथरूम के ऊपर रखी पानी की टंकी में छिपाकर रखा। दुर्गंध आने पर जब पुलिस ने तलाशी ली, तब इस काले सच का खुलासा हुआ।

    अब आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट का रुख
    सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल फांसी पर रोक लगाते हुए मामले का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। कोर्ट अब यह परखेगा कि क्या सजा के निर्धारण में किसी कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी हुई है या नहीं। केस में 22 गवाह, डीएनए रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जैसे पुख्ता सबूत हैं।इस मामले में आरोपी की मां बसंती और बहन चंचल को भी सबूत छिपाने और आरोपी की मदद करने के जुर्म में दो-दो साल की सजा सुनाई जा चुकी है।