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  • औरत ही औरत की दुश्मन टिप्पणी से गरमाया विवाद, ट्विशा शर्मा केस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    औरत ही औरत की दुश्मन टिप्पणी से गरमाया विवाद, ट्विशा शर्मा केस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    भोपाल से जुड़े मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले ने अब एक नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है, जहां इस संवेदनशील प्रकरण पर बयानबाजी तेज हो गई है। मामले को लेकर सार्वजनिक मंचों पर उठी टिप्पणियों ने विवाद को और गहरा कर दिया है और विभिन्न पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

    इस पूरे मामले में सबसे ताजा प्रतिक्रिया शिवसेना (यूबीटी) की सांसद Priyanka Chaturvedi की ओर से आई है, जिन्होंने ट्विशा शर्मा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि “औरत ही औरत की दुश्मन होती है” का कोई चेहरा होता, तो वह इस मामले में सामने आए बयान से जुड़ा हो सकता है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    यह विवाद तब और बढ़ गया जब गिरिबाला सिंह द्वारा मीडिया से बातचीत में दिए गए बयान सार्वजनिक हुए। उन्होंने दावा किया कि ट्विशा शर्मा गर्भावस्था से जुड़ी स्थिति के कारण मानसिक तनाव में थीं और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी की प्रक्रिया शुरू करने के बाद वह अपने फैसले को लेकर असमंजस में थीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की थी, लेकिन परिस्थितियां जटिल थीं। उनके इन बयानों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    प्रियंका चतुर्वेदी ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सार्वजनिक रूप से बयान देना, जो अब इस दुनिया में नहीं है, उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि पीड़ित पक्ष की छवि पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े। उनके अनुसार, एक पूर्व न्यायिक पद पर रह चुकी व्यक्ति से अधिक संतुलित बयान की अपेक्षा की जाती है।

    इस बीच मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है, और लोग इस बात पर भी बहस कर रहे हैं कि व्यक्तिगत मामलों को सार्वजनिक मंचों पर किस हद तक लाया जाना चाहिए। यह घटना न केवल एक कानूनी और पारिवारिक विवाद बन गई है, बल्कि अब सामाजिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक संवाद के स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुकी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बयानबाजी से स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है, खासकर तब जब मामला पहले से ही न्यायिक या जांच प्रक्रिया के दायरे में हो। सार्वजनिक बयानों का प्रभाव न केवल कानूनी प्रक्रिया पर पड़ सकता है, बल्कि संबंधित परिवारों और व्यक्तियों की सामाजिक छवि पर भी असर डाल सकता है।

    फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक उलझती दिख रही है। राजनीतिक प्रतिक्रिया के जुड़ने के बाद यह मुद्दा अब केवल एक निजी विवाद न रहकर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।

  • प्रशांत किशोर का VIDEO वायरल, 'जितने लोग हमारे साथ फोटो खींचते हैं उतना वोट भी नहीं मिला'

    प्रशांत किशोर का VIDEO वायरल, 'जितने लोग हमारे साथ फोटो खींचते हैं उतना वोट भी नहीं मिला'


    नई दिल्ली । जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कई बड़े-बड़े दावे किए थे. पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने तक की बात कही थी लेकिन रिजल्ट के बाद पार्टी जीरो पर आउट हो गई. अब प्रशांत किशोर हार का मंथन कर रहे हैं. अलग-अलग जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं. इस बीच उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वे ये कह रहे हैं कि जितने लोगों ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाई उतना भी वोट नहीं मिला.

    वायरल वीडियो कहां का है ये साफ नहीं हो सका है. वीडियो में प्रशांत किशोर कार्यकर्ताओं से बातचत करते नजर आ रहे हैं. वे कहते हैं, “किसके पास प्रमाण है कि कौन ईमानदारी से काम कर रहा है? जितने लोग हमारे साथ फोटो खींचते हैं उतना वोट हमको नहीं मिला और सब आदमी यही कह रहा है कि भैया हम ही किए हैं दूसरा नहीं किया. उन बातों का कोई मतलब नहीं है.”

    प्रशांत किशोर ने किया एनडीए पर हमला

    दूसरी ओर प्रशांत किशोर बीते मंगलवार 17 फरवरी, 2026 को बेगूसराय पहुंचे. इस दौरान उन्होंने बिहार में शराबबंदी और बढ़ रहे अपराध को लेकर एनडीए सरकार पर हमला बोला. एनडीए की सरकार चुनने पर जनता को भी खूब सुनाया. प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर शराबबंदी से महिलाओं का सशक्तिकरण हो रहा है तो इसे पूरे देश में लागू करना चाहिए.  मीडिया से प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज ने तीन सालों तक रणनीति बनाकर काम किया. जनता ने लगभग 18 लाख वोट देकर सेवा के लिए उनको चुना, बिहार छोड़कर जाने के लिए नहीं. वे जनता के आदेश का पालन कर रहे हैं.

    तो सरकार एनडीए के एजेंडे पर चलेगी

    प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले तीन सालों से जन सुराज की ओर से एक ही बात समझाई जा रही है कि जो बोओगे वही काटोगे. अगर आप एनडीए को चुनेंगे तो सरकार एनडीए के एजेंडे पर ही चलेगी. एनडीए का एजेंडा क्लियर है वो पूरा देश देख रहा है.  नीट छात्रा की मौत पर प्रशांत किशोर ने कहा कि पुलिस ने सबसे पहले इसको आत्महत्या करार दे दिया. इसे हत्या मानने से इनकार कर दिया. इस मामले में वो जब पीड़िता के परिजनों से मिले तब जाकर सरकार की नींद खुली. एसआईटी का गठन किया गया. इसके बाद दो पुलिस पदाधिकारी सस्पेंड हुए.