Tag: Pregnancy

  • 150 इंजेक्शन, लंबा इंतजार और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव, अनुष्का रंजन ने साझा किया IVF के जरिए मां बनने का कठिन सफर

    150 इंजेक्शन, लंबा इंतजार और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव, अनुष्का रंजन ने साझा किया IVF के जरिए मां बनने का कठिन सफर

    नई दिल्ली । अभिनेत्री अनुष्का रंजन ने मां बनने के अपने सफर को लेकर खुलकर बात करते हुए आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान झेली गई शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों का अनुभव साझा किया है। हाल ही में अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा करने वाली अनुष्का ने बताया कि मातृत्व तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था। इसके पीछे लंबा इलाज, लगातार चिकित्सकीय प्रक्रियाएं और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव शामिल रहे। उन्होंने अपने अनुभव को साझा कर उन महिलाओं का हौसला बढ़ाने की कोशिश की है, जो इसी तरह की परिस्थितियों का सामना कर रही हैं।

    अनुष्का रंजन ने बताया कि उन्होंने और उनके पति आदित्य सील ने परिवार बढ़ाने की योजना पर गंभीरता से विचार करने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह ली। सामान्य रूप से गर्भधारण नहीं होने पर दोनों ने आईवीएफ प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, यह उपचार केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद थकाने वाला साबित हुआ। कई बार उन्हें लगा कि इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उनके लिए बेहद कठिन हो जाएगा।

    अभिनेत्री ने बताया कि उपचार के दौरान उन्हें 150 से अधिक इंजेक्शन लेने पड़े। कई बार इंजेक्शन का दर्द इतना अधिक होता था कि आंखों में आंसू आ जाते थे। शुरुआती चरण में उनके पति आदित्य सील स्वयं उन्हें इंजेक्शन लगाने में मदद करते थे और हर कठिन पल में उनका हौसला बढ़ाते थे। अनुष्का के मुताबिक, लगातार दवाइयों, जांचों और उपचार के बीच कई ऐसे क्षण आए जब उन्होंने मानसिक रूप से खुद को बेहद कमजोर महसूस किया, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।

    उन्होंने कहा कि आईवीएफ केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि भावनात्मक परीक्षा भी है। इस दौरान महिलाएं शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ मानसिक दबाव, चिंता और अनिश्चितता से भी गुजरती हैं। इसलिए इस विषय को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि समाज में आईवीएफ को लेकर सही जानकारी और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि इस उपचार से गुजर रही महिलाओं को बेहतर समझ और भावनात्मक सहयोग मिल सके।

    अनुष्का ने बताया कि इस विषय पर उनकी बहन आकांक्षा ने भी उन्हें कई महत्वपूर्ण बातें समझाईं। उनके अनुसार, समाज में अक्सर यह धारणा बना दी जाती है कि विवाह के बाद गर्भधारण आसानी से हो जाता है, जबकि वास्तविकता कई बार इससे अलग होती है। विशेषज्ञों से बातचीत के दौरान उन्हें यह समझ आया कि प्रत्येक ओव्यूलेशन चक्र में गर्भधारण की संभावना सीमित होती है। इस जानकारी ने उन्हें प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद की।

    अभिनेत्री का कहना है कि इस पूरे अनुभव ने उन्हें महिलाओं की मानसिक और शारीरिक क्षमता का नया एहसास कराया। उनका मानना है कि मातृत्व का सफर हर महिला के लिए अलग होता है और किसी की परिस्थितियों का आकलन बिना पूरी जानकारी के नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उन महिलाओं से भी सकारात्मक बने रहने की अपील की जो किसी कारणवश गर्भधारण में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं।

    अनुष्का रंजन ने इस अवसर पर पुरुषों से भी संवेदनशीलता और सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पत्नी या जीवनसाथी आईवीएफ जैसी प्रक्रिया से गुजर रही हैं, तो उन्हें धैर्य, समझ और भावनात्मक समर्थन देना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, परिवार का साथ इस कठिन सफर को काफी हद तक आसान बना सकता है। उन्होंने कहा कि अपने अनुभव को सार्वजनिक करने का उद्देश्य आईवीएफ से जुड़ी झिझक को कम करना और इस विषय पर खुलकर संवाद को बढ़ावा देना है।

  • ‘मेरी जिंदगी नर्क बन चुकी है… मुझे यहां से ले जाओ’, ट्विशा शर्मा की मां संग चैट आई सामने

    ‘मेरी जिंदगी नर्क बन चुकी है… मुझे यहां से ले जाओ’, ट्विशा शर्मा की मां संग चैट आई सामने



    भोपाल। भोपाल के चर्चित कटारा हिल्स संदिग्ध मौत मामले में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा सामने आया है। पूर्व जज की बहू ट्विशा शर्मा और उसकी मां के बीच हुई व्हाट्सएप चैट सार्वजनिक हुई है, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। इन चैट्स में ट्विशा ने अपनी शादीशुदा जिंदगी को “नर्क” बताते हुए मां से उसे वहां से ले जाने की गुहार लगाई थी।

    जानकारी के मुताबिक, 12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा ने मौत से करीब पांच दिन पहले अपनी मां को कई भावुक मैसेज भेजे थे। चैट में ट्विशा लिखती है— “मेरी जिंदगी नर्क बन चुकी है… ये लोग बहुत क्रूर हैं… समर्थ मुझसे ठीक से बात तक नहीं करता… तुम यहां आओ और मुझे यहां से ले जाओ… ये लोग मुझे जीने नहीं देंगे।”

    इन चैट्स के सामने आने के बाद मृतका का परिवार इसे आत्महत्या नहीं बल्कि प्रताड़ना से जुड़ा मामला बता रहा है। परिवार का आरोप है कि शादी के कुछ ही महीनों बाद ट्विशा मानसिक रूप से टूट चुकी थी और लगातार दबाव में जी रही थी।

    इधर कोर्ट में आरोपी पक्ष की ओर से भी कई दावे किए गए हैं। ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह ने जमानत आवेदन में आरोप लगाया कि ट्विशा ड्रग एडिक्ट थी और उसे मूड स्विंग्स की समस्या थी। इस पर ट्विशा की मां ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं है, इसलिए उसके बारे में कुछ भी कहा जा रहा है।

    मामले में एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। परिवार के अनुसार ट्विशा करीब दो महीने की गर्भवती थी और उसके पति समर्थ सिंह ने उसके चरित्र पर सवाल उठाए थे। आरोप है कि समर्थ ने ट्विशा से बच्चे को लेकर आपत्तिजनक सवाल किए थे, जिससे वह मानसिक रूप से और ज्यादा परेशान हो गई थी।

    ट्विशा के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने दावा किया है कि समर्थ खुद नशा करता था और जब ट्विशा ने इसका विरोध किया तो उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। परिवार का आरोप है कि आरोपी पक्ष प्रभावशाली होने के कारण पुलिस जांच प्रभावित हो रही है। इसी वजह से परिजन अब मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग कर रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस एसआईटी के जरिए मामले की जांच कर रही है। वहीं ट्विशा की मौत से जुड़े हर नए खुलासे के बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

  • मातृत्व और प्रोफेशन का संतुलन: डिलीवरी के बाद जल्द काम पर लौटीं ये एक्ट्रेसेस बनीं मिसाल

    मातृत्व और प्रोफेशन का संतुलन: डिलीवरी के बाद जल्द काम पर लौटीं ये एक्ट्रेसेस बनीं मिसाल


    नई दिल्ली । मां बनना किसी भी महिला के जीवन का सबसे खास और भावुक पल होता है। लेकिन बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों ने यह साबित किया है कि मातृत्व और करियर साथ-साथ संभाले जा सकते हैं। जहां कुछ एक्ट्रेसेस ने प्रेग्नेंसी के दौरान काम किया वहीं कई ऐसी भी रहीं जिन्होंने डिलीवरी के तुरंत बाद ही प्रोफेशनल जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देते हुए काम पर वापसी की। इन अभिनेत्रियों ने अपने जज्बे और प्रोफेशनल कमिटमेंट से लोगों को चौंकाया भी और प्रेरित भी किया।

    सबसे पहले बात करें कॉमेडी क्वीन भारती सिंह की। भारती ने अपने पहले बच्चे के जन्म के महज 12 दिन बाद ही शो हुनरबाज के सेट पर वापसी कर सबको हैरान कर दिया था। बेटे को घर पर छोड़कर आने के बाद वह भावुक भी हो गई थीं। पैपराजी से बातचीत में उन्होंने बताया था कि वह काफी रोईं क्योंकि उनका बेबी सिर्फ 12 दिन का था लेकिन काम की जिम्मेदारी भी जरूरी थी। हालांकि इस फैसले को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा।

    वहीं अभिनेत्री नेहा धूपिया ने भी मां बनने के बाद जल्दी काम संभाला। उन्होंने अपनी बेटी महर के जन्म के लगभग 45 दिन बाद रियलिटी शो रोडीज की शूटिंग शुरू कर दी थी। इतना ही नहीं दूसरे बच्चे के जन्म के छह दिन बाद ही उन्होंने सोशल मीडिया पर स्क्रिप्ट पढ़ते हुए अपनी तस्वीर साझा कर यह संकेत दे दिया था कि वह जल्द ही काम पर लौटने वाली हैं।

    आलिया भट्ट ने भी बेटी राहा के जन्म के तीन से चार महीने के भीतर काम पर वापसी कर ली थी। खास बात यह है कि उन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान ही हॉलीवुड फिल्म हार्ट ऑफ़ स्टोन की शूटिंग पूरी की थी जिसमें उन्होंने कई एक्शन सीन भी किए। आलिया का यह प्रोफेशनलिज्म दर्शाता है कि वह अपने करियर को लेकर कितनी समर्पित हैं।

    बॉलीवुड की फिटनेस आइकन करीना कपूर खान भी इस सूची में शामिल हैं। उन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान विज्ञापन और शूटिंग जारी रखी थी। दूसरे बेटे जेह के जन्म के करीब एक महीने बाद ही वह दोबारा काम पर लौट आई थीं। करीना ने हमेशा यह संदेश दिया है कि प्रेग्नेंसी किसी महिला के काम करने की क्षमता को सीमित नहीं करती।

    टीवी इंडस्ट्री की बात करें तो भाभी जी घर पर हैं फेम सौम्या टंडन ने जनवरी 2019 में बेटे को जन्म दिया और महज चार महीने बाद मई में शूटिंग पर लौट आईं। इसी तरह छवी मित्तल बेटे के जन्म के एक महीने के भीतर ही काम पर सक्रिय हो गई थीं। वह अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान भी काफी एक्टिव रहीं और बाद में बेटे को सेट पर साथ लेकर भी पहुंचीं।

    साउथ और बॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुकीं काजल अग्रवाल ने भी बेबी के जन्म के दो महीने बाद काम पर वापसी की। वह अक्सर अपने बेटे को सेट पर साथ लेकर जाती थीं जिससे वह मां और प्रोफेशनल दोनों भूमिकाएं निभा सकें।

    इन अभिनेत्रियों की कहानियां यह साबित करती हैं कि आज की महिलाएं पारिवारिक और पेशेवर जीवन के बीच संतुलन बनाने में सक्षम हैं। उन्होंने यह दिखाया कि मां बनने के बाद भी सपनों की उड़ान थमती नहीं बल्कि और मजबूत हो जाती है।

  • गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स का उपयोग और नवजातों में GBS रोग का खतरा

    गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स का उपयोग और नवजातों में GBS रोग का खतरा

    ई दिल्ली एक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक्स का उपयोग नवजात शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस (GBS) रोग के विकास के जोखिम को बढ़ा सकता है।

    हालांकि ये बैक्टीरिया आमतौर पर आंत या जननांगों में हानिरहित रहते हैं, लेकिन ये नवजातों, बुजुर्गों और इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड व्यक्तियों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जिससे सेप्सिस, मेनिनजाइटिस और निमोनिया हो सकता है।

    स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट और बेल्जियम के एंटवर्प विश्वविद्यालय के एक अंतरराष्ट्रीय दल द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क नवजात GBS रोग के बढ़ते जोखिम से जुड़ा था, जो जन्म के चार सप्ताह के भीतर होता है। तीसरे तिमाही में प्रारंभिक संपर्क का सबसे मजबूत संबंध देखा गया।

    शोधकर्ताओं ने कहा, “गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क नवजातों में GBS के जोखिम को चार सप्ताह के भीतर बढ़ा सकता है, विशेष रूप से उन नवजातों में जिन्हें जोखिम-आधारित अंतःप्रसूति प्रोफिलैक्सिस से कवर नहीं किया गया है।”

    इस अध्ययन में 2006 से 2016 के बीच स्वीडन में सभी एकल जीवित जन्मों का जनसंख्या-आधारित अध्ययन किया गया।

    1,095,644 जीवित जन्मों में से 24.5 प्रतिशत नवजातों को एंटीबायोटिक्स का संपर्क हुआ।

    GBS की घटनाएं संपर्क में आए नवजातों में बिना संपर्क वाले नवजातों की तुलना में अधिक पाई गईं (0.86 बनाम 0.66 प्रति 1,000 जीवित जन्म)।

    शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अध्ययन नवजात GBS रोग के जोखिम से संबंधित गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क की जांच करने वाला पहला अध्ययन है। हालांकि, यह पिछले नॉर्डिक अध्ययनों के साथ मेल खाता है, जिन्होंने गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क के बाद प्रारंभिक बचपन (1-5 वर्ष) में संक्रमण के 16-34 प्रतिशत बढ़ते जोखिम की रिपोर्ट की थी।

    अध्ययन में यह भी पाया गया कि जन्म के करीब (चार सप्ताह के भीतर) दिए गए GBS-गतिशील एंटीबायोटिक्स कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करते।

    गर्भावस्था के दौरान किसी भी एंटीबायोटिक के संपर्क का नवजात GBS रोग के साथ संबंध केवल उन गर्भधारणाओं में देखा गया जिनमें GBS जोखिम कारक नहीं थे।

    इससे यह संकेत मिलता है कि बिना स्थापित GBS जोखिम कारकों वाले नवजातों को गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क को सीमित करने से अधिक लाभ हो सकता है।

    अधिक शोध की आवश्यकता पर जोर देते हुए, टीम ने उन नवजातों की निगरानी में बढ़ती सतर्कता की आवश्यकता को भी रेखांकित किया जो मौजूदा GBS रोकथाम दिशानिर्देशों के बाहर आते हैं, विशेष रूप से उन नवजातों के लिए जो प्रारंभिक तीसरी तिमाही में गर्भ में एंटीबायोटिक्स के संपर्क में आए।

  • कुमार सानू ने एक्स वाइफ रीता के खिलाफ दर्ज किया मानहानि का केस 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग

    कुमार सानू ने एक्स वाइफ रीता के खिलाफ दर्ज किया मानहानि का केस 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग


    नई दिल्ली । कुमार सानू ने अपनी एक्स वाइफ रीता के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज किया है और मुआवजे के रूप में 30 लाख रुपये की मांग की है। यह मामला तब सामने आया जब रीता ने कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुमार सानू पर गंभीर आरोप लगाए।

    क्या है मामला

    रीता ने अपने बयानों में दावा किया था कि कुमार सानू ने उनकी प्रेग्नेंसी के दौरान उनका बहुत बुरा व्यवहार किया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि कुमार सानू ने उन्हें भूखा रखा किचन में बंद कर दिया और प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें दूध और मेडिकल केयर तक नहीं दिया। रीता का यह भी कहना था कि कुमार सानू ने इस दौरान कोर्ट के मामलों को भी जारी रखा था।

    इन आरोपों को लेकर कुमार सानू ने मानहानि की याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि इन झूठे आरोपों के कारण उनकी इमेज को काफी नुकसान पहुंचा है और उन्होंने मानसिक तनाव का सामना भी किया है। कुमार सानू का कहना है कि इन आरोपों के कारण उनकी पब्लिक इमेज खराब हुई है और इसका असर उनके प्रोफेशनल करियर पर भी पड़ा है।

    याचिका में क्या कहा गया

    याचिका में कहा गया है कि इन बयानों ने सिंगर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है और उन्हें सोशल मीडिया पर भी निगेटिव प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा है। इस मानहानि के मामले में रीता और संबंधित मीडिया पोर्टल्स को लीगल नोटिस भेजा गया है। कुमार सानू ने यह भी कहा कि इन आरोपों से उन्हें आर्थिक और प्रतिष्ठा संबंधी भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा रीता ने यह भी आरोप लगाया था कि शादी के दौरान कुमार सानू के कई अफेयर थे जो मामला और पेचीदा बना रहा है।

    सना रईस खान ने लिया कुमार सानू का पक्ष

    कुमार सानू की ओर से इस मानहानि केस की याचिका वकील सना रईस खान द्वारा दायर की गई है। सना रईस खान बिग बॉस 17 की कंटेस्टेंट भी रह चुकी हैं और उन्होंने ही कुमार सानू का कानूनी प्रतिनिधित्व किया है।

    कुमार सानू और रीता का तलाक

    कुमार सानू और रीता का तलाक 2001 में हुआ था। दोनों का एक बेटा है जान कुमार सानू जो बिग बॉस 14 में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ चुके थे। जान कुमार सानू का नाम भी इस विवाद से जुड़ा है लेकिन अभी तक उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह विवाद सिंगर कुमार सानू और उनकी एक्स वाइफ रीता के बीच बढ़ता जा रहा है। यदि कोर्ट इस मामले में फैसला देता है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि मानहानि के इस केस में क्या परिणति होती है और क्या कुमार सानू को मुआवजा मिलता है।

  • र्भावस्था में क्या न खाएं: एक्सपर्ट गायनेकोलॉजिस्ट का हेल्दी डाइट गाइड

    र्भावस्था में क्या न खाएं: एक्सपर्ट गायनेकोलॉजिस्ट का हेल्दी डाइट गाइड


     नई दिल्ली /प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय होता है। इस दौरान केवल मां की नहीं बल्कि बच्चे की सेहत का भी खास ख्याल रखना पड़ता है। प्रेग्नेंसी में महिलाओं के शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम पहले जैसा मजबूत नहीं रहता। ऐसे में मां का हेल्दी और संतुलित आहार लेना बेहद जरूरी है, ताकि बच्चे की सही ग्रोथ और मां की सेहत दोनों बनी रहें। कई बार महिलाएं सोचती हैं कि प्रेग्नेंसी में उन्हें दो लोगों की डाइट लेनी है और अधिक मात्रा में खाना शुरू कर देती हैं। लेकिन यह सही नहीं है। हर फूड प्रेग्नेंसी में सुरक्षित नहीं होता। कुछ चीजें फूड पॉइजनिंग, इन्फेक्शन, हॉर्मोनल असंतुलन और बच्चे की विकास प्रक्रिया पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए।

    प्रेग्नेंसी में किन फूड्स से बचें:

    कच्चा या अधपका अंडा और मीट: इनमें बैक्टीरिया हो सकते हैं जो फूड पॉइजनिंग और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। कच्चा या अधपका पपीता: इसमें लेटेक्स नामक पदार्थ होता है जो गर्भाशय में संकुचन कर सकता है। जंक फूड, अधिक मसालेदार और तेलीय भोजन: ये हॉर्मोनल असंतुलन और वजन बढ़ने की समस्या पैदा कर सकते हैं। ज्यादा कैफीन: प्रतिदिन 200 मिलीग्राम से अधिक कैफीन लगभग एक कप कॉफी/चाय बच्चे की ग्रोथ और नींद पर असर डाल सकता है।

    क्या खाएं:

    बच्चे के सही विकास के लिए प्रेग्नेंट महिलाओं को पौष्टिक और संतुलित आहार लेना चाहिए। इसमें शामिल हैं: मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी ,दालें और काबुली ,चना, बीज और ड्राईफ्रूट्स जैसे पंपकिन, सनफ्लावर सीड्स  स्वस्थ तेल जैसे सरसों का तेल और घी  ताजे फल और हरी सब्जियां

    डेली डाइट प्लान:

    प्रेग्नेंसी में छोटे-छोटे खाने के हिस्से दिन में कई बार लेना बेहतर होता है। आहार में कार्ब्स, प्रोटीन, फैट और फाइबर का संतुलन होना चाहिए। हाइड्रेशन के लिए दिन भर में 2.5–3 लीटर पानी पीना जरूरी है। इसके अलावा नारियल पानी, सूप, लेमन वॉटर और छाछ भी पी सकते हैं।

    स्नैक्स:

    हल्के, सुपाच्य और न्यूट्रिएंट-रिच स्नैक्स लेना सुरक्षित है। जैसे- रोस्टेड नट्स  पका हुआ स्प्राउट्स चाट
    मूंग दाल या बेसन चीला  इडली और डोसा  होममेड वेजिटेबल सूप और सैंडविच  उबला अंडा और कॉर्न

    वजन बढ़ना:

    प्रेग्नेंसी में वजन बढ़ना सामान्य और जरूरी है। कुल वजन बढ़ने की सीमा आपकी पहले की बॉडी मास इंडेक्स BMI पर निर्भर करती है। आम तौर पर 10–12.5 किलो तक वजन बढ़ना सामान्य माना जाता है। अंडरवेट महिलाएं 12–18 किलो नॉर्मल वेट 11–16 किलो, ओवरवेट 7–11 किलो और ओबेसिटी वाली महिलाएं 5–9 किलो तक वजन बढ़ा सकती हैं।

    एक्सरसाइज और योगा:

    हल्की एक्सरसाइज और योगा पूरी तरह सुरक्षित हैं। नियमित हल्की वॉक, प्राणायाम, डीप ब्रीदिंग और स्ट्रेचिंग से शरीर एक्टिव रहता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और डिलीवरी में सहूलियत होती है। लेकिन भारी वजन उठाना, झटकेदार मूवमेंट या पेट के बल की एक्सरसाइज से बचें। किसी नई या कठिन योग पोज को बिना ट्रेनर के शुरू न करें। अगर चक्कर, सांस फूलना, पेट दर्द या ब्लीडिंग हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।  प्रेग्नेंसी का यह चरण बेहद खास होता है। संतुलित आहार, सही हाइड्रेशन, सुरक्षित स्नैक्स और हल्की एक्सरसाइज न केवल मां की सेहत बनाए रखती हैं बल्कि बच्चे के सही विकास और मजबूत इम्यून सिस्टम में भी मदद करती हैं।