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  • अयोध्या में दीपोत्सव को भव्य बनाने की तैयारी शुरू, 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीये

    अयोध्या में दीपोत्सव को भव्य बनाने की तैयारी शुरू, 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीये


    नई दिल्ली। अयोध्या में 10वें दीपोत्सव को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों को 30 लाख दीयों से रोशन करने का लक्ष्य रखा गया है। घाटों की सफाई के बाद दीये रखने के लिए मार्किंग का काम शुरू हो चुका है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन के साथ तैयारियों की औपचारिक शुरुआत होगी।

    दीपोत्सव की तैयारियों का समन्वय डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय कर रहा है। विश्वविद्यालय ने 30 लाख दीये जलाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 33 लाख दीये मंगवाए हैं। परिवहन और रखरखाव के दौरान दीयों के टूटने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त दीयों की व्यवस्था की गई है।

    शुक्रवार सुबह 7:30 बजे होगा भूमि पूजन

    दीपोत्सव की तैयारियों के लिए शुक्रवार सुबह 7:30 बजे घाट नंबर 10 पर भूमि पूजन किया जाएगा। इसमें डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति बिजेंद्र सिंह सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। भूमि पूजन के साथ घाटों पर दीयों की व्यवस्था और अन्य तैयारियों में तेजी आएगी।

    55 से बढ़ाकर 56 घाटों पर होगी दीयों की व्यवस्था

    इस बार दीपोत्सव के लिए 56 घाटों को शामिल किया गया है। इनमें विस्तारित राम की पैड़ी, चौधरी चरण सिंह घाट और भजन संध्या स्थल भी शामिल हैं। इससे पहले दीयों की व्यवस्था 55 घाटों पर की जाती थी।

    दीयों को निर्धारित संख्या और एक समान क्रम में लगाने के लिए ब्लॉक आधारित लेआउट तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, घाटों पर मार्किंग का काम तीन से चार दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद दीये रखने और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    35 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे व्यवस्था

    दीये लगाने और उन्हें जलाने के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को तैनात किया जाएगा। इनमें 30 डिग्री कॉलेज, 40 इंटरमीडिएट कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसर के विद्यार्थी शामिल होंगे। स्वयंसेवकों को अलग-अलग घाटों के हिसाब से जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। इसके लिए उनका प्रशिक्षण भी चल रहा है।

    स्वयंसेवकों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। उन्हें क्यूआर कोड, फोटो, संपर्क विवरण और तैनाती स्थल की जानकारी वाले पहचान पत्र दिए जाएंगे।

    दीयों की आपूर्ति, घाटों के प्रबंधन, स्वयंसेवकों की तैनाती और कार्यक्रम की सुरक्षा सहित सभी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के लिए विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं। इस बार 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य दीपोत्सव को भव्य स्वरूप देने की तैयारी का अहम हिस्सा है।

  • भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में ब्रह्मोस सबसे आगे, 2027-28 तक आएगा हल्का वर्जन: CEO जयतीर्थ जोशी

    भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में ब्रह्मोस सबसे आगे, 2027-28 तक आएगा हल्का वर्जन: CEO जयतीर्थ जोशी


    नई दिल्ली। भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को पूरी तरह स्वदेशी बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के एमडी और सीईओ डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी के मुताबिक, भारत के रक्षा निर्यात में ब्रह्मोस की अहम भूमिका है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस मिसाइल के इस्तेमाल के बाद वैश्विक स्तर पर इसकी क्षमता और प्रतिष्ठा को लेकर चर्चा बढ़ी है। कंपनी अब उत्पादन बढ़ाने, सप्लाई चेन मजबूत करने और ब्रह्मोस के हल्के वर्जन विकसित करने पर जोर दे रही है।

    ब्रह्मोस को भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना में शामिल किया जा चुका है। अब इसके नेक्स्ट जेनरेशन वर्जन ब्रह्मोस-एनजी पर काम चल रहा है। इसके अलावा, लंबी दूरी तक मार करने वाले स्ट्राइक वेरिएंट की अवधारणा पर भी काम किया जा रहा है।

    डिफेंस एक्सपोर्ट में ब्रह्मोस की बढ़ती भूमिका
    भारत का रक्षा निर्यात सालाना 62.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की अहम हिस्सेदारी है।

    डॉ. जोशी के मुताबिक, ब्रह्मोस की निर्यात सफलता की शुरुआत 2025 में इसके युद्ध में इस्तेमाल से पहले ही हो गई थी। वर्ष 2022 में भारत को इस मिसाइल के लिए पहला बड़ा निर्यात ऑर्डर मिला था। इस सौदे ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों की संभावनाओं को मजबूती दी।

    फिलीपींस के साथ शुरुआती निर्यात समझौते के बाद इस साल दक्षिण-पूर्व एशिया के दो और देशों के साथ सौदे किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम को मिले ऑर्डर और डिलीवरी के साथ ब्रह्मोस का निर्यात 600 मिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।

    सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए बढ़ेंगे साझेदार
    ब्रह्मोस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनी उत्पादन क्षमता और सप्लाई चेन का विस्तार कर रही है। डॉ. जोशी ने बताया कि हैदराबाद, नागपुर, पिलानी और लखनऊ स्थित उत्पादन इकाइयां तेजी से काम कर रही हैं।

    कंपनी हर सिस्टम और सब-सिस्टम के लिए औद्योगिक साझेदारों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में है। अभी जहां एक या दो प्रमुख साझेदारों पर निर्भरता रही है, वहीं इसे बढ़ाकर 45 सोर्स तक विकसित करने की योजना है। इससे उत्पादन में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता और लागत के स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    2027-28 तक तैयार हो सकता है ब्रह्मोस-एनजी का प्रोटोटाइप
    ब्रह्मोस के नए संस्करणों में ब्रह्मोस-एनजी यानी नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल महत्वपूर्ण है। यह मौजूदा मिसाइल की तुलना में छोटी और हल्की होगी। इसका उद्देश्य लड़ाकू विमानों में इसे एकीकृत करना आसान बनाना और भारत की हवाई हमले की क्षमता को मजबूत करना है।

    इस मिसाइल को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।

    डॉ. जोशी के अनुसार, ब्रह्मोस-एनजी का पहला प्रोटोटाइप 2027 या 2028 तक तैयार होने की उम्मीद है। इसमें अधिक स्वदेशी तकनीक और उन्नत सामग्री का इस्तेमाल करने की योजना है। इसके लिए व्यापक अनुसंधान एवं विकास की जरूरत होगी।

    1,500 किलोमीटर रेंज वाले वर्जन पर भी काम
    ब्रह्मोस एयरोस्पेस 1,500 किलोमीटर की रेंज वाले स्ट्राइक वेरिएंट पर भी काम कर रहा है। कंपनी के मुताबिक, मिसाइल ने जमीन, समुद्र और हवा से किए गए परीक्षणों में लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता दिखाई है। हालांकि, 1,500 किलोमीटर रेंज वाला वर्जन अभी अवधारणा के स्तर पर है।

    ब्रह्मोस की खासियत इसकी सुपरसोनिक गति, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और अलग-अलग प्लेटफॉर्म से लॉन्च किए जाने की सुविधा है। नए संस्करणों के विकास से भारतीय सेनाओं की परिचालन क्षमता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात की संभावनाओं को मजबूत करने का लक्ष्य है।

    नौसेना के लिए ब्रह्मोस का नया कॉन्ट्रैक्ट
    रक्षा मंत्रालय ने 6 अक्टूबर को भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदने के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस के साथ अनुबंध किया। इस परियोजना में कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) सहित विभिन्न भारतीय उद्योगों की भागीदारी भी रहेगी।

    डॉ. जोशी के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर ने ब्रह्मोस की परिचालन क्षमता को प्रदर्शित किया है। कंपनी का जोर अब इस मिसाइल को अधिक स्वदेशी बनाने, उत्पादन बढ़ाने और नई पीढ़ी के संस्करणों को विकसित करने पर है।

  • MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे

    MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे


    खंडवा।
    ओंकारेश्वर (Omkareshwar) में सिंहस्थ 2028 (Simhastha 2028) की तैयारियों के तहत बनने वाले प्रोजेक्ट्स से प्रभावित हो रहे स्थानीय लोग अब लामबंद हो गए हैं. जिला प्रशासन से अपनी मांगों पर सहमति नहीं बनने के विरोध में नगरवासियों ने दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का फैसला किया है।

    19 अक्टूबर से बंद के पहले दिन ओंकारेश्वर में लगभग सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद रहीं. यहां तक कि फुटपाथ पर फूल-माला, प्रसाद आदि बेचने वाले छोटे दुकानदारों ने भी अपना कारोबार बंद (Business Closed) रखा. इधर, प्रशासन ने कहा है कि स्थानीय लोगों से बातचीत चल रही है और उनकी लगभग सभी मांगों पर सहमति बन चुकी है।

    ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं. इस विस्तारीकरण योजना के तहत सड़कों और रास्तों के किनारे दुकानें, मकान एवं अन्य गतिविधियां संचालित करने वालों को विस्थापित किया जा रहा है. इसके लिए पूरी कार्ययोजना बनाई गई है.


    प्रशासन के सामने 19 मांगे रखी

    स्थानीय लोगों की समिति ने पिछले महीने जिला प्रशासन के सामने अपनी 19 मांगें रखी थीं. उनका कहना है कि जिला प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं, इसलिए दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का निर्णय लिया गया है. स्थानीय लोगों की मांग है कि जिनकी दुकानें, मकान एवं रोजगार से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, उन्हें इसके बदले बेहतर पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए।

    ओंकारेश्वर बंद को स्थानीय लोगों के साथ साधु-संतों का भी समर्थन मिला. उनका कहना है कि पिछले साल भी जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. अब वे पक्का और भरोसेमंद आश्वासन चाहते हैं.


    छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद

    ओंकारेश्वर बंद के दौरान छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद रहीं. यहां तक कि होटल और स्थानीय परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं. इस कारण बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को खासी परेशानी हुई. श्रद्धालुओं का भी कहना है कि स्थानीय लोगों के रोजगार और आजीविका का ध्यान रखते हुए कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

    इधर, जिला प्रशासन ने कहा कि स्थानीय लोगों से लगातार बातचीत जारी है. उनकी ओर से रखी गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया है और 19 में से 17 मांगें मानी जा चुकी हैं. पुनर्वास के लिए स्थान तय करने को लेकर थोड़ी दिक्कत आ रही है, जिसे भी जल्द सुलझा लिया जाएगा. जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्थानीय लोगों का बेहतर पुनर्वास किया जाए, ताकि उनकी आजीविका पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

  • फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी … खरगे ने चर्चा के लिए PM मोदी से की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

    फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी … खरगे ने चर्चा के लिए PM मोदी से की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Opposition Leader Mallikarjun Kharge) ने परिसीमन (Delimitation) के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद में लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए। खरगे की ओर से प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए लिखा गया यह चौथा पत्र है। इससे पहले वह 11 अप्रैल, 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी इस संबंध में पत्र लिख चुके हैं।


    खरगे बोले- पहले चर्चा हो, फिर संसद में लाया जाए विधेयक

    खरगे ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से कहा कि परिसीमन पर नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर संसद में विचार के लिए लाने से पहले सभी दलों के साथ विस्तार से चर्चा कराई जाए। उन्होंने जोर दिया कि राजनीतिक दलों को आपस में विचार-विमर्श करने और अन्य संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

    उन्होंने प्रधानमंत्री को आगाह करते हुए लिखा कि पहले की तरह किसी व्यापक संवैधानिक संशोधन विधेयक को संसद में जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश दोबारा नहीं होनी चाहिए। खरगे के मुताबिक, पहले भी ऐसी कोशिश की गई थी, लेकिन उसे संसद में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला था।


    मॉनसून सत्र खत्म हुए 64 दिन, फिर भी दोनों सदनों का सत्रावसान नहीं

    खरगे ने संसद के मॉनसून सत्र को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त, 2026 को मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं हुआ है। उन्होंने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताया। संसद का सत्रावसान करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। हालांकि, विपक्षी दलों ने सत्रावसान में देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्हें आशंका है कि सरकार परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।


    अप्रैल में भी उठाई थी सर्वदलीय बैठक की मांग

    खरगे ने पत्र में बताया कि उन्होंने पहली बार 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री से परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। उनके मुताबिक, सरकार ने उस मांग पर बैठक नहीं बुलाई।

    इसके बाद 14 अप्रैल, 2026 की देर शाम विधेयकों को सार्वजनिक किया गया और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। 17 अप्रैल को परिसीमन से संबंधित विधेयक संसद में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। यह मोदी सरकार की ओर से लाया गया पहला संवैधानिक संशोधन विधेयक था, जिसे संसद में हार का सामना करना पड़ा।


    दोबारा विधेयक लाने की अटकलों के बीच बढ़ी सियासी हलचल

    विधेयक गिरने के बाद से इस बात की अटकलें लगाई जाती रही हैं कि पर्याप्त संख्या बल जुटाने के बाद सरकार इसे दोबारा पेश कर सकती है। हालांकि, खबर प्रकाशित होने तक विधेयक फिर से पेश नहीं किया गया था।

    खरगे ने अपने ताजा पत्र में एक बार फिर स्पष्ट किया कि परिसीमन के नए प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लेने और उन्हें संसद में विचार के लिए लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को चर्चा का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में सभी दलों और संबंधित पक्षों को पर्याप्त समय मिलना जरूरी है।

  • राम मंदिर में अयोध्यावासियों के लिए अलग प्रवेश द्वार की तैयारी, आधार कार्ड से मिल सकता है सीधे दर्शन का लाभ

    राम मंदिर में अयोध्यावासियों के लिए अलग प्रवेश द्वार की तैयारी, आधार कार्ड से मिल सकता है सीधे दर्शन का लाभ

    अयोध्या। राम मंदिर में स्थानीय निवासियों को रामलला के सीधे दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर जल्द मंथन होगा। इसके तहत अयोध्यावासियों को आधार कार्ड के माध्यम से प्रवेश देने और संत-महंतों व गृहस्थों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव ने 15 अक्टूबर को धार्मिक न्यास समिति की बैठक बुलाई है। पहली बार भौतिक रूप से आयोजित होने वाली इस बैठक में अयोध्या के संत-महंतों और गृहस्थों को रामलला के दर्शन सुलभ कराने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा होगी। बैठक में तैयार रूपरेखा को दो दिसंबर को ट्रस्ट की कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट की सहमति और सुझावों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट अहम

    स्थानीय निवासियों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था लागू करने से पहले पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की सकारात्मक रिपोर्ट जरूरी मानी जा रही है। 15 अक्टूबर को होने वाली बैठक में यह भी स्पष्ट होने की संभावना है कि संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट ट्रस्ट को मिली है या नहीं।

    यदि रिपोर्ट अनुकूल रही, तो स्थानीय लोगों के लिए सीधे दर्शन की सुविधा देने की योजना आगे बढ़ सकती है। इसके साथ ही संत-महंतों और गृहस्थों के लिए निर्धारित प्रवेश द्वार बनाने पर भी निर्णय लिया जा सकता है।

    यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलती है, तो स्थानीय दर्शनार्थियों के लिए पहले से लागू व्यवस्था जारी रह सकती है। इसके तहत अयोध्या के निवासियों को आधार कार्ड के माध्यम से छह महीने की अवधि वाला नियमित दर्शन पास उपलब्ध कराया जाता है।

    अलग-अलग लेन बनाने की मांग

    राम मंदिर में स्थानीय दर्शनार्थियों के लिए अलग प्रवेश लेन बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। स्थानीय संत-महंतों का कहना है कि अलग लेन की व्यवस्था नहीं होने से दर्शन के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए स्थानीय निवासियों, संत-महंतों और गृहस्थों के लिए अलग-अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

    धार्मिक न्यास समिति की बैठक में इन समस्याओं और संभावित समाधानों पर विचार किया जाएगा। बैठक में बनने वाली रूपरेखा के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    15 अक्टूबर से निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक

    राम मंदिर की निर्माण समिति की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक भी 15 अक्टूबर से शुरू होगी। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या पहुंचेंगे। संभावना जताई जा रही है कि धार्मिक न्यास समिति की बैठक में उन्हें भी आमंत्रित किया जा सकता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश व्यवस्था से जुड़े विषय पर उनका सुझाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    निर्माण समिति की बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव भी पहली बार हिस्सा लेंगे। इस दौरान निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के साथ अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निर्माण कार्यों का भी अवलोकन किया जाएगा।

    अब 15 अक्टूबर की बैठकों में स्थानीय निवासियों के लिए दर्शन व्यवस्था और मंदिर निर्माण से जुड़े विषयों पर होने वाली चर्चा के बाद आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी…. समान सीटों के बंटवारे की शर्त पर होगा BJP-अकाली दल का गठबंधन

    पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी…. समान सीटों के बंटवारे की शर्त पर होगा BJP-अकाली दल का गठबंधन


    चंडीगढ़।
    केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में पंजाब विधानसभा चुनावों (Punjab Assembly elections) के लिए भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन होता है तो वह केवल समान सीटों के बंटवारे की शर्त पर ही होगा। अमृतसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा अब राज्य में छोटे भाई या जूनियर पार्टनर की भूमिका नहीं निभाएगी।

    हरदीप पुरी ने साफ किया कि पिछला 22-23 सीटों वाला पुराना फॉर्मूला अब नहीं चलेगा। पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों में से पहले भाजपा केवल 22-23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी और बाकी सीटों पर अकाली दल उम्मीदवार उतारता था।

    आपको बता दें कि अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच हुई मुलाकात के बाद दोनों पुराने सहयोगियों के फिर से साथ आने की अटकलें लगाई जा रही थीं। कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने 2020 में एनडीए का साथ छोड़ दिया था।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब में नशे के प्रकोप को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर युद्ध स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के शासन में पंजाब के हालात खराब हो चुके हैं। राज्य की जनता और यहां तक कि पुलिस बल भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

  • शमशान घाट जाने की थी तैयारी, तभी आया फोन- अंतिम संस्कार रोक दीजिए; एंबुलेंस के झटके के बाद जिंदा मिला शख्स

    शमशान घाट जाने की थी तैयारी, तभी आया फोन- अंतिम संस्कार रोक दीजिए; एंबुलेंस के झटके के बाद जिंदा मिला शख्स


    ऋषिकेश।
    उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे परिवार को अचानक हैरान कर दिया। जिस व्यक्ति को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते समय परिजनों ने एंबुलेंस में अचानक सांसें चलने की बात कही। इसके बाद अंतिम संस्कार की तैयारियां रोक दी गईं और व्यक्ति को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    यह मामला ऋषिकेश के गीता नगर गली नंबर-5 निवासी साईं राम से जुड़ा है। परिजनों के मुताबिक, डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद वे अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए थे। मुक्तिधाम सेवा समिति से अंतिम यात्रा के लिए वाहन भी बुक करा लिया गया था।

    श्मशान ले जाते समय एंबुलेंस का पहिया गड्ढे में गया

    बताया गया कि साईं राम के शव को एंबुलेंस से अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था। जब वाहन श्यामपुर रेलवे फाटक के पास पहुंचा, तभी सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे में एंबुलेंस का पहिया चला गया।

    परिजनों के अनुसार, वाहन को जोरदार झटका लगा। इसी दौरान साईं राम के शरीर में हलचल हुई और उन्होंने आंखें खोल दीं। परिजनों ने सांसें चलने की बात कही, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला किया गया।

    अंतिम यात्रा वाहन की बुकिंग भी हो चुकी थी

    मुक्तिधाम सेवा समिति के पंकज गुप्ता के मुताबिक, दोपहर में साईं राम के अंतिम संस्कार के लिए वाहन की बुकिंग कराई गई थी। इसके बाद वाहन और चालक की व्यवस्था कर दी गई थी।

    उन्होंने बताया कि करीब 2:30 बजे परिवार की ओर से फोन आया और अंतिम यात्रा वाहन की बुकिंग रद्द करने को कहा गया। जब इसकी वजह पूछी गई तो परिजनों ने बताया कि एंबुलेंस के गड्ढे में जाने के बाद लगे झटके के दौरान साईं राम की सांसें चलने लगी हैं।

    दो बार हार्ट अटैक और किडनी फेल होने की बात

    परिजनों के अनुसार, साईं राम की तबीयत काफी खराब थी। डॉक्टरों ने उनके गुर्दे फेल होने और दो बार हार्ट अटैक आने की बात कही थी और उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

    हालांकि, बाद में सांसें चलने की सूचना के बाद उन्हें उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।

    घटना ने खड़े किए कई सवाल

    इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में इसकी चर्चा हो रही है। हालांकि, एंबुलेंस के गड्ढे में जाने से लगे झटके और साईं राम के शरीर में दोबारा सांस चलने के बीच चिकित्सकीय संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि किसी मरीज को मृत घोषित किए जाने की प्रक्रिया में किन चिकित्सकीय मानकों का पालन किया गया था। फिलहाल साईं राम की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति और उन्हें मृत घोषित किए जाने की परिस्थितियां ही इस पूरे मामले को स्पष्ट करने में अहम होंगी।

  • होर्मुज की जंग में अब दक्षिण कोरिया की एंट्री, सैन्य संसाधन तैनात करने की तैयारी

    होर्मुज की जंग में अब दक्षिण कोरिया की एंट्री, सैन्य संसाधन तैनात करने की तैयारी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है। हालिया हमलों के बाद तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत भी अब पटरी से उतरती नजर आ रही है। इस बीच दक्षिण कोरिया होर्मुज को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।

    दक्षिण कोरिया होर्मुज में ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ यानी जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में सहयोग के लिए सैन्य संसाधन तैनात करने पर विचार कर रहा है। दक्षिण कोरियाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन संसाधनों को इस साल के अंत से पहले भेजने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट्स में सरकारी और सैन्य सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

    संसद से मंजूरी लेने की तैयारी
    दक्षिण कोरिया के कई मीडिया संस्थानों के अनुसार, सरकार सैन्य संसाधनों की संभावित तैनाती के लिए संसद की मंजूरी लेने की प्रक्रिया तैयार कर रही है। कैबिनेट की समीक्षा के बाद इसी महीने संसद में सहमति प्रस्ताव पेश करने की योजना है।

    सरकार के सामने कई विकल्प हैं। इनमें समुद्री गश्ती विमान भेजना, जहाजों को लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराना और समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने तथा उन्हें हटाने वाली यूनिट तैनात करना शामिल है। इसके अलावा सियोल अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई देशों के साथ अपने संभावित योगदान के आकार और स्वरूप को लेकर भी बातचीत कर रहा है।

    राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा- अभी फैसला नहीं
    दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ब्लू हाउस ने कहा है कि सियोल होर्मुज में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता में योगदान देने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा कर रहा है। हालांकि, कार्यालय ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को तथ्यों से अलग बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि सरकार ने सैन्य तैनाती का अंतिम फैसला ले लिया है।

    ट्रंप के बयान के बाद बदले समीकरण
    दक्षिण कोरिया का यह कदम अमेरिका के साथ उसके संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था कि उन्होंने अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को कुछ हद तक इसलिए कम किया, क्योंकि दक्षिण कोरिया ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की मदद करने से इनकार कर दिया था।

    अब होर्मुज में संभावित सैन्य योगदान को अमेरिका के साथ रिश्तों में आई तल्खी कम करने की दिशा में उठाए जा रहे कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

  • US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!

    US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का प्रशासन देश में शरण पाने के लिए आवेदन कर चुके या फिलहाल आवेदन की प्रक्रिया में शामिल दो लाख तक विदेशी नागरिकों के कारोबारी और पर्यटन वीजा (Tourist Visa) रद्द करने की तैयारी कर रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह अमेरिकी इतिहास (American History) में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में वीजा रद्द किए जाने की सबसे बड़ी कार्रवाई होगी और इसे लेकर कानूनी चुनौतियां सामने आने की संभावना है।

    अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों और दो अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि इस फैसले को चुनौती नहीं दी गई या इसमें बदलाव नहीं किया गया, तो विदेश विभाग आने वाले हफ्तों में 2016 से 2026 के बीच जारी किए गए बी1 और बी2 वीजा रद्द करने की घोषणा कर सकता है। इसमें ऐसे वीजा धारक शामिल होंगे, जिन्होंने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया है या वर्तमान में शरण मांग रहे हैं। यह कार्रवाई गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के समन्वय से की जाएगी।


    क्या है बी1 और बी2 वीजा

    बी1 वीजा आम तौर पर कारोबारी यात्राओं के लिए जारी किए जाते हैं, जबकि बी2 वीजा पर्यटन, परिवार से मिलने या चिकित्सा उपचार के लिए जारी किए जाते हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, ‘हम डीएचएस के साथ समन्वय कर ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान करने और उनके गैर-आप्रवासी वीजा रद्द करने का काम कर रहे हैं, जो अमेरिका में अल्पकालिक आगंतुक के रूप में आए थे, लेकिन बाद में यहां स्थायी रूप से रहने के लिए शरण का आवेदन दाखिल कर देते हैं।’

    उन्होंने वीजा रद्द किए जाने की संभावित संख्या पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, ‘चूंकि यह प्रक्रिया जारी रहेगी, इसलिए रद्द किए जाने वाले वीजा की संख्या लगातार बदलती रहेगी और यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।’


    क्या तुरंत देश से निकाल दिए जाएंगे 2 लाख लोग

    अधिकारियों ने कहा कि वीजा रद्द होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि संबंधित लोगों को तुरंत अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि फिलहाल जिन लोगों के शरण संबंधी मामले लंबित हैं, उनमें से अधिकांश की श्रेणी बदली जा सकती है, लेकिन वे कारोबारी या पर्यटन यात्री के रूप में अपना वीजा दर्जा खो देंगे।


    वीजा पर जारी हैं पाबंदियां

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले साल दूसरी बार कार्यभार संभालने के बाद से उनके प्रशासन ने वीजा आवेदकों पर लगातार पाबंदियां कड़ी की हैं। इनमें आवेदकों से उनके सोशल मीडिया इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मांगना, वीजा प्रक्रिया के लिए महंगे बॉन्ड जमा करने की अनिवार्यता और कुछ देशों के नागरिकों को वीजा जारी करने पर पूरी तरह रोक लगाना शामिल है।

    उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ऐसे लोगों को निशाने पर लिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे अमेरिका में प्रवेश करने के लिए पर्यटक और कारोबारी वीजा का इस्तेमाल करते हैं और फिर शरण के लिए आवेदन कर देते हैं।

    वर्तमान में बी1 और बी2 वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों से यह पुष्टि करने को कहा जाता है कि वे अमेरिका में शरण के लिए आवेदन नहीं करेंगे। साथ ही, उन्हें यह भी साबित करना होता है कि वे अपने देश लौटने का इरादा रखते हैं।


    करीब 2 लाख हो चुके हैं रद्द

    पिछले 18 महीनों में विदेश विभाग करीब 1.75 लाख वीजा रद्द कर चुका है। इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें नशे में वाहन चलाने से लेकर दुष्कर्म और लूट जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है या जिन पर ऐसे अपराधों के आरोप हैं। इसके अलावा अमेरिका की नीतियों, खासकर पश्चिम एशिया से जुड़ी नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने वाले कुछ लोगों के वीजा भी रद्द किए गए हैं।

    ट्रंप प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं द्वारा अमेरिका आकर यहां बच्चे को जन्म देकर उसे यहां की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य वाले विदेशियों के ‘बर्थ टूरिज्म’ (जन्म पर्यटन) पर भी कार्रवाई तेज कर दी है।

  • एक देश, एक चुनाव की कवायद हुई तेज….2034 की जगह 2029 तक लागू करने की तैयारी

    एक देश, एक चुनाव की कवायद हुई तेज….2034 की जगह 2029 तक लागू करने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    देशभर में लोकसभा (Lok Sabha) और विधानसभा चुनाव (Legislative Assembly Elections) साथ कराने को लेकर कवायद तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘एक देश, एक चुनाव’ (‘One Nation, One Election’) को लेकर बनाई गई संसद की संयुक्त समिति ने भी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस बारे में सलाह लेनी शुरू कर दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार एक देश एक चुनाव के लिए 20234 की डेडलाइन को घटाकर 2029 ही करना चाहती है। यानी अगला लोकसभा चुनाव बिल्कुल अलग अंदाज में हो सकता है। इसके साथ ही विधानसभा के चुनाव भी करवाए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो एक साथ ही सभी राज्य की विधानसभाओं को भंग कर दिया जाएगा।


    दो साल में 11 राज्यों में होना है चुनाव, अभी एनडीए की सरकार

    इस समय देश के 22 राज्यों में एनडीए की सरकार है। इनमें से 11 राज्यों में अगले दो सालों में विधानसभा का चुनाव होना है। चार ऐसे राज्य हैं जिनमें लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव हो सकते हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा का नाम शामिल है। 2024 में एक देश एक चुनाव को लेकर जो कमेटी बनाई गई थी उसका टारगेट यही था कि 2034 में साथ में चुनाव कराने को लेकर रणनीति तैयार की जाए। एक रिपोर्ट में कहा गया कि अब सरकार इस प्रयास में है कि इसके लिए ज्यादा इंतजार ना किया जाए।


    शीत सत्र में सौंप सकती है रिपोर्ट

    संयुक्त संसदीय समिति पिछले दो साल से अपने काम में लग है और इस शीत सत्र में संसद में रिपोर्ट जमा कर सकती है। संविधान का अनुच्छेद 174 2, बी राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है। ऐसे में अगर एक साथ चुनाव करवाने होंगे तो जनवरी में ही राज्यों की विधानसभा भंग कर दी जाएगी। जिन राज्यों में एनडीए की सरकार है वहां यह आसान होगा। क्योंकि मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही राज्यपाल विधानसभा भंग कर सकते हैं।

    संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के आखिरी हफ्ते में शुरू होता है और क्रिसमस से पहले संपन्न हो जाता है। यह 41 सदस्यीय समिति ‘एक देश, एक चुनाव’ व्यवस्था को लागू करने के लिए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार-विमर्श कर रही है। समिति 2029 तक, लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव पर देश भर में परामर्श कर रही है।

    बीजेपी के कुछ मुख्यमंत्रियों ने पहले ही लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा के चुनाव कराने की इच्छा जाहिर की है। गोवा, हरियाणा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने इसका समर्थन किया है। इसके साथ ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी 1 जुलाई को कमेटी के साथ बैठक की थी।