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  • US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!

    US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का प्रशासन देश में शरण पाने के लिए आवेदन कर चुके या फिलहाल आवेदन की प्रक्रिया में शामिल दो लाख तक विदेशी नागरिकों के कारोबारी और पर्यटन वीजा (Tourist Visa) रद्द करने की तैयारी कर रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह अमेरिकी इतिहास (American History) में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में वीजा रद्द किए जाने की सबसे बड़ी कार्रवाई होगी और इसे लेकर कानूनी चुनौतियां सामने आने की संभावना है।

    अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों और दो अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि इस फैसले को चुनौती नहीं दी गई या इसमें बदलाव नहीं किया गया, तो विदेश विभाग आने वाले हफ्तों में 2016 से 2026 के बीच जारी किए गए बी1 और बी2 वीजा रद्द करने की घोषणा कर सकता है। इसमें ऐसे वीजा धारक शामिल होंगे, जिन्होंने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया है या वर्तमान में शरण मांग रहे हैं। यह कार्रवाई गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के समन्वय से की जाएगी।


    क्या है बी1 और बी2 वीजा

    बी1 वीजा आम तौर पर कारोबारी यात्राओं के लिए जारी किए जाते हैं, जबकि बी2 वीजा पर्यटन, परिवार से मिलने या चिकित्सा उपचार के लिए जारी किए जाते हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, ‘हम डीएचएस के साथ समन्वय कर ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान करने और उनके गैर-आप्रवासी वीजा रद्द करने का काम कर रहे हैं, जो अमेरिका में अल्पकालिक आगंतुक के रूप में आए थे, लेकिन बाद में यहां स्थायी रूप से रहने के लिए शरण का आवेदन दाखिल कर देते हैं।’

    उन्होंने वीजा रद्द किए जाने की संभावित संख्या पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, ‘चूंकि यह प्रक्रिया जारी रहेगी, इसलिए रद्द किए जाने वाले वीजा की संख्या लगातार बदलती रहेगी और यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।’


    क्या तुरंत देश से निकाल दिए जाएंगे 2 लाख लोग

    अधिकारियों ने कहा कि वीजा रद्द होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि संबंधित लोगों को तुरंत अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि फिलहाल जिन लोगों के शरण संबंधी मामले लंबित हैं, उनमें से अधिकांश की श्रेणी बदली जा सकती है, लेकिन वे कारोबारी या पर्यटन यात्री के रूप में अपना वीजा दर्जा खो देंगे।


    वीजा पर जारी हैं पाबंदियां

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले साल दूसरी बार कार्यभार संभालने के बाद से उनके प्रशासन ने वीजा आवेदकों पर लगातार पाबंदियां कड़ी की हैं। इनमें आवेदकों से उनके सोशल मीडिया इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मांगना, वीजा प्रक्रिया के लिए महंगे बॉन्ड जमा करने की अनिवार्यता और कुछ देशों के नागरिकों को वीजा जारी करने पर पूरी तरह रोक लगाना शामिल है।

    उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ऐसे लोगों को निशाने पर लिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे अमेरिका में प्रवेश करने के लिए पर्यटक और कारोबारी वीजा का इस्तेमाल करते हैं और फिर शरण के लिए आवेदन कर देते हैं।

    वर्तमान में बी1 और बी2 वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों से यह पुष्टि करने को कहा जाता है कि वे अमेरिका में शरण के लिए आवेदन नहीं करेंगे। साथ ही, उन्हें यह भी साबित करना होता है कि वे अपने देश लौटने का इरादा रखते हैं।


    करीब 2 लाख हो चुके हैं रद्द

    पिछले 18 महीनों में विदेश विभाग करीब 1.75 लाख वीजा रद्द कर चुका है। इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें नशे में वाहन चलाने से लेकर दुष्कर्म और लूट जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है या जिन पर ऐसे अपराधों के आरोप हैं। इसके अलावा अमेरिका की नीतियों, खासकर पश्चिम एशिया से जुड़ी नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने वाले कुछ लोगों के वीजा भी रद्द किए गए हैं।

    ट्रंप प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं द्वारा अमेरिका आकर यहां बच्चे को जन्म देकर उसे यहां की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य वाले विदेशियों के ‘बर्थ टूरिज्म’ (जन्म पर्यटन) पर भी कार्रवाई तेज कर दी है।

  • एक देश, एक चुनाव की कवायद हुई तेज….2034 की जगह 2029 तक लागू करने की तैयारी

    एक देश, एक चुनाव की कवायद हुई तेज….2034 की जगह 2029 तक लागू करने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    देशभर में लोकसभा (Lok Sabha) और विधानसभा चुनाव (Legislative Assembly Elections) साथ कराने को लेकर कवायद तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘एक देश, एक चुनाव’ (‘One Nation, One Election’) को लेकर बनाई गई संसद की संयुक्त समिति ने भी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस बारे में सलाह लेनी शुरू कर दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार एक देश एक चुनाव के लिए 20234 की डेडलाइन को घटाकर 2029 ही करना चाहती है। यानी अगला लोकसभा चुनाव बिल्कुल अलग अंदाज में हो सकता है। इसके साथ ही विधानसभा के चुनाव भी करवाए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो एक साथ ही सभी राज्य की विधानसभाओं को भंग कर दिया जाएगा।


    दो साल में 11 राज्यों में होना है चुनाव, अभी एनडीए की सरकार

    इस समय देश के 22 राज्यों में एनडीए की सरकार है। इनमें से 11 राज्यों में अगले दो सालों में विधानसभा का चुनाव होना है। चार ऐसे राज्य हैं जिनमें लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव हो सकते हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा का नाम शामिल है। 2024 में एक देश एक चुनाव को लेकर जो कमेटी बनाई गई थी उसका टारगेट यही था कि 2034 में साथ में चुनाव कराने को लेकर रणनीति तैयार की जाए। एक रिपोर्ट में कहा गया कि अब सरकार इस प्रयास में है कि इसके लिए ज्यादा इंतजार ना किया जाए।


    शीत सत्र में सौंप सकती है रिपोर्ट

    संयुक्त संसदीय समिति पिछले दो साल से अपने काम में लग है और इस शीत सत्र में संसद में रिपोर्ट जमा कर सकती है। संविधान का अनुच्छेद 174 2, बी राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है। ऐसे में अगर एक साथ चुनाव करवाने होंगे तो जनवरी में ही राज्यों की विधानसभा भंग कर दी जाएगी। जिन राज्यों में एनडीए की सरकार है वहां यह आसान होगा। क्योंकि मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही राज्यपाल विधानसभा भंग कर सकते हैं।

    संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के आखिरी हफ्ते में शुरू होता है और क्रिसमस से पहले संपन्न हो जाता है। यह 41 सदस्यीय समिति ‘एक देश, एक चुनाव’ व्यवस्था को लागू करने के लिए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार-विमर्श कर रही है। समिति 2029 तक, लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव पर देश भर में परामर्श कर रही है।

    बीजेपी के कुछ मुख्यमंत्रियों ने पहले ही लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा के चुनाव कराने की इच्छा जाहिर की है। गोवा, हरियाणा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने इसका समर्थन किया है। इसके साथ ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी 1 जुलाई को कमेटी के साथ बैठक की थी।

  • बीजेपी संगठन में जल्द बड़ा बदलाव, नितिन नवीन की नई टीम में युवाओं-महिलाओं को मिल सकती है जगह

    बीजेपी संगठन में जल्द बड़ा बदलाव, नितिन नवीन की नई टीम में युवाओं-महिलाओं को मिल सकती है जगह


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संगठनात्मक बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को पार्टी की नई टीम का ऐलान हो सकता है। जनवरी में नितिन नवीन बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे और अब उनके नेतृत्व में संगठन में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक नई टीम में एक कोषाध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 9 राष्ट्रीय महामंत्रियों की नियुक्ति हो सकती है। इसके अलावा करीब 15 मंत्री भी बनाए जाने की चर्चा है। बीजेपी के संविधान में संशोधन के बाद संगठन में 33 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। ऐसे में नई टीम में महिलाओं और युवाओं को खास प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। प्रत्येक वर्ग में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से कम से कम तीन पदाधिकारी शामिल किए जा सकते हैं।

    पार्ल्यामेंट्री बोर्ड का भी होगा गठन
    बीजेपी की सबसे बड़ी निर्णायक संस्था पार्ल्यामेंट्री बोर्ड का भी नए सिरे से गठन होना है। इसमें अध्यक्ष समेत अधिकतम 11 सदस्य हो सकते हैं। इसके साथ ही केंद्रीय चुनाव समिति का भी गठन किया जाएगा। फिलहाल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महिला मोर्चा की अध्यक्ष वनाती श्रीनिवासन और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव इसके सदस्य हैं।

    राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी बदलाव
    पार्टी की रणनीति और महत्वपूर्ण फैसलों पर विचार करने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना है। इसमें अध्यक्ष के अलावा 120 सदस्य हो सकते हैं। इनमें 40 महिलाओं का होना जरूरी है। वहीं राष्ट्रीय परिषद में राज्य परिषदों के निर्वाचित सदस्य, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष, राज्यों में विधान परिषद और विधानसभा के नेताओं, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा 20 मनोनीत सदस्य शामिल होंगे।

    युवाओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
    नितिन नवीन पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उन्होंने अपनी नई टीम तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि उनकी टीम में युवाओं को ज्यादा जिम्मेदारी दी जा सकती है। संगठन में बदलाव के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    मौजूदा संगठन में कई बड़े चेहरे
    वर्तमान बीजेपी संगठन में चार सदस्यीय मार्गदर्शक मंडल है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हैं। वहीं संसदीय बोर्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा नितिन नवीन, राजनाथ सिंह, अमित शाह, जेपी नड्डा, बीए येदियुरप्पा, सर्वानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया और बीएल संतोष शामिल हैं।

    मौजूदा संगठन में 11 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 7 राष्ट्रीय महासचिव, एक संयुक्त महासचिव, 11 राष्ट्रीय सचिव, सात मोर्चा अध्यक्ष, मीडिया प्रभारी, मीडिया सह-प्रभारी, कोषाध्यक्ष और सह-कोषाध्यक्ष समेत कई पद हैं। नई टीम में इन पदों पर बदलाव के साथ बीजेपी संगठन में नई पीढ़ी को आगे लाने की तस्वीर साफ हो सकती है।

  • 3 दशक बाद कावेरी जल विवाद पर चर्चा की तैयारी…..तमिलनाडु-कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों के बीच जल्द होगी बैठक

    3 दशक बाद कावेरी जल विवाद पर चर्चा की तैयारी…..तमिलनाडु-कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों के बीच जल्द होगी बैठक


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) और कर्नाटक (Karnataka) के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार (Chief Minister D.K. Shivakumar) के बीच जल्द ही एक बैठक हो सकती है। कावेरी जल विवाद (Kaveri Water Dispute) को लेकर बुलाई गई यह बैठक काफी चर्चा में है। दरअसल मुख्यमंत्री थलपति विजय का यह कदम तमिलनाडु के तीन दशक पुराने रुख से बिल्कुल अलग है। इससे पहले तमिलनाडु हमेशा से बातचीत के बजाय अदालती फैसलों और ट्रिब्यूनल पर भरोसा करता आया है और राज्य के मुख्यमंत्री सीधी बातचीत से दूर ही रहे हैं। लेकिन अब विजय लीक से हटकर राह पकड़ रहे हैं। तमिलनाडु का मानना रहा है कि कावेरी विवाद दो मुख्यमंत्रियों की मेज पर बैठकर नहीं सुलझ सकता। हालांकि सीएम विजय सीधे संवाद का रास्ता अपना रहे हैं।

    विजय ने पानी के संकट को हल करने के लिए शिवकुमार के साथ 31 जुलाई से 3 अगस्त के बीच सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा है। अगर यह मुलाकात होती है, तो पिछले 14 सालों में यह पहला मौका होगा जब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री कावेरी मुद्दे पर आमने-सामने बैठकर द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।


    लीक से हटकर चल रहे विजय

    इससे पहले पिछले 30 से अधिक सालों से चेन्नई का मानना रहा है कि यह विवाद इतिहास, फसलों और चुनावी भावनाओं जैसे जटिल मुद्दों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसे किसी बैठक में सुलझाने के बजाय कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA), ट्रिब्यूनल के फैसले और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के जरिए ही लागू किया जाना चाहिए। वहीं विजय कानूनी अधिकारों को छेड़े बिना, दोनों राज्यों के बीच संवाद का रास्ता खोलना चाहते हैं ताकि संकट की स्थिति में पानी की आपूर्ति जारी रहे।


    क्यों पड़ी बातचीत की जरूरत?

    तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा के किसानों के सामने इस समय संकट बेहद गंभीर है। ट्रिब्यूनल के आदेश के तहत 1 जून से 23 जुलाई के बीच तमिलनाडु को लगभग 32 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी मिलना चाहिए था। लेकिन उसे केवल 3.5 TMC पानी ही मिला है। तमिलनाडु का मानना है कि कमजोर मॉनसून के बावजूद, कर्नाटक को कम से कम 3 TMC अतिरिक्त पानी तुरंत छोड़ना चाहिए था। पानी की कमी के कारण कावेरी डेल्टा में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर हैं।


    क्यों उठ रहे सवाल?

    विजय की इस सीधी बातचीत की पहल पर विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने कुछ चिंताएं जताई हैं। आलोचकों को डर है कि सीधी बातचीत से कर्नाटक को ‘कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण’ को दरकिनार करने का मौका मिल सकता है। यह शक भी है कि कर्नाटक पानी छोड़ने के बदले तमिलनाडु पर मेकेदातु में प्रस्तावित डैम के निर्माण पर विरोध वापस लेने का दबाव बना सकता है। इस मामले पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के कन्नन का कहना है कि मुख्यमंत्रियों की बातचीत आपसी सहयोग का माहौल बना सकती है, लेकिन यह ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए अधिकारों की जगह नहीं ले सकती।


    क्या है राजनीतिक समीकरण?

    राजनीतिक रूप से विजय के पास एक फायदा यह है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है, जो तमिलनाडु में विजय की सरकार की सहयोगी भूमिका में है। राहुल गांधी विजय के शपथ ग्रहण में शामिल हुए थे और डीके शिवकुमार से भी उनके मधुर संबंध हैं। ऐसे में विजय के लिए राह आसान हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जल विवादों में पार्टी लाइनें अक्सर बेअसर हो जाती हैं, क्योंकि दोनों राज्यों के नेताओं को अपने-अपने किसानों और स्थानीय जनता को जवाब देना होता है। अगर विजय बेंगलुरु में वार्ता से अपने राज्य के लिए तुरंत कावेरी का पानी लाने में सफल रहते हैं और मेकेदातु पर तमिलनाडु के रुख से समझौता नहीं करते, तो यह उनकी बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी। वहीं, अगर यह बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म होती है, तो आलोचक इसे राजनीतिक अपरिपक्वता करार देंगे।

  • गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियां तेज, 24 जुलाई से शिव महापुराण कथा, 29 जुलाई को गुरु दीक्षा समारोह

    गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियां तेज, 24 जुलाई से शिव महापुराण कथा, 29 जुलाई को गुरु दीक्षा समारोह


    सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव की शुरुआत 24 जुलाई से होगी। इस मौके पर दोपहर में कथा और 29 जुलाई को दीक्षा महोत्सव का आयोजन प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में किया जाएगा। मंदिर परिसर में होने वाली कथा की तैयारियां पूर्ण की जा रही है। इसको लेकर स्वयं अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित श्री मिश्रा ने यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर भोजनशाला सहित अन्य भव्य पंडालों का निरीक्षण कर यहां पर मौजूद विठलेश सेवा समिति के सेवादारों से चर्चा की। मंदिर परिसर में महोत्सव के लिए भव्य पंडाल स्थाई रूप से बना है।  इसको लेकर विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा और पंडित सहित अन्य ने मंदिर परिसर में भोजन, कथा स्थल आदि की व्यवस्था की।

    विश्व प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम में आयोजित होने वाले गुरु पूर्णिमा महोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। आयोजन समिति एवं जिला प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं कर रहे हैं। महोत्सव में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
    विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि 24 जुलाई से 28 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक शिव महापुराण कथा का आयोजन होगा। इसके बाद 29 जुलाई को प्रात: 7 बजे से रात्रि 7 बजे तक भव्य गुरु दीक्षा समारोह एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
    महोत्सव के एक दिन पहले से रुद्राक्ष वितरण रहेगा बंद
    महोत्सव की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए 24 जुलाई से रुद्राक्ष वितरण अस्थायी रूप से बंद रहेगा। इस अवधि में स्वयंसेवक आयोजन स्थल की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के आवागमन, सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक कार्यों में जुटे रहेंगे।
    होटल और धर्मशालाएं लगभग फुल
    गुरु पूर्णिमा महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है। इसके चलते कुबेरेश्वरधाम सहित आसपास के होटल, धर्मशालाएं एवं अन्य आवासीय स्थल लगभग हाउसफुल हो चुके हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से ही अपने ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे हैं।
    समिति और प्रशासन की संयुक्त तैयारियां
    आयोजन को सफल बनाने के लिए समिति एवं जिला प्रशासन द्वारा यातायात, पार्किंग, सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल, साफ-सफाई, बैरिकेडिंग एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
    मंगलवार को अपने प्रवचन के दौरान अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा  ने कहा कि महादेव कहते हैं धैर्य रखो, समय सबका बदलता है। जो मुझ पर विश्वास रखता है, उसका कभी अहित नहीं होता। इसलिए प्रतिदिन भगवान शिव का नाम जप करें और श्रद्धा के साथ एक लोटा जल अवश्य अर्पित करें। उन्होंने कहा कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं और उन पर सदैव अपनी कृपा बनाए रखते हैं। कुबेरेश्वरधाम में प्रतिदिन आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक भोजनशाला में निरंतर नि:शुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था की जा रही है। विठलेश सेवा समिति के स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सेवा में निरंतर जुटे हुए हैं और बड़ी संख्या में भक्त प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं। हर वर्ष आयोजित होने वाला गुरु पूर्णिमा महोत्सव कुबेरेश्वरधाम का प्रमुख आध्यात्मिक आयोजन माना जाता है। इस वर्ष भी शिव महापुराण कथा, गुरु दीक्षा समारोह और विशाल सेवा व्यवस्थाओं के कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
  • देश में अगले साल आ सकते हैं 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट…. RBI ने शुरू की तैयारी

    देश में अगले साल आ सकते हैं 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट…. RBI ने शुरू की तैयारी


    नई दिल्ली।
    भारत (Inida) में जल्द ही कटे-फटे और गंदे नोटों की समस्या हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India ) ने देश में पॉलीमर (Polymer) यानी प्लास्टिक के नोट लाने का नीतिगत फैसला कर लिया है और अगले साल तक 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट बाजार में उतारे जा सकते हैं। क्रेडिट कार्ड की तरह कड़े होने के बजाय ये नोट बेहद पतले, हल्के और लचीले होंगे।

    भारत में पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट चलन में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल दस व बीस रुपये के प्लास्टिक नोट बाजार में लाए जाएंगे। इसमें सुरक्षा के उन्हीं उन्नत नियमों का पालन किया जाएगा जो कागज के नोट छापने में अपनाए जाते हैं। अगले साल यह नोट बाजार में आ सकते हैं।

    रिजर्व बैंक ने पॉलीमर शीट आपूर्ति के लिए निजी कंपनियों को भी आमंत्रित किया है। शुरुआती चरण सफल रहा तो बड़े नोट भी चरणबद्ध तरीके से लाए जाएंगे। इन पॉलीमर नोटों के लिए डिजाइन, आकार व छपाई उसी तरह होगी जैसे कागज के नोट पर होगी। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए इन नोटों में विशेष तकनीक अपनाई जाएगी।

    रिजर्व बैंक के अधिकारियों के मुताबिक पॉलीमर नोटों के प्रचलन में आने की समय सीमा नहीं बताई जा सकती। इतना जरूर है कि पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट लाने का नीतिगत निर्णय हो चुका है और चार चरणों से गुजरने के बाद पॉलीमर नोट छापे जाएंगे।


    पतले, लचीले प्लास्टिक सब्सट्रेट से बनेंगे नोट

    इस पूरी प्रक्रिया में वक्त लगना स्वाभाविक है। इसमें मौसम, इस्तेमाल के तौर-तरीकों व जनता की सहूलियत का भी ध्यान रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में कितने नोट तैयार होंगे इसका आकलन बाजार में दस व बीस रुपये मूल्य वर्ग के नोटों की उपलब्धता, एटीएम व बैंकों की जरूरत के हिसाब से तय होगा। यह नोट एक पतले, लचीले प्लास्टिक सब्सट्रेट से बनेंगे। ये क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह कठोर नहीं हल्के, लचीले होंगे।

    पहले भी हो चुकी है कवायद…वर्ष 2012 में भारत सरकार ने मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला समेत कुछ शहरों में 10 रुपये के एक अरब पॉलीमर नोटों के परीक्षण को मंजूरी दी थी। लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी।


    कटे-फटे नोटों से निजात

    लोगों को कटे, फटे व गंदे नोटों से निजात मिलेगी। इसे वह आसानी से ले जा सकेंगे। पॉलीमर करेंसी नोट में नए सुरक्षा फीचर होंगे। इससे नकली नोट तैयार होने की संभावना न के बराबर हो जाएगी। पॉलीमर नोटों में माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और विशेष स्याही जैसी उन्नत, सुविधाओं का उपयोग होगा। कागज के मुकाबले इनके निर्माण पर खर्च भी कम आएगा। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड जैसे कई देशों में पॉलीमर नोट कई वर्षों से चलन में हैं।

    नोटों की छपाई पर बढ़ रहा खर्च
    रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, नोटों की छपाई पर व्यय वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये हो गया, यह पिछले वर्ष 5,101.4 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि मुख्य रूप से नोटों की बढ़ती मांग के कारण हुई है। वित्त वर्ष 2025 में, लगभग 23.8 अरब गंदे नोटों का निस्तारण किया गया। 10 रुपये और 20 रुपये जैसे कम मूल्यवर्ग के नोटों की जांच सबसे पहले होने की संभावना है।

  • अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग ने ली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

    अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग ने ली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक


    भोपाल। मध्‍य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को राजधानी भोपाल के अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नाथू बरखेड़ा में 28 जुलाई से 8 अगस्त तक होने वाली अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर सेना भर्ती कार्यालय (एआरओ), जिला प्रशासन एवं खेल और युवा कल्याण विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक ली।

    मंत्री सारंग ने बैठक में भर्ती रैली के सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए सभी संबंधित विभागों को निर्धारित समय-सीमा में तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मंत्री सारंग ने कहा कि अग्निवीर भर्ती रैली केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होकर राष्ट्रसेवा का स्वर्णिम अवसर है। इसलिए सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित एवं अभ्यर्थी हितैषी वातावरण में संपन्न हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सेना भर्ती कार्यालय एवं जिला प्रशासन के साथ पूरा समन्वय स्थापित कर प्रत्येक आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी।

    मंत्री सारंग ने कहा कि भर्ती रैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भोपाल आएंगे। ऐसे में यातायात, सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास एवं संयुक्त निरीक्षण समय रहते कर लिया जाए ताकि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न नहीं हो।

    बैठक में सेना भर्ती कार्यालय द्वारा विभिन्न विभागों को सौंपे गए दायित्वों की विस्तार से समीक्षा की गई। मंत्री सारंग ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग को अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, परीक्षण क्षेत्र, खेल मैदान एवं अन्य खेल अधोसंरचना पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल पर सेना एवं प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पुलिस विभाग को भर्ती रैली की संपूर्ण अवधि में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण तथा सुचारु यातायात संचालन के निर्देश दिए। वहीं स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल टीम, चिकित्सकों, एम्बुलेंस एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

    मंत्री सारंग ने नगर निगम एवं लोक निर्माण विभाग को परीक्षण क्षेत्र में आवश्यक बैरिकेडिंग, स्वच्छता, मोबाइल शौचालय, कचरा प्रबंधन तथा परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही आयोजन स्थल पर पर्याप्त पेयजल, टेंट, शेड, बैठने की व्यवस्था, मौसम के अनुरूप पंखे, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (पब्लिक एड्रेस सिस्टम) तथा अग्निशमन वाहन उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए।

    बैठक में सेना के अधिकारियों एवं जवानों के आवास, परिवहन एवं पार्किंग व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। मंत्री सारंग ने निर्देश दिए कि सेना के अधिकारियों एवं जवानों के ठहरने के लिए उपयुक्त व्यवस्था की जाए तथा उनके आवागमन के लिये आवश्यक वाहन उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही अभ्यर्थियों के रात्रि विश्राम एवं परिवहन की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में निर्णय लिया गया कि आयोजन स्थल पर अस्थायी विद्युत कनेक्शन, निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए जनरेटर बैकअप, इंटरनेट कनेक्शन, रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर आवश्यक सहायता व्यवस्था तथा दस्तावेजों के सत्यापन के लिए कंप्यूटर एवं ऑपरेटर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए न्यूनतम दरों पर भोजन एवं नाश्ते के स्टॉल भी लगाए जाएंगे।

    मंत्री सारंग ने निर्देशित किया कि भर्ती रैली प्रारंभ होने से पूर्व सेना भर्ती कार्यालय, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक एवं स्थल निरीक्षण कर सभी व्यवस्थाओं का अंतिम परीक्षण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल सफल आयोजन नहीं, बल्कि प्रत्येक अभ्यर्थी को सम्मानजनक, सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।

    उल्लेखनीय है कि सेना भर्ती कार्यालय, भोपाल द्वारा आयोजित यह अग्निवीर भर्ती रैली 28 जुलाई से 8 अगस्त तक अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नाथू बरखेड़ा, भोपाल में होगी। भर्ती रैली में मध्यप्रदेश के 15 जिले—भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, अशोकनगर, गुना, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, दमोह एवं पन्ना के अभ्यर्थी अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर तकनीकी एवं अग्निवीर ट्रेड्समैन श्रेणियों में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के अभ्यर्थियों के लिए धर्म गुरु एवं एजुकेशन हवलदार श्रेणी की भर्ती भी की जाएगी।

    मंत्री सारंग ने कहा कि भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है और राज्य सरकार भर्ती रैली को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक संसाधन एवं सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

  • मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी

    मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र (Monsoon-Session) में परिसीमन (Delimitation) व महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment-Bill) को पारित कराने के लिए मोदी सरकार (Modi Government) ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसके लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल हासिल करने के लिए सरकार ने विपक्षी दलों की तीन श्रेणियां बनाई हैं। हाल ही में इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाली द्रमुक के अलावा एनसीपी (एसपी), जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस से विधेयक को प्रत्यक्ष समर्थन करने पर, जबकि दूसरे कई अन्य गैर कांग्रेसी दलों से परोक्ष समर्थन पर बातचीत का दौर जारी है।

    सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों की तीन श्रेणियों में पहली श्रेणी ऐसे दलों की है, जो विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे। दूसरी श्रेणी समर्थन की संभावना वाले दलों की है। तीसरी श्रेणी मतदान से दूरी बनाने की संभावना वाले दलों की है। सूत्रों की माने तो प्रत्यक्ष समर्थन के लिए द्रमुक, वाईएसआर कांग्रेस की कुछ मांगों पर विचार किया जा रहा है। इसी श्रेणी में शरद पवार की एनसीपी भी शामिल है। सदन में अगर पुरानी स्थिति रही तो सरकार को दो तिहाई बहुमत के लिए अतिरिक्त 54 तो वर्तमान स्थिति के हिसाब से 60 मतों का जुगाड़ करना होगा।


    संसद में कैसे सधेगा नंबर गेम?

    इस बीच तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के बाद सरकार को पुरानी स्थिति में 28 मतों और वर्तमान स्थिति में 36 अतिरिक्त मतों का जुगाड़ करना होगा। अगर द्रमुक के 22, एनसीपी (एसपी) के 8 और वाईएसआर कांग्रेस के 4 सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया तो सरकार की परेशानी दूर हो जाएगी। मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के वॉयस ऑफ पीपुल्स, यूपीपीएल और जेडपीएम (4 सांसद) को पहले ही साध लिया है।


    दूसरी स्थिति के लिए भी रणनीति

    द्रमुक, एनसीपी (एसपी) और वाईएसआर कांग्रेस में से एक या दो दल अगर समर्थन के लिए राजी नहीं हुए तो इन्हें मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि तृणमूल के कम से कम दो सांसद इस प्रस्ताव को स्वीकार कर सकते हैं। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल, निर्दलीय सांसदों को भी समर्थन न देने की स्थिति में मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। फिर सरकार की विपक्षी दलों के उन सांसदों पर भी नजर है जो नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं।


    सत्र के दौरान बनेगी अंतिम रणनीति

    सरकार की योजना विपक्षी दलों से लगातार बातचीत जारी रखते हुए सत्र के दौरान अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने की है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि विधेयक को अगले महीने के पहले सप्ताह में पेश करने की है। ऐसे में सत्र के दौरान विपक्षी दलों से मंथन का नया दौर शुरू होगा।

  • वन नेशन-वन इलेक्शन 2029 के आम चुनाव तक लागू करने की तैयारी….99% लोग प्रस्ताव के समर्थन में

    वन नेशन-वन इलेक्शन 2029 के आम चुनाव तक लागू करने की तैयारी….99% लोग प्रस्ताव के समर्थन में


    नई दिल्ली।
    एक देश- एक चुनाव (One Nation, One Election) को लेकर हलचल तेज होती दिख रही है। संसद (Parliament) की संयुक्त समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने शुक्रवार को गोवा में इसको लेकर बड़ा बयान दिया है। वहीं, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने इसे गेम चेंजर बताया है। आपको बता दें कि समिति एक साथ चुनाव कराने संबंधी विधेयकों की समीक्षा कर रही। इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जिससे ‘एक देश, एक चुनाव’ सुधार को 2029 के आम चुनाव तक लागू किया जा सके।

    समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने दावा करते हुए कहा कि अबतक जिन नागरिक संस्थाओं से सुझाव लिया गया है उसमें से करीब 99 फीसदी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। प्रस्ताव का उद्देश्य बार-बार होने वाले चुनाव से होने वाले अनुमानित सात लाख करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान को रोकना है।

    पीपी चौधरी ने कहा कि गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों का दौरा पूरा हो चुका है। यहां संविधान विशेषज्ञों, नागरिक संस्थाओं, शिक्षाविदों और अन्य संबंधित लोगों से बातचीत हुई है। जिन लोगों से सलाह ली गई उनमें से अधिकतर ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया है। अब कोशिश ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिसे सभी राजनीतिक दल स्वीकार करें। इसे लागू करने की समय सीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि समिति कई विकल्पों पर विचार कर रही है।


    गेंम चेंजर साबित होगी व्यवस्था

    वहीं, इस मुद्दे पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि एक देश- एक चुनाव पूरे देश के लिए गेम चेंजर साबित होगा। नई व्यवस्था से शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, निवेश बढ़ेगा और बार-बार चुनाव कराने में लगने वाले समय एवं संसाधनों की बचत से रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे। उन्होंने जीएसटी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र, एक कर की व्यवस्था से देश को व्यापक लाभ मिला है। बार-बार होने वाले चुनावों का असर राज्यों के राजस्व, सरकारी कामकाज, न्याय व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।


    संविधान संसोधन विधेयक पर चर्चा

    समिति ने गोवा में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर चर्चा शुरू की। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ बातचीत से हुई जिसमें एकसाथ चुनाव कराने में आने वाली चुनौतियों और उनसे निपटने के तरीकों पर उनकी राय मांगी गई। चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ ‘एक देश, एक चुनाव’ को कैसे लागू किया जा सकता है, इसमें क्या चुनौतियां हैं और सभी को स्वीकार्य संतुलन बनाए रखते हुए उन चुनौतियों को कैसे कम किया जा सकता है।

  • बंगाल में BJP को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद…. रिजल्ट बाद हिंसा से निपटने की तैयारियां शुरू…

    बंगाल में BJP को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद…. रिजल्ट बाद हिंसा से निपटने की तैयारियां शुरू…


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद के बीच भाजपा (BJP) ने चुनाव बाद की स्थितियों से निपटने के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। परिणाम जो भी हों, पार्टी के निर्वाचित विधायक बिना बुलाए अपना क्षेत्र नहीं छोंड़ेंगे। स्थानीय संगठन के नेताओं को भी नतीजों के बाद कुछ दिन तक अपने ही क्षेत्र में रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विरोधी खेमे की किसी भी तरह का संभावित हिंसा से निपटा जा सके।

    वर्ष 2021 में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पश्चिम बंगाल में कई हिंसक घटनाएं हुईं थी। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाया था। इसी को देखते हुए भाजपा अपने समर्थकों की सुरक्षा के लिए सतर्कता बरत रही है।

    सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने नतीजे आने के बाद की स्थितियों के लिए पूरे संगठन को जरूरी निर्देश दिए हैं। उसके निर्वाचित विधायक भी बिना बुलाए कोलकाता नहीं पहुंचेंगे। संगठन के प्रमुख लोग भी कुछ दिनों तक अपने क्षेत्रों में ही रहेंगे और सुरक्षा स्थितियों पर नजर रखेंगे। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने भी अगले आदेश तक बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की विभिन्न क्षेत्रों में तैनाती सुनिश्चित की है।

    भाजपा ने अपने नेताओं से कहा है कि नतीजे आने के बाद भी उसका वार रूम काम करेगा और वहां पर हर क्षेत्र की स्थिति के बार में जानकारी दी जा सकेगी, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। पार्टी नेता इस बारे में लगातार बैठकें कर भावी स्थितियों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। दो मई को कोलकाता में होने वाली पार्टी की बड़ी बैठक में मुख्य मुद्दा मतगणना को लेकर रहेगा, लेकिन उसके बाद की स्थिति को लेकर भी चर्चा संभव है।


    मतगणना केंद्रों पर गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं : चुनाव आयोग

    पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में किसी भी मतगणना केंद्र पर किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी की जा रही है। सीईओ ने स्ट्रांगरूमों में ईवीएम से कथित छेड़छाड़ और गड़बड़ियों के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया।

    कोलकाता में गुरुवार को मतगणना केंद्रों पर जमकर हंगामा हुआ था। तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता और प्रत्याशी कुणाल घोष व शशि पांजा ने धरना दिया था। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर के सखावत स्कूल में बने मतगणना केंद्र में पहुंच गई थीं।


    टीएमसी की याचिका पर आज होगी सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें बंगाल में मतगणना केंद्रों पर सिर्फ केंद्रीय कर्मियों की पर्यवेक्षकों के तौर पर तैनाती के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई थी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ सुनवाई करेगी।