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  • इतिहास रचते हुए विजय बने मुख्यमंत्री: शपथ ग्रहण में दिखा नया राजनीतिक अध्याय और बदलता तमिलनाडु

    इतिहास रचते हुए विजय बने मुख्यमंत्री: शपथ ग्रहण में दिखा नया राजनीतिक अध्याय और बदलता तमिलनाडु

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐसा क्षण सामने आया जिसने पूरे राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को नई दिशा दे दी। लंबे समय तक फिल्मों में अपने अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले विजय ने अब सत्ता के शीर्ष पद पर पहुंचकर मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। यह केवल एक पद ग्रहण समारोह नहीं था, बल्कि एक ऐसे परिवर्तन की शुरुआत थी जिसने सिनेमा और राजनीति के बीच की दूरी को और कम कर दिया।

    विजय का यह सफर किसी साधारण राजनीतिक यात्रा जैसा नहीं रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्मी दुनिया से की थी, जहां शुरुआती संघर्ष और आलोचनाओं के बाद उन्होंने खुद को एक मजबूत अभिनेता के रूप में स्थापित किया। धीरे-धीरे उनकी लोकप्रियता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जनता के बीच उनकी छवि एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में बनने लगी जो लोगों की भावनाओं और समस्याओं को समझता है। यही जुड़ाव आगे चलकर उन्हें राजनीति की ओर ले गया।

    शपथ ग्रहण का यह अवसर बेहद खास और ऐतिहासिक बन गया, जहां विजय ने तमिल भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली। उनके साथ उनकी पार्टी के कई प्रमुख नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जिससे नई सरकार का गठन पूरा हुआ। यह पहला मौका था जब पूरी टीम एकजुट होकर सत्ता की जिम्मेदारी संभाल रही थी, और इसमें किसी बाहरी सहयोगी दल को स्थान नहीं दिया गया।

    समारोह के दौरान एक ऐसा क्षण भी आया जिसने सभी का ध्यान खींच लिया। जब विजय शपथ के शब्दों को पढ़ रहे थे, तो वे कुछ आगे बढ़कर अपने विचार व्यक्त करने लगे। इस पर उन्हें रोककर निर्धारित प्रारूप के अनुसार शपथ पूरी करने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्होंने प्रक्रिया का पालन करते हुए शपथ पूर्ण की, लेकिन यह घटना समारोह का सबसे चर्चित हिस्सा बन गई।

    राजनीतिक रूप से यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से पारंपरिक दलों के प्रभाव में रही है। ऐसे में एक नए नेतृत्व का उभरना और सत्ता की कमान संभालना राज्य के राजनीतिक ढांचे में बड़े परिवर्तन का संकेत है। विजय की पार्टी ने हाल के चुनावों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जिससे उन्हें सरकार बनाने का अवसर मिला और बहुमत का समर्थन प्राप्त हुआ।

    जनता के बीच विजय की लोकप्रियता पहले से ही काफी मजबूत थी, जिसका असर राजनीतिक क्षेत्र में भी साफ दिखाई दिया। उनके समर्थक उन्हें केवल एक अभिनेता नहीं बल्कि एक जननेता के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही राज्य में उम्मीदों का एक नया माहौल बन गया है।

    इस नई सरकार के सामने कई चुनौतियां भी होंगी, जिनमें विकास, रोजगार और प्रशासनिक सुधार प्रमुख हैं। लेकिन साथ ही जनता को यह उम्मीद भी है कि एक लोकप्रिय और जनसंपर्क से जुड़े नेता के रूप में विजय राज्य की राजनीति में नई कार्यशैली लेकर आएंगे।

  • शुभेंदु अधिकारी बनेंगे नए मुख्यमंत्री, ब्रिगेड ग्राउंड में भव्य शपथ ग्रहण..

    शुभेंदु अधिकारी बनेंगे नए मुख्यमंत्री, ब्रिगेड ग्राउंड में भव्य शपथ ग्रहण..


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम बंगाल की राजनीति आज एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ तौर पर दिखाई दे रही है। लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संघर्ष और तीखे चुनावी मुकाबलों के बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो रही है। इसी कड़ी में शुभेंदु अधिकारी आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड इस महत्वपूर्ण आयोजन का केंद्र बना हुआ है, जहां सुबह से ही उत्साह और हलचल का माहौल देखने को मिल रहा है।

    शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने मजबूत राजनीतिक पकड़ और प्रभावशाली नेतृत्व के जरिए अपनी स्थिति को और मजबूत किया। अब उनके सामने राज्य को नई दिशा देने और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की बड़ी जिम्मेदारी है। भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में इस बदलाव को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है, जिसे वे एक नए युग की शुरुआत मान रहे हैं।

    शपथ ग्रहण समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमुख राजनीतिक चेहरे, सामाजिक प्रतिनिधि और अन्य क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां इस अवसर का हिस्सा बनेंगी। शहर में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को भी विशेष रूप से मजबूत किया गया है ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

    ब्रिगेड ग्राउंड और उसके आसपास का इलाका सुबह से ही लोगों की भीड़ से भरा हुआ है। समर्थकों में जोश और उत्साह का माहौल है और कई जगहों पर जश्न जैसा वातावरण दिखाई दे रहा है। लोग इस क्षण को ऐतिहासिक मानते हुए इसे अपनी राजनीतिक उम्मीदों से जोड़कर देख रहे हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं।

    नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना है। चुनावी समय में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई थी, जैसे रोजगार, विकास, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार, अब उन्हें धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी सरकार के कंधों पर है। लोगों को उम्मीद है कि नई नेतृत्व व्यवस्था राज्य में स्थिरता और विकास का नया अध्याय शुरू करेगी।

    राज्य के आर्थिक और सामाजिक ढांचे में भी आने वाले समय में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। उद्योग जगत से जुड़े लोग नई सरकार से बेहतर निवेश माहौल और रोजगार के अवसरों की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं युवा वर्ग भी अपने भविष्य को लेकर नई उम्मीदें देख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकता है।

    आज का यह शपथ ग्रहण समारोह केवल सत्ता परिवर्तन का औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा और जनता की उम्मीदों का प्रतीक बन गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार अपने शुरुआती फैसलों के जरिए जनता का भरोसा कितनी जल्दी जीत पाती है और राज्य को किस दिशा में आगे ले जाती है।

  • राजनीतिक बदलाव का असर: केंद्र की योजनाएं अब तेजी से लागू होने की संभावना, विकास कार्यों में आएगी रफ्तार

    राजनीतिक बदलाव का असर: केंद्र की योजनाएं अब तेजी से लागू होने की संभावना, विकास कार्यों में आएगी रफ्तार

    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए राजनीतिक परिवर्तन के बाद राज्य के विकास मॉडल में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय से जिन केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में रुकावट देखी जा रही थी, अब उनके तेजी से लागू होने की संभावना बन रही है। इस बदलाव को राज्य में विकास की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां प्रशासनिक सहयोग बढ़ने से योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचने की उम्मीद है।

    पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाएं राज्य में पूरी तरह लागू नहीं हो पाई थीं या फिर उनकी गति काफी धीमी रही थी। इनमें स्वास्थ्य, आवास, जल आपूर्ति, रोजगार और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं प्रमुख थीं। अब राजनीतिक स्थिति बदलने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जाएगा और लाभार्थियों तक उनका सीधा फायदा पहुंचेगा।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में लागू होने वाली योजनाओं से गरीब और मध्यम वर्ग को बड़ा लाभ मिल सकता है। बीमा और इलाज से जुड़ी सुविधाएं अगर सही तरीके से लागू होती हैं तो लाखों लोगों को आर्थिक राहत मिल सकती है। इसी तरह आवास योजनाओं के विस्तार से उन परिवारों को घर मिलने की संभावना बढ़ेगी, जो अब तक इस सुविधा से वंचित रहे हैं।

    जल आपूर्ति से जुड़ी योजनाएं भी अब तेजी से आगे बढ़ सकती हैं। हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने का लक्ष्य लंबे समय से चुनौती बना हुआ था, लेकिन अब इसके क्रियान्वयन में सुधार की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या को देखते हुए यह योजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    रोजगार और आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं पर भी अब अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना है। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाएं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती हैं। इसी तरह महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजनाएं उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। छात्र-छात्राओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं के साथ यदि नई योजनाएं जुड़ती हैं तो शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सकती है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बेहतर होने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक परिवर्तन के बाद जब प्रशासनिक सहयोग बढ़ता है, तो योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आना स्वाभाविक है। इससे न केवल विकास कार्यों में गति आती है, बल्कि जनता को भी सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलने लगता है।

    कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में हुए इस बदलाव ने विकास योजनाओं के लिए नई उम्मीदें पैदा की हैं। यदि सभी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू होती हैं तो राज्य में सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल सकती है और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

  • AAP को एक और झटका: स्वाति मालीवाल BJP में शामिल, मोदी-शाह की तारीफ कर केजरीवाल पर जमकर किए हमले

    AAP को एक और झटका: स्वाति मालीवाल BJP में शामिल, मोदी-शाह की तारीफ कर केजरीवाल पर जमकर किए हमले


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी को एक और बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। करीब दो दशक पुराने रिश्ते को खत्म करते हुए उन्होंने इस फैसले के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब एक दिन पहले ही राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने पहले ही संकेत दिए थे कि पार्टी के कुछ और सांसद भी जल्द पाला बदल सकते हैं, जिस पर अब मालीवाल के फैसले से मुहर लग गई है। भाजपा में शामिल होने के बाद स्वाति मालीवाल ने कहा कि उन्होंने यह कदम किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक सोच और विश्वास के आधार पर उठाया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जो लोग सकारात्मक और रचनात्मक राजनीति करना चाहते हैं, वे भाजपा से जुड़ें।

    केजरीवाल पर तीखे आरोप

    इस दौरान स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वह 2006 से उनके साथ थीं और हर आंदोलन में सहयोग किया, लेकिन उन्हें ही अपने घर में प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। मालीवाल ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने आवाज उठाई तो उन पर दबाव बनाया गया और एफआईआर वापस लेने के लिए धमकाया गया। उन्होंने केजरीवाल को “महिला विरोधी” बताते हुए यह भी कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्हें संसद में बोलने का अवसर तक नहीं दिया गया।

    मोदी-शाह की तारीफ

    स्वाति मालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों और फैसलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के विकास और बड़े निर्णयों में इनका नेतृत्व महत्वपूर्ण रहा है। कुल मिलाकर, AAP से लगातार हो रहे दलबदल ने दिल्ली की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले समय में इसके और असर देखने को मिल सकते हैं।

  • एमपी कांग्रेस में जिलाध्यक्षों की बड़ी परीक्षा: 15 अप्रैल से परफॉर्मेंस रिव्यू, कमजोर पाए गए तो हो सकती है छुट्टी

    एमपी कांग्रेस में जिलाध्यक्षों की बड़ी परीक्षा: 15 अप्रैल से परफॉर्मेंस रिव्यू, कमजोर पाए गए तो हो सकती है छुट्टी


    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन को मजबूत करने के अभियान के तहत नियुक्त 71 जिलाध्यक्षों के कामकाज की अब सख्त समीक्षा होने जा रही है। अगले हफ्ते होने वाली इस प्रक्रिया में उनके प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा और कमजोर पाए जाने पर कार्रवाई, यहां तक कि पद से हटाने का फैसला भी लिया जा सकता है।

    दिल्ली से वरिष्ठ नेताओं की निगरानी

    पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार की समीक्षा को बेहद अहम माना जा रहा है। दिल्ली से वरिष्ठ नेता वामसी रेड्डी भी भोपाल पहुंचकर पूरे रिव्यू प्रोसेस की निगरानी करेंगे, जिससे पारदर्शिता और सख्ती सुनिश्चित की जा सके।

    15 से 18 अप्रैल तक संभागवार समीक्षा बैठकें

    प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी 15 से 18 अप्रैल के बीच चार दिनों तक संभागवार बैठकें करेंगे। इन बैठकों में जिलाध्यक्षों को बुलाकर संगठन निर्माण, अब तक के काम, सामने आई चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    किसानों के मुद्दे पर 16 अप्रैल को प्रदर्शन

    16 अप्रैल को कांग्रेस, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास के सामने विरोध प्रदर्शन करेगी। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में होने वाले इस धरने में गेहूं खरीदी में देरी और किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों को उठाया जाएगा।

    ब्लॉक अध्यक्षों का सम्मेलन और प्रशिक्षण

    17 अप्रैल को नवनियुक्त ब्लॉक अध्यक्षों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें संगठन को मजबूत करने की रणनीति के साथ उनकी जिम्मेदारियों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही जिलाध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित होंगे।

    संगठन विस्तार लगभग पूरा

    कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में संगठन का ढांचा तेजी से मजबूत हुआ है। अब तक 23 हजार में से करीब 21 हजार पंचायत कमेटियों का गठन किया जा चुका है। आने वाले समय में इन्हें सक्रिय कर जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।

  • नेपाल में बदलाव की बयार बालेन शाह का नया राजनीतिक अध्याय और हिंदुत्व बहस की नई दिशा

    नेपाल में बदलाव की बयार बालेन शाह का नया राजनीतिक अध्याय और हिंदुत्व बहस की नई दिशा


    नई दिल्ली
    : नेपाल की राजनीति इन दिनों एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है हाल ही में हुए आम चुनावों ने देश के सत्ता समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है अब 35 वर्ष के युवा नेता बालेंद्र शाह देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं उनकी शपथ को लेकर खास चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि वे 27 मार्च को राम नवमी के दिन पद की शपथ लेंगे यह तारीख केवल एक औपचारिक निर्णय नहीं मानी जा रही बल्कि इसे गहरे राजनीतिक और सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है

    बालेंद्र शाह जिन्हें लोग बालेन के नाम से भी जानते हैं पहले एक रैपर के रूप में लोकप्रिय हुए थे उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों पर खुलकर सवाल उठाए थे इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2022 में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई अब वही युवा नेता प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं और यह नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय माना जा रहा है

    उनका राजनीतिक सफर केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है बल्कि यह एक बड़े बदलाव का संकेत भी देता है वे मधेशी समुदाय से आते हैं और इस समुदाय से प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता हैं यह उपलब्धि नेपाल की सामाजिक संरचना में समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने हालिया चुनावों में भारी बहुमत हासिल किया है और 275 सदस्यीय संसद में 182 सीटें जीतकर स्पष्ट जनादेश प्राप्त किया है

    विशेषज्ञों का मानना है कि राम नवमी के दिन शपथ लेने का निर्णय एक रणनीतिक संदेश है यह जनता की आस्था से जुड़ने का प्रयास माना जा रहा है और इसे राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण समझा जा रहा है कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम यह दर्शाता है कि नया नेतृत्व धार्मिक भावनाओं को स्वीकार करता है लेकिन वह पारंपरिक राजनीति से अलग दिशा में आगे बढ़ना चाहता है

    यह भी माना जा रहा है कि बालेंद्र शाह का यह निर्णय नेपाल की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने का प्रयास है नेपाल हमेशा से अपनी अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने का पक्षधर रहा है ऐसे में राम नवमी जैसे पवित्र दिन पर शपथ लेना उस परंपरा को आगे बढ़ाने जैसा है

    दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि इसे भारत के संदर्भ में सीधे तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए नेपाल की अपनी राजनीतिक और धार्मिक पहचान है और वहां की राजनीति अपनी परिस्थितियों के अनुसार विकसित होती है बालेन शाह की सोच पुराने राजशाही मॉडल से अलग है जहां राजा को भगवान का अवतार माना जाता था इसके विपरीत वे आधुनिक और लोकतांत्रिक सोच के समर्थक माने जाते हैं

    उनके समर्थक मुख्य रूप से युवा वर्ग से हैं जो परिवर्तन की मांग कर रहे थे यह युवा नेतृत्व नेपाल की राजनीति में नई ऊर्जा और नई सोच लेकर आया है अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री के रूप में बालेंद्र शाह किस तरह देश की आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करते हैं

  • JDU में शामिल हुए नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, कहा पापा ने जो 20 साल में किया उसे

    JDU में शामिल हुए नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, कहा पापा ने जो 20 साल में किया उसे


    नई दिल्‍ली । बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब दिल्ली की ओर चल पड़े हैं तो वहीं उनके बेटे निशांत कुमार आखिरकार सक्रिय राजनीति का हिस्सा हो गए हैं। परिवारवाद से दूर रहने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने रविवार को जनता दल यूनाइटेड जॉइन कर ली है। पार्टी में आधिकारिक रूप से शामिल होने के बाद निशांत कुमार पिता नीतीश से मिलने पहुंचे और उन्हें मिठाई खिलाकर उनका आशीर्वाद लिया।

    इस मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, संजय झा, बिजेंद्र यादव, विजय चौधरी जैसे बड़े नेता उपस्थित रहे। सदस्यता ग्रहण के दौरान निशांत कुमार ने सबका आभार व्यक्त किया।

    निशांत कुमार ने कहा, यहां पर मौजूद आप सभी लोगों का अभिनंदन करता हूं। आभार व्यक्त करता हूं। मैं जेडीयू कार्यालय आया हूं। यहां जेडीयू की सदस्यता ग्रहण करने आया हूं। मैं एक सक्रिय सदस्य के रूप में पार्टी का ख्याल रखने की कोशिश करूंगा। मेरे पिता ने राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है, ये उनका निजी फैसला है। मैं इसको स्वीकार करता हूं। आदर करता हूं।

    पापा ने जो 20 साल में किया उसे

    निशांत ने कहा पार्टी ने और जनता ने जो विश्वास मुझ पर किया है मैं उस पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा। पार्टी कार्यकर्ता के हिसाब से मैं पार्टी संगठन को मजबूत करने की कोशिश करूंगा। पापा ने जो 20 साल में किया उसे जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश करूंगा। मेरे पिता जी ने जो 20 साल में किया वो सबको याद रहेगा। पिता ने जो 20 साल में किया है उससे पूरे देशवासियों को गर्व है।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद नहीं थे। नीतीश कुमार के कभी करीबी रहे आरसीपी सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है, प्रिय निशांत आपको सक्रिय राजनीति में आने के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद।

    इस सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम को लेकर काफी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता उपस्थित हुए। कार्यकर्ता निशांत कुमार जिंदाबाद का नारा लगाते नजर आए। बता दें कि इससे पहले निशांत कुमार ने जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष के घर पर बीते शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और युवा विधायकों के साथ बैठक की थी। बैठक में पार्टी की आगे की रणनीति और पार्टी को कैसे अच्छे से आगे बढ़ाया जाए, इस पर चर्चा हुई थी।

  • दिल्ली को आपदा सरकार से मिली मुक्ति, अब तेजी से आगे बढ़ रहा विकास : प्रधानमंत्री मोदी

    दिल्ली को आपदा सरकार से मिली मुक्ति, अब तेजी से आगे बढ़ रहा विकास : प्रधानमंत्री मोदी


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछली सरकार के कारण दिल्ली का विकास लंबे समय तक प्रभावित रहा लेकिन पिछले एक वर्ष में राजधानी में विकास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाया गया है और इसका लाभ आम लोगों तक पहुंच रहा है।

    रविवार को बुराड़ी में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने 33,500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि एक वर्ष पहले दिल्ली जिस आपदा से मुक्त हुई उसकी अहमियत अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि उस समय की सरकार बाधा न बनती तो मेट्रो का चौथा चरण काफी पहले ही पूरा हो सकता था। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद विकास कार्यों में तेजी आई है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली में प्रतिदिन लाखों लोग बसों से सफर करते हैं इसलिए उन्हें बेहतर और आरामदायक परिवहन सुविधा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में चार हजार से अधिक बसें राजधानी में सेवा दे रही हैं जिनमें इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग दस वर्षों तक पूर्व सरकार के समय विकास कार्य ठप पड़े रहे लेकिन अब उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यमुना नदी की सफाई के लिए भी बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार को लोगों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं था और गरीबों की अनदेखी की गई। वहीं रेखा गुप्ता के नेतृत्व में अब हालात को लगातार बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। पिछले एक वर्ष में बड़ी संख्या में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं जिससे लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।  प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली में अब विकास का नया मॉडल दिखाई दे रहा है जहां काम शुरू हो चुका है और बहानों की जगह परिणाम पर ध्यान दिया जा रहा है।