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  • इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

    इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

    मध्य प्रदेश: के इंदौर में सोशल मीडिया के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। इंस्टाग्राम के माध्यम से दो नाबालिग छात्राओं से कथित रूप से दोस्ती कर उन्हें अश्लील संदेश और वीडियो भेजने तथा मिलने के लिए दबाव बनाने के आरोप में एक 25 वर्षीय युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध POCSO एक्ट सहित विभिन्न प्रासंगिक धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए दोनों छात्राओं से संपर्क स्थापित किया। पहले सामान्य बातचीत के माध्यम से विश्वास जीतने का प्रयास किया गया और बाद में कथित रूप से आपत्तिजनक चैट, अश्लील वीडियो और अनुचित संदेश भेजे जाने लगे। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने छात्राओं पर व्यक्तिगत रूप से मिलने और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव भी बनाया।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्राओं के परिजनों ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट की चैट देखी। बातचीत की सामग्री संदिग्ध लगने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और आरोपी के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी।

    पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कुछ वर्षों से इंदौर में रह रहा था और पढ़ाई के सिलसिले में अलग-अलग स्थानों पर किराये के मकानों में रह चुका है। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की प्राथमिक पड़ताल में अन्य युवतियों से जुड़ी वीडियो चैट और तस्वीरें भी मिलने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इसी तरह की गतिविधियों का दायरा अन्य लोगों तक भी तो नहीं फैला हुआ था।

    जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल संचार के अन्य माध्यमों की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने कितने लोगों से संपर्क किया था और क्या उसने किसी अन्य नाबालिग को भी इसी प्रकार निशाना बनाने की कोशिश की थी। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों से संपर्क करते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। नाबालिगों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूक करना और अभिभावकों द्वारा उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर संतुलित निगरानी रखना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है।

    साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच पुलिस भी लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रही है। किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल, आपत्तिजनक संदेश, ब्लैकमेल या दबाव बनाने जैसी स्थिति सामने आने पर तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज को भी मिलकर बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूक करना होगा। तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग और समय पर सतर्कता ही इस प्रकार के साइबर अपराधों को रोकने में सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

  • प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद पर बाल यौन शोषण FIR, पुलिस ने शुरू की गहन जांच

    प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद पर बाल यौन शोषण FIR, पुलिस ने शुरू की गहन जांच


    प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ बाल यौन शोषण के गंभीर आरोपों पर FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने गहन जांच शुरू कर दी है। मामला POCSO कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और पीड़ित शिष्यों ने अदालत में बच्चों के कथित शोषण के बयानों को दर्ज कराया था, जिनके आधार पर पुलिस ने देर रात FIR को औपचारिक रूप दिया।

    पुलिस की पांच सदस्यीय टीम, जिसका नेतृत्व डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य कर रहे हैं, ने घटना स्थल का नक्शा तैयार कर लिया है और पीड़ितों के मेडिकल परीक्षण के बाद साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। टीम ने माघ मेला शिविर और अन्य कथित घटनास्थलों का निरीक्षण भी किया है। पुलिस का मुख्य फोकस अब उन पीड़ितों और शिकायतकर्ता तक पहुंचकर कलम बंद बयान और सबूत दर्ज करना है, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी सुनिश्चित हो सके।

    अविमुक्तेश्वरानंद ने FIR दर्ज होने के बाद कहा कि वे जांच से भागेंगे नहीं और उनके मठ के दरवाजे पुलिस के लिए हमेशा खुले हैं। उन्होंने बताया कि कई वकीलों ने उनका केस मुफ्त में लड़ने का प्रस्ताव दिया है और उनकी लीगल टीम अब अग्रिम कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है। वहीं, उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के आपराधिक इतिहास पर सवाल उठाया और दावा किया कि वह कांधला थाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी रह चुका है।

    इस हाई‑प्रोफाइल मामले में पुलिस ने स्पेशल टीम बनाई है जिसमें एसीपी और इंस्पेक्टर झूंसी समेत पांच वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम निष्पक्ष और तेज़ जांच सुनिश्चित कर रही है। POCSO Act के तहत यह मामला तीव्र और संवेदनशील माना जा रहा है, इसलिए पुलिस मेडिकल, फोरेंसिक और गवाह सबूत के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई तय करेगी।

    इस बीच समाज और धार्मिक जगत में भी इस मामले पर बहस जारी है। स्वामी ने आरोपों को झूठा और साजिशपूर्ण बताया है और कहा कि न्याय जल्द ही दोनों न्यायालयों में सही रूप से होगा। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के बयानों का उन्होंने समर्थन करते हुए उन्हें जनता की आवाज बताया।