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  • फिल्मों से लेकर जननायक बनने तक: कैसे बने तमिलनाडु के नए ‘थलापति’ विजय, जानिए पूरी कहानी

    फिल्मों से लेकर जननायक बनने तक: कैसे बने तमिलनाडु के नए ‘थलापति’ विजय, जानिए पूरी कहानी

    नई दिल्ली । फिल्मों की दुनिया से निकलकर राजनीति के शिखर तक पहुंचने की कहानी अक्सर कल्पना जैसी लगती है, लेकिन तमिल सुपरस्टार विजय थलापति के जीवन में यह सच बनती दिख रही है। आमिर खान की फिल्म ‘3 इडियट्स’ का गाना “जैसा फिल्मों में होता है, हो रहा है हूबहू…” जैसे उनके सफर पर बिल्कुल फिट बैठता है। पर्दे पर कई बार नेता बनकर जनता का दिल जीतने वाले विजय अब असल जीवन में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा नाम बन चुके हैं।

    विजय को फिल्मी दुनिया की प्रेरणा उनके परिवार से मिली। उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर निर्देशक हैं, जबकि मां शोभा चंद्रशेखर प्लेबैक सिंगर रही हैं। घर में कला और संगीत के माहौल ने उन्हें बचपन से ही अभिनय की ओर खींचा। अभिनय के साथ-साथ उन्हें गायन का भी शौक है।

    बाल कलाकार से शुरुआत
    22 जून 1974 को जन्मे जोसेफ विजय चंद्रशेखर ने 1984 में फिल्म ‘वेट्री’ से बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘कुडुम्बम’, ‘नान सिगप्पू मणिथन’, ‘वसंत रागम्’, ‘सत्तम ओरु विलायाट्टू’ और ‘इधु एंगळ नीति’ जैसी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों का निर्देशन उनके पिता ने ही किया था।

    हीरो बनने की राह में संघर्ष
    18 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘नालया थीरपू’ से बतौर लीड हीरो शुरुआत की, लेकिन फिल्म असफल रही और उनके लुक की आलोचना भी हुई। इसके बाद उनके पिता ने अभिनेता विजयकांत के साथ ‘सेंथूरपांडी’ (1993) बनाई, जो हिट रही और यहीं से विजय के करियर ने रफ्तार पकड़ी।

    हिट फिल्मों से सुपरस्टार तक
    अपने करियर में उन्होंने अब तक 69 फिल्में की हैं। ‘थेरी’, ‘राजविन परवैयिले’, ‘मिन्सरा कन्ना’, ‘बीस्ट’, ‘शाहजहां’, ‘लियो’ और ‘द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बड़ी सफलता दिलाई। 2023 की ‘लियो’ ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड तोड़े। बताया जाता है कि वह एक फिल्म के लिए करीब 250 करोड़ रुपये तक फीस लेते हैं।

    ‘थलापति’ नाम कैसे मिला
    फैंस ने उन्हें प्यार से ‘थलापति’ यानी कमांडर का नाम दिया। 1994 की फिल्म ‘रसिगन’ की सफलता के बाद उन्हें ‘इलाया थलापति’ (छोटा कमांडर) कहा गया। 2017 में फिल्म ‘मार्सल’ की बड़ी सफलता के बाद वे पूरी तरह ‘थलापति’ बन गए।

    फिल्मों में विवाद भी साथ-साथ
    उनकी फिल्मों ने कई बार विवाद भी झेले। 2013 की ‘थलाइवा’ और 2018 की ‘सरकार’ पर राजनीतिक विवाद हुए। हाल ही में उनकी फिल्म ‘जन नायकन’ भी सेंसर और कानूनी अड़चनों में फंसी रही और रिलीज नहीं हो सकी।

    राजनीति में एंट्री और बड़ा बदलाव
    फरवरी 2024 में विजय ने राजनीति में कदम रखते हुए अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) बनाई। इसके बाद उनकी पार्टी ने तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से मजबूत पकड़ बनाई और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई।

    करूर रैली हादसा
    27 सितंबर 2025 को करूर में हुई रैली के दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद विजय ने पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की और गहरा दुख जताया। इस मामले में जांच भी आगे बढ़ी और पुलिस केस दर्ज हुआ।

    निजी जीवन भी चर्चा में
    विजय ने 1999 में अपनी एक फैन से शादी की थी। हाल ही में उनके निजी जीवन को लेकर तलाक की खबरें सामने आई हैं। उनका नाम अभिनेत्री तृषा कृष्णन के साथ भी जोड़ा जाता रहा है।

    नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत
    आज 10 मई 2026 को विजय का राजनीतिक सफर एक नए मोड़ पर पहुंचने वाला है। बड़े पर्दे पर निभाए गए उनके नेता के किरदार अब असल जिंदगी में भी आकार लेते दिख रहे हैं। उनके समर्थक इस बदलाव को एक ऐतिहासिक शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।

  • नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन: अमित शाह ने स्वागत किया, JDU कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा

    नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन: अमित शाह ने स्वागत किया, JDU कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा


    नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा सदस्य के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके साथ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश कुमार भी मौजूद रहे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और नीतीश कुमार के लंबे और भ्रष्टाचार-मुक्त राजनीतिक सफर की सराहना की। शाह ने कहा कि नीतीश का कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में लिखा जाएगा और उन्होंने बिहार को जंगलराज से मुक्त करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बिहार की सड़कों और ग्रामीण विकास में भी योगदान दिया और अपनी राजनीतिक यात्रा में किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप कभी नहीं लगा।

    नामांकन के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यसभा में जाने के बावजूद वे बिहार की नई सरकार को हर तरह से सहयोग देंगे। उन्होंने अपने संसदीय जीवन के महत्व और जनता के प्रति जिम्मेदारी पर जोर दिया। नीतीश के इस ऐलान के बाद तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में महाराष्ट्र मॉडल लागू किया गया है और बीजेपी ने नीतीश को हाईजैक कर दिया। उनका कहना था कि सहयोगी पार्टी को ताकत से दबाकर नीतीश को राज्यसभा भेजा गया।

    नीतीश के राज्यसभा नामांकन की खबर मिलते ही सुबह से ही JDU कार्यकर्ता उनके मुख्यमंत्री आवास पर इकट्ठा होने लगे। कार्यकर्ताओं ने अपने नेता के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वे नीतीश कुमार को कहीं नहीं जाने देंगे। इस दौरान CM हाउस के बाहर भावुक दृश्य देखने को मिले और कई कार्यकर्ता रोते हुए नजर आए। कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कोटे के मंत्रियों सुरेंद्र मेहता, JDU MLC संजय गांधी और JDU विधायक प्रेम मुखिया को भी CM हाउस से बाहर निकाल दिया।

    JDU कार्यालय में भी नाराज कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और हंगामा किया। कई जिलों जैसे बेगूसराय और नालंदा में नीतीश के राज्यसभा जाने का विरोध हुआ। कार्यकर्ताओं ने ललन सिंह, विजय चौधरी, संजय झा मुर्दाबाद के नारे लगाए, जिसके कारण JDU ऑफिस का गेट बंद कर दिया गया। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि नीतीश कुमार के योगदान की चर्चा दशकों तक होती रहेगी और कार्यकर्ताओं के लिए यह फैसला सहज रूप से अपनाना मुश्किल है, लेकिन वे इसे स्वीकार करेंगे।

    अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि नीतीश कुमार 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री रहे और अब लंबे अरसे के बाद राज्यसभा सांसद के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं। शाह ने उनके प्रशासनिक कौशल, सादगी और बिहार में विकास कार्यों के लिए किए गए योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के हर गांव और घर में बिजली पहुंचाई और पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाया।

    नीतीश कुमार ने भी अपने पोस्ट में कहा कि संसदीय जीवन के लिए उनका सपना है कि वे दोनों सदनों का अनुभव लें और बिहार के विकास के लिए काम करें। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से अपील की कि वे बिहार की नई सरकार को सहयोग दें और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखें।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा के लिए नीतीश का नामांकन और JDU कार्यकर्ताओं का गुस्सा बिहार में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। यह घटना न केवल राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि आगामी दिनों में बिहार की सियासत में हलचल और बढ़ सकती है।

    नीतीश कुमार का यह कदम उनके समर्थकों और आलोचकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। राज्यसभा में जाने के साथ ही वे राष्ट्रीय स्तर पर फिर से सक्रिय भूमिका निभाएंगे, वहीं कार्यकर्ताओं का विरोध और नाराजगी बीजेपी और JDU के बीच संबंधों की जटिलता को भी दर्शाता है।