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  • गुरुवार का दिन: व्रत, पूजा और दान से जीवन में सुख और समृद्धि पाएं

    गुरुवार का दिन: व्रत, पूजा और दान से जीवन में सुख और समृद्धि पाएं


    नई दिल्ली। गुरुवार को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है। इसे श्रद्धा संयम और गुरु तत्व के सम्मान का दिन माना जाता है। आस्था और सेवा भाव के साथ किए गए छोटे-छोटे उपाय भी जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। पंचांग और धर्मग्रंथों के अनुसार गुरुवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की उपासना का अनुकूल दिन है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से ज्ञान, समृद्धि और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरुवार को पीले रंग का विशेष महत्व है। पीले रंग को गुरु का प्रतीक माना गया है। इसलिए व्रत पूजा और दान में पीले पदार्थों का प्रयोग शुभ माना जाता है। प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करना चाहिए और भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्वलित करना चाहिए। इसके बाद तुलसी की माला से 11 या 21 बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप करने से गुरु कृपा प्राप्त होती है। पूजा के बाद चने की दाल गुड़ या पीले फलों का भोग अर्पित करना लाभकारी माना गया है।

    गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा भी अत्यंत फलदायी मानी गई है। पूजा विधि में वृक्ष के नीचे जल अर्पित करें हल्दी का तिलक लगाएं और दीपक जलाकर समृद्धि की कामना करें। धार्मिक परंपरा अनुसार गुरुवार को हल्दी चने की दाल पीले फल या बेसन से बने प्रसाद का दान करना शुभ फल देता है। श्रद्धालु सुख समृद्धि और पारिवारिक शांति के लिए गुरुवार व्रत रखते हैं और सत्यनारायण कथा का श्रवण करते हैं।

    गुरुवार के दिन माथे पर हल्दी या केसर का तिलक लगाना गुरु कृपा का प्रतीक माना गया है। संयमित व्यवहार और सकारात्मक संकल्प इस दिन की आध्यात्मिक साधना को पूर्णता देते हैं। इस दिन किए गए कर्म और पूजा के प्रभाव से जीवन में मानसिक संतुलन और स्थिरता आती है।

    हालांकि परंपराओं में गुरुवार को कुछ कार्यों से बचने की सलाह भी दी गई है। सिर धोना या बाल कटवाना, हल्दी या धन उधार देना, घर में पोछा लगाना या पीली वस्तुओं का अपमान करना वर्जित कार्य माने गए हैं। इन बातों का पालन करने से गुरुवार की पूजा और व्रत का पूर्ण लाभ मिलता है।

    धार्मिक दृष्टि से गुरुवार का दिन साधना ध्यान और पूजा के लिए विशेष फलदायी है। यह दिन जीवन में समृद्धि सुख और ज्ञान के मार्ग खोलता है। गुरु और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए नियमित पूजा व मंत्र जाप अत्यंत आवश्यक है। छोटे उपाय जैसे पीले वस्त्र, केले के वृक्ष की पूजा और दान-पुण्य जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद लाते हैं।इस प्रकार गुरुवार केवल सप्ताह का एक दिन नहीं है बल्कि जीवन में स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है। श्रद्धा संयम और सेवा भाव के माध्यम से इस दिन की पूजा करना हर व्यक्ति के लिए लाभकारी और फलदायी है।

  • आज का पंचांग 26 फरवरी 2026, फाल्गुन शुक्ल दशमी: प्रीति योग और शुभ मुहूर्त से दिन बने विशेष

    आज का पंचांग 26 फरवरी 2026, फाल्गुन शुक्ल दशमी: प्रीति योग और शुभ मुहूर्त से दिन बने विशेष


    नई दिल्ली। आज 26 फरवरी 2026 गुरुवार को फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि के साथ दिन की शुरुआत हुई। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह दिन आध्यात्मिक साधना, ज्ञानार्जन, दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार दशमी तिथि रात्रि 12 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगी और ग्रहों की स्थिति मानव जीवन के बौद्धिक और सामाजिक पक्ष को सुदृढ़ करने में सहायक होगी।

    खगोलीय दृष्टि से आज सूर्य मंगल बुध शुक्र और राहु कुंभ राशि में स्थित हैं जबकि चंद्रमा मिथुन राशि के मृगशिरा नक्षत्र में विराजमान हैं। मृगशिरा नक्षत्र ज्ञान, खोज और मानसिक शांति का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र के देवता सोम माने जाते हैं जो अमृत और चंद्र ऊर्जा के प्रतिनिधि हैं। इसलिए आज का दिन ध्यान, जप, साधना और नए विचारों पर मनन के लिए विशेष रूप से फलदायी रहेगा।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज रात्रि 10 बजकर 33 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। धार्मिक दृष्टि से यह योग आपसी सद्भाव, संबंधों में मधुरता और रुके हुए कार्यों की सिद्धि का संकेत देता है। इसी प्रकार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा जिसे दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल माना जाता है। वहीं अमृत काल रात्रि 1 बजकर 23 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा जो साधना और आध्यात्मिक चिंतन के लिए बेहद अनुकूल समय है।

    हालांकि पंचांग में कुछ अशुभ काल भी बताए गए हैं। राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगा और इस अवधि में नए कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय से बचने की परंपरा रही है। इसके अतिरिक्त गुलिकाल और यमगण्ड भी दिन के अलग-अलग समय में प्रभावी रहेंगे जिनमें सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 49 मिनट और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 19 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 12 बजकर 54 मिनट पर तथा चंद्रास्त अगले दिन प्रातः 3 बजकर 46 मिनट पर होगा। धार्मिक दृष्टि से यह समय क्रम दैनिक पूजा, व्रत और आध्यात्मिक अनुशासन के निर्धारण में महत्वपूर्ण माना जाता है।

    धर्माचार्यों का मत है कि आज का दिन आत्मसंयम, ज्ञानार्जन और ईश्वर स्मरण के लिए विशेष फलदायी है। ग्रहों की स्थिति मानसिक संतुलन विवेकपूर्ण निर्णय और सामाजिक मेल-जोल के संकेत देती है। श्रद्धालुओं को आज प्रार्थना दान और सकारात्मक संकल्प के माध्यम से जीवन में शांति और समृद्धि की कामना करनी चाहिए।

    इस प्रकार आज का दिन आस्था, विवेक और सद्भाव के समन्वय का संदेश देता है। कर्म श्रद्धा और संयम जीवन को संतुलित दिशा प्रदान करते हैं। ध्यान साधना और ज्ञानार्जन के लिए अनुकूल यह दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्यों और जीवन के प्रति जागरूक और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है।