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  • मां से विवाद के बाद घर से निकली थी नाबालिग, बारामती में शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच तेज की

    मां से विवाद के बाद घर से निकली थी नाबालिग, बारामती में शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच तेज की

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरदचंद्र पवार गुट के विधायक रोहित पवार के पर्सनल असिस्टेंट की 12 वर्षीय बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। नाबालिग का शव रविवार सुबह साईनगर इलाके में उसके घर के पास नाले के किनारे मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया।

    पुलिस के अनुसार, शनिवार को बच्ची का अपनी मां से किसी बात को लेकर मामूली विवाद हुआ था। इसके बाद वह नाराज होकर घर से बाहर चली गई थी। काफी समय बीतने के बाद जब बच्ची वापस घर नहीं लौटी तो परिवार ने पुलिस को उसके लापता होने की सूचना दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी थी।

    रविवार सुबह बच्ची का शव घर के पास मिलने की जानकारी पुलिस को मिली। इसके बाद पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और प्रारंभिक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए बारामती सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

    मामले की सूचना मिलने के बाद विधायक रोहित पवार भी बारामती मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने बच्ची के परिवार से मुलाकात की। उनके अनुसार अस्पताल में परिवार के सदस्यों के अलावा बच्ची के दोस्त और परिचित भी मौजूद थे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से भी बातचीत की और पुलिस अधिकारियों के साथ करीब आधे घंटे तक मामले को लेकर चर्चा की।

    पुलिस इस मामले को फिलहाल संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के तौर पर देख रही है। जांच में आत्महत्या की संभावना समेत अन्य पहलुओं को भी शामिल किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर चैतन्य कदम के अनुसार, बच्ची के लापता होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की थी। उसके मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को घर से निकलने से पहले मां के साथ विवाद की जानकारी मिली। हालांकि, इस विवाद और बच्ची की मौत के बीच क्या संबंध था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    पुलिस घटनाक्रम से जुड़े डिजिटल और दूसरे साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। मामले में सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जबकि कॉल डिटेल की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा पुलिस एक लड़के के मोबाइल फोन की भी जांच कर रही है। इन सभी जानकारियों के आधार पर पुलिस घटना से पहले बच्ची की गतिविधियों और उसके संपर्क में रहे लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

    फिलहाल पुलिस ने मौत के कारण को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके साथ ही सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और कॉल डिटेल से मिलने वाली जानकारी को भी जांच के दौरान जोड़ा जाएगा।

    नाबालिग की संदिग्ध मौत के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • शहडोल में सरकारी क्वार्टर में ASI कैलाश मिश्रा का शव मिला, ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने खोला दरवाजा

    शहडोल में सरकारी क्वार्टर में ASI कैलाश मिश्रा का शव मिला, ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने खोला दरवाजा

    मध्य प्रदेश : के शहडोल में पुलिस विभाग से जुड़ी एक घटना सामने आई है, जहां कोतवाली में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक कैलाश मिश्रा का शव उनके सरकारी आवास से बरामद किया गया। ASI के निर्धारित समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया। जब काफी कोशिशों के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला तो पुलिसकर्मी उनके सरकारी क्वार्टर पहुंचे।

    साथी पुलिसकर्मियों ने आवास पर पहुंचकर दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद जब दरवाजा खोला गया तो ASI कैलाश मिश्रा का शव बिस्तर पर पड़ा मिला। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की सूचना दी गई।

    सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की गई। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कैलाश मिश्रा शहडोल कोतवाली में सहायक उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे और सरकारी आवास में रह रहे थे। रोजाना की तरह उनके ड्यूटी पर पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी जब वे थाने नहीं पहुंचे तो सहकर्मियों को चिंता हुई।

    पुलिसकर्मियों ने पहले फोन के माध्यम से उनसे संपर्क करने की कोशिश की। लगातार फोन किए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने सरकारी आवास जाकर स्थिति देखने का निर्णय लिया। वहां पहुंचने के बाद कमरे के भीतर उनका शव मिलने से साथी पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।

    फिलहाल पुलिस ने मौत की वजह को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ASI की तबीयत घटना से पहले कैसी थी और उनकी किसी व्यक्ति से बातचीत या मुलाकात हुई थी या नहीं।

    पुलिस जांच में आसपास की परिस्थितियों और घटनास्थल से प्राप्त जानकारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों की निगरानी में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।

    सरकारी आवास में पुलिस अधिकारी का शव मिलने की घटना के बाद विभाग में शोक का माहौल है। साथी पुलिसकर्मी और अधिकारी घटना को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने पर पुलिस का मुख्य फोकस है।

  • नरसिंहगढ़ के लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत से आक्रोश, परिजनों ने लापरवाही की जांच और कार्रवाई की मांग उठाई

    नरसिंहगढ़ के लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत से आक्रोश, परिजनों ने लापरवाही की जांच और कार्रवाई की मांग उठाई

    मध्य प्रदेश: के राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ स्थित लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। घटना के बाद अस्पताल में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही।

    परिजनों का आरोप है कि महिला के उपचार के दौरान अस्पताल के कर्मचारियों की ओर से लापरवाही बरती गई। उनका दावा है कि महिला को गलत दवाएं दी गईं, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मामले में परिजनों ने ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कुछ कर्मचारी कथित तौर पर नशे की हालत में थे और ऐसी स्थिति में मरीज का उपचार किया जा रहा था। परिजनों ने संबंधित कर्मचारियों की चिकित्सकीय जांच कराने और अल्कोहल टेस्ट कराए जाने की मांग प्रशासन के सामने रखी है।

    महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और अन्य लोगों की भीड़ जुट गई। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि उपचार में लापरवाही या किसी कर्मचारी की गंभीर चूक सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

    हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद मृतका के शव को आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के लिए ले जाया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल नरसिंहगढ़ भेज दिया, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का चिकित्सकीय परीक्षण किया जा सके।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच प्रक्रिया से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई। इलाज से संबंधित रिकॉर्ड, दवाओं की जानकारी और अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दौरान महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। फिलहाल परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

    घटना के बाद स्थानीय स्तर पर अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के उपचार और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

    बताया जा रहा है कि इसी अस्पताल को लेकर कुछ दिन पहले भी एक अन्य महिला के उपचार से संबंधित विवाद सामने आया था। इस कारण ताजा घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपचार प्रक्रिया को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई या उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही की भूमिका रही। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों को मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है।

  • त्विषा मामला बना बड़ा सवाल: दूसरे पोस्टमार्टम से उठीं नई उम्मीदें, न्याय की राह पर टिकी सबकी नजर

    त्विषा मामला बना बड़ा सवाल: दूसरे पोस्टमार्टम से उठीं नई उम्मीदें, न्याय की राह पर टिकी सबकी नजर


    नई दिल्ली। एक बेटी की असमय मौत ने पूरे समाज को भावुक और चिंतित कर दिया है। इस मामले ने न केवल एक परिवार को गहरे दर्द में डुबो दिया है, बल्कि कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। अब इस पूरे प्रकरण में नए मोड़ के साथ मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई है। दूसरे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होने के बाद एक बार फिर लोगों की नजरें इस केस पर टिक गई हैं। परिवार को उम्मीद है कि इस कदम से कई ऐसे सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं, जो अब तक अनसुलझे बने हुए हैं।

    मृतका के परिवार ने शुरू से ही पहले पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और रिपोर्ट को लेकर कई सवाल उठाए थे। उनका मानना था कि मामले की गहराई से और निष्पक्ष तरीके से जांच की जानी चाहिए ताकि किसी भी तरह की आशंका या संदेह को दूर किया जा सके। इसी को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम द्वारा दोबारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई। इस प्रक्रिया से परिवार को यह उम्मीद बंधी है कि घटना से जुड़ी परिस्थितियों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

    परिवार के लिए यह समय बेहद भावुक और पीड़ादायक बना हुआ है। एक ओर जहां वे अपनी बेटी को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर न्याय की लड़ाई भी जारी है। परिजनों का कहना है कि एक सपनों से भरी जिंदगी अचानक इस तरह खत्म हो जाना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। उनके दर्द और सवालों ने कई लोगों को भावुक कर दिया है।

    इस पूरे मामले ने समाज में बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। परिवार का कहना है कि हर बेटी को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। यदि किसी भी घटना के पीछे प्रताड़ना या मानसिक दबाव जैसी परिस्थितियां मौजूद हों, तो उनका निष्पक्ष खुलासा होना जरूरी है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में मदद करती है बल्कि समाज का भरोसा भी मजबूत करती है।

    इस बीच जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू की पड़ताल में जुटी हुई हैं। संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया जारी है। घटना से जुड़े अलग-अलग दावों और आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर पहलू को विस्तार से समझा जा सके।

    फिलहाल पूरा मामला संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और हर किसी की नजर आने वाली जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर बनी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि सच्चाई जल्द सामने आएगी और जो भी तथ्य सामने होंगे, उनके आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि समाज के भरोसे की सबसे मजबूत नींव भी होता है।

  • बैतूल जिला अस्पताल में बनेगा आधुनिक मर्चुरी भवन, बढ़ेंगी शवों की सुरक्षित व्यवस्था

    बैतूल जिला अस्पताल में बनेगा आधुनिक मर्चुरी भवन, बढ़ेंगी शवों की सुरक्षित व्यवस्था


    बैतूल / मध्यप्रदेश । बैतूल जिला अस्पताल में जल्द ही नया और आधुनिक मर्चुरी भवन बनने जा रहा है। वर्तमान मर्चुरी भवन लगभग 20 वर्ष पुराना हो चुका है और जर्जर अवस्था में होने के कारण कर्मचारियों और परिजनों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने लंबे समय से इस स्थिति को सुधारने की आवश्यकता जताई थी।

    अधिकारिक जानकारी के अनुसार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में अस्पताल परिसर का दौरा किया और नया मर्चुरी भवन बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल अधिकारियों से कहा कि न सिर्फ भवन आधुनिक होना चाहिए बल्कि इसमें शवों को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था भी होनी चाहिए। वर्तमान में जिला अस्पताल में केवल दो फ्रीजर हैं जिनमें प्रत्येक में दो-दो शव रखने की क्षमता है। इसका मतलब है कि एक समय में कुल चार शव ही सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

    हालांकि अस्पताल में हर महीने औसतन लगभग 50 पोस्टमार्टम किए जाते हैं और कई बार एक ही दिन में पांच से छह पोस्टमार्टम की स्थिति बन जाती है। ऐसी स्थिति में वर्तमान फ्रीजर व्यवस्था अपर्याप्त साबित होती है और शवों को सुरक्षित रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कर्मचारियों का कहना है कि पुराने मर्चुरी भवन में जगह की कमी और फ्रीजर की सीमित संख्या के कारण काम में परेशानी होती है और परिजनों को भी असुविधा होती है।

    नया मर्चुरी भवन न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा बल्कि इसमें अधिक फ्रीजर और शवों को सुरक्षित रखने के पर्याप्त स्थान की व्यवस्था भी की जाएगी। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक नया भवन तैयार होने के बाद पोस्टमार्टम कार्य और शवों के रखरखाव में काफी सुधार आएगा। इस कदम से न केवल कर्मचारियों के कामकाज में सुविधा बढ़ेगी बल्कि परिजनों को भी बेहतर और सम्मानजनक सुविधा मिलेगी।

    विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सुधार करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में आधुनिक मर्चुरी भवन का निर्माण एक महत्वपूर्ण कदम है जिससे न सिर्फ अस्पताल की कार्यप्रणाली में सुधार होगा बल्कि शवों को सुरक्षित और सम्मानजनक ढंग से रखा जा सकेगा। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होने के निर्देश भी दिए।

    अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मर्चुरी भवन के निर्माण के लिए जल्द ही आवश्यक वित्तीय और निर्माण संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद अस्पताल की मर्चुरी और पोस्टमार्टम व्यवस्था में काफी सुधार देखने को मिलेगा और यह क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

  • उज्जैन दर्शन से लौटते समय नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके ने ससुराल पर लगाया दहेज हत्या का आरोप

    उज्जैन दर्शन से लौटते समय नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके ने ससुराल पर लगाया दहेज हत्या का आरोप

    नई दिल्ली। जबलपुर के कटंगी क्षेत्र के कैमोरी गांव निवासी नवविवाहिता पूजा साहू की मौत ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है। पूजा की शादी 6 फरवरी 2026 को गढ़ा फाटक निवासी निखिल साहू से हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद पूजा अपने पति और परिवार के साथ उज्जैन दर्शन के लिए गई थी। परिजनों के अनुसार, 20 फरवरी को जब वे वापस लौट रहे थे, तब पूजा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। पति निखिल ने परिवार को एक वीडियो भेजकर बताया कि पूजा की हालत खराब है। लेकिन रास्ते में तेंदूखेड़ा, दमोह के पास पूजा की मौत हो गई।

    मृतका के मायके पक्ष का आरोप है कि पूजा के साथ लगातार दहेज की मांग और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था। परिजनों के अनुसार, शादी के समय 10 लाख रुपए की मांग की गई थी, जिसमें केवल 4 लाख रुपए दिए गए। पूजा ने अपनी मौत से पहले अपने मोबाइल के जरिए परिजनों को वीडियो भेजे थे, जिनमें उन्होंने ससुराल वालों के बर्ताव और अपनी व्यथा बताई। ये वीडियो अब पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपे जा रहे हैं।

    पूजा की मौत के बाद पूरे साहू समाज में आक्रोश फैल गया। समाज के सैकड़ों लोग और मृतका के रिश्तेदार जबलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह हत्या बीमारी का रूप देने की कोशिश है।

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जीरो में मामला दर्ज कर जांच के लिए डायरी दमोह भेज दी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने आश्वासन दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस मामले में पूजा की मौत ने परिवार और समाज में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। फिलहाल पुलिस साक्ष्यों और वीडियो की जांच कर रही है ताकि मामले की वास्तविकता सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो।

  • भोपाल: गांधी मेडिकल कॉलेज की MBBS छात्रा की संदिग्ध मौत, खाली एसिड की बोतल मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    भोपाल: गांधी मेडिकल कॉलेज की MBBS छात्रा की संदिग्ध मौत, खाली एसिड की बोतल मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार


    भोपाल । भोपाल में एक बार फिर मेडिकल छात्रा की संदिग्ध मौत ने सनसनी फैला दी है। राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज की MBBS प्रथम वर्ष 2025 बैच की छात्रा कोहेफिजा इलाके के एक प्राइवेट पीजी में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार छात्रा डे-स्कॉलर थी और कोहेफिजा थाना क्षेत्र में स्थित पीजी में रह रही थी। मंगलवार सुबह उसे उसके कमरे के बाथरूम में बेसुध अवस्था में पाया गया।

    परिजनों और दोस्तों ने कमरे और बाथरूम का दरवाजा तोड़कर छात्रा को बाहर निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शव के पास एक खाली एसिड की बोतल बरामद हुई है जिससे मौत की वजह पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है लेकिन एसिड की मौजूदगी ने मामले को और जटिल बना दिया है।

    इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है और पुलिस के लिए यह स्पष्ट करना बड़ी चुनौती बन गया है कि क्या यह आत्महत्या थी या किसी अन्य साजिश का हिस्सा। अभी तक कोई स्पष्ट सुराग सामने नहीं आया है लेकिन एसिड की बोतल होने के कारण जांच की दिशा और भी गंभीर हो गई है।

    पुलिस ने तुरंत ही मामले की जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए हैमिडिया अस्पताल भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह पता चलेगा कि छात्रा की मौत एसिड के कारण हुई थी या किसी अन्य वजह से।

    कोहेफिजा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। पीजी में रहने वाले अन्य छात्रों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही छात्रा के मोबाइल बैग और अन्य सामानों को भी कब्जे में लिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि छात्रा के साथ कोई मानसिक दबाव तो नहीं था या किसी प्रकार का दबाव/हैरानी वाली घटना तो नहीं हुई।

    इस घटना के बाद मेडिकल कॉलेज और आसपास के छात्रों में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। कई छात्रों और परिजनों ने सुरक्षा व्यवस्था और छात्रावास/पीजी में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं अब पुलिस की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है जो इस केस की दिशा तय करेगी। यदि रिपोर्ट में एसिड से संबंधित कारण सामने आते हैं तो मामला और गंभीर हो जाएगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छात्रा ने स्वयं ही आत्महत्या की या किसी ने उसे मारकर मामले को आत्महत्या जैसा दिखाने की कोशिश की।