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  • भारत सहित 54 देशों पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका…. USTR ने रखा प्रस्ताव

    भारत सहित 54 देशों पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका…. USTR ने रखा प्रस्ताव


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल (India and US Delegation) द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (Bilateral Trade talks) को अंतिम रूप देने की कोशिशों में जुटा है। इसी बीच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (US Trade Representative- USTR) ने बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लागू न करने के आरोप में भारत सहित 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव उन जांच के बाद सामने आया है, जो अमेरिका ने 60 देशों के खिलाफ इस आधार पर शुरू की थीं कि वे बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में असफल रहे हैं। इस प्रस्ताव की टाइमिंग काफी अहम है क्योंकि इस वक्त नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच व्यापार सौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस लिहाज से इसे एक झटका माना जा रहा है।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTS) जैमीसन ग्रीर ने एक बयान में कहा, ”हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने में विफल रहना अस्वीकार्य है। इससे ऐसी स्थिति पैदा होती है, जिसमें अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।” उन्होंने कहा, ”हम अब इस असमानता को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसका उल्लंघन करने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाएंगे” यह प्रस्ताव 1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत की गई 60 जांचों में से एक के बाद आया है।


    क्या है USTR की धारा 301?

    USTR (यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव) की धारा 301 अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 का एक प्रमुख प्रावधान है। यह अमेरिका को व्यापारिक साझेदार देशों की अनुचित व्यापार नीतियों या वबां प्रचलित परंपराओं की जांच करने और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए आयात शुल्क या व्यापार प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या वे उपाय अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं, या क्या वे US के व्यापार और वाणिज्यिक हितों पर कोई बेवजह बोझ तो नहीं डालते हैं।


    सुधारात्मक कार्रवाई करने की अनुमति

    अगर जाँच में यह पाया जाता है कि किसी देश ने द्विपक्षीय व्यापार के लिए ऐसे तौर-तरीके अपनाए हैं, जिन्हें अमेरिकी व्यापार के लिए हानिकारक मानता है, तो धारा-301 के प्रावधान US प्रशासन को उस मामले में सुधारात्मक कार्रवाई करने की अनुमति देता है। इन उपायों में ऊँचे टैरिफ लगाना, व्यापार पर प्रतिबंध लगाना या अन्य ऐसे उपाय शामिल हो सकते हैं जिनका उद्देश्य जाँच के दौरान सामने आई चिंताओं को दूर करना होता है।

    बंधुआ मजदूरी वाले आरोप पर भारत का क्या जवाब?
    भारत ने बंधुआ मजदूरी संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका से इन जांचों को समाप्त करने की मांग की है। भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के ढांचे के भीतर किया जाना चाहिए। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ”भारत धारा-301 कार्यवाही के मामले में अमेरिका के साथ संपर्क में है। साथ ही भारत दो फरवरी 2026 को घोषित समझौते के ढांचे और सात फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप अमेरिका के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भी बातचीत कर रहा है।”


    सार्वजनिक सुनवाई सात जुलाई 2026 को

    इसमें कहा गया कि धारा-232 (क्षेत्रीय) शुल्क के तहत आने वाले उत्पादों और कुछ अन्य वस्तुओं को इन प्रस्तावित शुल्कों से बाहर रखा गया है। कपड़ा एवं परिधान उत्पादों के लिए एक विशेष प्रणाली प्रस्तावित की गई है, जिसके तहत चयनित देशों से एक निश्चित मात्रा में आयात को अमेरिका में कम शुल्क दरों पर प्रवेश की अनुमति मिल सकती है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ”रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित शुल्क अभी अंतिम नहीं हैं और हितधारक 22 जून 2026 तक सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं। लिखित टिप्पणियां छह जुलाई 2026 तक प्रस्तुत की जा सकती हैं।” सार्वजनिक सुनवाई सात जुलाई 2026 को होगी।

    उधऱ, ग्रीर ने कहा कि कुछ व्यापारिक साझेदारों ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए शुरुआती कदम उठाए हैं। इनमें अमेरिका, मेक्सिको-कनाडा के बीच समझौते (यूएसएमसीए) और पारस्परिक व्यापार समझौतों के तहत जतायी गयी प्रतिबद्धताएं शामिल हैं।हालांकि, उन्होंने कहा कि ”प्रत्येक व्यापारिक साझेदार को यह सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे कि वैश्विक व्यापार बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा न दे और उसे स्थायी न बनाए।” अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने एक बयान में कहा कि भारत, चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सऊदी अरब सहित 54 देशों ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता दिखाई है।

  • विपक्षी एकता दिखाने की फिर से तैयारी…. दिल्ली में महाबैठक करेगा INDIA' गठबंधन

    विपक्षी एकता दिखाने की फिर से तैयारी…. दिल्ली में महाबैठक करेगा INDIA' गठबंधन


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) को घेरने और विपक्षी एकता (Opposition unity) दिखाने के लिए ‘INDI’ गठबंधन दिल्ली में महाबैठक (General Meeting) करने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 8 जून को यह बैठक हो सकती है। इसमें केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए संयुक्त रणनीति पर चर्चा होनी है। बैठक में करीब 15 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि भाग ले सकते हैं।


    ममता बनर्जी भी हो सकती हैं शामिल

    जानकारी के मुताबिक हाल के चुनाव में बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके की हार की समीक्षा और आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई गई है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना (UBT) नेता उद्धव ठाकरे और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आदि के भाग लेने की उम्मीद है।

    बता दें कि पश्चिम बंगाल की हार के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी भी बड़े संकट का सामना कर रही है। सूत्रों का कहना है कि टीएमसी के अंदर विरोध काफी तेज हो गया है और टीएमसी के कई बड़े नेता बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। उधर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हमला हो गया जिसको लेकर ममता बनर्जी केंद्र पर आक्रामक हैं। वहीं खबरें यहां तक आ रही हैं कि पार्टी में ममता बनर्जी के कद पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।


    राहुल गांधी बोले- रीति और नीति को प्रसारित करें

    राहुल गांधी ने एक दिन पहले ही पार्टी संगठन को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति और नीति को जन-जन तक पहुंचाना है। गांधी सोमवार को कांग्रेस की ओर से अजमेर के पुष्कर स्थित तिलोरा में आयोजित 10 दिवसीय सृजन संगठन चिंतन शिविर के समापन पर कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर में जिला अध्यक्षों को संगठन के प्रति निष्ठा और एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने जिला अध्यक्षों को स्पष्ट कहा कि संगठन से सर्वोपरि कुछ भी नहीं है। पार्टी की रीति-नीति आम जनता के बीच प्रसारित कर कांग्रेस को और मजबूत किया जाए।

    शिविर को सफल बताते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि संगठन सृजन अभियान के साथ चिंतन शिविर से कांग्रेस के कार्यकर्ता में एक नया जोश पैदा होगा और नयी जिम्मेदारी के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता जब पार्टी की रीति के साथ जब सड़कों पर उतरकर जनता के बीच जाएगा तो जनता का मत और समर्थन कांग्रेस को प्राप्त होगा। यही इस शिविर का मूल उद्देश्य भी है।

  • ईरान के भूमिगत ठिकानों पर हमले की तैयारी? ब्रिटेन के एयरबेस पर अमेरिकी B-1B लांसर तैनात

    ईरान के भूमिगत ठिकानों पर हमले की तैयारी? ब्रिटेन के एयरबेस पर अमेरिकी B-1B लांसर तैनात

    वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच United States ने Iran के खिलाफ अपने सैन्य अभियान की तैयारी तेज कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने पहली बार United Kingdom के एक एयरबेस से ईरान पर हमले की योजना बनाई है। इसके लिए अमेरिकी वायुसेना के तीन रणनीतिक बमवर्षक विमान Rockwell B‑1B Lancer को ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस पर तैनात किया गया है।

    माना जा रहा है कि यह ब्रिटिश ठिकाने से ईरान पर संभावित अमेरिकी हमलों का पहला बड़ा मिशन हो सकता है। B-1B लांसर लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाला भारी बमवर्षक विमान है, जो बड़ी मात्रा में पारंपरिक बम ले जाने में सक्षम है।

    बंकर-बस्टर बमों की तैयारी

    रिपोर्ट के अनुसार एयरबेस पर ग्राउंड क्रू को बमवर्षक विमानों में GPS-गाइडेड हथियार लोड करते देखा गया है। इन हथियारों में Joint Direct Attack Munition (JDAM) किट से लैस बम शामिल हैं, जो सामान्य बमों को सटीक लक्ष्य भेदने वाले हथियार में बदल देते हैं।

    ये किट 500 पाउंड के Mk‑82 bomb, 1,000 पाउंड के Mk‑83 bomb और 2,000 पाउंड के Mk‑84 bomb जैसे बमों पर लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा इन्हें BLU‑109 जैसे पेनिट्रेटर बमों के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जो भूमिगत सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाए गए हैं।

    क्या होता है बंकर-बस्टर?

    बंकर-बस्टर बम विशेष रूप से जमीन के नीचे बने कंक्रीट बंकर, सुरंगों और सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इनका मजबूत स्टील आवरण विस्फोट से पहले जमीन के भीतर गहराई तक प्रवेश कर जाता है।

    अमेरिका का शक्तिशाली बंकर-बस्टर GBU‑57 Massive Ordnance Penetrator लगभग 200 फीट (करीब 60 मीटर) गहराई तक प्रवेश करने में सक्षम माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि B-1B लांसर जैसे भारी बमवर्षक विमानों को ऐसे हथियारों से लैस किया जाए तो वे भूमिगत मिसाइल ठिकानों और सैन्य भंडारों को भी निशाना बना सकते हैं।

    ब्रिटेन की भूमिका पर उठे सवाल

    इस संभावित सैन्य अभियान में ब्रिटेन की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। शुरुआती दौर में ब्रिटिश प्रधानमंत्री Keir Starmer की सरकार ने कहा था कि ब्रिटिश ठिकानों का इस्तेमाल सीधे हमलों के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

    हालांकि बाद में लंदन ने अमेरिकी अनुरोध को मंजूरी दे दी और कहा कि इसका उद्देश्य “रक्षा के लिए मिसाइल खतरों को स्रोत पर ही नष्ट करना” है। यह फैसला उस समय लिया गया जब Cyprus में स्थित एक ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ था।

    मध्य-पूर्व में बढ़ी सैन्य गतिविधि

    युद्ध की शुरुआत के बाद ब्रिटेन ने पूर्वी भूमध्यसागर में अतिरिक्त सैन्य संसाधन तैनात किए हैं और ईरानी मिसाइल तथा ड्रोन हमलों को रोकने के लिए सहयोगी देशों के साथ ऑपरेशन चला रहा है।

    हालांकि ब्रिटेन में इस युद्ध को लेकर जनमत बंटा हुआ है। सर्वे एजेंसी YouGov के एक सर्वे के मुताबिक केवल 10% लोगों ने ही ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जोरदार समर्थन किया, जबकि 37% लोगों ने इसका विरोध जताया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका वास्तव में ब्रिटिश एयरबेस से हमले करता है, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव और भी बढ़ सकता है।

  • 1450 किमी लंबा राम वन गमन पथ तैयार कर रही मध्‍य प्रदेश सरकार

    1450 किमी लंबा राम वन गमन पथ तैयार कर रही मध्‍य प्रदेश सरकार

    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जिन्होंने नि:शब्द रहकर अपनी पुण्य भावनाओं को अमर शब्द दे दिए, ऐसी शबरी मैया को पूरे मध्यप्रदेश की ओर से नमन है, वंदन है। जिनके जूठे बेर खाकर भगवान श्री राम भी भक्तिभाव से धन्य हो गये उस माता शबरी की महिमा कौन नहीं जानता। भगवान को बेर भी भेंट देने से पहले खुद बेर का मीठापन जांच लेना भक्ति का उत्कर्ष है। यह प्रसंग हमें बताता है कि भगवान भक्त की आराधना पद्धति के नहीं, बल्कि उसके मन के भावों के भूखे होते हैं। व्यक्ति का मूल्य उसके हृदय की पवित्रता से तय होता है, जन्म से नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोल समाज की कुल देवी शबरी मैया हम सबके लिए सदैव आराध्य हैं, पूजनीय हैं, वंदनीय हैं। उन्होंने अपने चरित्र एवं सत्कर्मों से पूरे वनवासी और जनजातीय समाज का मान बढ़ाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को शहडोल जिले की ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गंधिया स्थित सीतामढ़ी धाम में माता शबरी जयंती पर आयोजित जनजातीय हितग्राही सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
    मुख्यमंत्री ने सीतामढ़ी परिसर में शबरी मैया की एक सुंदर प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम गंधिया से शहडोल जिले के लिए 747 करोड़ 91 लाख रुपए की लागत वाले 139 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन किया। इसमें 613 करोड़ रुपए से अधिक लागत से 79 कार्यों का लोकार्पण तथा 134 करोड़ रूपए से अधिक लागत के 60 कार्यों का भूमि पूजन शामिल है। मुख्यमंत्री ने यहां विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय वर्ग का समग्र कल्याण हमारी प्राथमिकताओं में है। प्रदेश में पीएम जन-मन योजना के अंतर्गत 98 करोड़ 30 लाख रुपए और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 401.56 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन किया जा चुका है। हमारी सरकार ने जनजातीय समाज के नायकों की गौरव गाथाओं को शैक्षिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शबरी माता ने बरसों भगवान श्री राम का इंतजार किया। कई साल तक राम का रास्ता निहारती रहीं। रोज अपनी कुटिया की सफाई करती रहीं कि आज नहीं, तो कल राम आएंगे। यह एक भक्त के अपने भगवान पर अटूट विश्वास का परिचायक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्री राम आए, शबरी मैया की भक्ति और स्नेह से अत्यंत भावविभोर हुए और उन्हें नवधा भक्ति का ज्ञान देकर मोक्ष भी प्रदान किया।

    हमारी सरकार ने शबरी मैया और हम सबके आराध्य भगवान श्रीराम की स्तुति के लिए श्री रामचन्द्र पथ गमन न्यास की स्थापना की है। हम प्रदेश में 1450 किमी लंबे राम वन गमन पथ का निर्माण करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को श्रीराम का विशेष स्नेह मिला। चित्रकूट में उन्होंने 11 वर्ष बिताए। ग्राम गंधिया में भी वे 11 रात रहे। इसीलिए गंधिया को भी राम वन गमन पथ विकास योजना में शामिल कर लिया गया है। इससे गंधिया का विकास होगा। इस गांव के विकास के लिए सरकार ने लगभग 80 लाख रुपए मंजूर किए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्यौहारी में 30 बिस्तरीय अस्पताल का निर्माण कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने सीतामढ़ी धाम को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने तथा वन्य जीव पर्यटन गतिविधियों के विकास-विस्तार के लिए क्षेत्रीय संजय डूबरी टाइगर रिजर्व का एक गेट ब्यौहारी की तरफ भी खोलने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में महुआ और कटहल बहुतायत से होता है। इसीलिए इन दोनों से बनने वाली औषधियों एवं अन्य उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने तथा क्षेत्र में उद्योग, रोजगार एवं निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए मुख्यमंत्री ने यहां एक औद्योगिक विकास केंद्र खोलने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने जयसिंह नगर के लिए आवश्यक बायपास बनवाने तथा वर्तमान में जयसिंहनगर तहसील क्षेत्र की उप तहसील आमाडीह को परीक्षण कराकर तहसील बनाने की घोषणा भी की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां की जनता ने सरकार की विकास नीतियों पर भरोसा जताया है, इसलिए इस क्षेत्र के विकास के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे।

    सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा कि त्रेतायुग मे इस भूमि पर भगवान राम के पावन चरण पड़े थे। मुख्यमंत्री ने शबरी माता की मूर्ति का अनावरण करके तथा विकास की सौगातें देकर क्षेत्र को धन्य कर दिया है। सांसद ने कटनी से ब्यौहारी होते हुए सिंगरौली तक फोरलेन सड़क निर्माण, औद्योगिक केन्द्र की स्थापना, सहित विभिन्न मांगे रखी। विधायक जयसिंहनगर श्रीमती मनीषा सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को क्षेत्र की विकास की विभिन्न सोगातों के लिए धन्यवाद दिया।

    विधायक ब्यौहारी श्री शरद जुगलाल कोल ने कहा कि 70 साल की प्रतीक्षा के बाद यहां मुख्यमंत्री पधारे हैं। मुख्यमंत्री ने शहडोल क्षेत्र को सिंचाई सुविधाओं सहित कई सौगातें दी है।

    कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्र भा मिश्रा, उपाध्यक्ष श्रीमती फूलवती सिंह, जनपद अध्यक्ष जयसिंहनगर श्रीमती मालती सिंह, जनपद अध्यक्ष ब्यौहारी श्रीमती आकांक्षी सिंह, सदस्य जिला योजना समिति श्रीमती चपरा, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक सहित कमिश्नर श्रीमती सुरभि गुप्ता और कलेक्टर डॉ. केदार सिंह उपस्थित रहे।

  • जल्द झारखंड के पर्यटन का प्रचार करते नजर आएंगे एमएस धोनी… ब्रांड एंबेसडर बनाने की तैयारी में विभाग

    जल्द झारखंड के पर्यटन का प्रचार करते नजर आएंगे एमएस धोनी… ब्रांड एंबेसडर बनाने की तैयारी में विभाग


    रांची।
    भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी (Mahendra Singh Dhoni) को झारखंड सरकार (Jharkhand Government) पर्यटन के क्षेत्र में ब्रांड एंबेसडर (Brand Ambassador) बनाने की तैयारी में है। पर्यटन विभाग के इस प्रस्ताव की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही राज्य सरकार इसकी अधिसूचना जारी कर सकती है।

    सूत्रों के अनुसार, राज्य के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ऐसा फैसला लिया गया है। पर्यटन को लेकर धौनी जल्द ही जागरूक करते नजर आ सकते हैं। बता दें कि बीते साल मंत्री सुदिव्य और धौनी में शिष्टाचार मुलाकात के बाद से ही ब्रांड एंबेसडर बनाने की चर्चा होने लगी थी।

    हाल ही में हुई थी CM हेमंत सोरेन से अचानक मुलाकात

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली रवाना हुईं। उनके साथ गुरुवार शाम विधायक कल्पना सोरेन भी गईं हैं। एयरपोर्ट तक मुख्यमंत्री भी गए। इस बीच मुख्यमंत्री की भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी से मुलाकात हुई। हेमंत ने एक्स पर मुलाकात की तस्वीर अपलोड कर लिखा ‘माही से अचानक मिलना हुआ।’

  • सरकार की तैयारी… EV वाहनों से होगी लंबी दूरी की यात्रा, नहीं रहेगा रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर

    सरकार की तैयारी… EV वाहनों से होगी लंबी दूरी की यात्रा, नहीं रहेगा रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric vehicles) को लंबी दूरी की यात्रा के लिए ज्यादा भरोसेमंद बनाने की दिशा में सरकार एक नई पहल पर काम कर रही है। इसके तहत देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे (Major Expressways) और हाईवे (Highway) पर ईवी कमांड सेंटर (EV Command Center) और रास्ते पर सहायता पहुंचाने वाला नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इस कदम का मकसद इलेक्ट्रिक वाहन चालकों की सबसे बड़ी चिंता मानी जाने वाली ‘रेंज एंग्जायटी’, यानी रास्ते में बैटरी खत्म होने के डर को कम करना है।

    सरकारी स्तर पर इस बात पर सहमति बन रही है कि केवल चार्जिंग स्टेशन बनाना ही काफी नहीं है। जब तक इलेक्ट्रिक वाहनों को यात्रा के दौरान तकनीकी सहायता, आपात मदद और रियल-टाइम सपोर्ट नहीं मिलेगा, तब तक लंबी दूरी की ईवी यात्रा को लेकर लोगों का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पाएगा। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे-आधारित ईवी सपोर्ट सिस्टम तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।


    संकट में आते ही तुरंत मदद मिलेगी

    प्रस्तावित योजना के तहत एक्सप्रेसवे पर ईवी-आधारित कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। ये सेंटर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल की तरह काम करेंगे। यहां से यात्रा कर रहे इलेक्ट्रिक वाहनों की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जाएगी।

    इन कमांड सेंटरों से तुरंत रास्ते में ही सहायता, बैटरी से जुड़ी समस्याओं में सहायता, चार्जिंग से संबंधित मार्गदर्शन और वाहन की बेसिक जांच जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे अगर कोई वाहन रास्ते में तकनीकी खराबी या बैटरी समस्या के कारण रुक जाता है, तो उसे तुरंत सहायता मिल सकेगी।


    दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे होगा पहला ईवी कॉरिडोर

    इस योजना के तहत दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। करीब 1,300 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर संपूर्ण सहायता प्रणाली तैयार की जी सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस पूरे मार्ग पर चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्जिंग के साथ-साथ तकनीकी और आपात सहायता भी मिलती रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है।


    सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर होगा जोर

    सरकार इस पूरे ढांचे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर विकसित करने पर विचार कर रही है। इसमें वाहन निर्माता कंपनियां, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता और निजी रोडसाइड असिस्टेंस कंपनियां शामिल हो सकती हैं। इससे सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा और सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होने की उम्मीद है।


    ईवी अपनाने को मिलेगा बढ़ावा

    भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यह बढ़त अभी मुख्य रूप से शहरों तक सीमित है। लंबी दूरी की यात्रा में भरोसे की कमी अब भी एक बड़ी बाधा है। एक्सप्रेसवे पर ईवी-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर और कमांड सेंटर की व्यवस्था होने से ईवी को पेट्रोल-डीजल वाहनों का व्यावहारिक विकल्प बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि देश के स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।