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  • जुलाई 2026 की ऑरमैक्स लिस्ट में प्रभास सबसे लोकप्रिय अभिनेता, शाहरुख खान और सलमान खान की रैंकिंग भी जानिए

    जुलाई 2026 की ऑरमैक्स लिस्ट में प्रभास सबसे लोकप्रिय अभिनेता, शाहरुख खान और सलमान खान की रैंकिंग भी जानिए

    नई दिल्ली ।जुलाई 2026 के लिए जारी लोकप्रिय भारतीय अभिनेताओं की सूची में दक्षिण भारतीय सिनेमा के सितारों का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला है। लोकप्रियता के आधार पर तैयार की गई इस सूची में बाहुबली स्टार प्रभास ने लगातार अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए पहला स्थान हासिल किया है। वहीं थलापति विजय दूसरे और अल्लू अर्जुन तीसरे नंबर पर रहे हैं।

    प्रभास की लोकप्रियता पिछले कई महीनों से लगातार चर्चा में रही है और इस सूची में भी उन्होंने अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। उनकी फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच बनी उत्सुकता और बड़े स्तर पर उनकी फैन फॉलोइंग उनकी लोकप्रियता को मजबूत बनाए हुए है। इस बार भी कोई अन्य अभिनेता उन्हें पहले स्थान से पीछे नहीं कर सका।

    दूसरे स्थान पर थलापति विजय हैं। तमिल सिनेमा के प्रमुख सितारों में शामिल विजय की आगामी फिल्म जन नायकन को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी चर्चा है। फिल्म से जुड़ी खबरों और अभिनेता की लोकप्रियता का असर उनकी रैंकिंग में भी दिखाई देता है। वह सूची में प्रभास के बाद दूसरे स्थान पर बने हुए हैं।

    अल्लू अर्जुन ने इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया है। पुष्पा फ्रेंचाइजी की सफलता के बाद उनकी लोकप्रियता देशभर में और मजबूत हुई है। जुलाई की रैंकिंग में उन्होंने तीसरे स्थान पर जगह बनाई, जिससे शीर्ष तीन में दक्षिण भारतीय सिनेमा के तीन बड़े सितारों का कब्जा रहा।

    बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में शामिल शाहरुख खान चौथे स्थान पर हैं। किंग खान की लोकप्रियता लंबे समय से देश और विदेश में कायम है, लेकिन इस बार वह शीर्ष तीन में जगह नहीं बना सके। इसके बावजूद उनका चौथा स्थान उनकी व्यापक लोकप्रियता को दर्शाता है।

    पांचवें नंबर पर तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार महेश बाबू हैं। उनके बाद छठे स्थान पर राम चरण को जगह मिली है। आरआरआर जैसी चर्चित फिल्म से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले राम चरण की लोकप्रियता भी लगातार बनी हुई है।

    सातवें स्थान पर अभिनेता सूर्या हैं। तमिल सिनेमा में अपनी अलग पहचान रखने वाले सूर्या ने भी शीर्ष दस में अपनी जगह बनाए रखी। उनके बाद बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान आठवें स्थान पर रहे। हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारों में गिने जाने वाले सलमान की रैंकिंग इस बार शाहरुख खान से चार स्थान नीचे रही।

    नौवें नंबर पर अक्षय कुमार को जगह मिली है। अभिनेता इन दिनों वेलकम टू द जंगल जैसी फिल्म को लेकर चर्चा में हैं। उनकी फिल्मों और लंबे करियर के कारण दर्शकों के बीच उनकी पहचान लगातार मजबूत बनी हुई है।

    सूची में दसवां स्थान जूनियर एनटीआर ने हासिल किया है। आरआरआर के बाद उनकी लोकप्रियता को देशभर में नई पहचान मिली है। शीर्ष दस में उनकी मौजूदगी बताती है कि दक्षिण भारतीय कलाकारों की लोकप्रियता हिंदी भाषी दर्शकों के बीच भी व्यापक रूप से बढ़ी है।

    जुलाई 2026 की इस सूची में शीर्ष दस में प्रभास, विजय, अल्लू अर्जुन, महेश बाबू, राम चरण, सूर्या और जूनियर एनटीआर जैसे सात दक्षिण भारतीय सितारे शामिल हैं। वहीं शाहरुख खान, सलमान खान और अक्षय कुमार तीन बॉलीवुड अभिनेताओं के रूप में जगह बनाने में सफल रहे। इससे मौजूदा दौर में भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय सितारों की बदलती तस्वीर साफ दिखाई देती है।

  • भारत की वैश्विक छवि पर प्यू सर्वे का बड़ा खुलासा, श्रीलंका में 79 प्रतिशत सकारात्मक राय, पाकिस्तान में सिर्फ 7 प्रतिशत समर्थन

    भारत की वैश्विक छवि पर प्यू सर्वे का बड़ा खुलासा, श्रीलंका में 79 प्रतिशत सकारात्मक राय, पाकिस्तान में सिर्फ 7 प्रतिशत समर्थन

    नई दिल्ली । भारत की वैश्विक छवि को लेकर किए गए एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे में अलग-अलग देशों के लोगों की राय में बड़ा अंतर सामने आया है। 36 देशों में किए गए अध्ययन के मुताबिक भारत के प्रति दुनिया की औसत सकारात्मक धारणा 45 प्रतिशत रही, जबकि 41 प्रतिशत लोगों ने नकारात्मक राय व्यक्त की। आंकड़े बताते हैं कि भारत की लोकप्रियता कई देशों में मजबूत है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में उसकी छवि को लेकर मतभेद भी स्पष्ट हैं।

    सर्वे में भारत के पड़ोसी देशों की राय सबसे ज्यादा चर्चा में रही। श्रीलंका में भारत के प्रति सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों का अनुपात 79 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा भारत के लिए सर्वे में शामिल देशों के बीच सबसे मजबूत सकारात्मक प्रतिक्रियाओं में शामिल है। इसके विपरीत पाकिस्तान में केवल 7 प्रतिशत लोगों ने भारत के बारे में सकारात्मक राय व्यक्त की।

    भारत की बेहतर छवि केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रही। केन्या और ब्रिटेन में भी लगभग दस में सात लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक रुख जताया। जर्मनी, इजरायल, इटली, स्वीडन, जापान और थाईलैंड में भी भारत को लेकर सकारात्मक सोच रखने वालों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही।

    यूरोपीय देशों में भारत की छवि में पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले सुधार भी दर्ज किया गया है। ब्रिटेन में एक वर्ष के दौरान भारत के प्रति सकारात्मक राय में 11 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। जर्मनी में सकारात्मक धारणा छह प्रतिशत अंक बढ़ी। फ्रांस में भी भारत के प्रति सकारात्मक राय 2023 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गई।

    श्रीलंका में भारत की छवि में विशेष सुधार दिखाई दिया। वहां 2024 के मुकाबले भारत के प्रति सकारात्मक राय में 14 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे दोनों देशों के बीच सामाजिक और क्षेत्रीय स्तर पर भारत की स्वीकार्यता की एक मजबूत तस्वीर सामने आती है।

    हालांकि अमेरिका में भारत को लेकर तस्वीर अपेक्षाकृत कमजोर रही। वहां 45 प्रतिशत लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की, जबकि 50 प्रतिशत लोगों की राय नकारात्मक रही। यह भारत के लिए 2008 के बाद अमेरिका में दर्ज सबसे कम सकारात्मक रेटिंग बताई गई है। वर्ष 2023 में अमेरिका में भारत को लेकर 51 प्रतिशत सकारात्मक राय सामने आई थी।

    अमेरिका में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भी भारत को लेकर अंतर दिखाई दिया। डेमोक्रेट समर्थकों में 50 प्रतिशत लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि रिपब्लिकन समर्थकों में यह आंकड़ा 42 प्रतिशत रहा। इससे अमेरिकी समाज में भारत की छवि को लेकर राजनीतिक विभाजन का संकेत मिलता है।

    सर्वे में भारत के वैश्विक प्रभाव को लेकर भी अमेरिकी नागरिकों से सवाल किया गया। 54 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों ने माना कि दुनिया में भारत का प्रभाव लगभग पहले जैसा ही है। वहीं 30 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भारत का प्रभाव बढ़ा है, जबकि 13 प्रतिशत ने इसके कम होने की बात कही।

    तुर्किये में भारत के प्रति सकारात्मक राय केवल 15 प्रतिशत रही। वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में यह आंकड़ा 18 प्रतिशत था। इजरायल में भी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर राय में अंतर सामने आया, जहां दक्षिणपंथी विचार रखने वालों में सकारात्मक धारणा 68 प्रतिशत और वामपंथी विचार रखने वालों में 46 प्रतिशत रही।

    कुल मिलाकर सर्वे भारत की वैश्विक छवि की मिश्रित तस्वीर पेश करता है। जहां श्रीलंका, ब्रिटेन, जर्मनी और कई अन्य देशों में भारत के प्रति सकारात्मक धारणा मजबूत हुई है, वहीं पाकिस्तान, तुर्किये और अमेरिका जैसे देशों में अलग रुझान दिखाई देता है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता एक समान नहीं है और अलग-अलग देशों में उसकी छवि क्षेत्रीय संबंधों, राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक धारणा के अनुसार बदल रही है।

  • ट्रंप बोले… इजराइल में मेरी लोकप्रियता की रेटिंग 99%…. दो साल बाद वहां जाकर लडूंगा PM चुनाव

    ट्रंप बोले… इजराइल में मेरी लोकप्रियता की रेटिंग 99%…. दो साल बाद वहां जाकर लडूंगा PM चुनाव


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने मंगलवार को फिर एक ऐसा दावा किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय जगत में हलचल पैदा हो गई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि इज़रायल (Israel) में उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत है और मजाकिया अंदाज में कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल पूरा होने के बाद (2028 में) वह वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव (Prime Minister’s post, election) लड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें एक ताज़ा सर्वेक्षण में बेहद ऊंची रेटिंग मिली है। उन्होंने कहा, “तो शायद यह काम पूरा करने के बाद, मैं इज़रायल जाऊंगा और प्रधानमंत्री पद का चुनाव (Prime Minister’s post, election) लड़ूंगा। आज सुबह ही एक जनमत सर्वेक्षण आया है, जिसमें मेरी रेटिंग 99% है।”

    जब पत्रकारों ने उनसे ईरान पर संभावित हमले के बारे में पूछा, तो ट्रंप ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य के साथ किसी समझौते पर पहुंचने की उन्हें “कोई जल्दी नहीं है।” उन्होंने कहा, “हमें होर्मुज समुद्री मार्ग को खोलना होगा, वह तुरंत खुल जाएगा, इसलिए हम इसे एक मौका देंगे। मुझे कोई जल्दी नहीं है। हर कोई कह रहा है, ‘ओह, मध्यावधि चुनाव आ रहे हैं।’ आदर्श रूप से, मैं चाहूंगा कि कम से कम लोग मारे जाएं, न कि बहुत ज़्यादा।”


    नेतन्याहू बहुत अच्छे इंसान

    पत्रकार लगातार ट्रंप से पूछते रहे कि उन्होंने इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस हमले के बारे में क्या कहा है? इस पर रिपब्लिकन नेता ने जवाब दिया, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं; वह वही करेंगे जो मैं उनसे करवाना चाहूंगा। और वह एक बेहतरीन व्यक्ति हैं… यह मत भूलिए कि वह युद्धकालीन प्रधानमंत्री रह चुके हैं।” उन्होंने यह दावा भी किया कि इज़रायल में नेतन्याहू के साथ “सही बर्ताव नहीं किया जाता है। ट्रंप ने कल ही ईरान को एक नई चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि “एक और बड़ा हमला” हो सकता है, क्योंकि दोनों देश एक स्थायी शांति समझौते की शर्तों को लेकर एक गंभीर गतिरोध पर पहुंच गए हैं।


    ट्रंप और नेतन्याहू पर 58 मिलियन डॉलर का इनाम?

    इस बीच, खबरों के अनुसार ईरान, ट्रंप और नेतन्याहू पर 58 मिलियन डॉलर का इनाम रखने पर विचार-विमर्श कर रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अज़ीज़ी ने घोषणा की है कि यह समिति “इस्लामिक गणराज्य के सैन्य और सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कार्रवाई” नामक एक विधेयक तैयार कर रही है। ईरान वायर और द टेलीग्राफ यूके की रिपोर्टों के अनुसार, इस विधेयक के माध्यम से किसी भी ऐसे व्यक्ति या संस्था को 50 मिलियन यूरो (लगभग 58.23 मिलियन डॉलर) की राशि का भुगतान औपचारिक रूप से सुनिश्चित किया जाएगा, जो अमेरिका और इज़रायल के इन नेताओं की हत्या करेगा। ईरानी संसद 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमलों के लिए,जिनमें तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए थे,ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या के लिए इनाम देने वाले एक बिल पर मतदान करने वाली है।

  • US: जानें क्यों घट रही ट्रंप की लोकप्रियता…… अप्रूवल रेटिंग घटी

    US: जानें क्यों घट रही ट्रंप की लोकप्रियता…… अप्रूवल रेटिंग घटी


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की लोकप्रियता (Popularity) में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। ट्रंप को लेकर जारी एक ताजा सर्वे में उनकी अप्रूवल रेटिंग (Approval rating) घटकर 34% पर पहुंच गई, जो उनके मौजूदा कार्यकाल का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट पिछले सर्वे के 36% से भी कम है और जनवरी 2025 में पद संभालने के समय के मुकाबले काफी नीचे आ चुकी है। सर्वे के अनुसार, महंगाई और ईरान के साथ चल रहे युद्ध ने जनता की नाराज़गी को और बढ़ा दिया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान युद्ध का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। इस संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे पेट्रोल की कीमतों में 40% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों में इजाफे ने अमेरिकी नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। सर्वे में केवल 22% लोगों ने ट्रंप के महंगाई से निपटने के तरीके को सही माना, जो यह दिखाता है कि आर्थिक मुद्दों पर सरकार के प्रति भरोसा कम हो रहा है।

    किस बात से नाराज है अमेरिका की जनता
    ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर भी अमेरिकी जनता में खासा विरोध देखा जा रहा है। सर्वे के अनुसार, केवल 34% लोग इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसके खिलाफ हैं। हालांकि, ट्रंप को रिपब्लिकन समर्थकों का मजबूत समर्थन अभी भी मिला हुआ है, जहां 78% लोग उनके साथ खड़े हैं। इसके बावजूद, अर्थव्यवस्था संभालने को लेकर उनके अपने समर्थकों में भी असंतोष बढ़ रहा है।

    इस गिरती लोकप्रियता का असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है। सर्वे में यह संकेत मिला है कि स्वतंत्र मतदाताओं के बीच डेमोक्रेट्स को बढ़त मिल रही है और कई मतदाताओं ने अभी भी कोई फैसला नहीं लिया है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले की कोशिश का भी जनता की राय पर खास असर नहीं पड़ा है। ऐसे में माना जा रहा है कि रिपब्लिकन पार्टी के लिए आगामी मध्यावधि चुनावों में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

  • US में लोकप्रियता की तुलना… एक्सपर्ट बोले- मोदी 10 साल से सत्ता में… ट्रंप 3 साल में हो जाएंगे बाहर

    US में लोकप्रियता की तुलना… एक्सपर्ट बोले- मोदी 10 साल से सत्ता में… ट्रंप 3 साल में हो जाएंगे बाहर


    वाशिंगटन।
    वेनेजुएला (Venezuela) के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की निगाहें दूसरे देशों पर भी हैं। वहीं, इसी बीच वह भारत (India) को टैरिफ को लेकर फिर से धमकाते नजर आ रहे हैं। अब जानकारों का मानना है कि वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद थोड़े समय के लिए मिल रहे ये फायदे ट्रंप के पद छोड़ने के बाद खत्म हो सकते हैं। साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की लोकप्रियता की तुलना की जा रही है।

    जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर को अमेरिका को होने वाले लॉन्ग टर्म फायदों पर संदेह है। उन्होंने कहा कि जब ट्रंप 2029 में दफ्तर छोड़ेंगे, तो ये थोड़े समय के फायदों पर विराम लग सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की तरह नहीं है, जहां प्रधानमंत्री मोदी लोकप्रियता के कारण 10 सालों से ज्यादा सत्ता में है। वहीं, ओवल ऑफिस में ट्रंप का कार्यकाल सीमित है।

    उन्होंने कहा कि चीन, रूस और भारत के विपरीत अमेरिका में हर चार साल में नेतृत्व बदलता है। उन्होंने कहा कि इसके चलते अमेरिका में सरकारी उपायों में निरंतरता नहीं रह जाती है और नतीजों में समय लगता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगला राष्ट्रपति ट्रंप के किए कई कामों को पलट सकता है, ठीक वैसे ही जैसे ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति के कामों के साथ किया।

    ब्रेमर ने कहा, ‘ट्रंप ने जो किया उसे अगला राष्ट्रपति बदल भी सकता है। यह शी जिनपिंग नहीं है, यह मोदी भी नहीं है जो 10 साल से ज्यादा समय से देश चला रहे हैं और लोकतंत्र में लोकप्रिय बने हुए हैं। यह ट्रंप हैं, जो 80 साल के हैं और अलोकप्रिय हैं और 3 साल में पद छोड़ देंगे।’

    तेल पर बोले
    ब्रेमर ने कहा कि तेल की वैश्विक दरें, वेनेजुएला में राजनीतिक स्थिरता और ट्रंप के बाद क्या होगा, ये सब तय करेंगे कि काराकास के तेल भंडार का अमेरिका को फायदा हो रहा है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘और तेल। आप जानते हैं कि वेनेजुएला अभी सिर्फ 8 लाख बैरल रोज बना रहा है। यह आंकड़ा 30 लाख बैरल हुआ करता था। इसे बढ़ाने के लिए आपको राजनीतिक स्थिरता चाहिए।’

    उन्होंने कहा, ‘आपको एक ऐसे आर्थिक पर्यावरण की जरूरत है, जिसमें तेल कंपनियां भरोसा कर सकें। आपको उस भरोसे की जरूरत है कि वो बैरल फायदेमंद होंगी और अभी एनर्जी की कीमतें काफी कम हैं।’

    उन्होंने वेनेजुएला से तेल निकाले जाने को लेकर कहा कि तेल कंपनियों का निवेश चक्र, दफ्तर में अमेरिकी राष्ट्रपतियों के रहने से ज्यादा होता है। उन्होंने कहा, ‘आपको इस भरोसे की भी जरूरत होगी कि जिस राजनीतिक व्यवस्था का समर्थन ट्रंप कर रहे हैं, वो 2029 में उनके जाने के बाद भी बनी रहेगी।’