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  • पीयूष गोयल बोले- PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 20 ट्रिलियन डॉलर, 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

    पीयूष गोयल बोले- PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 20 ट्रिलियन डॉलर, 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

    नई दिल्ली ।वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि क्रय शक्ति समता यानी PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार करीब 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मंत्री ने यह बात राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 13वें पीएएफआई एनुअल फोरम 2026 में कही।

    गोयल ने कहा कि भारत अब 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, जैसे-जैसे देश इस लक्ष्य की ओर बढ़ेगा, अलग-अलग आर्थिक मापदंडों के बीच मौजूद अंतर भी कम होता जाएगा। उन्होंने भारत की बदलती आर्थिक स्थिति और वैश्विक बाजारों के साथ बढ़ते जुड़ाव को व्यापार वार्ताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

    क्रय शक्ति समता ऐसी विनिमय दरों को दर्शाती है, जिनका उद्देश्य अलग-अलग देशों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के स्तर में अंतर को ध्यान में रखते हुए मुद्राओं की वास्तविक खरीद क्षमता की तुलना करना है। इसी आधार पर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार की तुलना की जाती है।

    गोयल ने कहा कि भारत व्यापार और आर्थिक साझेदारी को लेकर ऐसी अर्थव्यवस्था के रूप में बातचीत कर रहा है, जिसके 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। उन्होंने व्यापक आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं पर भी जोर दिया। इसमें सामान, सेवाओं, पर्यटकों, शिक्षण संस्थानों और खेलों से जुड़े लोगों के आसान आवागमन को बढ़ावा देने की बात शामिल है।

    उन्होंने बताया कि भारत की कई देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार वार्ताएं चल रही हैं। इनमें कनाडा, चिली, पेरू, सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन, मेक्सिको, मालदीव, यूरेशिया, मध्य एशिया, रूस, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल और इजरायल शामिल हैं।

    इन वार्ताओं का प्रमुख उद्देश्य भारत के लिए वैश्विक वैल्यू चेन और सप्लाई चेन में भागीदारी के अवसर बढ़ाना है। इसके साथ ही सामान और सेवाओं के आवागमन को आसान बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजारों से जुड़ाव बढ़ाने के लिए आर्थिक साझेदारी महत्वपूर्ण है।

    सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर की सालाना खपत की मांग 150 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है। उन्होंने इस क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों के अनुरूप क्षमताओं के विकास पर जोर दिया।

    मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बड़े लैंग्वेज मॉडल और एजेंटिक मॉडल सहित एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही भारतीय स्टार्टअप्स के लिए इनोवेशन और डीप-टेक इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने की बात कही।

    गोयल ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत निजी क्षेत्र द्वारा अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाला तीसरा देश बन गया है। इसके अलावा उन्होंने भारत की युवा आबादी के वैश्विक घटनाक्रमों और अवसरों को लेकर बढ़ती जागरूकता का जिक्र किया। उन्होंने युवाओं की अपने भविष्य से जुड़े फैसले लेने की क्षमता पर भरोसा जताया और देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की वृद्धि का भी उल्लेख किया।

  • एयरपोर्ट संचालकों के एयरलाइन कारोबार में उतरने पर कोई सरकारी रोक नहीं, कुछ PPP समझौतों में स्वामित्व की शर्तें लागू

    एयरपोर्ट संचालकों के एयरलाइन कारोबार में उतरने पर कोई सरकारी रोक नहीं, कुछ PPP समझौतों में स्वामित्व की शर्तें लागू


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि देश में ऐसी कोई व्यापक सरकारी नीति लागू नहीं है, जो बड़े हवाई अड्डों के संचालकों को एयरलाइन कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी रखने या खुद एयरलाइन कारोबार संचालित करने से रोकती हो। सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच संभावित कारोबारी संबंधों को लेकर चर्चा बढ़ रही है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के तहत विकसित कुछ हवाई अड्डों के मौजूदा समझौतों में स्वामित्व से जुड़ी विशेष शर्तें मौजूद हैं।

    सरकार के अनुसार, प्रमुख हवाई अड्डों के संचालकों पर एयरलाइन कारोबार में प्रवेश को लेकर कोई सामान्य नीतिगत प्रतिबंध नहीं है। इसका मतलब यह है कि किसी एयरपोर्ट ऑपरेटर के लिए एयरलाइन कंपनी में पर्याप्त हिस्सेदारी रखना या एयरलाइन संचालन से जुड़ना अपने आप में प्रतिबंधित नहीं है। हालांकि, किसी विशेष हवाई अड्डे के लिए किए गए रियायत समझौते यानी कंसेशन एग्रीमेंट की शर्तें इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    PPP मॉडल पर विकसित कुछ हवाई अड्डों के लिए किए गए मौजूदा समझौतों में ऐसी शर्तें रखी गई हैं, जिनके तहत अनुसूचित एयरलाइनों या उनसे संबंधित समूह कंपनियों और सहयोगी संस्थाओं को एयरपोर्ट संचालन करने वाली कंपनी में इक्विटी हिस्सेदारी रखने से सीमित किया गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच संभावित हितों के टकराव को नियंत्रित करना माना जाता है।

    सरकार ने यह भी बताया कि इस तरह के एक मौजूदा अनुबंध की शर्त में छूट देने का अनुरोध भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के पास पहुंचा है। इस अनुरोध के जरिए संबंधित पक्ष एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच मौजूदा स्वामित्व संबंधी सीमा में राहत चाहता है। यदि अनुबंध की शर्तों में बदलाव या छूट मिलती है तो संबंधित एयरपोर्ट संचालक के लिए एयरलाइन कारोबार में प्रवेश का रास्ता आसान हो सकता है।

    हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अनुरोध पर अभी नागर विमानन मंत्रालय की ओर से औपचारिक समीक्षा नहीं की गई है। यानी फिलहाल केवल अनुरोध प्राप्त हुआ है और उस पर अंतिम निर्णय या नीति संबंधी बदलाव की स्थिति नहीं बनी है। ऐसे में किसी एयरपोर्ट ऑपरेटर के एयरलाइन क्षेत्र में प्रवेश को लेकर तत्काल कोई निश्चित व्यवस्था मानना जल्दबाजी होगी।

    विमानन क्षेत्र में एयरपोर्ट और एयरलाइन के बीच कारोबारी संबंध लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। एक ही कारोबारी समूह के पास एयरपोर्ट और एयरलाइन से जुड़ी हिस्सेदारी होने पर प्रतिस्पर्धा, स्लॉट आवंटन, यात्री सेवाओं और अन्य कारोबारी फैसलों को लेकर सवाल उठ सकते हैं। दूसरी ओर, एकीकृत कारोबारी मॉडल के समर्थकों का मानना है कि इससे बुनियादी ढांचे और विमानन सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।

    भारत में हवाई यातायात और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का लगातार विस्तार हो रहा है। निजी निवेश और PPP मॉडल की भूमिका भी बढ़ी है। ऐसे में एयरपोर्ट संचालकों और एयरलाइन कंपनियों के बीच स्वामित्व संबंधों को लेकर आने वाले समय में नियमों और अनुबंधों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। फिलहाल सरकार के रुख से इतना स्पष्ट है कि एयरपोर्ट ऑपरेटरों के एयरलाइन कारोबार में उतरने पर कोई देशव्यापी सरकारी रोक नहीं है, लेकिन संबंधित PPP समझौतों की शर्तें किसी विशेष मामले में अलग स्थिति पैदा कर सकती हैं।