Tag: Power Crisis

  • आंधी-तूफान से सीहोर के 25 गांवों में बिजली संकट, बार-बार फाल्ट से लोग परेशान

    आंधी-तूफान से सीहोर के 25 गांवों में बिजली संकट, बार-बार फाल्ट से लोग परेशान


    मध्यप्रदेश । सीहोर जिले के बिलकिसगंज क्षेत्र में बरखेड़ी विद्युत केंद्र से जुड़े लगभग 25 गांवों में आंधी-तूफान के चलते बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। तेज हवाओं और मौसम के बदलाव के कारण बार-बार विद्युत लाइनों में फाल्ट आ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को लंबे समय तक अंधेरे में रहना पड़ रहा है।

    चंदेरी, नई चंदेरी, पिपलिया, ताकीपुर, शेरपुर, भगवानपुर, बड़नगर, आलमपुरा और बरखेड़ी सहित कई गांवों में हाल ही में रात के समय आंधी-तूफान के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। ग्रामीणों ने तुरंत विद्युत विभाग को सूचना दी, लेकिन सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण मरम्मत कार्य में काफी समय लग गया।

    ग्रामीणों का आरोप है कि रात की ड्यूटी में केवल एक या दो लाइनमैन ही तैनात रहते हैं, जिससे एक साथ कई स्थानों पर फाल्ट होने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है। भीषण गर्मी के बीच घंटों बिजली गुल रहने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की है कि शिकायत दर्ज कराने के दौरान कई बार संबंधित अधिकारी फोन नहीं उठाते, जिससे समस्या के समाधान में और देरी होती है। इससे ग्रामीणों और किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    इसी समस्या को लेकर किसान एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बिलकिसगंज रोड स्थित नई चंदेरी में विद्युत ट्रांसफार्मर के पास प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने शासन और विद्युत विभाग से मांग की है कि बरखेड़ी सब स्टेशन क्षेत्र में अतिरिक्त लाइनमैन तैनात किए जाएं और आपात स्थिति में त्वरित सुधार व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

    ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में रात 8 बजे हुए एक फाल्ट को सुधारने में लगभग 7 घंटे लग गए और बिजली रात 3 बजे के बाद ही बहाल हो सकी। इस देरी के कारण ग्रामीणों को पूरी रात अंधेरे में रहना पड़ा और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

    स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आंधी-तूफान या आपात स्थिति में विशेष टीम, अतिरिक्त स्टाफ और वाहन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में बिजली संकट की स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

  • बांग्‍लादेश में चुनाव से पहले बिजली गुल होने का खड़ा हो गया संकट, अडानी ग्रुप का बकाया भुगतान पत्र

    बांग्‍लादेश में चुनाव से पहले बिजली गुल होने का खड़ा हो गया संकट, अडानी ग्रुप का बकाया भुगतान पत्र


    नई दिल्ली। बांग्लादेश में आगामी संसदीय चुनावों से ठीक पहले बिजली आपूर्ति और वित्तीय स्थिति को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर में अडानी ग्रुप ने बकाया भुगतान को लेकर बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) को एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के बाद दोनों पक्षों के बीच चल रहा वित्तीय विवाद फिर से चर्चा में आ गया है और देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, अडानी पावर लिमिटेड ने 29 जनवरी को पीडीबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर तत्काल भुगतान की मांग की। कंपनी ने स्पष्ट किया कि पावर प्लांट का नियमित संचालन जारी रखने के लिए 112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का तुरंत भुगतान आवश्यक है। यदि यह भुगतान नहीं किया गया, तो बिना बाधा बिजली आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

    इस कुल बकाया में 53.2 मिलियन डॉलर की राशि पिछले वर्ष जून तक की देनदारी के रूप में शामिल है, जबकि 59.6 मिलियन डॉलर अक्टूबर तक दी गई बिजली सेवा का भुगतान है। कंपनी का कहना है कि कई बार आग्रह करने के बावजूद बांग्लादेश पावर बोर्ड इस रकम का पूरा भुगतान नहीं कर पाया है। ऐसे में बढ़ते बकाए का दबाव कंपनी के संचालन, मेंटेनेंस और इससे जुड़े साझेदारों पर पड़ने लगा है।

    पत्र में अडानी ग्रुप ने संकेत दिया है कि अगर भुगतान में और देरी होती है, तो बिजली उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। हालांकि इसे औपचारिक चेतावनी नहीं कहा गया, लेकिन इस तरह की भाषा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थिति गंभीर होती जा रही है और दोनों पक्षों को जल्द समाधान निकालने की जरूरत है।

    यह पहला मौका नहीं है जब इस मुद्दे पर तनाव पैदा हुआ हो। पिछले साल भी अडानी ग्रुप ने बकाया भुगतान को लेकर बांग्लादेश को पत्र भेजा था और 10 नवंबर तक की समय सीमा तय की थी। उस समय कंपनी ने साफ कहा था कि अगर तय समय तक पैसे नहीं मिले, तो 11 नवंबर से बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ सकती है। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने उसी महीने करीब 100 मिलियन डॉलर का भुगतान किया था, जिससे तत्काल संकट टल गया था। लेकिन उसके बाद भी पुराने बकाए का पूरा भुगतान नहीं हो पाया और दिसंबर से फिर देनदारी बढ़ने लगी। अब एक बार फिर वही स्थिति बनती नजर आ रही है, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है। बांग्लादेश जैसे देश के लिए, जहां ऊर्जा आपूर्ति आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ मानी जाती है, यह स्थिति काफी गंभीर मानी जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम का समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं और इसके साथ जनमत संग्रह भी प्रस्तावित है। चुनावी माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है और राजनीतिक दल पूरी ताकत से प्रचार में जुटे हैं। बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी जैसे दल मैदान में सक्रिय हैं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे माहौल में अडानी ग्रुप का यह पत्र बांग्लादेश की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में वित्तीय अस्थिरता का असर सीधे आम जनता और उद्योगों पर पड़ सकता है। अगर बिजली आपूर्ति में बाधा आती है, तो इसका असर उद्योग, व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देगा। ऐसे में सरकार के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह ऊर्जा कंपनियों के साथ अपने वित्तीय दायित्वों को समय पर पूरा करे।

    अडानी ग्रुप का बांग्लादेश में बिजली उत्पादन से जुड़ा प्रोजेक्ट वहां की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस वजह से बकाया भुगतान का मुद्दा केवल एक कारोबारी विवाद नहीं, बल्कि एक बड़े ऊर्जा और आर्थिक सवाल के रूप में देखा जा रहा है। यदि इस पर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह चुनावी माहौल में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। इस मामले ने बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल खड़े किए हैं। लगातार बढ़ते बकाए और भुगतान में देरी यह संकेत देते हैं कि सरकार वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। चुनाव से पहले इस तरह की खबरें राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती हैं।

    फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड इस बकाया भुगतान को लेकर क्या कदम उठाता है और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई समाधान निकल पाता है। अगर भुगतान समय पर हो जाता है, तो बिजली आपूर्ति सामान्य बनी रह सकती है। लेकिन अगर विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका असर बांग्लादेश की ऊर्जा व्यवस्था और राजनीतिक माहौल दोनों पर पड़ सकता है।

  • कराची-लाहौर में दोपहर में ‘अंधेरा’! भारत के रणनीतिक कदम से पाकिस्तान में हलचल, आज दिखेगी ‘सूर्यास्त्र’ की पहली झलक

    कराची-लाहौर में दोपहर में ‘अंधेरा’! भारत के रणनीतिक कदम से पाकिस्तान में हलचल, आज दिखेगी ‘सूर्यास्त्र’ की पहली झलक


    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर भारत एक ऐसे हथियार को कर्तव्य पथ पर उतारने जा रहा है, जिसकी एक झलक से ही दुश्मन के दिमाग में खौफ पैदा हो सकता है। भारत का पहला स्वदेशी मल्टी-कैलिबर लॉन्ग-रेंज रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’ आज परेड में पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई देगा। यह सिस्टम 300 किलोमीटर की गहराई तक स्ट्राइक करने में सक्षम है और रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पाकिस्तान के कई बड़े शहर कराची, लाहौर और रावलपिंडी जैसे केंद्र अब भारत की पहुंच में हैं।

    सूर्यास्त्र क्या है और क्यों खास है?
    ‘सूर्यास्त्र’ भारत का पहला Made-in-India, Multi-Caliber, Long-Range Rocket Launcher System है, जिसे पुणे स्थित NIBE लिमिटेड ने इज़राइल की एल्बिट सिस्टम्स के सहयोग से विकसित किया है। यह Elbit के PULS (Precise & Universal Launching System) आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक बेहद सटीक हमले करने में सक्षम है।

    सूर्यास्त्र की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
    सूर्यास्त्र की टेस्टिंग में 5 मीटर से भी कम CEP (Circular Error Probable) की सटीकता दिखाई गई है, जो इसे दुश्मन के एयरबेस, रडार, कमांड सेंटर और मिसाइल ठिकानों के लिए घातक बनाती है।इसके अलावा, यह सिस्टम 100 किलोमीटर तक लोइटरिंग मिशन भी चला सकता है, जिससे दुश्मन के रडार और सुरक्षा नेटवर्क को चकमा देना आसान हो जाता है।

    मल्टी-कैलिबर क्षमता: एक ही लॉन्चर, कई रॉकेट
    सूर्यास्त्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-कैलिबर क्षमता है।
    यानी एक ही लॉन्चर से अलग-अलग प्रकार के रॉकेट और गाइडेड म्यूनिशन दागे जा सकते हैं, जिससे ऑपरेशनल लचीलापन बढ़ता है और लॉजिस्टिक बोझ कम होता है।
    यह सिस्टम BEML के हाई मोबिलिटी व्हीकल (HMV) पर स्थापित है, जिससे यह तेजी से स्थान बदलकर सुरक्षित स्थिति में आ सकता है।

    कराची, लाहौर, पिंडी… सब पर सूर्यास्त्र का साया
    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्यास्त्र से भारत की डीप-स्ट्राइक डिटरेंस क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है।
    अब पाकिस्तान के बड़े शहर कराची, लाहौर, रावलपिंडी जैसी जगहें भी भारत की सीधी पहुंच में आ गई हैं।
    सूर्यास्त्र के एक सटीक हमले से दुश्मन के लिए दोपहर 12 बजे भी ‘सूरज डूब’ सकता है—यह भारत की नई रणनीतिक गहराई का प्रतीक माना जा रहा है।

    गणतंत्र दिवस पर दिखेंगे और कई आधुनिक हथियार
    गणतंत्र दिवस परेड में सूर्यास्त्र के अलावा ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्टम, MRSAM, ATAGS, धनुष तोप, शक्तिबान जैसे कई आधुनिक हथियार भी दिखेंगे।
    साथ ही इस बार चार जांस्कर पोनी, दो बैक्ट्रियन ऊंट, शिकारी पक्षी और सेना के कुत्ते भी पहली बार परेड में नजर आएंगे।
    आज कर्तव्य पथ पर जब सूर्यास्त्र की झलक दिखेगी, तो यह सिर्फ एक हथियार नहीं बल्कि भारत की नई सैन्य ताकत और आत्मविश्वास का प्रतीक होगा।
    यह सिस्टम न सिर्फ दुश्मन को दूर से मारने की क्षमता देता है, बल्कि भारतीय सेना की मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी को भी बढ़ाता है।
    विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्यास्त्र ने भारत की रणनीतिक गहराई को मजबूत कर दिया है और पाकिस्तान के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब डिफेंसिव नहीं, बल्कि ऑफेंसिव डीप-स्ट्राइक में भी सक्षम हो गया है।