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  • सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को, 6 साल बाद बन रहे शुभ संयोग में जानें पूजा विधि और शिव आराधना का सही तरीका

    सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को, 6 साल बाद बन रहे शुभ संयोग में जानें पूजा विधि और शिव आराधना का सही तरीका

    नई दिल्ली ।सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान आने वाले सोमवार को शिव भक्तों के लिए खास महत्व प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र, फूल, धतूरा, फल तथा प्रसाद अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस वर्ष सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार सावन के दूसरे सोमवार का महत्व इसलिए और बढ़ गया है क्योंकि सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। उपलब्ध धार्मिक जानकारी के अनुसार, ऐसा शुभ संयोग करीब छह साल बाद बन रहा है। शिव भक्तों के लिए सोमवार और प्रदोष दोनों ही भगवान शिव की उपासना से जुड़े महत्वपूर्ण अवसर माने जाते हैं।

    सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दूध या अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक भी कर सकते हैं।

    पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र, शमी, कनेर, धतूरा, चावल और फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आराधना की जाती है। फल, पान, सुपारी और प्रसाद भी पूजा में शामिल किए जा सकते हैं। श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखते हुए भगवान शिव का स्मरण और मंत्र जाप करते हैं।

    भगवान शिव की पूजा में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप विशेष रूप से किया जाता है। इसे शिव का सरल और प्रमुख मंत्र माना जाता है। श्रद्धालु पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा के अनुसार कर सकते हैं।

    सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का संयोग होने के कारण इस दिन शिव आराधना का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। प्रदोष व्रत भी भगवान शिव को समर्पित होता है और प्रदोष काल में शिव पूजा करने की परंपरा है। ऐसे में भक्त सोमवार की पूजा के साथ प्रदोष काल में भी भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।

    इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया जाता है। मंत्र है, “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥” धार्मिक मान्यताओं में इस मंत्र को भगवान शिव की उपासना से जुड़ा महत्वपूर्ण मंत्र माना गया है।

    सावन सोमवार के अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और पूरे दिन सात्विक जीवनशैली का पालन करते हैं।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूजा में दिखावे के बजाय श्रद्धा और भक्ति को महत्व दिया जाता है। इसलिए श्रद्धालु अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा सामग्री का उपयोग कर सकते हैं। व्रत रखने वाले लोगों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए।

    10 अगस्त का दूसरा सावन सोमवार इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि इस दिन सोमवार और प्रदोष व्रत का संयोग बताया जा रहा है। श्रद्धालु सुबह से शिव पूजा के साथ दिनभर भगवान शिव का स्मरण कर सकते हैं और प्रदोष काल में भी विधिपूर्वक आराधना कर सकते हैं।

  • 10 अगस्त को सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत, जानें शिवलिंग पर किन चीजों से अभिषेक करना माना जाता है शुभ

    10 अगस्त को सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत, जानें शिवलिंग पर किन चीजों से अभिषेक करना माना जाता है शुभ

    नई दिल्ली । सावन का दूसरा सोमवार इस बार 10 अगस्त को पड़ रहा है और इसी दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि होने से प्रदोष व्रत का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, जबकि प्रदोष काल में शिव पूजा का अपना महत्व बताया गया है। ऐसे में दोनों अवसरों के एक साथ आने से शिवभक्तों के लिए यह दिन खास माना जा रहा है।

    मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन व्रत रखने और भगवान शिव का विधिपूर्वक पूजन करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता की अनुभूति हो सकती है। इस दिन शिवलिंग पर अलग-अलग सामग्री से अभिषेक करने की परंपरा भी रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं में कुछ विशेष सामग्रियों को अलग-अलग ग्रहों से जोड़ा जाता है और उनके माध्यम से ग्रहों की अनुकूलता की कामना की जाती है।

    सबसे सरल और व्यापक रूप से प्रचलित उपाय शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करना है। पूजा के दौरान स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित किया जाता है। धार्मिक परंपरा में जलाभिषेक को शांति और शिव आराधना का सहज माध्यम माना गया है।

    चंद्रमा से संबंधित मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन की कामना के लिए दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने की परंपरा भी बताई जाती है। सावन सोमवार पर शुद्ध दूध अर्पित करते समय भक्त भगवान शिव से मन की स्थिरता और जीवन में सौम्यता बनाए रखने की प्रार्थना कर सकते हैं। यह पूरी तरह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित उपाय है।

    गुरु और शुक्र की अनुकूलता की कामना के लिए शहद से अभिषेक करने का भी उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं में शहद को मधुरता और शुभता से जोड़ा जाता है। इसी वजह से इसे वाणी में मधुरता, संबंधों में सौहार्द और पारिवारिक जीवन में सुख की कामना के साथ भगवान शिव को अर्पित किया जाता है।

    शनि तथा राहु-केतु से जुड़ी बाधाओं की शांति की कामना के लिए काले तिल से अभिषेक करने की परंपरा भी बताई जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं में काले तिल का संबंध शनि से माना गया है। हालांकि किसी भी ग्रह की स्थिति और उसके प्रभाव को लेकर व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर उपाय अलग हो सकते हैं।

    सावन में गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक भी धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। इसे सुख, समृद्धि और मनोकामना की पूर्ति की धार्मिक भावना से जोड़ा जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इस अभिषेक को पूजा का हिस्सा बना सकते हैं।

    10 अगस्त को प्रदोष काल में पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप, बिल्वपत्र अर्पित करना और दीपदान करना भी शिव आराधना का हिस्सा बनाया जा सकता है। सुबह जलाभिषेक और शाम को प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा का पालन किया जा सकता है।

    हालांकि नवग्रह शांति के लिए एक ही उपाय हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। ज्योतिषीय दृष्टि से किसी विशेष ग्रह से जुड़ी परेशानी के लिए जन्मकुंडली में ग्रह की स्थिति, भाव, राशि, दशा और गोचर को देखकर उपाय तय करने की बात कही जाती है। इसलिए धार्मिक उपायों को श्रद्धा और व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुसार अपनाना अधिक उचित माना जाता है।

  • भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष दिन: प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन होने से बना दुर्लभ संयोग, इन विशेष वस्तुओं के दान से चमकेगी किस्मत

    भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष दिन: प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन होने से बना दुर्लभ संयोग, इन विशेष वस्तुओं के दान से चमकेगी किस्मत

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि का एक ही दिन पड़ना बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इस वर्ष 12 जुलाई 2026 को भगवान शिव को समर्पित दो अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत, रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि एक ही दिन पड़ रहे हैं। इस दुर्लभ संयोग के कारण शिव भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और सुबह से ही देश भर के शिवालयों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। ज्योतिषविदों के अनुसार इस प्रकार के संयोग में की गई पूजा और दान का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

    धार्मिक गणना के अनुसार आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी तिथि के चलते प्रदोष व्रत का पालन किया जा रहा है। चूंकि आज रविवार का दिन है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि रवि प्रदोष का व्रत रखने और प्रदोष काल में भगवान शिव व माता पार्वती की संयुक्त उपासना करने से जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। आज प्रदोष काल में पूजा के लिए सबसे उत्तम समय शाम को 07:20 बजे से लेकर रात के 09:30 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसमें श्रद्धालु विशेष आरती और अर्घ्य आदि प्रदान कर सकते हैं।

    इसके साथ ही, संध्या काल के पश्चात चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ होने के कारण आज ही के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत भी रखा जा रहा है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में इसके लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। मासिक शिवरात्रि की मुख्य पूजा निशिता काल यानी मध्य रात्रि में संपन्न की जाती है। इस व्रत के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 13 जुलाई की रात को यानी आधी रात के समय 12:07 बजे से लेकर 12:47 बजे तक रहेगा, जहां शिव भक्त शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे।

    इस महासंयोग के अवसर पर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार आज के दिन अनाज जैसे चावल, गेहूं और दाल का दान करने से घर में कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती है। भगवान भोलेनाथ को सफेद रंग अत्यधिक प्रिय है, इसलिए आज के दिन सफेद रंग की मिठाइयों का दान करने से आर्थिक उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं और इच्छित वरदान की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सफेद वस्त्रों का दान करने से जातक को सौभाग्य की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य संबंधी सभी परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

    पर्यावरण और ग्रहों की शांति के दृष्टिकोण से आज के शुभ दिन पर पौधों का दान करना भी अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि रवि प्रदोष और मासिक शिवरात्रि के इस पावन अवसर पर छायादार या पूजनीय पौधों का दान करने से कुंडली के विभिन्न ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस प्रकार श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, उचित समय पर महादेव का अभिषेक करने और जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार दान देने से मनुष्य को मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।