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  • तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: विजय की TVK को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा तेज, मलेशियाई पीएम ने बताया ऐतिहासिक बदलाव

    तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: विजय की TVK को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा तेज, मलेशियाई पीएम ने बताया ऐतिहासिक बदलाव



    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में बड़ी चर्चा देखने को मिल रही है, हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस तरह की चुनावी जीत और सरकार गठन से जुड़ी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि निर्वाचन आयोग या अधिकृत नतीजों से ही मानी जाती है। फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय राजनीतिक परिदृश्य के अनुसार टीवीके का उदय राज्य की पारंपरिक DMK और AIADMK राजनीति के बीच एक नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके सीटों और सरकार बनाने जैसे दावों पर अलग-अलग स्रोतों में स्पष्टता नहीं है।

    इसी बीच मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का एक सोशल मीडिया बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने विजय को बधाई देते हुए तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव की बात कही है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि तमिल समुदाय के साथ मलेशिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध गहरे रहे हैं और वह उम्मीद करते हैं कि नया नेतृत्व इस रिश्ते को और मजबूत करेगा। उन्होंने विजय के चुनावी नारे “ओरु विरल पुरची” (एक उंगली क्रांति) का उल्लेख करते हुए इसे बदलाव की भावना से जोड़ा।

    अनवर इब्राहिम ने अपने संदेश में यह भी कहा कि विजय लंबे समय तक फिल्मों में भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए दिखे हैं और अब जनता ने उन्हें वास्तविक जीवन में नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है। उन्होंने इसे तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में वर्णित किया।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से DMK और AIADMK के प्रभाव में रही है, और किसी नए राजनीतिक विकल्प का उभरना अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन वास्तविक राजनीतिक स्थिति, सीटों का बंटवारा और सत्ता परिवर्तन को लेकर अंतिम और आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग के प्रमाणित परिणामों पर ही निर्भर करती है।

    कुल मिलाकर यह मामला अभी राजनीतिक चर्चा और दावों के स्तर पर ज्यादा है, जबकि जमीनी राजनीतिक तस्वीर आधिकारिक नतीजों और पुष्टि के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

  • 1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक

    1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है जहां भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। राजधानी भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में हुई अहम बैठक में आने वाले दिनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में प्रदेश स्तर के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर जोर दिया गया।

    इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 1 मई से 30 मई तक व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण सत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं को कुल 11 अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। उनका कहना था कि भाजपा की कार्यप्रणाली में नियमित प्रशिक्षण का विशेष महत्व है और इसी के माध्यम से कार्यकर्ताओं को विचारधारा संगठनात्मक कौशल और जनसंपर्क के तरीकों में दक्ष बनाया जाता है।

    बैठक में डॉ. मोहन यादव सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए। इसके अलावा राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश प्रदेश प्रभारी डॉ महेन्द्र सिंह और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी प्रशिक्षण महाअभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे महत्वपूर्ण घोषणा प्रदेश कार्यसमिति को लेकर सामने आई। हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट संकेत दिए कि नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची जल्द जारी की जाएगी। यह कार्यसमिति आगामी समय में पार्टी के संगठनात्मक फैसलों और राजनीतिक रणनीति का केंद्र होगी। कार्यसमिति के गठन को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्सुकता भी बढ़ गई है क्योंकि इसमें शामिल नाम भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

    खास बात यह है कि नई कार्यसमिति के गठन के बाद उसकी पहली बैठक ऐतिहासिक स्थल ओरछा में आयोजित की जाएगी। यह बैठक भगवान राम के दरबार में आयोजित करने की योजना है जिससे इसे सांस्कृतिक और वैचारिक महत्व भी दिया जा रहा है। पार्टी इसे केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक और प्रेरणादायक शुरुआत के रूप में देख रही है।

    निगम मंडलों में नियुक्तियों को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई बार सभी की सहमति एक नाम पर नहीं बन पाती इसलिए प्रक्रिया में समय लगता है लेकिन सरकार और संगठन योग्य और काबिल लोगों को ही जिम्मेदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध और मतभेद हर युग में रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो भाजपा ने मध्यप्रदेश में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। मई का महीना पार्टी के लिए बेहद अहम रहने वाला है जिसमें प्रशिक्षण अभियान के साथ-साथ नई कार्यसमिति का गठन और उसकी पहली बैठक राजनीतिक रूप से कई संकेत देने वाली होगी।

  • 80 नहीं, पूरे 136 विधायक मेरे साथ: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं पर डीके शिवकुमार का करारा जवाब

    80 नहीं, पूरे 136 विधायक मेरे साथ: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं पर डीके शिवकुमार का करारा जवाब


    बेंगलुरु/नई दिल्ली। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर मची हलचल के बीच उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने एक बड़ा बयान देकर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को नया मोड़ दे दिया है। दिल्ली में पार्टी आलाकमान के साथ बैठकों के दौर के बीच शिवकुमार ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके खेमे में विधायकों की संख्या कम है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि विधानसभा में कांग्रेस के सभी 136 विधायक उनके साथ हैं।

    पिछले कुछ समय से राज्य में ‘पावर-शेयरिंग’ फॉर्मूलेढाई-ढाई साल के कार्यकाल को लेकर कयासों का बाजार गर्म है, खासकर तब जब नवंबर 2025 में सरकार का आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के उस बयान के बाद कि ‘उनके पिता पूरे 5 साल मुख्यमंत्री रहेंगे’, राजनीति और गरमा गई थी। इसी पृष्ठभूमि में शिवकुमार का यह कहना कि136 विधायक मेरे साथ हैं, न केवल उनकी संगठन पर पकड़ को दर्शाता है, बल्कि आलाकमान को भी अपनी ताकत का सीधा संकेत है।

    शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके बीच कोई गोपनीय समझौता नहीं है जो सार्वजनिक न हो। उन्होंने पार्टी नेताओं को चेतावनी भी दी कि नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचता है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि वह दिल्ली में आगामी चुनावोंजैसे असम विधानसभा चुनाव की रणनीति और पार्टी मामलों पर चर्चा करने आए हैं, न कि मुख्यमंत्री की कुर्सी की मांग करने।

    राज्य में विपक्ष भाजपा लगातार कांग्रेस के भीतर चल रहे इस शीतयुद्ध को ‘अस्थिरता’ का नाम दे रहा है। ऐसे में शिवकुमार का ‘136 विधायकों’ वाला बयान पार्टी के भीतर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति भी माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें मार्च 2026 में पेश होने वाले राज्य बजट पर टिकी हैं, जहाँ सिद्धारमैया अपना रिकॉर्ड 17वां बजट पेश करेंगे।

  • PMC चुनाव में सियासी सरगर्मी,अजित पवार से नहीं बनी बात, शरद पवार गुट फिर MVA में वापसी के लिए तैयार

    PMC चुनाव में सियासी सरगर्मी,अजित पवार से नहीं बनी बात, शरद पवार गुट फिर MVA में वापसी के लिए तैयार


    नई दिल्ली। पुणे महानगरपालिका (PMC) चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शरद पवार गुट की एनसीपी (NCP-SP) ने अजित पवार गुट के साथ गठबंधन की बातचीत टूटने के बाद फिर से महाविकास आघाड़ी (MVA) के साथ वार्ता शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार ने शरद पवार गुट की प्रमुख मांगों को ठुकरा दिया और 68 सीटों का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।

    पिछले सात दिनों से दोनों एनसीपी गुटों के बीच संभावित गठबंधन पर चर्चा चल रही थी, लेकिन बातचीत अंततः असफल रही।

    अजित पवार ने जोर देकर कहा कि शरद पवार गुट के समर्थित उम्मीदवार केवल ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न पर ही चुनाव लड़ें। शरद पवार गुट का कहना है कि यदि यह शर्त मान ली जाती तो पुणे शहर में उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाता।

    अजित पवार ने 68 सीटों का प्रस्ताव ठुकराया
    अजित पवार ने तर्क दिया कि 2017 के PMC चुनाव में एनसीपी एकजुट थी, तब केवल 43 सीटें जीती थीं। इसलिए 68 सीटों की मांग अव्यवहारिक है।

    शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता ने कहा, अजित पवार की शर्तों को मान लेना हमारे लिए अस्वीकार्य था, क्योंकि इससे पुणे में हमारे उम्मीदवारों का अस्तित्व ही खत्म हो जाता।

    इस इनकार के बाद सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल सहित NCP-SP के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि PMC चुनाव एमवीए के साथ मिलकर लड़ा जाएगा।

    नतीजतन, पुणे में तीनों पारंपरिक एमवीए सहयोगी दलकांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी-एसपीके बीच नई वार्ता शुरू हो गई है। हालांकि पिंपरी-चिंचवड़ में दोनों एनसीपी गुटों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना बनी हुई है।

    शरद पवार गुट की MVA में वापसी
    पहले शरद पवार गुट और अजित पवार के गठबंधन की संभावना ने एमवीए में दरार पैदा कर दी थी जिसके चलते कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) अलग होकर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे थे। लेकिन अब एनसीपी-एसपी के एमवीए में लौटने से तीनों दलों के बीच समन्वय बैठकें फिर शुरू हो गई हैं।

    अजित पवार ने इस बीच शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे और पुणे में उनके नेतृत्व वाली शिवसेना नेताओं से संपर्क साधा। सूत्रों के मुताबिक एनसीपी की शिवसेना नेता उदय सामंत के साथ भी बातचीत चल रही है और अजित पवार समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • दिल्ली कोर्ट में अर्जी दायर, 1978 के वोटर केस पर सोनिया गांधी पर कार्रवाई की मांग

    दिल्ली कोर्ट में अर्जी दायर, 1978 के वोटर केस पर सोनिया गांधी पर कार्रवाई की मांग


    नई दिल्‍ली । कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के खिलाफ वोट चोरी का मुकदमा दर्ज कराने के लिए एक शख्स ने दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी अर्जी में उस शख्स ने मजिस्ट्रेट कोर्टके उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से साफ तौर पर मना कर दिया गया था। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि भारतीय नागरिकता लेने से तीन साल पहले ही सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया गया था।

    यह केस शुक्रवार को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज (PC Act) विशाल गोगने के सामने आया। जज ने इसे 9 दिसंबर को विचार के लिए लिस्ट करने का आदेश दिया है। यह क्रिमिनल रिवीजन अर्जी विकास त्रिपाठी नाम के एक व्यक्ति ने फाइल की है। त्रिपाठी ने अपनी अर्जी में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACMM) वैभव चौरसिया के 11 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है।

    1983 में भारत की नागरिक बनी थीं सोनिया
    त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली चुनाव क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि वह अप्रैल 1983 में भारत की नागरिक बनी थीं। अर्जी में त्रिपाठी ने अन्य विवरण देते हुए आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम सबसे पहले 1980 में मतदाता सूची में शामिल किया गया था, फिर 1982 में उसे हटा लिया गया था। इसके बाद 1983 में फिर से उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया, जब वह आधिकारिक तौर पर भारत की नागरिक बन गईं।

    कुछ जाली कागजात जमा किए होंगे?
    त्रिपाठी के वकीलों ने आरोप लगाया है कि 1980 में मतदाता सूची में उनका नाम शामिल होने का मतलब है कि तब उन्होंने कुछ जाली कागजात जमा किए थे। वकीलों के मुताबिक यह एक ऐसा केस है जो दिखाता है कि एक संज्ञेय अपराध किया गया है। इससे पहले सितंबर में जज चौरसिया ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि कोर्ट ऐसी जांच नहीं कर सकता क्योंकि इससे संवैधानिक अधिकारियों को सौंपे गए क्षेत्रों में गलत तरीके से उल्लंघन होगा और यह भारत के संविधान के आर्टिकल 329 का उल्लंघन होगा।

  • 40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह

    40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह


    बहरामपुर । TMC के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी जैसी मस्जिद’ (Babri Mosque) बनाने का ऐलान कर बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने भी मस्जिद के निर्माण में हस्तक्षेप करने के इनकार कर दिया है। इसके बाद अब शिलान्यास समारोह को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। समारोह स्थल को एक विशाल कार्यस्थल में बदल दिया गया है जहां शनिवार को बाबरी जैसी मस्जिद का शिलान्यास होगा। जानकारी के मुताबिक समारोह में सऊदी अरब के मौलवियों के आने की संभावना है। वहीं यहां हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों ने समारोह से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

    इससे पहले TMC ने हुमायूं कबीर को पार्टी से निकाल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए इस तरह के आयोजनों के खिलाफ चेतावनी भी जारी की है। हालांकि कबीर राजनीतिक घटनाक्रम और प्रशासनिक दबाव से बेपरवाह दिखे। कबीर ने पत्रकारों से कहा है कि शनिवार को मोरादघी के पास 25 बीघा जमीन पर लगभग तीन लाख लोग इकट्ठा होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कई राज्यों के धार्मिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। कबीर ने बटुआ, “सऊदी अरब से दो काजी सुबह कोलकाता हवाई अड्डे से एक विशेष काफिले में पहुंचेंगे।”

    60-70 लाख रुपए खानपान में खर्च
    राज्य के एकमात्र उत्तर-दक्षिण मुख्य राजमार्ग एनएच-12 के किनारे स्थित विशाल आयोजन स्थल पर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। भीड़ के लिए शाही बिरयानी बनाने के लिए मुर्शिदाबाद की सात खानपान एजेंसियों को अनुबंध दिया गया है। विधायक के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि मेहमानों के लिए लगभग 40,000 पैकेट और स्थानीय लोगों के लिए 20,000 पैकेट बनाए जा रहे हैं, जिससे सिर्फ भोजन का खर्च 30 लाख रुपए से अधिक हो जाएगा। उन्होंने कहा, “आयोजन स्थल का बजट लगभग 60-70 लाख रुपए होगा।”

    मंच पर 400 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था
    धान के खेतों के ऊपर बना मुख्य मंच इस विशाल आयोजन का सबसे स्पष्ट प्रतीक बन गया है। करीबी सहयोगी ने बताया कि 150 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा यह मंच लगभग 400 मेहमानों के बैठने की क्षमता के साथ 10 लाख रुपए की अनुमानित लागत से बनाया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि लगभग 3,000 स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने, मार्गों को नियंत्रित करने और NH-12 पर अवरोधों को रोकने के लिए तैनात किए गए हैं। इनमें से 2,000 ने शुक्रवार सुबह से ही काम शुरू कर दिया था।

    कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा समारोह
    कबीर ने कहा कि समारोह पूर्वाह्न 10 बजे कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा, जिसके बाद दोपहर में आधारशिला समारोह होगा। उन्होंने कहा, “औपचारिकताएं दो घंटे पहले शुरू हो जाएंगी। पुलिस के निर्देशानुसार शाम चार बजे तक मैदान खाली कर दिया जाएगा।”

    3000 पुलिसकर्मी तैनात
    इस बीच शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था और NH-12 पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हुमायूं कबीर की टीम के साथ कई दौर की चर्चा की। जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बेलडांगा और रानीनगर थाना क्षेत्र में लगभग 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।