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  • पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल के बीच TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य को लेकर गंभीर आरोप, जांच की मांग तेज

    पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल के बीच TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य को लेकर गंभीर आरोप, जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली ।  बंगाल से आई भ्रष्टाचार की एक तस्वीर की चर्चा पूरे देश में हो रही है. उत्तर 24 परगना ज़िले में एक खेत में नोट से भरी हुई बोरियां बरामद हुई हैं. पुलिस को बोरियों में मिले ये नोट गिनने में कई घंटे लग गए. जब नोटों की गिनती ख़त्म हुई तो पता चला कि कुल मिलाकर 2 करोड़ 24 लाख रुपये खेत में गाड़े गए थे. ये नोट बदुरिया नगरपालिका के चेयरमैन और TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के हैं.
    TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य का भ्रष्टाचार उजागर
    दीपांकर भट्टाचार्य वही नेता है जिसको 3 दिन पहले भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. गिरफ़्तारी के समय भी दीपांकर के पास से 80 लाख रुपये बरामद हुए थे. इस तरह पुलिस ने अभी तक दीपांकर की काली कमाई के 3 करोड़ 4 लाख रुपये ज़ब्त कर लिए हैं. जनसेवा के नाम पर राजनीति में आने वाले दीपांकर भट्टाचार्य ने दोनों हाथों से जनता को लूटा और नोटों की बोरी खेत में दबा दी.

    ज़ी न्यूज की टीम ने बदुरिया के उस खेत में जाकर पता लगाया कि पैसे किस तरह छिपाकर रखे गए थे. कैसे पुलिस को बोरियों में छिपाकर रखे गए पैसे का पता चला. आख़िर दीपांकर भट्टाचार्य के पास इतने पैसे कहां से आए. एक समय में जो दीपांकर मज़दूरी का काम करता था, वो करोड़ों का मालिक कैसे बन गया. कहते हैं कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते लेकिन बंगाल में पैसे इन दिनों खेत से निकल रहे हैं और ये पैसे भ्रष्टाचार के हैं.

    खेत में दबी मिली नोटों की बोरी
    उत्तर 24 परगना के बदुरिया में जूट का यही वो खेत है जहां नोटों से भरी बोरियां और ट्रॉली बैग मिले थे. कोई सोच भी नहीं सकता था कि लगभग 7 फीट लंबे जूट के पौधों के बीच पैसे से भरी बोरियां और बैग छिपाए गए होंगे.
    स्थानीय लोगों के मुताबिक़ जूट का ये खेत शमीम नाम के व्यक्ति का है. शमीम को बदुरिया नगरपालिका के अध्यक्ष दीपांकर भट्टाचार्य का दाहिना हाथ बताया जाता है. एक व्यक्ति जब घास काटने के लिए खेत में आया तो उसे ये गड्ढे दिखाई दिए. फिर उसने एक स्थानीय नेता के जरिए पुलिस को इसकी जानकारी दी. इसी सूचना के आधार पर आधे घंटे में पुलिस खेत में पहुंच गई. कुछ घंटों की जांच-पड़ताल के बाद नोटों से भरी ये बोरियां मिलीं.

    मजदूर से शुरू करके बना भ्रष्ट नेता

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, दीपांकर का शुरुआती जीवन बेहद साधारण था. उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. शुरुआत में उसने दिहाड़ी मज़दूर का भी काम किया. बाद में परिवार की मदद से एक कार खरीदी. उसी गाड़ी से वो सवारी ढोने का काम करने लगा.
    वर्ष 2010 के करीब राजनीति में एंट्री के बाद उसकी ज़िंदगी बदल गई. दीपांकर ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की. लेकिन 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद वो TMC में शामिल हो गया. यहीं से उसकी ज़िंदगी बदल गई. पहले वो पार्षद बना और उसके बाद बदुरिया नगरपालिका का चेयरमैन भी बन गया. आरोप है कि वो सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों से वसूली करता था. इन्हीं पैसों को उसने खेत में छिपा रखा था.
    योजनाओं के नाम पर लेता था रिश्वत
    रिपोर्टर अमित भारद्वाज से बातचीत में एक व्यक्ति ने बताया कि लोगों से आवास योजना के नाम पर दीपांकर रिश्वत लेता था. खुद उस व्यक्ति ने 40 हज़ार रुपये दिए.
    लेकिन सरकार बदलते ही दीपांकर भट्टाचार्य के बुरे दिन शुरू हो गए. उसके खिलाफ शिकायत की गई कि उसने सरकारी तिरपाल लोगों के बीच बांटने के बदले अपने पास रख लिए. इसी सिलसिले में पुलिस ने उसके गोदाम पर छापा मारा तो 4,000 सरकारी तिरपाल ज़ब्त हुए. बाद में उसके कंप्यूटर सेंटर से 80 लाख रुपये भी मिले. इसी के बाद 25 मई को पुलिस ने दीपांकर भट्टाचार्य को गिरफ़्तार किया. खेत में दबे उसके पैसे का कभी सुराग नहीं मिलता, अगर अनजाने में स्थानीय व्यक्ति की नज़र नहीं गई होती.
    आलीशान घर में रहता था भ्रष्ट दीपांकर
    नोटों से भरी बोरियां मिलने के बाद बदुरिया में TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के ख़िलाफ़ जांच का दायरा बढ़ता ही जा रहा है. दीपांकर के जिस आलीशान घर पर दिन में ताला लगा हुआ था, वहां शाम होते-होते पुलिस पहुंच गई. CRPF की टीम के साथ स्थानीय पुलिस ने दीपांकर के घर की जांच की. जिस नेता ने खेत में पैसा छिपा रखा था, उसने घर में भी अपने भ्रष्टाचार का कोई न कोई निशान ज़रूर छोड़ा होगा. घर में तलाशी पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी.

  • 'उसका घर तो उन्नाव में है ना, ही-ही-ही… मंत्री राजभर ने उड़ाया रेप पीड़िता का मजाक, Video

    'उसका घर तो उन्नाव में है ना, ही-ही-ही… मंत्री राजभर ने उड़ाया रेप पीड़िता का मजाक, Video


    नई दिल्‍ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने 2017 के उन्नाव रेप केस मामले में दोषी ठहराए गए और उम्रकैद की सजा काट रहे बीजेपी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सशर्त जमानत दी है. इसके विरोध में रेप पीड़िता और उसकी मां ने इंडिया गेट पर धरना दिया. इसे लेकर जब उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर से सवाल पूछा गया तो वे खिलखिलाकर हंस दिए.सेंगर को जमानत दिए जाने के विरोध में उन्नाव रेप पीड़िता और उनके परिवार ने आज इंडिया गेट पर धरना दिया. लेकिन यह प्रदर्शन ज्यादा देर तक नहीं चल सका. दिल्ली पुलिस ने पीड़िता और उनकी मां को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया.

    इसे लेकर जब यूपी सरकार में मंत्री ओपी राजभर से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जब कोर्ट ने सेंगर को पीड़िता के घर के पांच किलोमीटर दूर तक नहीं जाने को कहा है तो कोई असुरक्षित कहां हैं? पीड़ित पक्ष अभी दिल्ली में क्या कर रहा है? दिल्ली में प्रदर्शन की क्या जरूरत है? बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप के मामले में कुलदीप सिंह को सशर्त जमानत दी है. कोर्ट ने 15 लाख रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि के जमानत की शर्त रखी है. कोर्ट ने साफ कहा है कि सेंगर पीड़िता के पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं आएगा और जमानत की अवधि के दौरान दिल्ली में ही रहेगा. उसे हर सोमवार पुलिस को रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा.

    अदालत का साफतौर पर कहना है कि कुलदीप सेंगर उन्नाव रेप पीड़िता और उसके परिवार को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी भी तरह की धमकी नहीं देगा. उसे अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करना होगा और किसी भी शर्त के उल्लंघन की स्थिति में उसकी जमानत तुरंत रद्द की जा सकती है. हालांकि, इसके बावजूद सेंगर की तत्काल रिहाई संभव नहीं लग रही क्योंकि उसे पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया गया है और इस मामले में वह दस साल की सजा काट रहा है. ऐसे में वह फिलहाल जेल में ही रहेगा.

    उन्नाव रेप केस की नाबालिग पीड़िता को 11 से 20 जून 2017 के बीच कुलदीप सेंगर ने अगवा कर रेप किया. इसके बाद उसे 60 हजार रुपये में बेच दिया गया. बाद में पीड़िता को माखी थाना क्षेत्र से बरामद किया गया. आरोप यह भी है कि पीड़िता को पुलिस अधिकारियों की ओर से लगातार धमकाया गया और सेंगर के निर्देश पर चुप रहने का दबाव बनाया गया. इसके बाद रेप, अपहरण और आपराधिक धमकी सहित पॉक्सो एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई. इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद कुलदीप सेंगर को गिरफ्तार किया गया था.