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  • शिवपुरी में 27 वर्षीय विवाहिता ससुराल में फंदे पर लटकी मिली, हाथ के निशान को लेकर कही थी परेशान करने वाली बात

    शिवपुरी में 27 वर्षीय विवाहिता ससुराल में फंदे पर लटकी मिली, हाथ के निशान को लेकर कही थी परेशान करने वाली बात

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर के देहात थाना क्षेत्र के गौशाला इलाके में 27 वर्षीय विवाहिता राधा अपनी ससुराल में फंदे पर लटकी मिली। घटना गुरुवार दोपहर की बताई गई है। घटना के समय वह घर में अकेली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल विवाहिता की मौत के कारण स्पष्ट नहीं हुए हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    जानकारी के अनुसार, गौशाला क्षेत्र में रहने वाले सुखवीर धाकड़ एक निजी स्कूल में शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी राधा से करीब एक साल पहले हुई थी। गुरुवार को वह रोज की तरह स्कूल में पढ़ाने के लिए गए थे। दोपहर करीब तीन बजे उन्हें सूचना मिली कि उनकी पत्नी ने फंदे पर लटककर जान दे दी है। सूचना मिलने के बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।

    बताया गया कि घटना के समय घर में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था और राधा अकेली थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि किन परिस्थितियों में उसकी मौत हुई। शुरुआती जानकारी में पति ने राधा के हाथ पर मौजूद एक निशान का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, राधा अक्सर अपने हाथ के उस निशान को देखकर कहती थी कि वह ज्यादा दिनों तक उनके साथ नहीं रह पाएगी। हालांकि, इस बात का घटना से क्या संबंध था, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

    मामले में पुलिस सभी संबंधित पहलुओं की जांच कर रही है। केवल हाथ पर निशान होने या उससे जुड़ी किसी बात के आधार पर मौत का कारण तय नहीं किया जा सकता। पुलिस के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के सदस्यों के बयान से घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि घटना से पहले विवाहिता की स्थिति कैसी थी और क्या किसी तरह की परेशानी सामने आई थी।

    देहात थाना प्रभारी विकास यादव ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान मिलने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस की ओर से मौत को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है।

    घटना के बाद क्षेत्र में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विवाहिता की शादी को करीब एक वर्ष ही हुआ था, इसलिए पुलिस उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटनाक्रम की जांच कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि राधा की मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच पूरी होने और आवश्यक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलेगा कारण

    कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलेगा कारण

    मध्य प्रदेश । के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा के आठ महीने के एक शावक की मौत हो गई है। सोमवार को नियमित निगरानी के दौरान वन विभाग की टीम को आशा के साथ पांच के बजाय चार शावक दिखाई दिए। एक शावक के गायब होने की जानकारी मिलने के बाद उसकी तलाश शुरू की गई। कुछ समय बाद तलाशी अभियान के दौरान उसका शव बरामद कर लिया गया। फिलहाल शावक की मौत की वजह स्पष्ट नहीं हुई है और अधिकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शावक के दिखाई नहीं देने पर पार्क में उसकी तलाश के लिए अभियान चलाया गया। इसके तहत वन कर्मियों ने पार्क के बड़े हिस्से में खोजबीन की। तलाशी के दौरान शावक का शव मिलने के बाद उसकी मौत के कारणों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    मादा चीता आशा भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम के तहत नामीबिया से लाए गए चीतों में शामिल है। उसे विशेष विमान के जरिए कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया था। इस साल की शुरुआत में आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया था। इन शावकों के जन्म को देश में चीता पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया था। अब उसके एक शावक की मौत के बाद वन विभाग उसके कारणों की जांच कर रहा है।

    कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शावक की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की वजह के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल किसी निश्चित कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि शावक की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

    यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कूनो नेशनल पार्क में चीतों के प्रजनन से जुड़ी सकारात्मक खबरें भी सामने आती रही हैं। पार्क में शावकों के जन्म से भारत में चीते की आबादी को स्थापित करने और उसे स्थायी बनाने की उम्मीदों को बल मिला है। हालांकि, आशा के आठ महीने के शावक की मौत के बाद इस मामले में वन विभाग की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो गई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 59 बताई गई है। इनमें 40 शावक भारत में जन्मे हैं। वहीं, 15 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। शावक की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए वन विभाग रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

  • सुशांत सिंह राजपूत की मौत के छह साल बाद बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी साझा की

    सुशांत सिंह राजपूत की मौत के छह साल बाद बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी साझा की

    नई दिल्ली ।दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन को छह साल बीत चुके हैं। 14 जून 2020 को मुंबई स्थित अपने घर में उनकी मौत हुई थी। उनके निधन को उस समय कथित आत्महत्या बताया गया था। हालांकि, सुशांत के परिवार की ओर से इस निष्कर्ष को स्वीकार नहीं किया गया था और उनकी बहन श्वेता सिंह कीर्ति लगातार मामले से जुड़े सवाल उठाती रही हैं।

    अब श्वेता सिंह कीर्ति ने एक वीडियो संदेश में अपने भाई के पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी साझा की है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में उन्हें उस व्यक्ति से जुड़ी जानकारी मिली, जिसने सुशांत का पोस्टमार्टम किया था। श्वेता के अनुसार, पोस्टमार्टम करने वाले व्यक्ति ने कुछ ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें लेकर परिवार पहले से सवाल करता रहा है।

    श्वेता ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि उन्हें हाल ही में पता चला कि पोस्टमार्टम करने वाले व्यक्ति के मुताबिक बंदूक का इस्तेमाल हुआ था। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुशांत का पैर टूटा हुआ था और उनकी आंखों पर चोट थी। श्वेता ने यह भी कहा कि उनके भाई पर बहुत ज्यादा जोर डाला गया था।

    इन दावों के सामने आने के बाद सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े पुराने सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। हालांकि, श्वेता द्वारा वीडियो संदेश में बताई गई जानकारी उनके दावे के रूप में सामने आई है। उन्होंने अपने बयान में पोस्टमार्टम से जुड़ी कथित जानकारी का उल्लेख किया है।

    श्वेता ने अपने भाई के निधन के बाद लोगों की भावनात्मक प्रतिक्रिया का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अटलांटा से लौटने के बाद उनसे मिलने के लिए सैकड़ों लोग आए थे। उनके अनुसार, कई लोगों ने उन्हें गले लगाया और सुशांत को याद करते हुए रोए।

    श्वेता ने कहा कि लोगों को लगा कि उनके भाई के साथ जो हुआ, वह गलत था। उनके बयान में सुशांत के निधन को लेकर लोगों के बीच मौजूद भावनात्मक जुड़ाव और परिवार की ओर से उठाए जाते रहे सवालों का भी उल्लेख सामने आया।

    सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर लंबे समय तक अलग-अलग सवाल और दावे सामने आते रहे हैं। परिवार की ओर से भी मामले को लेकर संदेह व्यक्त किया जाता रहा है। अब छह साल बाद श्वेता के नए वीडियो संदेश में पोस्टमार्टम से जुड़ी बताई गई जानकारी ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है।

    श्वेता के अनुसार, पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी में पैर टूटने और आंखों पर चोट जैसी बातें सामने आई थीं। उन्होंने बंदूक के इस्तेमाल और अत्यधिक जोर लगाए जाने का भी दावा किया। फिलहाल, ये बातें श्वेता सिंह कीर्ति द्वारा साझा की गई जानकारी और उनके दावे के रूप में सामने आई हैं।

  • रायसेन में खेत में मिले चाचा-भतीजे के शव, फूल लेने गए थे दोनों, बिजली के तारों की चपेट में आने की आशंका

    रायसेन में खेत में मिले चाचा-भतीजे के शव, फूल लेने गए थे दोनों, बिजली के तारों की चपेट में आने की आशंका

    मध्य प्रदेश। के रायसेन जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में एक खेत से चाचा-भतीजे के शव मिलने का मामला सामने आया है। दोनों मंगलवार को फूल लेने के लिए घर से खेत की ओर गए थे, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे। इसके बाद परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर खोजबीन की, जिसके बाद दोनों के शव गांव के पास नदी किनारे स्थित एक खेत में मिले।

    मामला बेरखेड़ी राजाराम गांव का है। यहां रहने वाले 45 वर्षीय अशोक अहिरवार मंगलवार दोपहर अपने 16 वर्षीय भतीजे संजय अहिरवार के साथ फूल लेने खेत की ओर गए थे। काफी समय बीतने के बाद भी दोनों घर नहीं पहुंचे तो परिवार के लोगों को चिंता हुई। उन्होंने गांव और आसपास के इलाकों में दोनों की तलाश की। परिजनों ने उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने का भी प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

    इसके बाद परिवार ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की लोकेशन के आधार पर तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान पुलिस टीम गांव के नजदीक नदी किनारे ग्राम चौकीदार नर्मदा चढ़ार के खेत तक पहुंची। वहां चाचा और भतीजे के शव खेत में पड़े मिले। दोनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने से इलाके में भी लोगों की भीड़ जुट गई।

    घटनास्थल पर शवों की स्थिति को देखते हुए करंट लगने की आशंका सामने आई है। परिजनों का कहना है कि मृतक अशोक के हाथ में बिजली का तार लिपटा हुआ मिला था। परिवार ने आरोप लगाया कि खेत में जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए बिजली प्रवाहित तार लगाए गए थे। परिजनों को आशंका है कि इन्हीं तारों की चपेट में आने से दोनों की मौत हुई।

    हालांकि, पुलिस ने अभी मौत की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद सुल्तानगंज के तहसीलदार देवेंद्र शुक्ला भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई तथा हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

    सुल्तानगंज थाना प्रभारी दिनेश सिंह रघुवंशी के अनुसार, मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर दोनों की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि खेत में बिजली का तार किस उद्देश्य से लगाया गया था और वह किस तरह सक्रिय था। परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है। चाचा-भतीजे की एक साथ मौत से परिवार में शोक का माहौल है।

  • मां से विवाद के बाद घर से निकली थी नाबालिग, बारामती में शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच तेज की

    मां से विवाद के बाद घर से निकली थी नाबालिग, बारामती में शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच तेज की

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरदचंद्र पवार गुट के विधायक रोहित पवार के पर्सनल असिस्टेंट की 12 वर्षीय बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। नाबालिग का शव रविवार सुबह साईनगर इलाके में उसके घर के पास नाले के किनारे मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया।

    पुलिस के अनुसार, शनिवार को बच्ची का अपनी मां से किसी बात को लेकर मामूली विवाद हुआ था। इसके बाद वह नाराज होकर घर से बाहर चली गई थी। काफी समय बीतने के बाद जब बच्ची वापस घर नहीं लौटी तो परिवार ने पुलिस को उसके लापता होने की सूचना दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी थी।

    रविवार सुबह बच्ची का शव घर के पास मिलने की जानकारी पुलिस को मिली। इसके बाद पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और प्रारंभिक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए बारामती सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

    मामले की सूचना मिलने के बाद विधायक रोहित पवार भी बारामती मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने बच्ची के परिवार से मुलाकात की। उनके अनुसार अस्पताल में परिवार के सदस्यों के अलावा बच्ची के दोस्त और परिचित भी मौजूद थे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से भी बातचीत की और पुलिस अधिकारियों के साथ करीब आधे घंटे तक मामले को लेकर चर्चा की।

    पुलिस इस मामले को फिलहाल संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के तौर पर देख रही है। जांच में आत्महत्या की संभावना समेत अन्य पहलुओं को भी शामिल किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर चैतन्य कदम के अनुसार, बच्ची के लापता होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की थी। उसके मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को घर से निकलने से पहले मां के साथ विवाद की जानकारी मिली। हालांकि, इस विवाद और बच्ची की मौत के बीच क्या संबंध था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    पुलिस घटनाक्रम से जुड़े डिजिटल और दूसरे साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। मामले में सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जबकि कॉल डिटेल की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा पुलिस एक लड़के के मोबाइल फोन की भी जांच कर रही है। इन सभी जानकारियों के आधार पर पुलिस घटना से पहले बच्ची की गतिविधियों और उसके संपर्क में रहे लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

    फिलहाल पुलिस ने मौत के कारण को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके साथ ही सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और कॉल डिटेल से मिलने वाली जानकारी को भी जांच के दौरान जोड़ा जाएगा।

    नाबालिग की संदिग्ध मौत के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • शहडोल में सरकारी क्वार्टर में ASI कैलाश मिश्रा का शव मिला, ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने खोला दरवाजा

    शहडोल में सरकारी क्वार्टर में ASI कैलाश मिश्रा का शव मिला, ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने खोला दरवाजा

    मध्य प्रदेश : के शहडोल में पुलिस विभाग से जुड़ी एक घटना सामने आई है, जहां कोतवाली में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक कैलाश मिश्रा का शव उनके सरकारी आवास से बरामद किया गया। ASI के निर्धारित समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया। जब काफी कोशिशों के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला तो पुलिसकर्मी उनके सरकारी क्वार्टर पहुंचे।

    साथी पुलिसकर्मियों ने आवास पर पहुंचकर दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद जब दरवाजा खोला गया तो ASI कैलाश मिश्रा का शव बिस्तर पर पड़ा मिला। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की सूचना दी गई।

    सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की गई। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कैलाश मिश्रा शहडोल कोतवाली में सहायक उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे और सरकारी आवास में रह रहे थे। रोजाना की तरह उनके ड्यूटी पर पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी जब वे थाने नहीं पहुंचे तो सहकर्मियों को चिंता हुई।

    पुलिसकर्मियों ने पहले फोन के माध्यम से उनसे संपर्क करने की कोशिश की। लगातार फोन किए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने सरकारी आवास जाकर स्थिति देखने का निर्णय लिया। वहां पहुंचने के बाद कमरे के भीतर उनका शव मिलने से साथी पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।

    फिलहाल पुलिस ने मौत की वजह को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ASI की तबीयत घटना से पहले कैसी थी और उनकी किसी व्यक्ति से बातचीत या मुलाकात हुई थी या नहीं।

    पुलिस जांच में आसपास की परिस्थितियों और घटनास्थल से प्राप्त जानकारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों की निगरानी में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।

    सरकारी आवास में पुलिस अधिकारी का शव मिलने की घटना के बाद विभाग में शोक का माहौल है। साथी पुलिसकर्मी और अधिकारी घटना को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने पर पुलिस का मुख्य फोकस है।

  • नरसिंहगढ़ के लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत से आक्रोश, परिजनों ने लापरवाही की जांच और कार्रवाई की मांग उठाई

    नरसिंहगढ़ के लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत से आक्रोश, परिजनों ने लापरवाही की जांच और कार्रवाई की मांग उठाई

    मध्य प्रदेश: के राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ स्थित लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। घटना के बाद अस्पताल में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही।

    परिजनों का आरोप है कि महिला के उपचार के दौरान अस्पताल के कर्मचारियों की ओर से लापरवाही बरती गई। उनका दावा है कि महिला को गलत दवाएं दी गईं, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मामले में परिजनों ने ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कुछ कर्मचारी कथित तौर पर नशे की हालत में थे और ऐसी स्थिति में मरीज का उपचार किया जा रहा था। परिजनों ने संबंधित कर्मचारियों की चिकित्सकीय जांच कराने और अल्कोहल टेस्ट कराए जाने की मांग प्रशासन के सामने रखी है।

    महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और अन्य लोगों की भीड़ जुट गई। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि उपचार में लापरवाही या किसी कर्मचारी की गंभीर चूक सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

    हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद मृतका के शव को आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के लिए ले जाया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल नरसिंहगढ़ भेज दिया, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का चिकित्सकीय परीक्षण किया जा सके।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच प्रक्रिया से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई। इलाज से संबंधित रिकॉर्ड, दवाओं की जानकारी और अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दौरान महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। फिलहाल परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

    घटना के बाद स्थानीय स्तर पर अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के उपचार और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

    बताया जा रहा है कि इसी अस्पताल को लेकर कुछ दिन पहले भी एक अन्य महिला के उपचार से संबंधित विवाद सामने आया था। इस कारण ताजा घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपचार प्रक्रिया को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई या उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही की भूमिका रही। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों को मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है।

  • त्विषा मामला बना बड़ा सवाल: दूसरे पोस्टमार्टम से उठीं नई उम्मीदें, न्याय की राह पर टिकी सबकी नजर

    त्विषा मामला बना बड़ा सवाल: दूसरे पोस्टमार्टम से उठीं नई उम्मीदें, न्याय की राह पर टिकी सबकी नजर


    नई दिल्ली। एक बेटी की असमय मौत ने पूरे समाज को भावुक और चिंतित कर दिया है। इस मामले ने न केवल एक परिवार को गहरे दर्द में डुबो दिया है, बल्कि कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। अब इस पूरे प्रकरण में नए मोड़ के साथ मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई है। दूसरे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होने के बाद एक बार फिर लोगों की नजरें इस केस पर टिक गई हैं। परिवार को उम्मीद है कि इस कदम से कई ऐसे सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं, जो अब तक अनसुलझे बने हुए हैं।

    मृतका के परिवार ने शुरू से ही पहले पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और रिपोर्ट को लेकर कई सवाल उठाए थे। उनका मानना था कि मामले की गहराई से और निष्पक्ष तरीके से जांच की जानी चाहिए ताकि किसी भी तरह की आशंका या संदेह को दूर किया जा सके। इसी को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम द्वारा दोबारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई। इस प्रक्रिया से परिवार को यह उम्मीद बंधी है कि घटना से जुड़ी परिस्थितियों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

    परिवार के लिए यह समय बेहद भावुक और पीड़ादायक बना हुआ है। एक ओर जहां वे अपनी बेटी को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर न्याय की लड़ाई भी जारी है। परिजनों का कहना है कि एक सपनों से भरी जिंदगी अचानक इस तरह खत्म हो जाना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। उनके दर्द और सवालों ने कई लोगों को भावुक कर दिया है।

    इस पूरे मामले ने समाज में बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। परिवार का कहना है कि हर बेटी को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। यदि किसी भी घटना के पीछे प्रताड़ना या मानसिक दबाव जैसी परिस्थितियां मौजूद हों, तो उनका निष्पक्ष खुलासा होना जरूरी है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में मदद करती है बल्कि समाज का भरोसा भी मजबूत करती है।

    इस बीच जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू की पड़ताल में जुटी हुई हैं। संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया जारी है। घटना से जुड़े अलग-अलग दावों और आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर पहलू को विस्तार से समझा जा सके।

    फिलहाल पूरा मामला संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और हर किसी की नजर आने वाली जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर बनी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि सच्चाई जल्द सामने आएगी और जो भी तथ्य सामने होंगे, उनके आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि समाज के भरोसे की सबसे मजबूत नींव भी होता है।

  • बैतूल जिला अस्पताल में बनेगा आधुनिक मर्चुरी भवन, बढ़ेंगी शवों की सुरक्षित व्यवस्था

    बैतूल जिला अस्पताल में बनेगा आधुनिक मर्चुरी भवन, बढ़ेंगी शवों की सुरक्षित व्यवस्था


    बैतूल / मध्यप्रदेश । बैतूल जिला अस्पताल में जल्द ही नया और आधुनिक मर्चुरी भवन बनने जा रहा है। वर्तमान मर्चुरी भवन लगभग 20 वर्ष पुराना हो चुका है और जर्जर अवस्था में होने के कारण कर्मचारियों और परिजनों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने लंबे समय से इस स्थिति को सुधारने की आवश्यकता जताई थी।

    अधिकारिक जानकारी के अनुसार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में अस्पताल परिसर का दौरा किया और नया मर्चुरी भवन बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल अधिकारियों से कहा कि न सिर्फ भवन आधुनिक होना चाहिए बल्कि इसमें शवों को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था भी होनी चाहिए। वर्तमान में जिला अस्पताल में केवल दो फ्रीजर हैं जिनमें प्रत्येक में दो-दो शव रखने की क्षमता है। इसका मतलब है कि एक समय में कुल चार शव ही सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

    हालांकि अस्पताल में हर महीने औसतन लगभग 50 पोस्टमार्टम किए जाते हैं और कई बार एक ही दिन में पांच से छह पोस्टमार्टम की स्थिति बन जाती है। ऐसी स्थिति में वर्तमान फ्रीजर व्यवस्था अपर्याप्त साबित होती है और शवों को सुरक्षित रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कर्मचारियों का कहना है कि पुराने मर्चुरी भवन में जगह की कमी और फ्रीजर की सीमित संख्या के कारण काम में परेशानी होती है और परिजनों को भी असुविधा होती है।

    नया मर्चुरी भवन न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा बल्कि इसमें अधिक फ्रीजर और शवों को सुरक्षित रखने के पर्याप्त स्थान की व्यवस्था भी की जाएगी। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक नया भवन तैयार होने के बाद पोस्टमार्टम कार्य और शवों के रखरखाव में काफी सुधार आएगा। इस कदम से न केवल कर्मचारियों के कामकाज में सुविधा बढ़ेगी बल्कि परिजनों को भी बेहतर और सम्मानजनक सुविधा मिलेगी।

    विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सुधार करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में आधुनिक मर्चुरी भवन का निर्माण एक महत्वपूर्ण कदम है जिससे न सिर्फ अस्पताल की कार्यप्रणाली में सुधार होगा बल्कि शवों को सुरक्षित और सम्मानजनक ढंग से रखा जा सकेगा। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होने के निर्देश भी दिए।

    अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मर्चुरी भवन के निर्माण के लिए जल्द ही आवश्यक वित्तीय और निर्माण संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद अस्पताल की मर्चुरी और पोस्टमार्टम व्यवस्था में काफी सुधार देखने को मिलेगा और यह क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

  • उज्जैन दर्शन से लौटते समय नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके ने ससुराल पर लगाया दहेज हत्या का आरोप

    उज्जैन दर्शन से लौटते समय नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके ने ससुराल पर लगाया दहेज हत्या का आरोप

    नई दिल्ली। जबलपुर के कटंगी क्षेत्र के कैमोरी गांव निवासी नवविवाहिता पूजा साहू की मौत ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है। पूजा की शादी 6 फरवरी 2026 को गढ़ा फाटक निवासी निखिल साहू से हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद पूजा अपने पति और परिवार के साथ उज्जैन दर्शन के लिए गई थी। परिजनों के अनुसार, 20 फरवरी को जब वे वापस लौट रहे थे, तब पूजा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। पति निखिल ने परिवार को एक वीडियो भेजकर बताया कि पूजा की हालत खराब है। लेकिन रास्ते में तेंदूखेड़ा, दमोह के पास पूजा की मौत हो गई।

    मृतका के मायके पक्ष का आरोप है कि पूजा के साथ लगातार दहेज की मांग और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था। परिजनों के अनुसार, शादी के समय 10 लाख रुपए की मांग की गई थी, जिसमें केवल 4 लाख रुपए दिए गए। पूजा ने अपनी मौत से पहले अपने मोबाइल के जरिए परिजनों को वीडियो भेजे थे, जिनमें उन्होंने ससुराल वालों के बर्ताव और अपनी व्यथा बताई। ये वीडियो अब पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपे जा रहे हैं।

    पूजा की मौत के बाद पूरे साहू समाज में आक्रोश फैल गया। समाज के सैकड़ों लोग और मृतका के रिश्तेदार जबलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह हत्या बीमारी का रूप देने की कोशिश है।

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जीरो में मामला दर्ज कर जांच के लिए डायरी दमोह भेज दी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने आश्वासन दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस मामले में पूजा की मौत ने परिवार और समाज में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। फिलहाल पुलिस साक्ष्यों और वीडियो की जांच कर रही है ताकि मामले की वास्तविकता सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो।