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  • MP के पुलिस ट्रेनिंग केंद्रों में अब ‘दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ से होगी दिन की शुरुआत, विपक्ष ने उठाए सवाल

    MP के पुलिस ट्रेनिंग केंद्रों में अब ‘दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ से होगी दिन की शुरुआत, विपक्ष ने उठाए सवाल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों (Police Training Centres) में अब दिन की शुरुआत ‘श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ के पाठ से होगी। पुलिस प्रशिक्षण विंग के इस नए निर्देश के बाद राज्य में एक बार फिर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इसे सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ बीजेपी (BJP) ने इसे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बताते हुए इसका बचाव किया है।

    दरअसल, पुलिस प्रशिक्षण विंग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों (PTS) को निर्देश जारी किया है कि हर दिन प्रशिक्षण शुरू होने से पहले परिसर में लगे लाउडस्पीकरों के जरिए ‘श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ बजाया जाए, ताकि प्रशिक्षक और भर्ती दोनों इसे सुन सकें।


    एडीजी ने बताई वजह

    एडीजी ने कहा कि दक्षिणामूर्ति को ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है। उनके मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी के लिए केवल जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे विवेक, संवेदनशीलता और सहानुभूति भी होनी चाहिए। उनका मानना है कि स्तोत्र के माध्यम से प्रशिक्षुओं में नैतिक स्पष्टता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।


    पहले भी हो चुका है ऐसा निर्देश

    दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब पुलिस प्रशिक्षण में धार्मिक या दार्शनिक ग्रंथों को शामिल किया गया हो। पिछले साल भी विभाग ने आठ पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में रात के ध्यान सत्र से पहले भागवद गीता का एक अध्याय पढ़ने का सुझाव दिया था। इससे पहले प्रशिक्षुओं को रामचरितमानस के दोहे पढ़ने के लिए भी कहा गया था। अधिकारियों का कहना था कि इससे लगभग 4000 प्रशिक्षुओं में अनुशासन और नैतिक सोच को बढ़ावा मिलेगा।


    कांग्रेस ने उठाए सवाल

    नए आदेश के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि कानून व्यवस्था संभालने वाली संस्थाओं को पूरी तरह तटस्थ होना चाहिए और किसी एक आस्था से जुड़ी परंपरा को बढ़ावा देना ठीक नहीं है।


    बीजेपी का पलटवार

    भाजपा ने इस पहल का बचाव किया है। पार्टी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि गीता या दक्षिणामूर्ति स्तोत्र जैसे ग्रंथ सांप्रदायिक नहीं बल्कि ज्ञान, अनुशासन और कर्तव्य की शिक्षाएं देते हैं। उनके मुताबिक, इन्हें सांप्रदायिक बताना भारत की सभ्यतागत परंपरा को न समझने जैसा है।

    पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले से ही योग, ध्यान और मानसिक अनुशासन शामिल हैं और यह पहल उसी का हिस्सा है। उनका दावा है कि इसका उद्देश्य धार्मिक अभ्यास लागू करना नहीं बल्कि नैतिक सोच और संवेदनशीलता को मजबूत करना है। हालांकि, इस निर्देश के बाद एक बार फिर मध्य प्रदेश की पुलिस ट्रेनिंग व्यवस्था सियासी बहस के केंद्र में आ गई है, जहां सांस्कृतिक परंपरा और संस्थागत तटस्थता को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।

  • राज्यपाल पटेल: मन की बात जन भावनाओं का सम्मान करने और पुलिस सेवा की संवेदनशीलता की सीख देती है

    राज्यपाल पटेल: मन की बात जन भावनाओं का सम्मान करने और पुलिस सेवा की संवेदनशीलता की सीख देती है


    भोपाल । भोपाल में रविवार को मंगुभाई पटेल ने मन की बात कार्यक्रम को केवल एक रेडियो प्रसारण न मानने की अपील की और उसे जन‑भावनाओं की जीवंत गाथा बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश के कोने‑कोने में हो रहे सकारात्मक बदलाव और आम नागरिकों की भागीदारी की प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाता है, जिससे समाज की नब्ज को समझने और जन‑भावनाओं का सम्मान करने की सीख मिलती है। राज्यपाल ने यह बात प्रशिक्षणाधीन पुलिस अधिकारियों और नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए कही।

    उन्होंने कहा कि पुलिस का जनता से सीधा जुड़ाव होता है, इसलिए मन की बात जैसे कार्यक्रम को केवल औपचारिकता न मानकर नियमित रूप से सुनना चाहिए, क्योंकि इससे लोक‑कल्याण की भावना, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुण विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस कार्यक्रम के माध्यम से विपरीत परिस्थितियों में भी समाज के लिए उदाहरण पैदा करने वाले गुमनाम नायकों की कहानियों को साझा करते हैं, जो पुलिस बल को भी अपनी सेवा‑परिवार के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाने में मदद करती हैं।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रशिक्षण का समय भविष्य की नींव है और इस दौरान सीखी गई बातें और प्रधानमंत्री के विचार पुलिस अधिकारियों के करियर में मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस सेवा में शालीनता और तत्परता होना चाहिए, ताकि पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास आते समय सुरक्षित महसूस करे। साथ ही पुलिस में अनुशासन के साथ सहानुभूति का होना आवश्यक है, और मन की बात कार्यक्रम हमें मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करता है, जो वर्दी को केवल सत्ता का प्रतीक नहीं बल्कि समाज सेवा का संकल्प बनाता है।

    राज्यपाल ने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे देश‑भक्ति और जन‑सेवा की गौरवशाली परंपरा को सशक्त, अनुशासित और मानवीय पुलिस बल के रूप में आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि मन की बात में प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छता, जल संरक्षण और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों पर दिया गया मार्गदर्शन उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में लागू करना चाहिए। यह कार्यक्रम आज के सामाजिक और तकनीकी युग में पुलिस सेवा को लोक‑कल्याण की भावना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

    राज्यपाल ने प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों को कहा कि वे अपने आप को केवल ड्यूटी तक सीमित न रखें, बल्कि समाज में चेंज मेकर के रूप में अपनी पहचान बनाने का प्रयास करें। उन्होंने बताया कि मन की बात में देश के अलग‑अलग हिस्सों से आने वाली सफल कहानियों से यह स्पष्ट होता है कि व्यक्ति का छोटा सा प्रयास भी बड़े परिवर्तन ला सकता है। इस संदेश को अपनाकर पुलिस विभाग समाज में मित्र और रक्षक की छवि को और मजबूत कर सकता है।

    कार्यक्रम की शुरुआत में विशेष पुलिस महानिदेशक और मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के निदेशक ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा प्रशिक्षण के अनुभवों को नव आरक्षकों ने साझा किया। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक और अकादमी के सहायक निदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उपस्थित रही।