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  • प्रेग्नेंसी डायबिटीज को हल्के में न लें, बाद में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का रिस्क

    प्रेग्नेंसी डायबिटीज को हल्के में न लें, बाद में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का रिस्क


    नई दिल्ली । गर्भावस्था के दौरान होने वाली जेस्टेशनल डायबिटीज को अक्सर महिलाएं अस्थायी समस्या मानकर भूल जाती हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर डिलीवरी के बाद भी लंबे समय तक शरीर पर बना रह सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी के बाद ब्लड शुगर भले ही सामान्य हो जाए, लेकिन शरीर में हुए हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव भविष्य में थायरॉयड, हार्ट डिजीज और टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मां बनने के बाद ज्यादातर महिलाओं का पूरा ध्यान बच्चे की देखभाल में चला जाता है। ऐसे में लगातार थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, कमजोरी, मूड स्विंग्स, डिप्रेशन या ठंड ज्यादा लगने जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि यही संकेत थायरॉयड डिसफंक्शन की ओर इशारा कर सकते हैं।

    डॉक्टरों का कहना है कि जेस्टेशनल डायबिटीज के दौरान शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिसका असर थायरॉयड ग्लैंड पर भी पड़ सकता है। थायरॉयड शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। ऐसे में इसमें गड़बड़ी होने पर शरीर धीरे-धीरे कई समस्याओं की चपेट में आने लगता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि थायरॉयड की परेशानी अचानक नहीं दिखती, बल्कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। बिना वजह वजन बढ़ना, ड्राई स्किन, ध्यान लगाने में परेशानी, एंग्जायटी, पीरियड्स अनियमित होना और लगातार कमजोरी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कई महिलाएं इन्हें पोस्ट-प्रेग्नेंसी बदलाव समझकर अनदेखा कर देती हैं, जिससे समस्या गंभीर हो सकती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज हुई हो, उन्हें डिलीवरी के बाद भी नियमित हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए। खासतौर पर अगर परिवार में डायबिटीज या थायरॉयड की हिस्ट्री हो तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

    डॉक्टरों का मानना है कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय-समय पर ब्लड शुगर व थायरॉयड टेस्ट करवाकर भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। क्योंकि मां की सेहत सिर्फ गर्भावस्था तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका असर लंबे समय तक पूरे शरीर पर दिखाई देता है।

  • गर्भावस्था में क्यों जरूरी है फोलिक एसिड? जानिए ‘प्रेग्नेंसी विटामिन’ का पूरा महत्व..

    गर्भावस्था में क्यों जरूरी है फोलिक एसिड? जानिए ‘प्रेग्नेंसी विटामिन’ का पूरा महत्व..

    नई दिल्ली। गर्भावस्था का समय महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण माना जाता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनका सीधा असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों पर पड़ता है। ऐसे में संतुलित और पोषक आहार की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। इन्हीं पोषक तत्वों में फोलिक एसिड को विशेष स्थान दिया जाता है, जिसे अक्सर “प्रेग्नेंसी का विटामिन” कहा जाता है।

    फोलिक एसिड, विटामिन बी-9 का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि इसका प्राकृतिक स्रोत फोलेट कहलाता है। यह शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है और रक्त निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है। गर्भावस्था के दौरान जब शिशु का तेजी से विकास होता है, तब यह पोषक तत्व उसकी वृद्धि में अहम भूमिका निभाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने बच्चे के सबसे महत्वपूर्ण विकास चरण होते हैं। इसी समय भ्रूण के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का निर्माण होता है। फोलिक एसिड इस प्रक्रिया में सहायक होता है और न्यूरल ट्यूब को सही तरीके से विकसित करने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर बच्चे में जन्म के समय विकास संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

    फोलिक एसिड की कमी केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकती है। इसकी कमी से शरीर में कमजोरी, थकान, एनीमिया और सिरदर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर गर्भधारण से पहले ही फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं ताकि शरीर पहले से तैयार हो सके।

    यह पोषक तत्व कई प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और मेथी, दालें, चना, मूंग और मसूर इसके अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा संतरा, अनार जैसे फल और बादाम-अखरोट जैसे सूखे मेवे भी शरीर में फोलिक एसिड की पूर्ति करते हैं।

    पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों में भी गर्भावस्था के दौरान विशेष आहार पर जोर दिया गया है। इस अवधि को संतुलित भोजन और सही जीवनशैली का समय माना जाता है, जिसमें शरीर को आवश्यक पोषण देने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन महत्वपूर्ण होता है। सही आहार न केवल मां के स्वास्थ्य को बनाए रखता है, बल्कि शिशु के समुचित विकास में भी मदद करता है।

    आज के समय में फोलिक एसिड को गर्भावस्था का अनिवार्य हिस्सा माना जाता है। यह न केवल बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास को मजबूती देता है, बल्कि मां को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसलिए इसे “प्रेग्नेंसी का विटामिन” कहा जाता है, क्योंकि यह आने वाले जीवन की नींव को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।