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  • चेकिंग से बचने की कोशिश में बेकाबू ट्राला, पुलिस ने रोका तो फोड़े गए कांच

    चेकिंग से बचने की कोशिश में बेकाबू ट्राला, पुलिस ने रोका तो फोड़े गए कांच


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Indore में गुरुवार को एक बड़ा हंगामा उस समय हो गया जब छत्रीपुरा इलाके में पुलिस चेकिंग के दौरान एक ट्राला चालक ने बैरिकेड तोड़कर भागने की कोशिश की। यह घटना गंगवाल बस स्टैंड क्षेत्र में हुई, जहां पुलिस ने वाहन जांच के लिए बैरिकेड और स्टॉपर लगाए हुए थे।

    पुलिस के अनुसार, चेकिंग के दौरान एक ट्राला तेज रफ्तार में आया और रोकने के प्रयास के बावजूद चालक ने बैरिकेड्स को टक्कर मारते हुए आगे बढ़ा दिया। इसके बाद ट्राला जवाहर मार्ग की ओर तेज गति से भाग निकला, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    घटना के बाद पुलिस ने तुरंत ट्राले का पीछा शुरू किया। सूचना मिलते ही अलग-अलग टीमों ने इलाके में नाकेबंदी कर दी। ट्राला जब बंबई बाजार क्षेत्र में पहुंचा तो पुलिस ने एफआरवी वाहन लगाकर उसे रोक लिया।

    हालांकि ट्राले के रुकते ही स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। मौके पर मौजूद लोगों में गुस्सा फैल गया और भीड़ ने ट्राले के कांच फोड़ दिए। कुछ देर के लिए वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया।

    अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यह अफवाह भी फैल गई कि ट्राले ने रास्ते में कुछ लोगों को टक्कर मार दी है। हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस तरह की किसी भी घटना से इनकार किया है और स्पष्ट किया है कि कोई जनहानि नहीं हुई है।

    पुलिस ने ट्राले को जब्त कर लिया है और चालक से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि चालक नशे की हालत में हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि मेडिकल जांच के बाद ही की जाएगी।

    Indore में हुई इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और नशे में वाहन चलाने के खतरे को उजागर कर दिया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि चालक चेकिंग से क्यों भागा और क्या वाहन में कोई अन्य अनियमितता थी।

    फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन घटना के बाद कुछ समय तक बंबई बाजार क्षेत्र में तनाव का माहौल बना रहा।

  • भोपाल पहुंचकर रुकी आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा, 200 किमी पैदल आए कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    भोपाल पहुंचकर रुकी आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा, 200 किमी पैदल आए कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर निकली आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा राजधानी पहुंचते ही थम गई। बैतूल से करीब 200 किलोमीटर का सफर तय कर आए आंदोलनकारियों को पुलिस ने बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के पास रोक दिया और मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी।

    11 दिन में तय किया लंबा सफर
    यह पदयात्रा 1 अप्रैल को बैतूल जिले के अंबेडकर चौक से शुरू हुई थी। लक्ष्य था 11 दिनों में भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना और आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचाना। पूर्व छात्र नेता रामकुमार नागवंशी के नेतृत्व में निकली इस यात्रा को आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा नाम दिया गया। उनका कहना है कि गांव-गांव में सेवाएं देने वाली इन कार्यकर्ताओं को न तो उचित वेतन मिलता है और न ही सरकारी कर्मचारी का दर्जा, इसलिए यह आंदोलन उनके अधिकारों के लिए है।

    राजधानी में एंट्री पर पुलिस ने रोका रास्ता

    शनिवार सुबह करीब 8:45 बजे जब पदयात्रा बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के पास पहुंची, तब पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्हें मुख्यमंत्री निवास तक नहीं जाने दिया गया और पास ही बैठा दिया गया।

    व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा आंदोलन
    रामकुमार नागवंशी ने बताया कि उनके परिवार की महिलाएं भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। उनके संघर्ष को करीब से देखने के बाद ही उन्होंने इस पदयात्रा की शुरुआत की। उनके मुताबिक यह लाखों महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई है। तेज गर्मी के बावजूद कार्यकर्ताओं ने लगातार पैदल यात्रा जारी रखी। रास्ते में गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया और समर्थन जुटाया।

    मुख्य मांगें और आगे की रणनीति

    आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, साथ ही उनके वेतन और सुविधाओं में सुधार किया जाए। उनका कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।