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  • 'ठाकुर सज्जन सिंह' से घर-घर मशहूर हुए अनुपम श्याम, बीमारी के दौर में योगी सरकार ने की थी 20 लाख रुपये की मदद

    'ठाकुर सज्जन सिंह' से घर-घर मशहूर हुए अनुपम श्याम, बीमारी के दौर में योगी सरकार ने की थी 20 लाख रुपये की मदद

    नई दिल्ली । अभिनेता अनुपम श्याम ओझा भारतीय फिल्म और टेलीविजन जगत में अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली आवाज और अलग अंदाज के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। खास तौर पर लोकप्रिय धारावाहिक ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ में ठाकुर सज्जन सिंह के किरदार ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। फिल्मों से लेकर छोटे पर्दे तक अपने अभिनय की मजबूत छाप छोड़ने वाले अनुपम श्याम ने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए। हालांकि, जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें गंभीर बीमारी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मिली आर्थिक सहायता भी चर्चा में रही थी।

    अनुपम श्याम का जन्म 20 सितंबर 1957 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। बचपन से ही उनका रुझान अभिनय की ओर था। शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अवध विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद लखनऊ स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी से रंगमंच और अभिनय का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद वह दिल्ली के श्रीराम सेंटर रंगमंडल से जुड़े और थिएटर के जरिए अभिनय की बारीकियों को समझा। रंगमंच पर अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने अभिनय के बड़े सपने के साथ मुंबई का रुख किया।

    मुंबई में शुरुआती दौर आसान नहीं था। उन्हें छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत करनी पड़ी, लेकिन उनकी प्रतिभा ने धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचा। उनके फिल्मी करियर की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘लिटिल बुद्धा’ से हुई। इसके बाद शेखर कपूर की चर्चित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में भी उन्होंने अभिनय किया। आगे चलकर वह ‘लगान’, ‘नायक’, ‘शक्ति’, ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’, ‘वांटेड’, ‘हल्ला बोल’ और ‘रक्त चरित्र’ जैसी फिल्मों का हिस्सा बने। कई फिल्मों में उन्होंने दबंग और नकारात्मक भूमिकाओं को प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतारा।

    हालांकि फिल्मों में लंबे समय तक काम करने के बाद भी उन्हें सबसे बड़ी लोकप्रियता वर्ष 2009 में शुरू हुए धारावाहिक ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ से मिली। इसमें ठाकुर सज्जन सिंह की भूमिका ने उनकी पहचान को एक अलग मुकाम दिया। उनका संवाद बोलने का अंदाज और किरदार की प्रभावशाली प्रस्तुति दर्शकों को बेहद पसंद आई। इस भूमिका की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि बड़ी संख्या में दर्शक उन्हें उनके वास्तविक नाम के बजाय ठाकुर सज्जन सिंह के नाम से पहचानने लगे। बाद में उन्होंने ‘प्रतिज्ञा 2’, ‘कृष्णा चली लंदन’ और ‘डोली अरमानों की’ सहित कई धारावाहिकों में अभिनय किया।

    जीवन के अंतिम दौर में अनुपम श्याम गंभीर किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ती थी और लंबे इलाज के कारण आर्थिक परेशानियां भी बढ़ गई थीं। इसी दौरान उनके परिवार की ओर से मदद की अपील की गई थी। अनुपम श्याम ने बाद में एक बातचीत में बताया था कि उनकी बीमारी की जानकारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, जिसके बाद इलाज के लिए 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अस्पताल के खाते में भेजी गई। अभिनेता ने इस मदद के लिए आभार भी जताया था और बताया था कि इससे उनके इलाज को आगे बढ़ाने में सहायता मिली।

    इलाज के दौरान उनकी तबीयत में कुछ समय के लिए सुधार आया और उन्होंने दोबारा काम शुरू करने की कोशिश की। वह ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा 2’ की शूटिंग से भी जुड़े, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लगातार बनी रहीं। आखिरकार 8 अगस्त 2021 को मुंबई के एक अस्पताल में 63 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके जाने के बाद फिल्म और टेलीविजन जगत में शोक की लहर दौड़ गई। अनुपम श्याम भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ठाकुर सज्जन सिंह सहित उनके यादगार किरदार और अभिनय की विरासत दर्शकों के बीच लंबे समय तक जीवित रहेगी।

  • राजा भैया ने शूटिंग में दिखाया दम, यूपी स्टेट चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर दर्ज कराई नई उपलब्धि

    राजा भैया ने शूटिंग में दिखाया दम, यूपी स्टेट चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर दर्ज कराई नई उपलब्धि

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने इस बार राजनीतिक गतिविधियों से अलग खेल के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने 49वीं यूपी स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार निशानेबाजी करते हुए कांस्य पदक हासिल किया है। प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन ने यह साबित किया कि वह केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि खेलों में भी अपनी रुचि और क्षमता के लिए पहचाने जाते हैं।

    राजा भैया ने नई दिल्ली स्थित डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। यह प्रतियोगिता 21 से 30 जून तक आयोजित की गई थी, जिसमें उन्होंने प्रतियोगी संख्या 71 के रूप में भाग लिया। एस-25 क्ले पिजन ट्रैप शूटिंग (एनआर) स्पर्धा में उन्होंने 25 पॉइंट का स्कोर हासिल किया और इसी प्रदर्शन के आधार पर कांस्य पदक अपने नाम किया। प्रतियोगिता के परिणाम बुधवार को घोषित किए गए।

    निशानेबाजी के प्रति राजा भैया की रुचि काफी पुरानी रही है। वह लंबे समय से शूटिंग खेल से जुड़े हुए हैं और हथियारों तथा निशानेबाजी में उनकी दिलचस्पी सार्वजनिक रूप से भी चर्चा में रही है। वह नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के लाइफटाइम सदस्य भी हैं। निशानेबाजी के क्षेत्र में उनकी रुचि के पीछे पारिवारिक प्रेरणा भी बताई जाती है।

    राजा भैया ने पहले भी बताया था कि उनके पिता उदय प्रताप सिंह स्वयं शूटर रहे हैं और उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने निशानेबाजी की शुरुआत की थी। परिवार से मिली इस प्रेरणा ने उन्हें इस खेल से लंबे समय तक जोड़े रखा। समय के साथ उन्होंने अभ्यास जारी रखा और अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

    शूटिंग के अलावा राजा भैया अपने पारंपरिक शस्त्रों के प्रति लगाव को लेकर भी कई बार चर्चा में रहे हैं। हर वर्ष दशहरे के अवसर पर वह अपने शस्त्रागार में रखे हथियारों की पूजा करते हैं। उनके शस्त्र संग्रह को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, कुछ मौकों पर इससे जुड़े विवाद भी सामने आए हैं, जिनका संबंध पारिवारिक और कानूनी मामलों से रहा है।

    राजनीतिक जीवन की बात करें तो रघुराज प्रताप सिंह प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से लगातार सातवीं बार विधायक हैं। वह जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी छवि एक प्रभावशाली क्षेत्रीय नेता के रूप में रही है।

    शूटिंग प्रतियोगिता में पदक जीतने के बाद उनके समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। समर्थक इसे उनके व्यक्तित्व के एक अलग पहलू के रूप में देख रहे हैं, जहां उन्होंने राजनीति के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हासिल किया गया यह पदक उनके लिए खेल उपलब्धियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

  • 'बाबरी पर आंसू बहाने वालों को अयोध्या पर बोलने का अधिकार नहीं', प्रतापगढ़ में विपक्ष पर योगी का तीखा हमला, आस्था और वक्फ को लेकर साधा निशाना

    'बाबरी पर आंसू बहाने वालों को अयोध्या पर बोलने का अधिकार नहीं', प्रतापगढ़ में विपक्ष पर योगी का तीखा हमला, आस्था और वक्फ को लेकर साधा निशाना

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में आयोजित एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए अयोध्या, राम मंदिर और वक्फ कानून जैसे मुद्दों पर विपक्ष के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल पहले भगवान श्रीराम के अस्तित्व और अयोध्या से जुड़े मुद्दों पर अलग रुख अपनाते रहे, वे अब हिंदुओं की आस्था का हवाला देकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता ऐसे दोहरे रवैये को भलीभांति समझती है और समय आने पर उसका जवाब भी देती है।

    उन्होंने राम मंदिर से जुड़े दान विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय को विपक्ष ने वास्तविक तथ्यों से अधिक राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री के अनुसार अयोध्या का वर्तमान स्वरूप धार्मिक, सांस्कृतिक और आधारभूत विकास का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि शहर में आधुनिक सुविधाओं, बेहतर संपर्क व्यवस्था और तीर्थ विकास के लिए व्यापक स्तर पर कार्य हुआ है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ मिल रहा है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों के पास जनता के सामने रखने के लिए विकास का कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष समाज को जातीय आधार पर विभाजित करने और धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रूप देने की कोशिश करता रहा है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक राजनीति का आधार विकास, सुशासन और जनहित होना चाहिए, न कि समाज में विभाजन पैदा करना।

    अयोध्या और राम मंदिर के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग पहले इन विषयों पर अलग दृष्टिकोण रखते थे, वे अब स्वयं को आस्था का समर्थक बताने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक दलों को अपने पुराने रुख और वर्तमान बयानों के बीच की विसंगतियों का भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता इतिहास और वर्तमान दोनों को याद रखती है।

    अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने वक्फ कानून का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के समान अनुपालन को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर सुधारात्मक कदम उठाए जाने पर विपक्ष अनावश्यक विरोध करता है, जबकि सुधारों का उद्देश्य आम लोगों के हितों की रक्षा करना होता है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि राज्य सरकार विकास, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को समान प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे राजनीतिक बयानों के बजाय सरकार के कार्यों और विकास योजनाओं के आधार पर निर्णय लें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश में विकास, निवेश, धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में चल रहे प्रयास आने वाले समय में राज्य की प्रगति को नई गति देंगे और जनता का विश्वास इसी प्रकार बना रहेगा।