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  • IPL जीत के बाद आध्यात्मिक सफर पर विराट कोहली, पहुंचे वृंदावन आश्रम

    IPL जीत के बाद आध्यात्मिक सफर पर विराट कोहली, पहुंचे वृंदावन आश्रम


    मथुरा । आईपीएल 2026 में शानदार जीत दर्ज करने के बाद Virat Kohli एक बार फिर आध्यात्मिक यात्रा पर नजर आए। मंगलवार सुबह वे अपनी पत्नी Anushka Sharma के साथ वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने केली कुंज आश्रम में संत Premanand Maharaj के दर्शन किए।

    दोनों सुबह करीब 7 बजे आश्रम पहुंचे और मास्क पहनकर कार से उतरने के बाद नंगे पैर आश्रम परिसर में प्रवेश किया। संत प्रेमानंद महाराज के शिष्यों ने उनका स्वागत किया। विराट और अनुष्का लगभग दो घंटे तक आश्रम में रुके और संत से मुलाकात की। बाहर निकलने पर विराट के माथे पर चंदन और त्रिपुंड लगा हुआ था, जबकि उनके हाथ में एक धार्मिक पुस्तक भी दिखाई दी।

    आश्रम दर्शन के बाद दोनों ने लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित गुरु हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम का भी दौरा किया। खास बात यह रही कि इस दौरान भी वे नंगे पैर पैदल ही चलते नजर आए। इस यात्रा के दौरान उनकी सादगी और आध्यात्मिक जुड़ाव की झलक देखने को मिली।

    इससे पहले भी विराट और अनुष्का कई बार वृंदावन आ चुके हैं। इसी साल 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर भी दोनों ने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए थे और सत्संग में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि पिछले तीन वर्षों में यह उनकी सातवीं मुलाकात है, जिसमें इस वर्ष की यह तीसरी यात्रा शामिल है।

    गौरतलब है कि हाल ही में Royal Challengers Bengaluru ने अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया था। इस मुकाबले में विराट कोहली ने अहम भूमिका निभाई थी और अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन भी बनाए थे।

    आईपीएल में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद कोहली का यह आध्यात्मिक दौरा एक बार फिर चर्चा में है, जहां क्रिकेट की सफलता के बाद उन्होंने धार्मिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्राथमिकता दी।

  • प्रेमानंद जी महाराज का जवाब: विदेश में नॉनवेज खाने के बाद भी लोग तरक्की कैसे करते हैं? जानिए गहरी सीख

    प्रेमानंद जी महाराज का जवाब: विदेश में नॉनवेज खाने के बाद भी लोग तरक्की कैसे करते हैं? जानिए गहरी सीख




    नई दिल्ली। प्रेमानंद जी महाराज  के एकांतिक वार्ता में दिए गए विचारों पर आधारित एक सवाल ने लोगों का ध्यान खींचा है। भक्त ने पूछा कि विदेशों में लोग मांसाहार करते हैं, फिर भी वे तरक्की कैसे कर लेते हैं? इस पर महाराज जी ने जीवन, धर्म और “सच्ची उन्नति” को लेकर गहरी बात समझाई।

    महाराज जी के अनुसार, केवल भौतिक सफलता या पैसा कमाना ही असली उन्नति नहीं है। उन्होंने कहा कि असली उन्नति वह है जिसमें मन की शांति, संस्कार और आध्यात्मिक संतुलन भी शामिल हो। उनके अनुसार, बाहरी सफलता को ही पूरी उन्नति मान लेना एक अधूरी सोच है।

    शाकाहार और कर्म का संदेश
    प्रेमानंद जी महाराज ने यह भी कहा कि हर जीव के जीवन का मूल्य है और कर्म का प्रभाव व्यक्ति पर जरूर पड़ता है। उन्होंने समझाया कि व्यक्ति के कर्म ही उसके जीवन के परिणाम तय करते हैं, और समय के साथ हर चीज का फल मिलता है।

    विदेश और “उन्नति” पर विचार
    भक्त के सवाल पर महाराज जी ने कहा कि केवल धन और भोग-विलास को उन्नति मानना सही नहीं है। उनके अनुसार, सच्ची शांति और संतोष केवल बाहरी सुविधाओं से नहीं मिलता, बल्कि आंतरिक संस्कारों और आध्यात्मिक जीवन से मिलता है।

    आधुनिकता और अध्यात्म का संतुलन
    महाराज जी ने यह भी कहा कि आधुनिक शिक्षा जरूरी है, लेकिन उसके साथ अध्यात्म का संतुलन भी होना चाहिए। उनके अनुसार, यदि दोनों साथ चलें तो समाज अधिक संतुलित और शांतिपूर्ण बन सकता है।

  • सच्चे समर्पण की ताकत क्या है प्रेमानंद जी महाराज का जीवन बदलने वाला उपदेश

    सच्चे समर्पण की ताकत क्या है प्रेमानंद जी महाराज का जीवन बदलने वाला उपदेश


    नई दिल्ली । आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध श्री प्रेमानंद जी महाराज ने जीवन और भक्ति को लेकर एक गहरा संदेश दिया है जिसमें उन्होंने बताया कि इंसान के जीवन में केवल एक सही निर्णय ही उसकी पूरी दिशा बदल सकता है। उनके अनुसार जीवन में प्रवचन सुनना और बोलना आसान है लेकिन असली कठिनाई अपने मन शरीर और प्राण को पूरी तरह भगवान के प्रति समर्पित करने में है।

    महाराज जी का कहना है कि अक्सर लोग यह दावा करते हैं कि वे भगवान के प्रति समर्पित हैं लेकिन जब जीवन में कठिन परिस्थितियां आती हैं तो उनका विश्वास डगमगा जाता है। ऐसे समय में व्यक्ति फिर से माया और सांसारिक चीजों की ओर झुक जाता है। उनके अनुसार इस संसार में स्थायी कुछ भी नहीं है न परिवार न धन और न ही प्रतिष्ठा। केवल एक ही सत्य है सच्चिदानंद परमात्मा जो इस पूरी सृष्टि का संचालन करता है।

    उन्होंने समझाया कि हर इंसान के सामने जीवन में एक बड़ा विकल्प हमेशा होता है कि वह दुनिया के आकर्षण यानी माया को चुने या भगवान और गुरु का मार्ग अपनाए। अधिकतर लोग सांसारिक चीजों को चुन लेते हैं और यही उनके दुख का कारण बनता है। लेकिन जो व्यक्ति भगवान का सहारा पकड़ लेता है उसके लिए यही दुनिया बंधन नहीं बल्कि मुक्ति का माध्यम बन जाती है।

    प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार सच्चा समर्पण यही है कि व्यक्ति यह भाव रखे कि उसका शरीर मन और प्राण भगवान के अधीन हैं न कि स्वयं के। जब यह भावना जीवन में आ जाती है तो इंसान अपनी इच्छाओं और मन के भटकाव से ऊपर उठ जाता है। चाहे सुख हो या दुख बीमारी हो या अपमान वह हर परिस्थिति को भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार करता है।

    उन्होंने पौराणिक उदाहरण देते हुए राजा मोरध्वज और राजा बलि की कथा का उल्लेख किया। राजा मोरध्वज ने भगवान की परीक्षा में अपने पुत्र का बलिदान स्वीकार कर लिया जबकि राजा बलि ने अपने वचन का पालन करते हुए सब कुछ भगवान को समर्पित कर दिया। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि सच्चा समर्पण त्याग और विश्वास का दूसरा नाम है।

    महाराज जी कहते हैं कि जीवन की असली परीक्षा किसी कागज पर नहीं होती बल्कि परिस्थितियों के रूप में सामने आती है। कभी सुख और लालच के रूप में तो कभी दुख और अपमान के रूप में। जो व्यक्ति हर स्थिति में भगवान के साथ बना रहता है वही सच्चा साधक कहलाता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि यदि व्यक्ति माया के अस्थायी सहारों को छोड़कर भगवान और गुरु का सहारा पकड़ ले तो उसका जीवन पूरी तरह बदल सकता है। एक सरल लेकिन शक्तिशाली नियम उन्होंने दिया कि जो भी भगवान की इच्छा है वही स्वीकार करना चाहिए।

    अंत में उन्होंने कहा कि यह संसार केवल एक भ्रम है और जब व्यक्ति इस सत्य को समझ लेता है तो उसके भीतर का भय समाप्त हो जाता है। जो व्यक्ति सांसारिक चीजों को छोड़कर ईश्वर को अपना लेता है वही सच्ची शांति और आनंद को प्राप्त करता है। उनके अनुसार समर्पण ही वह मार्ग है जो साधारण जीवन को असाधारण आध्यात्मिक अनुभव में बदल देता है।