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  • मध्य प्रदेश में वीआईपी काफिले पर सियासी घमासान, दिल्ली तक पहुंचा मामला

    मध्य प्रदेश में वीआईपी काफिले पर सियासी घमासान, दिल्ली तक पहुंचा मामला

    भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और सादगी की अपील के बावजूद मध्य प्रदेश में बड़े वाहन काफिलों के साथ निकाली गई रैलियों ने अब सियासी हलचल बढ़ा दी है। पार्टी संगठन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त रुख अपनाया है और ऐसे नेताओं को 17 मई को भोपाल स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में तलब किया गया है।

    सूत्रों के मुताबिक, इन नेताओं से सीधे सवाल-जवाब किए जाएंगे कि पीएम की अपील के बावजूद उन्होंने बड़े काफिले और शक्ति प्रदर्शन वाली रैलियां क्यों निकालीं। इस पूरे मामले की रिपोर्ट दिल्ली स्थित भाजपा हाईकमान ने भी तलब की है, जिससे संगठन स्तर पर दबाव और बढ़ गया है।

    8-9 जगहों पर रैलियां, आलाकमान नाराज
    जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री की 10 मई की अपील के बाद भी प्रदेश में कम से कम 8 से 9 स्थानों पर बड़े वाहन काफिलों के साथ स्वागत रैलियां निकाली गईं। इसे पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है और इसे सीधे तौर पर अनुशासन और निर्देशों की अनदेखी माना जा रहा है। अब पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि संगठनात्मक अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    कई नेताओं पर पहले ही गिरी गाज
    इस मामले में कुछ नेताओं पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है-
    सज्जन सिंह यादव (भिंड किसान मोर्चा अध्यक्ष) – 100 वाहनों के काफिले के साथ रैली, नियुक्ति रद्द
    सौभाग्य सिंह ठाकुर (पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष) – 700 वाहनों के काफिले पर कारण बताओ नोटिस, अधिकारों में कटौती इसके अलावा कई अन्य नेताओं पर भी सवाल उठे हैं, जिनमें बड़े काफिलों के साथ दौरे और कार्यक्रम शामिल हैं।

    किन नेताओं को भोपाल तलब किया गया
    अब जिन नेताओं से जवाब मांगा जा रहा है, उनमें शामिल हैं-
    टिकेंद्र प्रताप सिंह – 200 वाहनों के काफिले के साथ जिला कार्यालय पहुंचे
    पवन पाटीदार – 24 वाहनों के साथ चंबल दौरे पर गए
    वीरेंद्र गोयल – 30 से अधिक वाहनों का काफिला, ई-रिक्शा में भी मौजूद
    रेखा यादव – सैकड़ों वाहनों की रैली, छतरपुर में ट्रैफिक जाम
    सत्येंद्र भूषण सिंह – ई-रिक्शा से पहुंचे, लेकिन बड़ा काफिला साथ रहा
    राकेश सिंह जादौन – ई-रिक्शा के साथ वाहन काफिला चर्चा में

    सीएम भी सख्त, काफिला घटाया
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस संदेश को गंभीरता से लेते हुए अपने काफिले से 5 वाहन कम कर दिए हैं। वहीं, डिप्टी सीएम और अन्य मंत्रियों ने भी अपने-अपने काफिलों में कटौती की है। पार्टी अब यह संदेश दे रही है कि प्रधानमंत्री की अपील सिर्फ बयान नहीं, बल्कि संगठनात्मक निर्देश है जिसे हर स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।

     17 मई को होगी ‘क्लास’, हो सकती है कार्रवाई
    17 मई को भोपाल में होने वाली बैठक में नेताओं से विस्तृत जवाब मांगा जाएगा। अगर स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला तो संगठनात्मक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व अनुशासन और छवि को लेकर किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं दिख रहा है।

    वाहन काफिला विवाद ने मध्य प्रदेश बीजेपी संगठन में हलचल बढ़ा दी है। पीएम मोदी की सादगी और ईंधन बचत की अपील के बाद अब पार्टी खुद अपने नेताओं पर सख्त होती दिख रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े फैसले संभव हैं।

  • बंगाल में डबल इंजन सरकार पर सीएम योगी का दावा, विकास और बदलाव का किया आह्वान..

    बंगाल में डबल इंजन सरकार पर सीएम योगी का दावा, विकास और बदलाव का किया आह्वान..


    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और तेज हो गया है। चकदहा में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की मौजूदा सरकार और राजनीतिक स्थिति को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने नदिया जिले की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि चैतन्य महाप्रभु की वैष्णव परंपरा की पहचान रही है और अब यहां बदलाव की संभावनाएं दिख रही हैं।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने विकास के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की तुलना करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार बनने पर विकास की गति तेज होती है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर उद्योगों का विस्तार हुआ है और रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में औद्योगिक गतिविधियों में गिरावट देखी गई है। उन्होंने कहा कि विकास और निवेश के लिए स्थिर शासन जरूरी है।

    सीएम योगी ने अपने भाषण में सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बंगाल की भूमि हमेशा से आध्यात्मिक और साहित्यिक योगदान के लिए जानी जाती रही है और इसे अपनी मूल पहचान को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है।

    राजनीतिक टिप्पणी के दौरान उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था और प्रशासन को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि विकास तभी संभव है जब सुरक्षा और सुशासन मजबूत हों। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को ऐसे विकल्प पर विचार करना चाहिए जो स्थिरता और विकास सुनिश्चित कर सके।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विभिन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हस्तियों का भी उल्लेख किया और कहा कि बंगाल की धरती ने देश को कई महान योगदान दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी जनता की है।

    सभा के दौरान उन्होंने स्थानीय प्रत्याशी के समर्थन में मतदान की अपील की और कहा कि आने वाले समय में राज्य में विकास और बदलाव की नई दिशा तय हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस तरह के बयानों से चुनावी माहौल और अधिक गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में प्रचार अभियान और तेज होने की संभावना है।

  • रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की शादी की तारीख को लेकर चर्चा तेज, काशी दर्शन के बाद बढ़ेगी हलचल

    रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की शादी की तारीख को लेकर चर्चा तेज, काशी दर्शन के बाद बढ़ेगी हलचल


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेटर Rinku Singh और उनकी मंगेतर Priya Saroj हाल ही में Varanasi पहुंचे। दोनों ने यहां आकर प्रसिद्ध Kashi Vishwanath Temple में पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।

    बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा आरती में हुए शामि
    मंदिर में करीब आधे घंटे बिताने के बाद रिंकू और प्रिया ने काशी के घाटों का आनंद लिया। शाम को दोनों Dashashwamedh Ghat पहुंचे, जहां उन्होंने भव्य गंगा आरती में हिस्सा लिया। दोनों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “काशी, महादेव की धरती और गंगा का पावन संग।”

    जून में हो सकती है शादी, होटल ताज में फेरे की चर्चा
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की शादी जून के पहले हफ्ते में हो सकती है। यह भी खबर सामने आ रही है कि शादी Taj Hotel Varanasi में हो सकती है। कहा जा रहा है कि दोनों उसी होटल में रुके थे, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने शादी की तैयारियों का जायजा भी लिया।

    IPL 2026 के बीच काशी पहुंचे रिंकू
    रिंकू सिंह इस समय Kolkata Knight Riders के लिए Indian Premier League 2026 खेल रहे हैं और टीम के उपकप्तान हैं। KKR का अगला मुकाबला Lucknow Super Giants के साथ लखनऊ में होना है।

    कौन हैं प्रिया सरोज?
    प्रिया सरोज उत्तर प्रदेश की मछलीशहर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद हैं। वह राजनीति में तेजी से उभरता हुआ चेहरा मानी जाती हैं और अब रिंकू सिंह के साथ अपने रिश्ते को लेकर भी चर्चा में हैं।

    रिंकू सिंह का क्रिकेट करियर
    रिंकू सिंह भारत के लिए वनडे और टी20 इंटरनेशनल में डेब्यू कर चुके हैं। उन्होंने अब तक 2 वनडे और 45 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं। वह 2018 से IPL में खेल रहे हैं और शुरुआत से ही कोलकाता नाइट राइडर्स का हिस्सा हैं। रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की वाराणसी यात्रा ने उनकी शादी की खबरों को और हवा दे दी है। हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जून में शादी और वाराणसी में फेरे की चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं।

  • महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर संसद में आज टकराव के आसार

    महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर संसद में आज टकराव के आसार

    नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को गुरुवार को संसद में पेश किया गया, जिसके साथ ही सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन गई। माना जा रहा है कि 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाला यह विशेष सत्र राजनीतिक रूप से बेहद गरम रहेगा। विपक्ष ने बिल का समर्थन तो किया है, लेकिन परिसीमन से जुड़े प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया है।

    नंबर गेम में NDA के लिए चुनौती
    संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जबकि NDA के पास फिलहाल यह संख्या पूरी नहीं है। ऐसे में सरकार को विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। लोकसभा में सीटों की मौजूदा संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी इस विधेयक का हिस्सा है।

    पीएम मोदी ने बताया नारी सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की विशेष बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। उन्होंने इसे माताओं और बहनों के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि यह राष्ट्र के सम्मान का विषय है।

    तमिलनाडु CM स्टालिन का विरोध
    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव को ‘काला कानून’ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है और वहां की जनता के अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकता है।

    2011 जनगणना पर आधारित होगा परिसीमन
    सूत्रों के अनुसार, परिसीमन प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर की जा रही है क्योंकि 2026 की जनगणना के परिणाम देर से आने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करना है, जिसके लिए समयबद्ध प्रक्रिया जरूरी बताई जा रही है।

    परिसीमन आयोग के गठन की भी तैयारी
    सरकार ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ के साथ परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक भी पेश कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इन्हें सदन में रखा। प्रस्ताव के अनुसार परिसीमन आयोग का गठन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व या वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में किया जाएगा।

    विरोध के मूड में विपक्ष
    INDIA गठबंधन ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए परिसीमन प्रस्ताव का विरोध करने का फैसला लिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करना चाहती है। इसे लेकर गठबंधन के भीतर रणनीति तैयार की जा रही है और संसद में तीखा विरोध देखने की संभावना है।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बिहार के नए नेतृत्व को दी बधाई विकास की जताई उम्मीद

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बिहार के नए नेतृत्व को दी बधाई विकास की जताई उम्मीद


    भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिहार में नई सरकार के गठन पर शुभकामनाएं देते हुए वहां के नए नेतृत्व को बधाई दी है। उन्होंने सम्राट चौधरी को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

    इसके साथ ही बिजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर भी बधाई दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में इन सभी नेताओं के सफल कार्यकाल की कामना की है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार की एनडीए सरकार विकास और सुशासन के नए मानक स्थापित करेगी।

    उन्होंने कहा कि बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य में मजबूत नेतृत्व और बेहतर प्रशासन से आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा और राज्य तेजी से प्रगति की दिशा में आगे बढ़ेगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी उम्मीद जताई कि नई सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी और विकास के साथ साथ सुशासन को भी प्राथमिकता देगी।

  • Pawan Khera केस पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, तेलंगाना HC के आदेश पर लगी रोक

    Pawan Khera केस पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, तेलंगाना HC के आदेश पर लगी रोक


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता Pawan Khera को लेकर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम राहत (ट्रांजिट अग्रिम जमानत) के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे अब यह मामला (Pawan Khera Case) और ज्यादा गंभीर हो गया है और कानूनी लड़ाई शीर्ष अदालत तक पहुंच गई है।

    दरअसल, तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे असम की अदालत में जाकर नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें।

    क्या है Pawan Khera Case?
    यह विवाद उस बयान से जुड़ा है जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी पर कुछ आरोप लगाए थे। इसके बाद असम में उनके खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

    एफआईआर दर्ज होने के बाद असम पुलिस उनकी तलाश में जुट गई थी, जिसके चलते उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया। वहां से उन्हें सीमित अवधि के लिए राहत मिली थी।

    अब सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
    असम सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार का कहना है कि इस तरह की राहत जांच को प्रभावित कर सकती है और मामला गंभीर है।

    सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई है, जिससे अब पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, जहां यह तय होगा कि उन्हें राहत मिलती है या नहीं।

    कुल मिलाकर, यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुका है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

  • तमिलनाडु चुनाव में PM मोदी का प्रचार जोरों पर, राहुल गांधी नदारद, DMK-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल

    तमिलनाडु चुनाव में PM मोदी का प्रचार जोरों पर, राहुल गांधी नदारद, DMK-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल

    नई दिल्ली। तमिलनाडु में चुनावी प्रचार तेज हो गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार राज्य के दौरे कर भाजपा और एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में जनता से संपर्क कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अभी तक राज्य में चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं।

    मोदी का सक्रिय अभियान
    पिछले दो महीनों में मोदी ने तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया और 15 अप्रैल को फिर से राज्य का दौरा कर नागरकोइल में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। उनका प्रचार अभियान भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए माहौल बनाने पर केंद्रित है।

    राहुल गांधी की अनुपस्थिति और DMK के साथ दूरी
    राहुल गांधी ने अब तक तमिलनाडु में प्रचार अभियान नहीं चलाया। राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस और DMK गठबंधन में चल रहे मनमुटाव से जोड़ रहे हैं। 2021 में राहुल गांधी चुनाव से पहले ही राज्य में तीन दिवसीय दौरे पर थे, लेकिन इस बार उनकी गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुडुचेरी में संकेत मिले दूरियों के
    हाल ही में पुडुचेरी में प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का नाम तक नहीं लिया। वहीं स्टालिन भी उसी दिन वहां मौजूद थे, लेकिन दोनों नेताओं के कार्यक्रम अलग समय पर निर्धारित किए गए थे। राजनीतिक जानकार इसे सीट बंटवारे और गठबंधन खींचतान का परिणाम मान रहे हैं।

    पार्टियों की सफाई और आगे की योजना
    DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने प्रचार कार्यक्रम पहले से तय कर लिए थे और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि राहुल गांधी तमिलनाडु का दौरा 10 अप्रैल के बाद कर सकते हैं, जब पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा।DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने प्रचार कार्यक्रम पहले से तय कर लिए थे और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि राहुल गांधी तमिलनाडु का दौरा 10 अप्रैल के बाद कर सकते हैं, जब पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा।

  • 'घुटनों के बल पर लागू करेगी बीजेपी', यूजीसी बिल को लेकर पल्लवी पटेल ने सरकार को दी चुनौती

    'घुटनों के बल पर लागू करेगी बीजेपी', यूजीसी बिल को लेकर पल्लवी पटेल ने सरकार को दी चुनौती

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा में यूजीसी बिल को लेकर अपना दल कमेरावादी पार्टी नेता और सिराथू सीट से विधायक पल्लवी ने भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस सरकार ने जानबूझकर यूजीसी बिल को कोर्ट के दांवपेंच में फंसा दिया है. लेकिन, एक दिन यहीं सरकार घुटनों पर आकर इसे लागू करेगी.
    पल्लवी पटेल ने राज्यपाल के अभिभाषण पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मैं भारतीय जनता पार्टी से पूछना चाहती हूं कि आपकी दृष्टि बदलाव, सुधार और रिफॉर्म क्या है? क्या आपकी नजर मे रिफॉर्म सिर्फ आंकड़ों तक सीमित है या सत्ता प्राप्ति तक सीमित है. क्योंकि, झूठे आंकड़े पेश करके सुधार विकास के दावे करके छवि नहीं सुधार सकते हैं.

    यूजीसी बिल को लेकर सरकार को घेरा
    सिराथू विधायक ने कहा कि जिस बदलाव, सुधार और रिफॉर्म की हम बात कर रहे हैं उसका उद्देश्य है न्याय, समानता और दक्षता है लेकिन, बीजेपी की सरकार ने इस विचार के उद्देश्य की धज्जियां उड़ा दी है.

    उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं है तो क्या कारण था कि देश के उच्च संस्थानों में समानता के भाव को उजागर करने के लिए जिस यूजीसी एक्ट 2026 को संसदीय समिति की संस्तुति के बाद और कोर्ट के निर्देशानुसार लाया गया क्यों आपने उसे लाकर पिछड़ा वंचित समाज को खुश होने का अवसर दिया और फिर सोची समझी रणनीति के तहत सड़कों पर तनाव पैदा करने का काम किया. इसके बाद इसे न्यायपालिका के पेचीदा घुमाव में फंसा दिया.

    भारतीय जनता पार्टी पर उठाए सवाल
    पल्लवी पटेल ने सवाल किया आपको ये करके क्या मिला? यूजीसी समानता अधिनियम के लागू होने के बाद यहां सालों से चले आ रहे वंचित और अगड़ा समाज की खाई को पाटा जा सकता था लेकिन आपने इस खाई को और गहरा कर दिया. ये तो वहीं बात हुई चित भी अपनी और पट भी अपनी.

    जितना सवाल आज इस सरकार पर उठ रहा है उतना है सवाल आज हम जन प्रतिनिधियों पर भी उठ रहा है. क्योंकि वंचित समाज आज उच्च शिक्षा और सम्मान के लिए अपने जनप्रतिनिधियों की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है. ये हम सबकी जिम्मेदारी है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस पर चर्चा की जाए..

    ‘घुटनों पर आकर लागू करेगी सरकार’
    उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की कविता पढ़ते हुए कहा कि ‘जो तटस्थ है समय लिख देगा उसका भी अपराध..’ पल्लवी ने कहा कि मैं भविष्य वक्ता तो नहीं लेकिन याद रखिए जिस बीजेपी सरकार ने इस यूजीसी बिल को कोर्ट में फंसाकर का काम किया वहीं घुटनों पर आकर इस बिल को लागू करेगी. बीजेपी का हर कदम रिफॉर्म नहीं होता है.

    ‘मेरी मजबूरी समझिए, मेरा तो ये भी ठिकाना नहीं…’, यूपी विधानसभा में भावुक हुए अब्बास अंसारी