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  • प्रदीप रावत के बेटे विक्रमादित्य ने पिता के अनसुने सपनों का किया खुलासा, बताया क्यों अभिनेता नहीं बनना चाहते थे

    प्रदीप रावत के बेटे विक्रमादित्य ने पिता के अनसुने सपनों का किया खुलासा, बताया क्यों अभिनेता नहीं बनना चाहते थे

    नई दिल्ली ।अभिनेता प्रदीप रावत के निधन के बाद उनके परिवार और प्रशंसकों के बीच उनकी यादें ताजा हैं। हिंदी सिनेमा, दक्षिण भारतीय फिल्मों और टेलीविजन में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रदीप रावत का 5 अगस्त 2026 को 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन के बाद अब उनके बेटे विक्रमादित्य रावत ने पिता के जीवन से जुड़े कई ऐसे पहलुओं का खुलासा किया है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते थे।

    विक्रमादित्य ने बताया कि उनके पिता का पहला सपना अभिनेता बनना नहीं था। वह बचपन से सेना में जाने की इच्छा रखते थे। उनके दादा भी सैनिक थे और इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि का प्रभाव प्रदीप रावत के मन पर पड़ा था। हालांकि, परिस्थितियों के चलते वह सेना में शामिल नहीं हो सके और आगे चलकर उनका जीवन अभिनय की दुनिया की ओर मुड़ गया।

    विक्रमादित्य के मुताबिक, अभिनय उनके पिता के जीवन में एक ऐसे मोड़ के रूप में आया, जिसने आगे चलकर उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। उन्होंने अपने काम के जरिए हिंदी सिनेमा के साथ दक्षिण भारतीय फिल्मों और टेलीविजन में भी मजबूत जगह बनाई। अलग-अलग तरह के किरदारों को प्रभावशाली ढंग से निभाने की उनकी क्षमता दर्शकों के बीच उनकी खास पहचान बनी।

    प्रदीप रावत को बीआर चोपड़ा के लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में अश्वत्थामा के किरदार से घर-घर में पहचान मिली। इस भूमिका ने उनके अभिनय करियर को एक मजबूत आधार दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में भी कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भूमिकाएं निभाईं। आमिर खान की फिल्म गजनी में उनका किरदार विशेष रूप से चर्चित रहा और इस भूमिका ने नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उन्हें पहचान दिलाई।

    विक्रमादित्य ने अपने पिता के व्यक्तित्व की एक और खास बात साझा करते हुए कहा कि वह बेहद आत्मनिर्भर स्वभाव के व्यक्ति थे। वह मुश्किल परिस्थितियों में भी दूसरों से मदद मांगने के बजाय अपनी मेहनत और क्षमता पर भरोसा करते थे। उनके लिए आत्मसम्मान और खुद के दम पर आगे बढ़ना जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

    उन्होंने बताया कि उनके पिता हमेशा मेहनत करने और ईश्वर पर विश्वास रखने की बात कहते थे। उनका मानना था कि इंसान के हाथ में केवल अपना प्रयास होता है, जबकि परिणाम हमेशा उसके नियंत्रण में नहीं होता। इसलिए व्यक्ति को ईमानदारी से अपना काम करते रहना चाहिए और इसके बाद मिलने वाले परिणाम को स्वीकार करना चाहिए। यही सोच उनके जीवन और व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।

    विक्रमादित्य ने यह भी बताया कि उनके पिता की एक बड़ी इच्छा थी कि वह अपने बेटे को फिल्मी दुनिया में एक सफल कलाकार के रूप में देखें। प्रदीप रावत चाहते थे कि उनका बेटा भी अभिनय के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए और बड़ा नाम हासिल करे। अब विक्रमादित्य ने पिता के इस सपने को पूरा करने का संकल्प जताया है।

    प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वह बीमारी का इलाज करा रहे थे और उनके जीवन के अंतिम दौर में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ गई थीं। उनके निधन के बाद बेटे द्वारा साझा की गई यादों ने उनके प्रशंसकों को उनके अभिनय के साथ-साथ उनके निजी व्यक्तित्व और जीवन मूल्यों को भी करीब से समझने का अवसर दिया है।

  • प्रदीप रावत ने बताया था क्यों छोड़ा सलमान खान का साथ, वर्षों बाद मुलाकात में गले लगाकर जताया अपनापन

    प्रदीप रावत ने बताया था क्यों छोड़ा सलमान खान का साथ, वर्षों बाद मुलाकात में गले लगाकर जताया अपनापन


    नई दिल्ली ।
    दिवंगत अभिनेता प्रदीप रावत के निधन के बाद उनके जीवन से जुड़े कई पुराने किस्से एक बार फिर चर्चा में हैं। इन्हीं में से एक किस्सा अभिनेता सलमान खान के साथ उनकी गहरी दोस्ती का है। प्रदीप रावत ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि संघर्ष के दिनों में वह करीब छह महीने तक सलमान खान के घर रहे थे। उस दौरान दोनों के बीच बेहद मजबूत दोस्ती थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए खुद ही सलमान से दूरी बना ली थी।

    प्रदीप रावत ने बताया था कि उनकी और सलमान खान की दोस्ती फिल्म ‘बागी’ के दौरान शुरू हुई थी। शुरुआती मुलाकातों के बाद दोनों के बीच अच्छा तालमेल बन गया। दोनों को फिटनेस का शौक था और अक्सर साथ समय बिताते थे। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी हो गई कि सलमान खान उन्हें अपने घर से वापस जाने ही नहीं देते थे। वह वहीं रहते, खाना खाते, व्यायाम करते और कई बार साथ में सामाजिक कार्यक्रमों में भी शामिल होते थे।

    उन्होंने बताया था कि उस दौर में सलमान खान ने उनका हर तरह से साथ दिया। बड़े आयोजनों में जाने के लिए यदि उनके पास उपयुक्त कपड़े नहीं होते थे तो उनकी भी व्यवस्था कराई जाती थी। प्रदीप रावत के अनुसार, सलमान खान हमेशा अपने दोस्तों का पूरा ध्यान रखते थे और जरूरत के समय बिना किसी संकोच के मदद करते थे। उन्होंने सलमान को बड़े दिल वाला और अपने लोगों का ख्याल रखने वाला इंसान बताया था।

    हालांकि कुछ समय बाद प्रदीप रावत ने महसूस किया कि वह इस आरामदायक जीवनशैली के अभ्यस्त होते जा रहे हैं। उन्हें लगा कि यदि वह इसी माहौल में लंबे समय तक रहे तो अपने व्यक्तिगत संघर्ष और करियर की दिशा से भटक सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने खुद को सलमान के करीब रहने वाले दायरे से अलग करने का फैसला किया और अपने अभिनय करियर पर पूरा ध्यान देना शुरू किया।

    कई वर्षों तक दोनों के बीच मुलाकात नहीं हुई। बाद में एक दिन सड़क पर अचानक दोनों आमने-सामने आ गए। प्रदीप रावत ने बताया था कि सलमान खान ने उन्हें देखते ही अपनी गाड़ी रोक दी और उनसे गले मिलकर पूछा कि वह इतने वर्षों से कहां थे। इस मुलाकात ने दोनों की पुरानी दोस्ती की यादें फिर ताजा कर दीं। प्रदीप के अनुसार, सलमान उनसे नाराज जरूर थे कि उन्होंने बिना बताए दूरी बना ली थी, लेकिन उनके व्यवहार में अपनापन पहले जैसा ही था।

    प्रदीप रावत ने अपने संघर्ष के दिनों का एक और प्रसंग साझा करते हुए बताया था कि जब वह बैंक में नौकरी करते थे, तब सलमान खान उनसे मिलने वहां भी पहुंच जाते थे और उनके काम खत्म होने तक बैठकर इंतजार करते थे। उन्होंने यह भी बताया था कि बाद में एक फिल्म के हिंदी संस्करण के लिए उन्होंने निर्देशक को सलमान खान के बजाय आमिर खान का नाम सुझाया था। उनके अनुसार, यह फैसला पूरी तरह पेशेवर सोच के आधार पर लिया गया था और इसका उनकी निजी दोस्ती से कोई संबंध नहीं था। आज प्रदीप रावत के निधन के बाद उनकी और सलमान खान की यह दोस्ती तथा उससे जुड़ी यादें एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।