Tag: political discussion

  • ओम बिड़ला ने राहुल गांधी पर ली चुटकी, संसद में माइक टिप्पणी से बना हल्का-फुल्का माहौल

    ओम बिड़ला ने राहुल गांधी पर ली चुटकी, संसद में माइक टिप्पणी से बना हल्का-फुल्का माहौल


    नई दिल्ली:
    संसद के विशेष सत्र के दौरान उस समय माहौल कुछ देर के लिए हल्का और अनौपचारिक हो गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की एक टिप्पणी पर सदन में मौजूद सांसदों के बीच हंसी का माहौल बन गया। यह घटना उस समय हुई जब सदन में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा चल रही थी और राजनीतिक बहस अपने चरम पर थी।

    चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से एक सांसद अपना वक्तव्य रख रहे थे, तभी यह बात उठी कि उनका माइक्रोफोन सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। इसी दौरान विपक्षी बेंचों की ओर से भी माइक को लेकर प्रतिक्रिया दी गई और सदन में कुछ देर के लिए हल्की अफरा तफरी जैसी स्थिति बन गई।

    इसी मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने मुस्कुराते हुए टिप्पणी की कि माइक चालू है, केवल कुछ लोगों का ही माइक बंद रहता है। उनकी इस बात पर सदन में मौजूद कई सांसदों ने हंसी और मेज थपथपाकर प्रतिक्रिया दी, जिससे कुछ क्षणों के लिए कार्यवाही का माहौल गंभीरता से हटकर हल्का हो गया।

    यह टिप्पणी राजनीतिक चर्चा में भी एक अलग विषय बन गई क्योंकि इससे पहले भी विपक्ष की ओर से समय समय पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि उन्हें संसद में पर्याप्त रूप से बोलने नहीं दिया जाता या उनकी आवाज को दबाया जाता है। इसी पृष्ठभूमि में यह घटना एक प्रतीकात्मक हल्के पल के रूप में देखी जा रही है।

    हालांकि इस हल्के क्षण के बाद सदन की कार्यवाही फिर से गंभीर मुद्दों पर केंद्रित हो गई। विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधान और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा जारी रही, जिन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।

    परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को लेकर कुछ राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं, विशेष रूप से इस बात को लेकर कि जनसंख्या आधारित बदलाव से राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार की ओर से इन विधेयकों को संवैधानिक और प्रशासनिक सुधारों के लिए आवश्यक बताया गया।

    सदन में दिन भर गंभीर बहसों के बीच यह छोटा सा हास्यपूर्ण क्षण भी चर्चा में रहा, जिसने कुछ समय के लिए माहौल को तनावपूर्ण राजनीति से हटाकर हल्केपन की ओर मोड़ दिया।

  • नीतीश के सामने ललन ने निशांत से कहा ‘अब मान जाइए’, पॉलिटिकल डेब्यू की अटकलों से फिर गरमाई बिहार की सियासत

    नीतीश के सामने ललन ने निशांत से कहा ‘अब मान जाइए’, पॉलिटिकल डेब्यू की अटकलों से फिर गरमाई बिहार की सियासत


    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर चल रही चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। सरस्वती पूजा के मौके पर सामने आए एक वीडियो ने बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। वीडियो में केंद्रीय मंत्री और जदयू नेता ललन सिंह नीतीश कुमार की मौजूदगी में निशांत कुमार से कहते नजर आ रहे हैं
    “अब बोल दीजिए कि मान जाएंगे, आज बोल ही दीजिए।” इस एक लाइन ने निशांत के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को और हवा दे दी है।

    दरअसल, शुक्रवार को पटना में एक पूजा स्थल पर नीतीश कुमार दर्शन के लिए पहुंचे थे, जहां निशांत कुमार पहले से मौजूद थे। उसी दौरान ललन सिंह, विजय चौधरी समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता भी वहां मौजूद थे। बातचीत के दौरान ललन सिंह ने निशांत के कंधे पर हाथ रखकर यह बात कही। हालांकि, निशांत कुमार ने कोई जवाब नहीं दिया और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए।

    नीतीश कुमार ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे रखी और पूजा में लीन रहे। मौके पर मौजूद लोग इस बातचीत पर मुस्कुरा दिए, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

    इस वीडियो के सामने आने के बाद जदयू और भाजपा दोनों दलों में बयानबाज़ी शुरू हो गई है। जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि वीडियो का संदर्भ स्पष्ट नहीं है और यह जरूरी नहीं कि बात राजनीति में आने को लेकर ही हो। वहीं प्रवक्ता मनीष यादव ने कहा कि निशांत कुमार पढ़े-लिखे और सक्षम युवा हैं, लेकिन राजनीति में आने का फैसला पूरी तरह उनका और पार्टी नेतृत्व का होगा।

    भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है।

    भाजपा नेता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि निशांत कुमार में क्षमता है और अगर वे राजनीति में आते हैं तो बिहार को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतिम निर्णय निशांत कुमार का ही होगा और सभी को उसका सम्मान करना चाहिए।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब निशांत कुमार के राजनीतिक डेब्यू की चर्चा हुई हो।

    इससे पहले भी जदयू नेताओं और समर्थकों की ओर से पोस्टर, उपवास और नारेबाज़ी के जरिए उन्हें राजनीति में लाने की मांग उठती रही है। उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता भी निशांत की वकालत कर चुके हैं।

    फिलहाल, नीतीश कुमार और निशांत कुमार की खामोशी बनी हुई है, लेकिन ललन सिंह का यह बयान बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर गया हैक्या निशांत कुमार जल्द सियासी मैदान में उतरेंगे या यह चर्चा यूं ही चलती रहेगी