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  • इंदौर में थाने से हथकड़ी खोलकर फरार हुआ बदमाश अवैध शराब मामले का आरोपी पुलिस को देकर गया चुनौती

    इंदौर में थाने से हथकड़ी खोलकर फरार हुआ बदमाश अवैध शराब मामले का आरोपी पुलिस को देकर गया चुनौती


    इंदौर । इंदौर के द्वारकापुरी थाने से अवैध शराब मामले में गिरफ्तार आरोपी साबिर उर्फ गज्जू हथकड़ी से हाथ निकालकर फरार हो गया। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आरोपी की तलाश में कई टीमें रवाना कर दी गईं।

    इंदौर के द्वारकापुरी थाना परिसर से मंगलवार को पुलिस की हिरासत में मौजूद एक आरोपी के फरार होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अवैध शराब के मामले में गिरफ्तार साबिर उर्फ गज्जू संतरी को चकमा देकर हथकड़ी से अपना हाथ निकालने में सफल रहा और मौके से फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल अलग अलग टीमों का गठन कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। आसपास के इलाकों में सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार साबिर उर्फ गज्जू निवासी अहीरखेड़ी को सोमवार रात गिरफ्तार किया गया था। वह अवैध शराब के एक मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसे द्वारकापुरी थाने लाया गया जहां सुरक्षा के तहत हथकड़ी लगाकर बैठाया गया था। मंगलवार को मौका मिलते ही उसने धीरे धीरे हथकड़ी से अपना हाथ निकाल लिया और पुलिसकर्मियों को भनक लगे बिना वहां से भाग निकला।

    जानकारी के मुताबिक जिस स्थान पर साबिर को बैठाया गया था वहीं पास में पुलिस की गिरफ्त में मौजूद ड्रग्स तस्कर चेतन नाथ भी बैठा हुआ था। चेतन नाथ को सोमवार को ही आठ किलो गांजा लगभग 270 ग्राम ब्राउन शुगर 19 लाख रुपये नकद नोट गिनने की मशीन और 22 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसी दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक का फायदा उठाकर साबिर फरार हो गया।

    घटना सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने तत्काल पूरे मामले की जानकारी ली और आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीमों को रवाना किया। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में दबिश दे रही है और आरोपी के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार साबिर कोई नया अपराधी नहीं है। करीब दो महीने पहले उसके साथी अरुण को अवैध शराब के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस समय भी साबिर उसके साथ मौजूद था लेकिन पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। तभी से पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी और सोमवार रात उसे पकड़ने में सफलता मिली थी लेकिन अगले ही दिन वह फिर पुलिस हिरासत से भाग निकला।

    सूत्रों के मुताबिक साबिर के खिलाफ अवैध शराब की तस्करी मारपीट और अन्य आपराधिक मामलों सहित तीन से अधिक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी के साथ साथ यह भी जांच कर रही है कि थाने से फरार होने में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। पूरे मामले की विभागीय समीक्षा भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

  • मिलने बुलाया, फिर सरेराह पिटाई, पुलिस ने आरोपी को किया हिरासत में

    मिलने बुलाया, फिर सरेराह पिटाई, पुलिस ने आरोपी को किया हिरासत में


    भोपाल। भाई की सलाह पर एक छात्रा ने आरोपी को मिलने के लिए बुलाया, लेकिन जैसे ही वह मौके पर पहुंचा, छात्रा के भाई और भाभी ने उसे सरेराह पीट दिया। घटना के बाद आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया।

    पुलिस ने बताया कि पीड़िता के परिवार ने औपचारिक एफआईआर दर्ज कराने से इनकार किया, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी के खिलाफ धारा 151 (शांति भंग) के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि फिलहाल यह मामला परिवार के आंतरिक विवाद का प्रतीत होता है, लेकिन कानून के अनुसार हर कदम उठाया जा रहा है।

    घटना स्थल पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को हिरासत में लेकर उसकी पहचान और पिटाई की वास्तविक वजह का पता लगाया जा रहा है। साथ ही, परिवार और पीड़िता से बयान लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि समाज में कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को भी उजागर करता है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और अपराधी को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

    इस घटना से यह संदेश जाता है कि विवादों का समाधान हाथापाई या हिंसा से नहीं, बल्कि कानून और संवाद से होना चाहिए।

  • लखनऊ में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का प्रदर्शन, कई कार्यकर्ता हिरासत में

    लखनऊ में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का प्रदर्शन, कई कार्यकर्ता हिरासत में

    नई दिल्ली । लखनऊ में शनिवार 21 फरवरी को परिवर्तन चौक पर सवर्ण मोर्चा के सदस्यों ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सवर्ण समाज के कार्यकर्ता पहले शांतिपूर्वक धरने पर बैठे और नारेबाजी कर अपने विरोध की आवाज बुलंद की। उन्होंने शंखनाद करते हुए प्रशासन से मांग की कि यूजीसी के हालिया नियम सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ हैं और इन्हें तुरंत वापस लिया जाए।

    प्रदर्शन में शामिल हुए कई कार्यकर्ता बदलाव की मांग कर रहे थे और उनका कहना था कि नए नियम उनके रोजगार और सामाजिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे। इसी दौरान हाल ही में सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने वाले अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री भी प्रदर्शन में पहुंचे। उनके आने के बाद प्रदर्शनकारियों ने परिवर्तन चौक से मार्च निकालने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने पहले से लगाए गए बैरिकेडिंग के जरिए उन्हें रोक दिया।

    कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों के जरिए इको गार्डन भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई।

    सवर्ण मोर्चा के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल परिवर्तन चौक पर भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    इस प्रदर्शन के दौरान शहर में कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल देखने को मिला लेकिन पुलिस की सतर्कता और नियंत्रण के कारण स्थिति अब सामान्य बताई जा रही है। प्रदर्शन में सवर्ण समाज की भारी उपस्थिति ने इस आंदोलन को और मजबूती दी है। प्रशासन ने भी पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए रखी।

  • मध्य प्रदेश में बोर्ड पैटर्न लागू, नकल और लीक से निपटने की तैयारी

    मध्य प्रदेश में बोर्ड पैटर्न लागू, नकल और लीक से निपटने की तैयारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस साल 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं पूरी तरह से बोर्ड पैटर्न पर आयोजित की जा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में किया गया है। अब प्रश्नपत्र स्कूलों में नहीं, बल्कि सीधे पुलिस थानों में सुरक्षित रखे जाएंगे। परीक्षा के दिन ही केंद्राध्यक्ष की निगरानी में इन बंडलों को थाने से परीक्षा केंद्र तक लाया जाएगा और परीक्षा शुरू होने से ठीक 60 मिनट पहले खोला जाएगा।

    इस कदम से नकल और प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं को रोकने की तैयारी की जा रही है। मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा तैयार किए गए प्रश्नपत्र अब जिला शिक्षा अधिकारी और केंद्राध्यक्षों के माध्यम से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो।

    कक्षा 11वीं की परीक्षाएं 23 फरवरी से 17 मार्च 2026 तक आयोजित होंगी जबकि कक्षा 9वीं की परीक्षाएं 2 मार्च से 17 मार्च 2026 तक होंगी। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं एक ही पाली में होंगी और दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेंगी।

    सभी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 23 मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंक योजना के अनुसार होगी, जिससे सभी छात्रों को निष्पक्ष अंक मिलें और मूल्यांकन में पारदर्शिता बनी रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, प्रश्नपत्रों की थाने में सुरक्षा व्यवस्था से नकल की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे स्कूल स्तर पर लीक की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। साथ ही, परीक्षा अधिकारियों और पुलिस की निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी अनुचित गतिविधि न हो।

    अभिभावक और शिक्षक इस बदलाव से संतुष्ट हैं और उनका मानना है कि इससे परीक्षा का स्तर और विश्वसनीयता दोनों बढ़ेंगे। छात्रों को भी समय से पहले प्रश्नपत्र खोलने की प्रक्रिया से अतिरिक्त तनाव कम होगा और वे बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल हो पाएंगे।

    मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम राज्य में परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है। भविष्य में इसे अन्य कक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में भी लागू किए जाने की संभावना है।

    इस प्रकार इस साल 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं केवल पाठ्यक्रम की समझ ही नहीं, बल्कि अनुशासन और ईमानदारी की परीक्षा भी होंगी। छात्रों और शिक्षकों के लिए यह नई प्रणाली चुनौतीपूर्ण, लेकिन पारदर्शिता और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

  • युवा कांग्रेस के अध्यक्ष को पुलिस ने घर से उठाया, बढ़ती अपराधों को लेकर था विरोध

    युवा कांग्रेस के अध्यक्ष को पुलिस ने घर से उठाया, बढ़ती अपराधों को लेकर था विरोध


    मुरैना । मुरैना जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां पुलिस ने युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष अभिषेक पचौरी को उनके घर से उठा लिया। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब पचौरी ने 10 तारीख को थाने के घेराव का ऐलान किया था। पचौरी और उनके समर्थक शहर में बढ़ते अपराधों, खासकर लूट, डकैती और हत्याओं के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उनका कहना था कि पुलिस अपराधों पर काबू पाने में नाकाम रही है और इसका असर आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ रहा है।

    इस घेराव से पहले, पुलिस ने अपनी ओर से सख्ती दिखाते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक पचौरी और उनके 3-4 समर्थकों को हिरासत में ले लिया। यह कदम तब उठाया गया जब पचौरी और उनके समर्थकों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे, खासकर हाल ही में हुए अंकित माहौर हत्याकांड के बाद। पचौरी का आरोप था कि पुलिस ने सही तरीके से इस मामले की जांच नहीं की, जिससे अपराधियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।

    युवा कांग्रेस नेता का यह भी कहना था कि बढ़ते अपराधों ने इलाके में भय का माहौल बना दिया है और पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा। इससे पहले, पचौरी ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने लूटपाट और डकैती के मामलों में लापरवाही बरती है, जिससे अपराधियों को खुला माहौल मिल रहा है। पचौरी का आंदोलन पुलिस की नीतियों के खिलाफ था और इसे लेकर कांग्रेस पार्टी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला था। साथ ही, पार्टी ने आरोप लगाया था कि सरकार अपने कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की सुरक्षा में असफल रही है।

    हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से नकारा और कहा कि वे सभी मामलों की जांच कर रहे हैं और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकने के लिए वे कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस घटनाक्रम ने मुरैना में राजनीतिक माहौल को और भी गरम कर दिया है। पुलिस ने अभिषेक पचौरी और उनके समर्थकों को रातोंरात हिरासत में लेकर यह संदेश दिया है कि अब कानून व्यवस्था के खिलाफ कोई भी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर अब राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगने की तैयारी कर रही है।

  • विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में 30 करोड़ धोखाधड़ी मामला

    विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में 30 करोड़ धोखाधड़ी मामला


    नई दिल्ली । फिल्म इंडस्ट्री के जानेमाने फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को 30 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में उदयपुर की एक कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह मामला एक बड़े धोखाधड़ी कांड से जुड़ा हुआ है जिसमें दोनों पर उदयपुर के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनियों के फाउंडर डॉ. अजय मुर्डिया के साथ मिलकर करोड़ों की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

    मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम बेल की याचिका खारिज

    9 दिसंबर को विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को सात दिन की पुलिस हिरासत के बाद कोर्ट में पेश किया गया। कपल के वकील ने इस दौरान मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत की याचिका दी थी। उनका तर्क था कि दोनों को मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए रिहा किया जाए। हालांकि कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। एडवोकेट मंजूर हुसैन ने कोर्ट के फैसले से पहले ANI को बताया “हमने कोर्ट से मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत की रिक्वेस्ट की है। अगर जमानत मिलती है तो वे मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए कुछ समय के लिए बाहर आ सकते हैं लेकिन यह पूरी तरह से कोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगा।”

    उदयपुर की सेंट्रल जेल में भेजे जाएंगे

    कोर्ट ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इसके बाद पुलिस ने जानकारी दी कि दोनों को अब उदयपुर की सेंट्रल जेल में भेजा जाएगा। DSP सूर्यवीर सिंह ने मीडिया को बताया “कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उदयपुर की सेंट्रल जेल में रखा जाएगा।”

    30 करोड़ का धोखाधड़ी मामला

    विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को 7 दिसंबर को मुंबई में अरेस्ट किया गया था। गिरफ्तार करने के बाद उन्हें उदयपुर लाया गया जहां 8 दिसंबर को कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद 9 दिसंबर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। इस मामले में विक्रम भट्ट उनकी पत्नी और छह अन्य आरोपियों पर इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनियों के फाउंडर डॉ. अजय मुर्डिया के साथ मिलकर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। यह मामला अब पूरे फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन चुका है। विक्रम भट्ट का नाम इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने से उनकी छवि को भी नुकसान पहुंच सकता है।

    न्यायिक प्रक्रिया और आगे की कानूनी कार्रवाई

    अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई चल रही है और आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद उनकी फिल्म इंडस्ट्री में छवि को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं लेकिन फिलहाल मामले की जांच चल रही है। अगले कुछ दिनों में इस मामले में और अधिक जानकारी सामने आ सकती है जिसमें आरोपियों की जमानत या उनके खिलाफ कोर्ट में चल रहे मुकदमे के बारे में निर्णय लिया जाएगा।

  • छिंदवाड़ा में सांसद निवास के पास सरेआम गुंडागर्दी युवकों को बेल्ट और बल्ले से पीटा 2 आरोपी हिरासत में

    छिंदवाड़ा में सांसद निवास के पास सरेआम गुंडागर्दी युवकों को बेल्ट और बल्ले से पीटा 2 आरोपी हिरासत में


    छिंदवाड़ा । छिंदवाड़ा में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। कोतवाली थाना क्षेत्र के परासिया रोड पर जो सांसद निवास और कार्यालय से कुछ कदम की दूरी पर स्थित है एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें दो गुटों के युवकों के बीच सरेआम बेल्ट और बल्ले से मारपीट होती दिखाई दे रही है। यह घटना गुरुवार को हुई जब पुरानी रंजिश और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई के चलते इन युवकों ने सड़क पर लगभग 10 मिनट तक उत्पात मचाया।

    वीडियो में देखा जा सकता है कि ट्रैफिक के बीच सड़क पर कई लोग खड़े होकर तमाशा देख रहे थे लेकिन कोई भी घटनास्थल पर हस्तक्षेप करने के लिए आगे नहीं आया। हमलावरों ने बिना किसी डर के बेल्ट और बल्ले से एक-दूसरे को बेरहमी से मारा। हमले के दौरान सिर हाथ और पैर पर जमकर चोटें आईं। हमलावरों को न तो पुलिस का खौफ था और न ही आसपास के लोगों का डर। यह घटना पूरी तरह से सड़क पर एक असमर्थता की स्थिति उत्पन्न कर रही थी।

    आरोपियों ने जिस तरह से यह मारपीट की उससे यह भी प्रतीत होता है कि इस घटना के पीछे एक पुरानी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई का कारण हो सकता है। हमलावरों के बीच इस संघर्ष का मुख्य उद्देश्य केवल इलाके में अपनी ताकत दिखाना था जो उनके व्यवहार से साफ तौर पर स्पष्ट हो रहा था।

    मारपीट के बाद सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल था क्योंकि लोग गाड़ी चलाने और इस हिंसक घटना से बचने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। पुलिस की समय पर प्रतिक्रिया के बावजूद घटनास्थल पर काफी देर तक स्थिति नियंत्रण से बाहर रही। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर दो आरोपियों को हिरासत में ले लिया लेकिन बाकी आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

    यह घटना स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है। सांसद निवास के पास इस प्रकार की हिंसक घटना का होना स्थानीय प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है। इलाके में सुरक्षा के प्रति जनता का विश्वास कमजोर हो रहा है खासकर जब पुलिस की उपस्थिति भी इस प्रकार की घटनाओं को रोकने में नाकाम रहती है।

    वीडियो वायरल होने के बाद इलाके के लोग इस हिंसक घटना की निंदा कर रहे हैं। इस घटना ने छिंदवाड़ा में कानून-व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है और इस प्रकार की घटनाओं के पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।

    इसके अलावा वीडियो में दिखाए गए कुछ लोग घटनास्थल पर खड़े होकर यह तमाशा देख रहे थे लेकिन किसी ने भी हमलावरों को रोकने की कोशिश नहीं की। यह दर्शाता है कि लोगों में भी कानून और सुरक्षा के प्रति किसी प्रकार का भय नहीं रह गया है और हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं।

    अब पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में न हों और सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कानून बनवाने के लिए आवाज उठाएं।