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  • रवि प्रदोष व्रत आज, शिव आराधना और प्रदोष काल की पूजा का विशेष संयोग, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बताए गए उपायों का है खास महत्व

    रवि प्रदोष व्रत आज, शिव आराधना और प्रदोष काल की पूजा का विशेष संयोग, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बताए गए उपायों का है खास महत्व

    नई दिल्ली । आज रविवार को रवि प्रदोष व्रत का पावन संयोग बना है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ता है तो इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की उपासना के साथ सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने की भी मान्यता है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर प्रदोष काल में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की कामना करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु शिवलिंग का जल, दूध और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक करते हैं तथा ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से मन को शांति मिलती है और जीवन में आने वाली विभिन्न प्रकार की बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।

    रवि प्रदोष व्रत के अवसर पर कई श्रद्धालु यश और प्रतिष्ठा की कामना से शिवलिंग पर लाल चंदन अर्पित करते हैं। धार्मिक परंपराओं में माना जाता है कि रविवार के दिन भगवान शिव की पूजा में लाल चंदन का विशेष महत्व होता है। इसके साथ ही श्रद्धालु जल अर्पित कर भगवान शिव से आत्मविश्वास, सफलता और सम्मान की प्रार्थना करते हैं। यह पूरी तरह धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित परंपरा मानी जाती है।

    आर्थिक सुख-समृद्धि की कामना करने वाले श्रद्धालु प्रदोष काल में शिवलिंग पर शहद अर्पित कर उसके बाद शुद्ध जल से अभिषेक करते हैं। इसी प्रकार पारिवारिक सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण की कामना के लिए कच्चा दूध, काले तिल और बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन पूजन विधियों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने का विशेष महत्व बताया गया है।

    स्वास्थ्य संबंधी मंगलकामना के लिए भी अनेक श्रद्धालु गंगाजल में थोड़ा घी मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और पूरे समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव की आराधना मन को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक विश्वास है और इन्हें आस्था के दृष्टिकोण से देखा जाता है।

    रवि प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में मंदिर जाकर घी का दीपक जलाने और भगवान शिव के समक्ष अपनी प्रार्थना रखने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सात्विक जीवनशैली अपनाना, क्रोध से बचना, मधुर वाणी का प्रयोग करना और जरूरतमंद लोगों को दान देना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार इन नियमों का पालन करते हुए भगवान शिव की आराधना करते हैं। धार्मिक विद्वानों का भी मानना है कि पूजा-पाठ के साथ सदाचार, संयम और सेवा की भावना ही किसी भी व्रत और उपासना का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है।

  • मार्च 2026 में 'रवि' और 'सोम' प्रदोष व्रत का अद्भुत संयोग: महादेव की कृपा पाने के लिए नोट कर लें शुभ मुहूर्त और तिथि

    मार्च 2026 में 'रवि' और 'सोम' प्रदोष व्रत का अद्भुत संयोग: महादेव की कृपा पाने के लिए नोट कर लें शुभ मुहूर्त और तिथि


    नई दिल्ली ।हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत को सर्वोत्तम माना गया है। पौराणिक मान्यताओं और शिव पुराण के अनुसार, त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में महादेव स्वयं शिवलिंग में साक्षात विराजमान होते हैं। मार्च 2026 का महीना शिव भक्तों के लिए विशेष होने वाला है, क्योंकि इस महीने में दो अत्यंत फलदायी प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। पहला व्रत जहाँ रविवार को होने के कारण “रवि प्रदोष” कहलाएगा, वहीं दूसरा व्रत सोमवार को होने की वजह से “सोम प्रदोष” के नाम से जाना जाएगा। शास्त्रों में इन दोनों ही वारों पर पड़ने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, जो साधक को आरोग्य और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

    मार्च महीने के पहले प्रदोष व्रत की शुरुआत फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी तिथि से हो रही है। पंचांग के अनुसार, यह तिथि 28 फरवरी की रात 08 बजकर 43 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 1 मार्च, रविवार को रात 09 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए 1 मार्च को “रवि प्रदोष व्रत” रखा जाएगा। इस दिन महादेव की पूजा के लिए शाम 06 बजकर 21 मिनट से लेकर 07 बजकर 09 मिनट तक का समय सबसे शुभ रहेगा। रविवार को प्रदोष व्रत रखने से सूर्य देव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे व्यक्ति को मान-सम्मान और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

    वहीं, मार्च का दूसरा प्रदोष व्रत चैत्र कृष्ण त्रयोदशी को पड़ेगा। इसकी तिथि 16 मार्च 2026 को सुबह 09:40 बजे प्रारंभ होकर 17 मार्च की सुबह 09:23 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल की गणना के अनुसार, यह व्रत 16 मार्च को रखा जाएगा। सोमवार का दिन होने के कारण यह “सोम प्रदोष” कहलाएगा, जिसे शिवजी का सबसे प्रिय दिन माना जाता है। इस दिन पूजा का मुहूर्त शाम 06:30 बजे से रात 08:54 बजे तक रहेगा। सोम प्रदोष का व्रत करने से वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर होते हैं और चंद्रमा की शुभता बढ़ती है।

    प्रदोष व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन निराहार रहकर शिवलिंग पर जल, दूध और विशेष रूप से “बेलपत्र” अर्पित करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता और दुखों का नाश होता है। यह व्रत क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों से मुक्ति दिलाकर मन में सकारात्मकता का संचार करता है। यदि आप भी महादेव की असीम अनुकंपा प्राप्त करना चाहते हैं और अपने घर में सुख-शांति की कामना रखते हैं, तो मार्च के इन दो विशेष तिथियों को अपनी डायरी में जरूर नोट कर लें।