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  • प्रेमानंद महाराज की तबीयत में सुधार, दूर-दूर से पहुंचे भक्त बोले- ‘गुरुदेव स्वस्थ होने तक इंतजार करेंगे’

    प्रेमानंद महाराज की तबीयत में सुधार, दूर-दूर से पहुंचे भक्त बोले- ‘गुरुदेव स्वस्थ होने तक इंतजार करेंगे’




    नई दिल्ली। प्रेमानंद महाराज की तबीयत बिगड़ने के बाद देशभर से वृंदावन पहुंचे भक्त लगातार उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। पिछले 10 दिनों से पदयात्रा और सार्वजनिक दर्शन बंद होने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। भक्तों का कहना है कि उन्हें अपने गुरुदेव और राधारानी पर पूरा भरोसा है और वे स्वस्थ होकर फिर से भक्तों के बीच लौटेंगे।

    करीब 1400 किलोमीटर दूर Kolkata से वृंदावन पहुंचीं श्रद्धालु जूही भावनी ने कहा कि महाराज जी अभी दर्शन नहीं दे रहे हैं तो भी कोई बात नहीं, वे यहीं रुककर इंतजार करेंगी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्हें विश्वास है कि राधारानी की कृपा से प्रेमानंद महाराज जल्द स्वस्थ होंगे और फिर भक्तों को आशीर्वाद देंगे। इसी तरह राजस्थान, असम, बिहार, हरियाणा और उत्तराखंड समेत कई राज्यों से भक्त वृंदावन पहुंच रहे हैं।

    हाल ही में प्रेमानंद महाराज का एक भावुक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि “हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। चिंता मत करिए, खूब नाम जप करो।” इस संदेश के बाद भक्तों और शिष्यों में चिंता और भावुकता दोनों बढ़ गई। हालांकि आश्रम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अब उनकी तबीयत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और वे केवल चुनिंदा शरणागत शिष्यों से ही मुलाकात कर रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर किडनी बीमारी से जूझ रहे हैं। वर्ष 2006 में उन्हें पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज का पता चला था। उनकी दोनों किडनियां प्रभावित हैं और सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस किया जाता है। वृंदावन स्थित उनके फ्लैट में ही डायलिसिस की विशेष व्यवस्था बनाई गई है। कई बार उनकी डायलिसिस प्रक्रिया 4 से 5 घंटे तक चलती है।

    Vrindavan स्थित केली कुंज आश्रम के सेवादारों ने ऑन कैमरा कुछ भी बोलने से इनकार किया, लेकिन ऑफ कैमरा उन्होंने बताया कि महाराज जी फिलहाल एकांत भजन और साधना में लीन हैं। उन्होंने भक्तों से अपील की कि महाराज जी के पूरे संदेश को ध्यान से सुनें और उनके भाव को समझें।

    राजस्थान के पाली से आए श्रद्धालु जालम सिंह ने कहा कि गुरुदेव शरीर से दूर हो सकते हैं, लेकिन उनके बताए मार्ग पर चलने से वे हर भक्त के हृदय में हमेशा मौजूद रहेंगे। वहीं असम से आए भक्त ओमप्रकाश ने कहा कि प्रेमानंद महाराज उनके लिए सर्वस्व हैं और सभी भक्त उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

    17 मई से प्रेमानंद महाराज की प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा भी स्थगित है। हर रोज हजारों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचते थे। सामान्य दिनों में करीब 20 हजार भक्त पदयात्रा में शामिल होते थे, जबकि बड़े आयोजनों में यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती थी। हालांकि कुछ दिन पहले वे अपने आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित संत गोविंद शरण महाराज के दर्शन करने भी पहुंचे थे, जिससे भक्तों को उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद मिली है।

    प्रेमानंद महाराज का जीवन भी बेहद प्रेरणादायक माना जाता है। कानपुर के अखरी गांव में जन्मे अनिरुद्ध कुमार पांडे ने महज 13 वर्ष की उम्र में घर छोड़ दिया था। बाद में वे वृंदावन पहुंचे और राधा-कृष्ण भक्ति में लीन होकर राधावल्लभी परंपरा के प्रमुख संतों में शामिल हो गए। आज देशभर में करोड़ों लोग उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में मानते हैं।

  • वृंदावन में हिमांगी सखी का बड़ा बयान: प्रेमानंद महाराज के लिए भावुक अपील, CJP और धार्मिक मुद्दों पर भी रखी खुली राय

    वृंदावन में हिमांगी सखी का बड़ा बयान: प्रेमानंद महाराज के लिए भावुक अपील, CJP और धार्मिक मुद्दों पर भी रखी खुली राय






    नई दिल्ली। मथुरा के वृंदावन में मंगलवार को वैष्णव किन्नर अखाड़ा की जगद्गुरु शंकराचार्य हिमांगी सखी ने बांके बिहारी मंदिर में दर्शन किए और परिक्रमा कर आस्था प्रकट की। दर्शन के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में संत प्रेमानंद महाराज के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की और उन्हें वर्तमान समय का एक प्रभावशाली भक्ति संत बताया। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज कम समय में जिस तरह लोगों के बीच लोकप्रिय हुए हैं, वह भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का बड़ा उदाहरण है।

    हिमांगी सखी ने भावुक होते हुए कहा कि वे अपने ठाकुर जी से प्रार्थना करेंगी कि संत प्रेमानंद महाराज की उम्र उन्हें मिल जाए, ताकि वे लंबे समय तक समाज को भक्ति मार्ग पर प्रेरित कर सकें। उन्होंने कहा कि ऐसे संतों की आज के समय में बहुत आवश्यकता है जो लोगों को आध्यात्मिकता और सकारात्मक दिशा दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर संत प्रेमानंद महाराज के वीडियो देखकर उनका मन भावुक हो जाता है और भक्ति भाव और मजबूत होता है।

    इस दौरान उन्होंने हाल के दिनों में चर्चित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर भी अपनी राय रखी। हिमांगी सखी ने कहा कि यह युवाओं द्वारा उठाया गया एक प्रतीकात्मक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य समाज में व्याप्त गंदगी, भ्रष्टाचार और कमियों को उजागर करना बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जैसे जीव जिस तरह गंदगी की मौजूदगी का संकेत देते हैं, उसी तरह यह आंदोलन भी व्यवस्था में सुधार की ओर इशारा करता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बदलाव के लिए आलोचना और सवाल जरूरी हैं, और यदि कोई समूह कमियों को उजागर कर रहा है तो उसे सकारात्मक तरीके से देखा जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन को मर्यादा और कानून के दायरे में रहकर ही आगे बढ़ना चाहिए।

    इसके बाद उन्होंने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। हिमांगी सखी ने कहा कि देश में कई धार्मिक मामलों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहे हैं, जिन्हें संवाद और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए हल किया जाना चाहिए। उन्होंने ज्ञानवापी, भोजशाला और अन्य विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों का समाधान समयबद्ध तरीके से होना चाहिए ताकि समाज में अनावश्यक तनाव न बढ़े।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन और न्याय व्यवस्था मिलकर काम करें तो ऐसे संवेदनशील मुद्दों को आसानी से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ मामलों में अदालत के फैसले आ चुके हैं, लेकिन कई मुद्दे अब भी लंबित हैं, जिन पर जल्द निर्णय की आवश्यकता है।

    अपने बयान के अंतिम हिस्से में उन्होंने कहा कि वे सनातन परंपरा और धार्मिक आस्था के लिए हमेशा आवाज उठाती रहेंगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी अपने विचार व्यक्त करेंगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाना है।

    वृंदावन में उनके इस दौरे और बयानों के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया है, जबकि कुछ ने इसे अलग-अलग नजरिए से देखा है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और स्थिति सामान्य बनी हुई है।

  • संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    नई दिल्ली । देश-दुनिया में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर इन दिनों भक्तों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे महाराज जी की नियमित धार्मिक गतिविधियां स्थगित हैं, जिसके बाद उनके अनुयायियों के बीच लगातार बेचैनी बढ़ रही थी। इसी बीच संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों के लिए एक बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश जारी किया है, जिसने लाखों श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया है।

    काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे संत प्रेमानंद महाराज ने अपने संदेश में भक्तों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह शरीर नश्वर है और जीवन का नियम परिवर्तन है, लेकिन आत्मिक संबंध कभी समाप्त नहीं होते। उन्होंने अपने श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि चाहे वह इस शरीर में रहें या न रहें, उनका स्नेह, आशीर्वाद और आध्यात्मिक उपस्थिति हमेशा उनके साथ बनी रहेगी। उन्होंने भक्तों से अपनी चिंता छोड़कर पूरी श्रद्धा के साथ श्रीजी के नाम का स्मरण और भजन करने की अपील की।

    बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं चल रही है, जिसके कारण उनकी प्रसिद्ध पदयात्रा और नियमित दर्शन कार्यक्रम अस्थायी रूप से स्थगित कर दिए गए हैं। यह निर्णय उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया। उनके दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं और उनकी एक झलक पाने के लिए लोग घंटों इंतजार किया करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य में आई गिरावट के बाद परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला है।

    गौरतलब है कि संत प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कठिन शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी धार्मिक दिनचर्या और भक्तों से जुड़ाव को कभी कम नहीं होने दिया। शारीरिक कष्ट के बावजूद उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तों के प्रति समर्पण हमेशा लोगों के लिए प्रेरणा का विषय रहा है। यही कारण है कि उनके स्वास्थ्य को लेकर भक्तों की चिंता स्वाभाविक रूप से लगातार बढ़ती रही।

    अपने संदेश में उन्होंने एकांतवास को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका यह एकांत किसी निजी कारण या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह उनके आश्रितों और भक्तों के कल्याण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अब उनका जीवन पूरी तरह अपने अनुयायियों की आध्यात्मिक उन्नति और कल्याण के लिए समर्पित है। साथ ही उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से निर्भय और निश्चिंत रहने की अपील की।

    संत प्रेमानंद महाराज का यह भावुक संदेश केवल स्वास्थ्य अपडेट नहीं बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी माना जा रहा है। उनके शब्दों ने एक बार फिर यह दिखाया कि संतों का रिश्ता केवल शारीरिक उपस्थिति तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह श्रद्धा, विश्वास और आत्मिक जुड़ाव से जुड़ा होता है। यही कारण है कि उनके इस संदेश ने भक्तों के मन को भावुक भी किया और उन्हें आध्यात्मिक रूप से मजबूत होने का संदेश भी दिया।

  • भक्ति और संगीत का संगम: वृंदावन में गूंजा “बम लहरी”, प्रेमानंद महाराज हुए भावविभोर

    भक्ति और संगीत का संगम: वृंदावन में गूंजा “बम लहरी”, प्रेमानंद महाराज हुए भावविभोर



    नई दिल्ली। वृंदावन में भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला जब प्रसिद्ध सूफी एवं भजन गायक Kailash Kher ने केलीकुंज आश्रम में संत Premanand Maharaj से भेंट की। इस मुलाकात के दौरान पूरा वातावरण भक्ति भाव और आनंद से भर गया। कैलाश खेर ने महाराज का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और उन्हें मोरपंखी हार पहनाकर सम्मान प्रकट किया।

    आश्रम में बातचीत के दौरान प्रेमानंद महाराज ने सबसे पहले कैलाश खेर का हाल-चाल पूछा, जिस पर गायक ने सहज भाव से कहा कि वे पूरी तरह “मस्त” हैं। इसके बाद कैलाश खेर ने माइक लेकर अपने प्रसिद्ध भजन “बम लहरी” का गायन शुरू किया। अपने खास अंदाज में उन्होंने न केवल भजन प्रस्तुत किया बल्कि भावपूर्ण नृत्य भी किया, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालु और संतगण भी भावविभोर हो उठे। यह भजन लगभग डेढ़ मिनट तक चला, लेकिन इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

    भजन समाप्त होते ही Premanand Maharaj मुस्कुराए और उन्होंने कैलाश खेर की प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बहुत सुंदर और अत्यंत प्रभावशाली था। उनके चेहरे की मुस्कान ने वहां मौजूद सभी लोगों को और भी उत्साहित कर दिया। इसके बाद कैलाश खेर ने एक और भजन प्रस्तुत करने की इच्छा जताई, जिस पर महाराज ने सहमति दी।

    इसके बाद उन्होंने “5 वर्ष की मीरा लाडली हो…” और “सखियां में खेला जाए री…” जैसे भावपूर्ण भजन अपनी विशेष शैली में सुनाए। इन भजनों ने आश्रम के वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। प्रेमानंद महाराज ने उनकी आवाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी गायकी अत्यंत प्रभावशाली है और इसमें भक्ति का गहरा भाव झलकता है।

    इससे पहले कैलाश खेर ने वृंदावन स्थित Banke Bihari Temple में भगवान श्री बांके बिहारी जी के दर्शन किए। मंदिर में उन्होंने लगभग 30 मिनट बिताए और फूल बंगले में विराजमान भगवान की छवि को एकटक निहारते रहे। उन्होंने मंदिर की देहरी पर इत्र भी अर्पित किया और श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। इस दौरान सेवायत मोहित गोस्वामी ने उन्हें भगवान का प्रसाद और अंगवस्त्र भेंट किया।

    कैलाश खेर के आगमन से वृंदावन में भक्ति का माहौल और अधिक गहरा हो गया। उनके भजन और प्रेमानंद महाराज के साथ संवाद ने यह संदेश दिया कि संगीत और आध्यात्मिकता एक-दूसरे के पूरक हैं। इस पूरे आयोजन ने श्रद्धालुओं को भक्ति के नए अनुभव से जोड़ा और वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

  • वृंदावन में भक्ति का रंग: ग्लैमर जगत के सितारों की राधा-कृष्ण भक्ति यात्रा ने बढ़ाई रौनक

    वृंदावन में भक्ति का रंग: ग्लैमर जगत के सितारों की राधा-कृष्ण भक्ति यात्रा ने बढ़ाई रौनक


    नई दिल्ली । चमक-दमक और ग्लैमर की दुनिया छोड़कर कई फिल्मी और टीवी सितारे अब वृंदावन की भक्ति और सादगी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ‘राधे-राधे’ के जयकारे के साथ आध्यात्मिक शांति की तलाश में बड़ी संख्या में लोग ब्रज की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय कारोबार में तेज़ उछाल देखा जा रहा है।

    कभी फिल्मी पर्दे की चकाचौंध, रेड कार्पेट और करोड़ों के सेट जिनकी पहचान हुआ करते थे, आज वही दुनिया कई कलाकारों को आकर्षित नहीं कर पा रही। हाल के वर्षों में वृंदावन और ब्रजभूमि का आध्यात्मिक माहौल कई सेलेब्रिटीज़ को अपनी ओर खींच रहा है। अब ‘राधे-राधे’ का जयघोष और तुलसी की माला कई कलाकारों की नई पहचान बनती दिख रही है।

    वृंदावन बना आस्था और सुकून का केंद्र
    मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार रोजाना करीब 1 से 1.5 लाख लोग यहां पहुंच रहे हैं। त्योहारों और वीकेंड पर यह आंकड़ा कई गुना बढ़ जाता है। बरसाना, गोवर्धन और बांके बिहारी मंदिर जैसे स्थान अब सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि आत्मिक शांति के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
    एना जयसिंघानी: टीवी की दुनिया से साध्वी जीवन तक
    ग्वालियर की रहने वाली एना जयसिंघानी ने मुंबई में टीवी इंडस्ट्री में पहचान बनाई थी। ‘देखा एक ख्वाब’ और ‘फियर फाइल्स’ जैसे शोज़ से लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने अचानक ग्लैमर की दुनिया से दूरी बना ली। उनका कहना है कि वृंदावन आने के बाद उन्हें जीवन की नई दिशा मिली। अब वह भक्ति मार्ग पर चल रही हैं और साध्वी जीवन अपना चुकी हैं।
    अनुष्का शर्मा और आध्यात्मिक जुड़ाव की चर्चा
    बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के भी वृंदावन और प्रेमानंद महाराज से जुड़ाव की चर्चाएं लगातार सुर्खियों में रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे कई बार आश्रम पहुंची हैं और आध्यात्मिक प्रवचनों से जुड़ी रही हैं।
    अन्य सितारे भी भक्ति में हुए शामिल
    शिल्पा शेट्टी, हेमा मालिनी, मीका सिंह, बादशाह और कुमार सानू जैसे कई कलाकार भी समय-समय पर वृंदावन और संतों के संपर्क में आए हैं। इन मुलाकातों में अधिकांश ने मानसिक शांति और जीवन संतुलन की बात को प्रमुखता दी है।
    प्रेमानंद महाराज का बढ़ता प्रभाव
    वृंदावन के प्रेमानंद महाराज की शिक्षाएं ‘राधा नाम जप’ और सरल जीवन पर आधारित हैं। उनके आश्रम में आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि यहां जीवन की जटिलताओं का समाधान भक्ति और नामस्मरण में बताया जाता है। यही कारण है कि युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में यहां आकर्षित हो रहा है।
    ग्लैमर की दुनिया से भक्ति की ओर बढ़ता यह रुझान केवल व्यक्तिगत बदलाव नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिकता की बढ़ती तलाश को भी दर्शाता है। वृंदावन अब केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मानसिक शांति और जीवन संतुलन का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
  • ब्रज को बनाओ पूरी तरह सात्विक, प्रेमानंद महाराज की योगी सरकार से बड़ी मांग; मांस-मदिरा बैन पर फिर छिड़ी बहस

    ब्रज को बनाओ पूरी तरह सात्विक, प्रेमानंद महाराज की योगी सरकार से बड़ी मांग; मांस-मदिरा बैन पर फिर छिड़ी बहस



    नई दिल्ली। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने एक बार फिर ब्रज क्षेत्र को मांस और मदिरा मुक्त बनाने की मांग उठाकर धार्मिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की उत्तर प्रदेश सरकार से अपील करते हुए कहा कि मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज मंडल की पवित्रता बनाए रखने के लिए यहां मांस और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

    अपने दैनिक सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ब्रज केवल एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की लीलाभूमि है। उन्होंने कहा कि जिस धरती पर भगवान कृष्ण ने बाल लीलाएं कीं और प्रेम, भक्ति व करुणा का संदेश दिया, वहां मांस और मदिरा की बिक्री उचित नहीं मानी जा सकती। महाराज ने कहा कि ब्रज की पहचान उसकी आध्यात्मिकता और सात्विक संस्कृति से है, इसलिए इसकी गरिमा को बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने कहा कि हर साल लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से मथुरा, वृंदावन, बरसाना और गोवर्धन जैसे पवित्र स्थलों पर दर्शन और भक्ति के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ब्रज क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह धार्मिक और शांतिपूर्ण होना चाहिए। प्रेमानंद महाराज का मानना है कि यदि पूरे ब्रज क्षेत्र को मांस और मदिरा मुक्त घोषित किया जाता है, तो इससे यहां की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी।

    गौरतलब है कि इससे पहले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी ब्रज क्षेत्र में शराब और मांस बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने दिल्ली से मथुरा तक पदयात्रा निकालते हुए कहा था कि धार्मिक नगरी में शराब की दुकानों की मौजूदगी श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।

    हालांकि, इस मुद्दे पर पहले विवाद भी हो चुके हैं। कुछ समय पहले मथुरा में कुछ युवकों ने कथित तौर पर जबरन शराब की दुकान बंद कराने की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया था। प्रशासन ने साफ किया था कि कानून हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

    अब प्रेमानंद महाराज के ताजा बयान के बाद ब्रज क्षेत्र में मांस-मदिरा प्रतिबंध की मांग फिर सुर्खियों में आ गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय दे रहे हैं। कुछ लोग इसे ब्रज की धार्मिक पहचान से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इस विषय पर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर संतुलित फैसला लिया जाना चाहिए।

  • विराट-अनुष्का की वृंदावन यात्रा: क्या बदल गया है क्रिकेट के 'किंग' का जीवन के प्रति दृष्टिकोण? भक्ति और मानसिक संतुलन के नए सफर का हुआ आगाज़!

    विराट-अनुष्का की वृंदावन यात्रा: क्या बदल गया है क्रिकेट के 'किंग' का जीवन के प्रति दृष्टिकोण? भक्ति और मानसिक संतुलन के नए सफर का हुआ आगाज़!


    नई दिल्ली। वृंदावन, उत्तर प्रदेश: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा एक बार फिर आध्यात्मिक यात्रा के लिए वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने प्रेमानंद महाराज के आश्रम में पहुंचकर दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस यात्रा को उनके लगातार बढ़ते आध्यात्मिक रुझान के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वे पिछले कुछ समय से नियमित रूप से धार्मिक स्थलों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान कपल बेहद साधारण और शांत अंदाज में नजर आया, जिसने वहां मौजूद लोगों और फैंस का ध्यान आकर्षित किया।

    वृंदावन स्थित श्रीहित राधा केली कुंज आश्रम में पहुंचकर विराट और अनुष्का ने धार्मिक वातावरण में कुछ समय बिताया। दोनों ने मंदिर में दर्शन किए और वहां मौजूद संतों के सानिध्य में आध्यात्मिक माहौल को अनुभव किया। इस दौरान उनका व्यवहार पूरी तरह सहज और विनम्र दिखाई दिया। वे बिना किसी दिखावे के भक्तों के बीच शांत भाव से बैठे रहे और पूरे वातावरण को गंभीरता से महसूस करते नजर आए। धार्मिक स्थान पर उनकी उपस्थिति ने वहां मौजूद लोगों के बीच उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना दिया।

    आश्रम में दोनों ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मुलाकात के दौरान जीवन के उद्देश्य, भक्ति, मानसिक शांति और गुरु के महत्व जैसे विषयों पर चर्चा हुई। बताया जाता है कि इस संवाद में आध्यात्मिक जीवन को समझने और उसे दैनिक जीवन में अपनाने पर विशेष रूप से विचार साझा किए गए। विराट और अनुष्का ने पूरी बातचीत को ध्यानपूर्वक सुना और इसे आत्मिक शांति से जोड़कर देखा।

    पिछले कुछ महीनों में यह पहली बार नहीं है जब यह कपल वृंदावन पहुंचा हो। जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय में वे कई बार यहां आ चुके हैं। लगातार हो रही इन यात्राओं से यह साफ संकेत मिलता है कि दोनों अपने जीवन में आध्यात्मिकता को एक महत्वपूर्ण स्थान दे रहे हैं। व्यस्त पेशेवर जीवन और सार्वजनिक चर्चाओं के बीच वे समय निकालकर इस तरह के स्थानों पर पहुंचते हैं, जहां वे मानसिक शांति और संतुलन की तलाश करते हैं।

    इस यात्रा के दौरान उनका सादगी भरा अंदाज सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना रहा। वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में दोनों को बेहद सामान्य और सहज रूप में देखा गया, जहां वे किसी भी तरह के औपचारिक या दिखावटी व्यवहार से दूर नजर आए। लोगों ने उनके इस व्यवहार को वास्तविक और जमीन से जुड़ा हुआ बताया। खेल और फिल्म जगत की चकाचौंध के बीच उनका यह रूप उनके फैंस के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।

  • इंदौर का 10वीं छात्र रुद्र उत्तराखंड से सुरक्षित बरामद, प्रेमानंद महाराज से मिलने निकला था

    इंदौर का 10वीं छात्र रुद्र उत्तराखंड से सुरक्षित बरामद, प्रेमानंद महाराज से मिलने निकला था

    नई दिल्ली।  खजराना क्षेत्र के 10वीं के छात्र रुद्र पांडेय को पुलिस ने चार दिन बाद उत्तराखंड के गुप्तकाशी से सुरक्षित बरामद कर लिया। छात्र घर छोड़ने से पहले पत्र लिख गया था, जिसमें उसने बताया कि वह संत प्रेमानंद महाराज से मिलने और “अपने असली परिवार” के पास जाने के लिए निकल पड़ा है।

    पुलिस के अनुसार, रुद्र 12 मार्च को घर से निकला था। उसने अपने पत्र में भावुक शब्दों में लिखा था: “मैं रुद्र पांडेय आ रहा हूं महाराज जी, आपके चरणों में। मैं अपने असली परिवार के पास जा रहा हूं। मम्मी-पापा मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना। आपके साथ मेरा जीवन पूरा हो गया, अब मैं चलता हूं।”

    छात्र ने पुलिस को बताया कि वह सोशल मीडिया पर संतों के प्रवचन और रील्स देखता था और उन्हीं से प्रभावित होकर आध्यात्मिक खोज में घर छोड़कर निकला। रुद्र ने अपने परिवार को पत्र में यह भी लिखा कि उसके जाने का कारण आध्यात्मिक मार्ग की तलाश है और वे उसे ढूंढने की कोशिश न करें।

    रुद्र ने घर से निकलते समय लगभग ₹500 अपने साथ लिए थे। उसने पत्र में लिखा था कि पैसे उसके दोस्त के पास हैं और बाद में माता-पिता को लौटवा दिए जाएंगे। बेटे के अचानक गायब होने और पत्र मिलने से परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने तुरंत खजराना थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

    तलाश के दौरान पुलिस को शक था कि रुद्र वृंदावन की ओर गया होगा। इसी बीच, किशोर ने अपने पिता को फोन किया और आधार कार्ड की जरूरत बताई, जिससे पुलिस को उसकी लोकेशन पता चली। इसके बाद इंदौर पुलिस ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग पुलिस की मदद से उसे गुप्तकाशी क्षेत्र से बरामद किया।

    बरामदगी के बाद रुद्र को उसके माता-पिता को सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किशोर पूरी तरह सुरक्षित है और अब उसे काउंसलिंग के माध्यम से समझाइश दी जा रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन वीडियो किशोरों पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। रुद्र के इस प्रकरण ने यह दिखाया कि माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की मानसिक स्थिति और डिजिटल आदतों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।