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  • ट्रंप की धमकी पर ग्रीनलैंड के सियासी दलों की दो-टूक, बोले- कोई दूसरा तय नहीं करेगा हमारे देश का भविष्य

    ट्रंप की धमकी पर ग्रीनलैंड के सियासी दलों की दो-टूक, बोले- कोई दूसरा तय नहीं करेगा हमारे देश का भविष्य


    नूक (ग्रीनलैंड)।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने जब से ग्रीनलैंड (Greenland) पर कब्जे की बात कही है, खलबली मची हुई है। अब ग्रीनलैंड की संसद (Greenland Parliament) के तमाम नेताओं ने संयुक्त वक्तव्य जारी किया है। इसमें ग्रीनलैंड के नेताओं ने कहा है कि उनके देश का भविष्य कोई दूसरा नहीं तय करेगा, बल्कि खुद यहां के लोग करेंगे। इंसारत्तूस में प्रतिनिधित्व करने वाली सभी पांच पार्टियों के नेताओं द्वारा साइन किए गए एक बयान में, अमेरिका या डेनमार्क के नियंत्रण के किसी भी सुझाव को अस्वीकार कर दिया। इस बयान में कहा गया है कि हम अमेरिकन नहीं बनना चाहते हैं। हमें डैनिश नहीं होना चाहते। हम सिर्फ ग्रीनलैंड वाले बनकर रहना चाहते हैं।

    गौरतलब है कि तीन जनवरी को की गई कार्रवाई में वेनेजुएला के नेतृत्व को सफलतापूर्वक उखाड़ फेंकने के बाद, अमेरिका सरकार का हौसला बढ़ गया है। अब वह सीधे ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की बात कर रही है। विभिन्न यूरोपीय नेताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की है, लेकिन वे एक कथित सहयोगी द्वारा किए गए विश्वासघात पर कोई सुसंगत प्रतिक्रिया देने में सक्षम नहीं हो पाए हैं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका को रूस और चीन को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने से रोकने के लिए उस पर अपना नियंत्रण करना चाहिए। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में तेल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर हम ग्रीनलैंड नहीं लेते हैं, तो रूस या चीन आपके पड़ोसी बन जाएंगे। ऐसा नहीं होने वाला है। मैं आसानी से डील करना चाहता हूं। लेकिन अगर हम इसे आसानी से नहीं करते हैं, तो हम इसे मुश्किल तरीके से करेंगे। उन्होंने डेनमार्क के एक स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता पर सवाल उठाया और इस विशाल, संसाधन से भरपूर द्वीप पर ऐतिहासिक दावों को खारिज कर दिया।

    ट्रंप ने कहा कि मैं डेनमार्क का प्रशंसक हूं, लेकिन, आप जानते हैं, सिर्फ इसलिए कि 500 साल पहले उनका एक जहाज वहां उतरा था, इसका मतलब यह नहीं है कि वे उस जमीन के मालिक हैं। यह टिप्पणियां अमेरिका और कई नाटो सहयोगियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने ऐसे किसी भी कदम को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी हमला नाटो और दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था का अंत होगा।

  • बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के मुस्लिम समर्थक कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैंपूर्व राजदूत महेश सचदेवा

    बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के मुस्लिम समर्थक कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैंपूर्व राजदूत महेश सचदेवा


    नई दिल्ली । बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने 17 सालों के बाद घर वापसी की है। रहमान ने घर लौटने पर मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए देश के लोगों का दिल से शुक्रिया अदा किया। दूसरी ओर बांग्लादेश में हफ्तेभर में लगातार दूसरे अल्पसंख्यक हिंदू की हत्या का मामला सामने आया है। इन मुद्दों को लेकर पूर्व राजदूत महेश सचदेवा ने आईएएनएस से खास बातचीत की।

    पूर्व राजदूत महेश सचदेवा ने कहाकुछ हफ्तों में हिंदू युवक की हत्या की यह दूसरी घटना सामने आई हैजिसमें ज्यादातर सांप्रदायिक नफरत की वजह से हत्या की गई है। इससे कई तरह की चिंताएं पैदा हुई हैं। सबसे पहलेइससे पता चलता है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा पक्की करने के लिए संघर्ष कर रही है।

    उन्होंने आगे कहादूसरा यह बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में गहरी पैठ जमाए हुए ‘इस्लामवाद’ को दिखाता हैजिसमें पार्टियां अपने विरोधियों से ज्यादा मुस्लिम समर्थक और कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैं। तीसराइससे यह सवाल उठता है कि क्या 12 फरवरी के चुनाव के बाद सांप्रदायिक दुश्मनी की यह लहर कम हो जाएगी या अगर ये ताकतें सत्ता में आती हैंतो क्या हालात और बिगड़ सकते हैं।

    तारिक रहमान की वापसी को लेकर महेश सचदेवा ने कहा17 साल के निर्वासन के बादतारिक रहमान बांग्लादेश लौट आए हैं। इस बात का चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता हैक्योंकि 12 फरवरी के चुनाव में बीएनपी को सबसे आगे देखा जा रहा है। उन्होंने सुलह वाली बातें कहीइस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश मुसलमानों और ईसाइयों समेत सभी का है। निर्वासन के दौरान देश के विकास की तारीफ की और अवामी लीग सरकार के सुधारों को भी माना। जानकार बांग्लादेश की मौजूदा उथल-पुथल के बीच भारत और उनके आर्थिक और सामाजिक एजेंडे पर नरम रुख पर नजर रख रहे हैं।

    बता देंढाका नॉर्थ सिटी यूनिट ने पुरबाचल इलाके में जुलाई 36 एक्सप्रेसवे पर बीएनपी ने सफाई अभियान चलाया। इस सड़क का इस्तेमाल तारिक रहमान की रैली के लिए किया गया था। जुलाई 36 एक्सप्रेसवे को 300-फीट रोड के नाम से जाना जाता है। सफाई अभियान के दौरान ढाका नॉर्थ सिटी कॉर्पोरेशन डीएसीसी के वर्करपार्टी कार्यकर्ता और 300 किराए के सफाई कर्मचारी शामिल रहे और कचरे-मलबे को हटाया।

    ढाका नॉर्थ बीएनपी के संयोजक अमीनुल हक ने इस अभियान का नेतृत्व किया। कचरे को जल्दी हटाने के लिए सोलह ट्रक किराए पर लिए गए। इसके अलावाराजधानी के अलग-अलग इलाकों से 300 सफाई कर्मचारी लाए गए। इस बीचडीएनसीसी के सफाई कर्मचारी भी सड़क से कचरा साफ करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

  • भोपाल में SIR प्रक्रिया के तहत 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटेआंकड़ा चौंकाने वाला

    भोपाल में SIR प्रक्रिया के तहत 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटेआंकड़ा चौंकाने वाला


    भोपाल ।भोपाल में चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण चल रहा है। इस प्रक्रिया में अब तक 39 दिनों में 4 लाख 43 हजार 633 मतदाताओं के नाम कटने की संभावना जताई गई है। ये नाम मुख्य रूप से मृतशिफ्टेडअनुपस्थितडबल एंट्री और अन्य कारणों से कटे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित वह मतदाता हैं जिनके नाम ‘नो-मैपिंग’ सूची में थेजिनकी संख्या घटकर 1 लाख 35 हजार 765 रह गई है। इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राजनीति में हलचल तेज हो गई हैऔर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने निर्वाचन आयोग से प्रक्रिया की पारदर्शिता की मांग की है।

    SIR प्रक्रिया और नाम कटने की वजह

    SIR प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को साफ और सही बनाना है ताकि चुनावों में कोई धोखाधड़ी न हो। इस दौरान मृतशिफ्टेड या अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैंऔर जिनका नाम डबल एंट्री के रूप में दर्ज हैउनका नाम भी हटाया जाता है। इन कदमों से सूची में वास्तविक और सक्रिय मतदाताओं की संख्या सुनिश्चित होती है।

    भोपाल में जिन 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटने की संभावना जताई गई हैउनमें से अधिकांश मृत और शिफ्टेड मतदाता हैंजिनकी जानकारी नियमित रूप से अपडेट नहीं की गई थी। इसके अलावाकई मतदाताओं के नाम डबल एंट्री के कारण भी कटने जा रहे हैं। इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने बूथ लेवल अधिकारी से सभी नामों की वेरिफिकेशन कराने का निर्देश दिया है।

    राजनीतिक दलों का रुख और आयोग की प्रतिक्रिया

    चुनाव आयोग के आब्जर्वर ब्रजमोहन मिश्रा ने शुक्रवार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने इन नामों को वेरिफाई कराने का सुझाव दिया ताकि कोई भी मतदाता बिना वजह सूची से बाहर न हो जाए। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि 18 दिसंबर तक गणना पत्रक जमा किए जाएं।

    हालांकिविधानसभा क्षेत्रों में जहां ज्यादा मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा हैआयोग ने कुछ क्षेत्रों में बीएलओ की कामकाजी स्थिति की भी समीक्षा की। नरेलामध्यगोविंदपुरा और हुजूर जैसी विधानसभाओं में बीएलओ के काम को और कड़ी निगरानी में रखने का निर्णय लिया गया थालेकिन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो गए।

    भविष्य की दिशा और चुनौती

    इस पुनरीक्षण प्रक्रिया से निश्चित रूप से मतदाता सूची में सुधार होगालेकिन इसके परिणामस्वरूप कुछ राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को असंतोष भी हो सकता हैविशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां नाम काटे गए हैं। चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष रहेताकि भविष्य में कोई विवाद न उठे।

    इतना ही नहींराजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को भी मतदाता सूची में सुधार की इस प्रक्रिया को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिएक्योंकि यह चुनावी प्रणाली को मजबूत और निष्पक्ष बनाता है। अगर प्रक्रिया ठीक से लागू होती है तो यह चुनावों की विश्वसनीयता को बढ़ाएगा और लोगों का विश्वास बनाए रखेगा।