Tag: Prayagraj Mela Authority

  • माघ मेले में बग्घी विवाद: मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा, जमीन आवंटन रद्द और आजीवन प्रतिबंध की धमकी

    माघ मेले में बग्घी विवाद: मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा, जमीन आवंटन रद्द और आजीवन प्रतिबंध की धमकी



    प्रयागराज।माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्राधिकरण के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। मेला प्रशासन ने अब दूसरी बार नोटिस जारी करते हुए उनकी संस्था को दी गई भूमि आवंटन रद्द करने और उन्हें मेले से आजीवन प्रतिबंधित करने की बात कही है।
    प्रशासन ने नोटिस का जवाब 24 घंटे में मांगा है।

    नोटिस में क्या लिखा है?
    प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस में कहा है कि मौनी अमावस्या के दिन पुलिस ने संगम क्षेत्र में सभी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई थी। इसी दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बग्घी लेकर संगम नोड पर जाने का प्रयास किया, जिससे भगदड़ की संभावना बढ़ गई और मेला प्रबंधन की व्यवस्था प्रभावित हुई।

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि उन्होंने मेले में अपने आप को शंकराचार्य बताकर बोर्ड लगवाए, जो सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दायरे में आता है।

    इसलिए प्राधिकरण ने पूछा है कि उनकी संस्था का भूमि आवंटन और सुविधाएं निरस्त कर उन्हें माघ मेले में हमेशा के लिए प्रतिबंधित क्यों न किया जाए।

    शंकराचार्य ने क्या जवाब दिया?
    मेला प्रशासन के नोटिस पर शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने प्रेस नोट जारी कर इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि नोटिस बैक डेट में चस्पा किया गया और प्रशासन अब कह रहा है कि जवाब नहीं दिया गया।

    शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, भ्रामक और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि जिस बग्घी का उल्लेख किया जा रहा है, वह उनके शिविर में कभी नहीं थी।

    उनका दावा है कि यह आरोप CCTV फुटेज से भी आसानी से गलत साबित किया जा सकता है।

    उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि धार्मिक कार्यों में मेला प्रशासन का दखल अस्वीकार्य है और यदि यह जारी रहा तो अंजाम बुरा हो सकता है।

    क्यों बढ़ रहा है विवाद?
    माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन संगम पर स्नान को लेकर पहले ही तनाव देखने को मिला था। इस विवाद ने शंकराचार्य और मेला प्राधिकरण के बीच रिश्तों में और खटास ला दी है। अब प्रशासन द्वारा भूमि आवंटन रद्द करने और आजीवन प्रतिबंध की धमकी से यह मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गया है।

    अगला कदम क्या हो सकता है?
    प्रशासन ने नोटिस का जवाब 24 घंटे में मांगा है।
    यदि शंकराचार्य की संस्था द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो मेला प्राधिकरण भूमि आवंटन रद्द और प्रतिबंध जैसे कदम उठा सकता है। इससे माघ मेले के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के मुद्दे और भी अधिक बढ़ सकते हैं।