Tag: PoliticalNews

  • वीडी सतीशन का दिल्ली दौरा बना सियासी हलचल का केंद्र, कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से कई अहम बैठकें

    वीडी सतीशन का दिल्ली दौरा बना सियासी हलचल का केंद्र, कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से कई अहम बैठकें


    नई दिल्ली । केरल में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद राज्य के नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन अपने पहले आधिकारिक दिल्ली दौरे पर पहुंचे हैं। सत्ता संभालने के बाद यह उनका पहला राष्ट्रीय राजधानी दौरा माना जा रहा है, जिसे राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

    मुख्यमंत्री सतीशन शुक्रवार देर रात दिल्ली पहुंचे, जहां केरल हाउस में उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। यह स्वागत उनके हालिया चुनावी जीत और लंबे समय बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन का प्रतीक माना जा रहा है। दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातों का सिलसिला शुरू किया।

    अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों में केवल औपचारिक बातचीत ही नहीं हुई बल्कि संगठनात्मक रणनीति और सरकार के आगामी कार्यों को लेकर भी गंभीर चर्चा की गई।

    बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सतीशन ने चुनावी अभियान के दौरान मिले सहयोग और समर्थन के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी साझा किया कि नई सरकार किस दिशा में आगे बढ़ेगी और जनता से किए गए वादों को किस तरह पूरा किया जाएगा। बंद कमरे में हुई इन बैठकों में राज्य की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक संतुलन को लेकर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

    इसके साथ ही केरल कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रही चर्चा भी इस दौरे का अहम हिस्सा रही। संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव की संभावना के बीच पार्टी नेतृत्व के साथ इस मुद्दे पर भी गहन मंथन हुआ। माना जा रहा है कि आने वाले समय में पार्टी संगठन में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं, जिनका असर राज्य की राजनीति पर भी पड़ेगा।

    सूत्रों का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री सतीशन आगामी दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि इस संभावित बैठक को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यदि यह मुलाकात होती है, तो यह राज्य और केंद्र के बीच सहयोग और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का महत्वपूर्ण अवसर होगा।

    हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में यूडीएफ ने लेफ्ट सरकार को पराजित कर केरल की सत्ता में वापसी की है। यह जीत राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। ऐसे में नए मुख्यमंत्री का यह दिल्ली दौरा न केवल औपचारिक मुलाकातों का हिस्सा है, बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • एमपी में नारी शक्ति वंदन पर सियासी घमासान कल से पदयात्रा विधानसभा में निंदा प्रस्ताव की तैयारी

    एमपी में नारी शक्ति वंदन पर सियासी घमासान कल से पदयात्रा विधानसभा में निंदा प्रस्ताव की तैयारी


    भोपाल । भोपाल में नारी शक्ति वंदन को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है जहां सत्ताधारी दल ने इस मुद्दे पर बड़ा जनआंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। प्रदेश बीजेपी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और इसे लेकर प्रदेशभर में व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश में कल से नारी शक्ति वंदन पदयात्रा शुरू की जाएगी जो गांव गांव और शहर शहर तक पहुंचेगी। इसके साथ ही विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की भी तैयारी है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि समाज की आधी आबादी के सम्मान से जुड़ा विषय है और इसे लेकर जनता के बीच जाकर सच्चाई रखी जाएगी।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में जो व्यवहार देखने को मिला वह निंदनीय है और इससे महिलाओं के प्रति उनकी सोच उजागर होती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के हर प्रयास का विरोध करना एक तरह की अलगाववादी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने अवसरवादिता दिखाते हुए अपने रुख बदल लिए और महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर भी राजनीति की।

    इस मुद्दे को लेकर प्रदेश में बड़े स्तर पर जनजागरण अभियान चलाने की रणनीति बनाई गई है। नेताओं ने बताया कि केवल पदयात्रा ही नहीं बल्कि नगर निगम से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक विरोध और निंदा प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इसके जरिए जनता को यह बताया जाएगा कि कौन महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है और कौन इसके खिलाफ खड़ा है।

    प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की आधी आबादी से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण विषय है लेकिन विपक्ष ने इसे गंभीरता से लेने के बजाय राजनीतिक अवसर के रूप में देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके नेताओं ने इस मुद्दे पर जिस तरह का रुख अपनाया वह महिलाओं के प्रति उनकी सोच को दर्शाता है।

    उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़े ऐसे विषय पर जश्न मनाना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। पार्टी इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है और हर स्तर पर इसका विरोध दर्ज कराएगी।

    नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेशभर में आक्रोश रैलियां आयोजित की जाएंगी और व्यापक स्तर पर लोगों को इस मुद्दे से जोड़ा जाएगा। पंचायत स्तर तक आंदोलन को ले जाने की योजना बनाई गई है ताकि हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचे कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए सरकार और संगठन पूरी मजबूती से खड़े हैं।

    कुल मिलाकर नारी शक्ति वंदन का मुद्दा अब मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा जनआंदोलन बनने की ओर बढ़ रहा है जिसमें सियासी बयानबाजी के साथ साथ जमीनी स्तर पर भी सक्रियता देखने को मिलेगी।

  • मंत्रि-परिषद के बड़े फैसले: जनजातीय व महिला-बाल विकास योजनाओं को 2031 तक निरंतरता, 7,133 करोड़ की स्वीकृति; पेंशन नियम 2026 को मंजूरी

    मंत्रि-परिषद के बड़े फैसले: जनजातीय व महिला-बाल विकास योजनाओं को 2031 तक निरंतरता, 7,133 करोड़ की स्वीकृति; पेंशन नियम 2026 को मंजूरी


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के सामाजिक कल्याण, जनजातीय विकास, ऊर्जा, न्यायिक सेवा और पेंशन व्यवस्था से जुड़े कई बड़े और दूरगामी निर्णय लिए गए। बैठक की शुरुआत वंदे-मातरम् के सामूहिक गायन से हुई।

    मंत्रि-परिषद ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जनजातीय कार्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की निरंतरता के लिए कुल 7,133 करोड़ 17 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की। इस स्वीकृति के तहत जनजातीय कार्य विभाग की प्रमुख योजनाओं में पीवीटीजी आहार अनुदान योजना के लिए 2,350 करोड़ रुपये, एकीकृत छात्रावास योजना के लिए 1,703 करोड़ 15 लाख रुपये, सीएम राइज विद्यालय योजना के लिए 1,416 करोड़ 91 लाख रुपये और आवास सहायता योजना के लिए 1,110 करोड़ रुपये शामिल हैं।

    इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा मंडल को शुल्क प्रतिपूर्ति, अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति तथा कक्षा 9वीं की छात्रवृत्ति के लिए 522 करोड़ 8 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के लिए 31 करोड़ 3 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।

    मंत्रि-परिषद ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के लिए भी बड़ा फैसला लिया। इसके तहत 63,077 अविद्युतीकृत घरों और 650 शासकीय संस्थानों के विद्युतीकरण के लिए 366 करोड़ 72 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसमें केंद्र सरकार का अंश 220 करोड़ 3 लाख रुपये और राज्य सरकार का अंश 146 करोड़ 69 लाख रुपये रहेगा। इसके साथ ही म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा 8,521 घरों के ऑफ-ग्रिड सोलर + बैटरी विद्युतीकरण के लिए लगभग 97 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति दी गई है।

    बैठक में उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के आईटी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को तकनीकी संवर्ग की भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए एक बार के लिए आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट देने का निर्णय भी लिया गया। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा पेंशन नियम 2026 और पेंशन के सारांशीकरण नियम 2026 को मंजूरी दी। इन नियमों के तहत पेंशन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। खास बात यह है कि अब परिवार पेंशन के पात्र सदस्यों में अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री को भी शामिल किया गया है।

    इसके साथ ही मध्यप्रदेश सिविल सेवा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली नियम 2026 और एनपीएस के अंतर्गत उपदान संदाय नियम 2026 को भी मंजूरी दी गई है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इनमें अभिदाता की मृत्यु पर परिवार पेंशन, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, ई-सेवा पुस्तिका, उपदान भुगतान और विभागीय जांच से जुड़े स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। सरकार के इन फैसलों को सामाजिक सुरक्षा, जनजातीय उत्थान और प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • बीजेपी में नकद चंदा बंद, सहयोग निधि अब केवल ऑनलाइन चेक से 15 मार्च तक अभियान

    बीजेपी में नकद चंदा बंद, सहयोग निधि अब केवल ऑनलाइन चेक से 15 मार्च तक अभियान


    भोपाल । मध्यप्रदेश बीजेपी में अब से नकद चंदा बंद किया जा रहा है। पार्टी ने यह निर्णय लिया है कि अब से सहयोग निधि केवल ऑनलाइन और चेक के माध्यम से ही जमा होगी। यह नई व्यवस्था कल से शुरू हो रहे सहयोग निधि अभियान के साथ लागू होगी। बीजेपी के प्रदेश स्तर पर आज बड़ी बैठक हुई, जिसमें क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, संभागीय प्रभारी और जिला प्रभारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में यह तय किया गया कि पार्टी को मिलने वाली सहयोग निधि में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए नकद चंदा पूरी तरह बंद किया जाएगा।

    अभियान कल से शुरू हो रहा है और यह 15 मार्च तक चलेगा। इस दौरान जिला स्तर पर पार्टी के बैंक खाते में कोई राशि जमा नहीं होगी। सभी योगदान सीधे प्रदेश स्तर के खाते में आएंगे और बाद में उन्हें जिलों को भेजा जाएगा। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि 20,000 रुपए या इससे अधिक की राशि बिना PAN नंबर के स्वीकार नहीं की जाएगी। चेक से चंदा देने वालों की सूची तैयार की जाएगी, जिसमें नाम-पता, बैंक का नाम-पता और चेक-बुक नंबर जैसी जानकारी दर्ज होगी।

    यह अभियान पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि से शुरू हो रहा है। इससे पहले पिछले साल स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की शताब्दी वर्ष पर समर्पण निधि का अभियान चलाया गया था, जिसमें करीब 100 करोड़ से अधिक राशि जुटाई गई थी। बीजेपी का यह कदम पार्टी की वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ाने और नकदी प्रवाह को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, इससे फंडिंग के स्रोतों की स्पष्टता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

    केंद्र और प्रदेश स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को देखते हुए यह निर्णय समय की मांग माना जा रहा है। साथ ही, चुनावी साल में वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।अब यह देखना होगा कि इस अभियान के तहत कितनी सहयोग निधि जुटती है और पार्टी के लिए यह नया तरीका कितना प्रभावी साबित होता है।

  • पीयूष गोयल ने T20 जीत पर मजाकिया टिप्पणी की, कहा- ‘अगर टैरिफ 0 होता तो अमेरिका जीत जाता’

    पीयूष गोयल ने T20 जीत पर मजाकिया टिप्पणी की, कहा- ‘अगर टैरिफ 0 होता तो अमेरिका जीत जाता’


    नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ अंतरिम व्यापार समझौता अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के सहयोग के बिना संभव नहीं था। गोयल ने सर्जियो गोर की व्यक्तिगत भूमिका की सराहना की और इस अवसर पर भारत और अमेरिका के बीच खेले गए T20 मैच पर भी चुटकी ली।

    गोयल ने मजाकिया लहजे में कहा अगर अमेरिका ने अपने जवाबी टैरिफ को शून्य प्रतिशत कर दिया होता तो शायद वह भारत के खिलाफ मैच जीत जाता। इस बात पर मौजूद मेहमानों ने हँसी और तालियों के साथ प्रतिक्रिया दी। गोयल ने आगे कहा कि अमेरिका ने क्रिकेट खेलना केवल कुछ साल पहले शुरू किया है और उनकी टीम का प्रदर्शन हाल ही में शानदार रहा।

    स्वागत समारोह और व्यापार समझौता

    नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अपने आवास पर एक स्वागत समारोह आयोजित किया। इसमें वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य दिग्गज शामिल हुए। यह बैठक भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी होने के बाद हुई।सर्जियो गोर ने कहा कि व्हाइट हाउस भारत पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी की दोस्ती ने व्यापार सौदे को संभव बनाया। भारत ने अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ कम किया है जबकि अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया।

    भारत-अमेरिका T20 मैच

    विश्व कप के पहले मैच में भारत ने अमेरिका को 29 रन से हराया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने दबाव में 84 रन की नाबाद पारी खेली जबकि मोहम्मद सिराज ने तीन विकेट लिए। भारत ने नौ विकेट पर 161 रन बनाए। अमेरिका ने 20 ओवर में 132 रन पर 8 विकेट खोकर पीछा किया। उनके लिए संजय कृष्णमूर्ति और शुभम रंजने ने 37-37 रन और मिलिंद कुमार ने 34 रन बनाए। भारत के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह और सिराज ने शुरुआती सफलता दिलाई।

    पाकिस्तान के खिलाफ मैच
    पाकिस्तान सरकार ने मैच बहिष्कार का फैसला वापस ले लिया है। अब 15 फरवरी को भारत और पाकिस्तान के बीच T20 मैच होगा। इससे पहले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ने क्रिकेट हित में पाकिस्तान से मैच खेलने का अनुरोध किया था।

  • महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव में BJP का दबदबा कायम, शिंदे सेना और NCP भी मजबूत स्थिति में

    महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव में BJP का दबदबा कायम, शिंदे सेना और NCP भी मजबूत स्थिति में

    नई दिल्‍ली । महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के बाद अब जिला परिषद चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। शुरुआती रुझानों के अनुसार, भाजपा 145 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना 85 सीटों पर और अजित पवार गुट की एनसीपी करीब 80 सीटों पर आगे चल रही है।

    बता दें कि राज्यभर में कुल 731 जिला परिषद और 1462 पंचायत समिति सीटों के लिए रविवार को मतदान कराया गया था, जिसमें लगभग 2 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यह चुनाव पहले 5 फरवरी को प्रस्तावित थे, लेकिन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कारण इन्हें स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद 8 फरवरी को मतदान संपन्न हुआ और अब इसके नतीजे सामने आ रहे हैं।

    भाजपा को सांगली, सतारा और पनवेल में बढ़त

    अब तक सामने आए रुझानों के मुताबिक, भाजपा ने सांगली, सतारा और पनवेल जैसे अहम क्षेत्रों में बढ़त बना ली है। दूसरी ओर, अजित पवार का पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले बारामती इलाके में एनसीपी का प्रदर्शन मजबूत नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एनसीपी को यह बढ़त अजित पवार के हालिया निधन के बाद बनी सहानुभूति के चलते मिली हो सकती है। अजित पवार को पुणे और मराठवाड़ा क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में शुमार थे और इन इलाकों में उनकी गहरी पकड़ रही है। ऐसे में उनके निधन के बाद मतदाताओं में भावनात्मक जुड़ाव का असर चुनावी नतीजों में झलकता दिखाई दे रहा है।

    विपक्ष को करारा झटका

    731 जिला परिषद सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरती दिख रही है। महायुति के सहयोगी दलों में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना दूसरे स्थान पर है, जबकि अजित पवार की एनसीपी तीसरे नंबर पर बनी हुई है। विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार संघर्ष कर रहे विपक्ष को इन नतीजों से एक बार फिर करारा झटका लगा है। कांग्रेस महज 30 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना केवल 21 सीटों पर ही बढ़त दर्ज कर पाई है। वहीं पुणे और सोलापुर जैसे प्रमुख जिलों में एनसीपी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया है।

    सोलापुर-पुणे में एनसीपी का दबदबा, सतारा में BJP ने बनाई बढ़त

    जिला परिषद चुनावों के रुझानों में सोलापुर और पुणे जिलों में एनसीपी का प्रदर्शन काफी मजबूत नजर आ रहा है। सोलापुर में पार्टी अब तक 24 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस यहां अपना खाता खोलने में भी नाकाम रही है। पुणे जिले में भी एनसीपी को बढ़त मिलती दिख रही है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक सहानुभूति लहर से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं सतारा जिले में भाजपा ने स्पष्ट बढ़त हासिल की है। यहां भाजपा 32 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि एनसीपी 17 और शिवसेना 10 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

  • ईरान का ट्रंप को साफ संदेश: ‘ना डरते हैं, ना किसी का हुक्म मानेंगे’

    ईरान का ट्रंप को साफ संदेश: ‘ना डरते हैं, ना किसी का हुक्म मानेंगे’


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और फिलहाल युद्ध के खतरे को पूरी तरह टाला नहीं जा सका है। बातचीत की कोशिशों के बीच रविवार को ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना रुख फिर स्पष्ट कर दिया। ईरान ने कहा कि वह अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को किसी भी दबाव के बावजूद नहीं छोड़ेगा और किसी अन्य देश के आदेश में काम नहीं करेगा।

    तेहरान में एक सार्वजनिक मंच से बोलते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अपनी परमाणु नीति किसी से डरकर नहीं बदलेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दर्शकों के सामने कहा कि यूरेनियम संवर्धन उनके लिए गैर-समझौते वाला मुद्दा है।अराघची ने कहा, “हम संवर्धन क्यों करते हैं और इसे छोड़ने से इंकार क्यों करते हैं, भले ही युद्ध का खतरा हो? क्योंकि किसी को भी हम पर हुक्म चलाने का अधिकार नहीं है।”

    अमेरिका पर भरोसा नहीं

    ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को दबाव बनाने की कमजोर रणनीति बताया। अराघची ने कहा, “क्षेत्र में उनकी सैन्य तैनाती हमें डराती नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। अराघची ने बताया कि कुछ संकेत अमेरिकी गंभीरता दिखाते हैं, जबकि कई संकेत इसे झूठा साबित करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान के खिलाफ जारी प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अमेरिका की गंभीरता पर सवाल खड़े करती हैं।

    समझौते के लिए ईरान की शर्तें

    अराघची ने कहा कि ईरान सभी संकेतों का मूल्यांकन करेगा। उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत समझौते की राह खोल सकती है, लेकिन केवल तभी जब अमेरिकी मांगें वास्तविक और न्यायसंगत हों। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका का दृष्टिकोण सम्मानजनक और आपसी हितों पर आधारित होगा, तभी समझौता संभव है।”