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  • शहीद दिवस रैली से ठीक पहले कामरहाटी के कद्दावर विधायक ने छोड़ी पार्टी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगा कर दी खुली चुनौती

    शहीद दिवस रैली से ठीक पहले कामरहाटी के कद्दावर विधायक ने छोड़ी पार्टी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगा कर दी खुली चुनौती

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस में आगामी 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से ठीक पहले एक बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सपरिवार समन जारी किए जाने के बाद कामरहाटी विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ और कद्दावर विधायक मदन मित्रा ने मंगलवार रात को ही पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व से दूरी बना ली और सुबह होते ही ममता बनर्जी के आधिकारिक कालीघाट गुट को औपचारिक रूप से अलविदा कह दिया। तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद मदन मित्रा ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कई सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य का सियासी पारा पूरी तरह से गरमा गया है।

    एक प्रमुख बांग्ला समाचार चैनल को दिए गए अपने विस्तृत साक्षात्कार में पूर्व तृणमूल नेता ने पार्टी के भीतर व्याप्त सांगठनिक ढांचे और नेतृत्व की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में खुले मंच से यह दावा किया कि वह इस तथ्य को पूरी तरह साबित कर सकते हैं कि वर्तमान सत्ता पक्ष की टीम में शामिल प्रत्येक दस में से आठ लोग भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। उन्होंने स्वयं को पूरी तरह से पाक-साफ बताते हुए नेतृत्व को खुली चुनौती दी कि यदि कोई भी व्यक्ति उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमाणित कर देता है, तो वह राजनीति छोड़ने के साथ-साथ अत्यंत कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने विपक्ष के खेमे में जाने और वहां मौजूद अन्य नेताओं के संदर्भ में पूछे गए सवालों पर स्पष्ट किया कि परिस्थितिजन्य राजनीति के तहत बड़े सांगठनिक बदलाव अब अवश्यंभावी हो चुके हैं।

    अभिषेक बनर्जी के पार्टी में तेजी से बढ़ते प्रभाव और उनके काम करने के तौर-तरीकों को मुख्य निशाना बनाते हुए मदन मित्रा ने भूतकाल की राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अभिषेक बनर्जी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था, तब उनके सामने संगठन में पार्थ चटर्जी, मुकुल रॉय और सुब्रत बख्शी जैसे अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ चेहरे मौजूद थे। आरोप के अनुसार, इन वरिष्ठ चेहरों को आगे रखकर पृष्ठभूमि से पूरी तरह से समानांतर सत्ता चलाने का प्रयास किया गया। मित्रा ने वर्तमान सांगठनिक गतिविधियों को बेहद नकारात्मक बताते हुए आरोप लगाया कि समकालीन राजनीति में इतनी जटिल और रणनीतिक प्रवृत्तियां किसी अन्य नेता में नहीं हैं और उनके सामने विरोधी राजनीतिक दल जैसे माकपा और भाजपा के नेता भी काफी पीछे नजर आते हैं।

    राजनीतिक हलकों में इस प्रकार के तीखे बयानों के बाद संभावित सुरक्षा खतरों और पार्टी की ओर से होने वाली किसी भी जवाबी कार्रवाई के डर के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का मदन मित्रा ने बेहद बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनके मन से किसी भी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है और वह मानसिक रूप से पूरी तरह शांत हैं। उन्होंने आगे पलटवार करते हुए कहा कि उनके ऊपर किसी भी प्रकार का दबाव बनाने या संगठनात्मक हमला करने का साहस विरोधियों में नहीं है। अभिषेक बनर्जी के क्षेत्रीय जनाधार पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके स्थानीय क्षेत्र के नागरिक भी उनके साथ खड़े नहीं हैं, जिसके संबंध में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जिसका आज तक संगठन की ओर से कोई आधिकारिक खंडन जारी नहीं किया जा सका है।

  • महाराष्ट्र के मंत्री का आमिर खान पर सीधा हमला: तीसरी शादी को लेकर दिया विवादित बयान, सियासी गलियारों में मची हलचल

    महाराष्ट्र के मंत्री का आमिर खान पर सीधा हमला: तीसरी शादी को लेकर दिया विवादित बयान, सियासी गलियारों में मची हलचल


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता आमिर खान एक बार फिर अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को लेकर बड़े राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता नितेश राणे ने आमिर खान की कथित तीसरी शादी को लेकर बेहद तीखा और आक्रामक रुख अपनाया है। राणे ने अभिनेता पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें ‘लव जिहाद का ब्रांड एंबेसडर’ तक कह डाला है। इस बयान के सामने आने के बाद फिल्म उद्योग से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में एक नई बहस छिड़ गई है और सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा नेता नितेश राणे अपने बेबाक और कड़े बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान आमिर खान के पिछले विवाहों और हालिया चर्चाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ऐसी शादियां समाज में एक खास तरह का संदेश देती हैं, जिसे वे स्वीकार्य नहीं मानते। राणे ने अभिनेता के निजी फैसलों को सामाजिक और धार्मिक चश्मे से देखते हुए उन पर यह गंभीर टिप्पणी की है। महाराष्ट्र की राजनीति में इस बयान को लेकर अचानक से तापमान बढ़ गया है।

    आमिर खान की बात करें तो वे अपनी बेहतरीन फिल्मों और अभिनय के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अपनी शादियों और बयानों के कारण वे अक्सर ट्रोल्स और कुछ राजनीतिक संगठनों के निशाने पर भी रहे हैं। उनकी पहली शादी रीना दत्ता और दूसरी शादी किरण राव से हुई थी, और दोनों ही शादियां आपसी सहमति से तलाक के मोड़ पर खत्म हुईं। हाल के दिनों में उनकी तीसरी शादी से जुड़ी कुछ खबरें और अफवाहें मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तैर रही थीं, जिसने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

    इस पूरे मामले पर अभी तक आमिर खान या उनके आधिकारिक प्रवक्ताओं की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमतौर पर आमिर खान ऐसे व्यक्तिगत विवादों पर चुप्पी साधे रखना ही पसंद करते हैं, लेकिन फिल्म जगत के कई समर्थकों और प्रशंसकों ने नितेश राणे के इस बयान को पूरी तरह से गैर-जरूरी और किसी के निजी जीवन में अत्यधिक हस्तक्षेप बताया है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी भाजपा पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयानों का सहारा लेने का आरोप लगाया है।

    चुनावों और राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस तरह के संवेदनशील मुद्दों का उछलना कोई नई बात नहीं है। नितेश राणे के इस बयान ने मनोरंजन जगत और राजनीति के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर से उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद महज एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर शांत हो जाता है या फिर इस पर बॉलीवुड और अन्य राजनीतिक दलों की तरफ से कोई बड़ी और संगठित प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

  • सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और ऑनलाइन लीक के नुकसान से उबरी 'जन नायकन', 'ए' सर्टिफिकेट के साथ सिनेमाघरों में दस्तक देने को तैयार थलपति विजय की अंतिम फिल्म

    सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और ऑनलाइन लीक के नुकसान से उबरी 'जन नायकन', 'ए' सर्टिफिकेट के साथ सिनेमाघरों में दस्तक देने को तैयार थलपति विजय की अंतिम फिल्म


    नई दिल्ली ।
    तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनेता थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित और आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने महीनों से चले आ रहे लंबे इंतजार और विवादों के बाद आखिरकार इस फिल्म को हरी झंडी दे दी है। सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने के साथ ही फिल्म की संभावित रिलीज डेट भी सामने आ गई है, जिसके अनुसार यह फिल्म आगामी 24 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। यह फिल्म थलपति विजय के अभिनय करियर की अंतिम फिल्म है, जिसे देखने के लिए उनके प्रशंसक लंबे समय से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

    सेंसर बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘जन नायकन’ को सीबीएफसी की तरफ से ‘ए’ (वयस्क) सर्टिफिकेट जारी किया गया है। इसके साथ ही फिल्म की समयावधि यानी रनटाइम को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है, यह फिल्म 3 घंटे और 3 मिनट लंबी होने वाली है। हालांकि, सेंसर वेबसाइट पर जारी किए गए इस सर्टिफिकेट में फिल्म की मुख्य कहानी की रूपरेखा या बोर्ड द्वारा लगाए गए कट्स और बदलावों के बारे में फिलहाल कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। इस सर्टिफिकेशन के पूरा होने के साथ ही फिल्म की रिलीज के रास्ते में आ रही सबसे बड़ी कानूनी अड़चन दूर हो गई है।

    इस फिल्म को थलपति विजय की आखिरी फिल्म इसलिए माना जा रहा है क्योंकि वे अब अभिनय की दुनिया को पूरी तरह अलविदा कहकर एक पूर्णकालिक राजनेता के रूप में सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बना चुके हैं। अभिनेता ने हाल ही में 10 मई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, जिसके बाद से उनके राजनीतिक दायित्व काफी बढ़ गए हैं। यही वजह है कि फैंस के बीच इस फिल्म को लेकर एक अलग ही स्तर का उत्साह और भावुकता देखने को मिल रही है। प्रशंसक इस बात से बेहद खुश हैं कि कई महीनों से अधर में लटकी उनकी पसंदीदा स्टार की अंतिम फिल्म अब बड़े पर्दे पर प्रदर्शित होने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    ‘जन नायकन’ में थलपति विजय के साथ-साथ मनोरंजन जगत के कई अन्य बड़े और लोकप्रिय चेहरे भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म के कलाकारों की सूची में बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल, अभिनेत्री पूजा हेगड़े और ममिता बैजू जैसे नाम शामिल हैं, जो फिल्म के आकर्षण को और ज्यादा बढ़ाते हैं। हालांकि मेकर्स की ओर से अभी रिलीज डेट का कोई भव्य आधिकारिक ऐलान होना बाकी है, लेकिन व्यापार विश्लेषकों और अंदरूनी सूत्रों की रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स ने 24 जुलाई को ही सिनेमाघरों में उतारने की पूरी तैयारी कर ली है।

    इस फिल्म का रिलीज तक पहुंचने का सफर बेहद उतार-चढ़ाव और भारी आर्थिक नुकसान से भरा रहा है। मूल रूप से यह फिल्म इसी साल की शुरुआत में 9 जनवरी 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सैन्य बलों के चित्रण और कुछ दृश्यों से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की शिकायतों के बाद सेंसर बोर्ड ने इसे रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया था। इस विवाद के बीच 9 अप्रैल को यह फिल्म ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लीक हो गई, जिससे मेकर्स को करीब 300 से 400 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा और अमेजन प्राइम वीडियो ने भी अपनी 120 करोड़ रुपये की बड़ी ओटीटी डील रद्द कर दी थी। इन सभी चुनौतियों को पार कर अब यह फिल्म सिनेमाघरों में आने को तैयार है।

  • बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

    बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

    नई दिल्ली । बिहार की सियासत में पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहा हाई-प्रोफाइल विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था को दोबारा चाक-चौबंद करने का आदेश जारी किया है। सरकार के नए फैसले के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ नेताओं की ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा को तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया है। इसके साथ ही दोनों नेताओं को राज्य सरकार की ओर से पुनः बुलेटप्रूफ गाड़ियां भी उपलब्ध करा दी गई हैं, जिससे इस मुद्दे पर जारी गतिरोध के फिलहाल थमने के आसार हैं।

    इस पूरे प्रशासनिक विवाद की शुरुआत कुछ समय पहले हुई थी, जब बिहार सरकार के गृह विभाग ने वीआईपी नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा की थी। इस समीक्षा बैठक के बाद सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मिली ‘Z+’ श्रेणी की सुरक्षा को हटाने का निर्णय लिया था। सरकार के इस कदम के बाद बिहार की राजनीति में अचानक उबाल आ गया था और विपक्षी खेमे ने इस फैसले को लेकर सत्तापक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। राष्ट्रीय जनता दल ने इस प्रशासनिक कटौती को पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया था।

    सुरक्षा में की गई इस कटौती के विरोध में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने एक कड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपनी बची हुई शेष सरकारी सुरक्षा को भी प्रशासन को वापस लौटा दिया था। दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी सुरक्षा सरेंडर किए जाने की घटना ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी थी। राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि सत्तापक्ष जानबूझकर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रहा है और उनके जीवन को खतरे में डालने का प्रयास किया जा रहा है।

    यह विवाद उस समय और अधिक गहरा गया जब बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। तेजस्वी यादव ने सरकार के इस फैसले को विपक्ष के साथ किया जाने वाला खुला भेदभाव करार दिया था और एकजुटता दिखाते हुए अपनी स्वयं की सरकारी सुरक्षा भी प्रशासन को वापस सौंप दी थी। एक साथ तीन शीर्ष नेताओं द्वारा सुरक्षा लौटाए जाने के बाद सरकार चौतरफा दबाव में आ गई थी और इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर नए सिरे से विचार करना अनिवार्य हो गया था।

    विपक्ष के इस कड़े और आक्रामक रुख को देखते हुए आखिरकार बिहार सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और अपने पुराने फैसले की समीक्षा करनी पड़ी। सरकार के नए आदेश के तहत अब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को न सिर्फ ‘Z’ श्रेणी की कड़े घेरे वाली सुरक्षा वापस मिल गई है, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक बुलेटप्रूफ वाहन भी उनके काफिले में दोबारा शामिल कर दिए गए हैं। इस निर्णय के बाद राजद कैंप में इसे विपक्ष की नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में आगामी राजनीतिक समीकरणों और कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने इस विवाद को और अधिक लंबा न खींचना ही उचित समझा। हालांकि सुरक्षा बहाली के इस नए फैसले के बाद फिलहाल दोनों पक्षों के बीच जारी बयानबाजी और टकराव पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है।