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  • ट्रंप को कोर्ट से झटका: बर्थराइट सिटिजनशिप सीमित करने वाले आदेश पर रोक

    ट्रंप को कोर्ट से झटका: बर्थराइट सिटिजनशिप सीमित करने वाले आदेश पर रोक


    नई दिल्ली। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बर्थराइट सिटिजनशिप यानी अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता देने के नियम को सीमित करने के मामले में बड़ा झटका लगा है। मैरीलैंड की संघीय जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को ट्रंप प्रशासन के नए आदेश के अमल पर रोक लगा दी। यह रोक प्रवासी अधिकार संगठनों की मांग पर लगाई गई है।

    जज बोर्डमैन ने कहा कि संबंधित क्लास एक्शन मुकदमे के दायरे में आने वाले बच्चों पर ट्रंप का नया आदेश लागू करना लगभग निश्चित तौर पर असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस वर्ग में शामिल बच्चे जन्म के समय अमेरिकी नागरिक हैं।

    ट्रंप प्रशासन की दलील भी नहीं मानी
    ट्रंप प्रशासन ने कोर्ट में दलील दी थी कि मुकदमा जल्दबाजी में दाखिल किया गया है, क्योंकि नए आदेश को लागू करने के लिए संबंधित सरकारी एजेंसियों की विस्तृत गाइडलाइन अभी जारी नहीं हुई है। सरकार के मुताबिक यह गाइडलाइन शनिवार तक जारी होने की उम्मीद थी।

    हालांकि, जज बोर्डमैन ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि आदेश की भाषा को देखते हुए उसके अमल पर तत्काल रोक लगाना जरूरी है। साथ ही एजेंसियों को आदेश के क्रियान्वयन से जुड़ी गाइडलाइन तैयार करने की अनुमति दी गई है।

    बर्थ टूरिज्म को निशाना बनाता है आदेश
    राष्ट्रपति ट्रंप ने 6 अगस्त को नया कार्यकारी आदेश जारी किया था। इसका मुख्य निशाना बर्थ टूरिज्म था। इसमें ऐसी महिलाएं अमेरिका आती हैं जो वहां बच्चे को जन्म देकर बच्चे को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता दिलाना चाहती हैं।

    आदेश में उन बच्चों को भी नागरिकता से वंचित करने की कोशिश की गई है, जिनके माता-पिता में से कोई अमेरिका में किसी विदेशी सरकार के लिए काम करता है। इसके अलावा धोखाधड़ी या किसी व्यावसायिक लेनदेन के जरिए नागरिकता हासिल करने की कोशिश वाले मामलों और कुछ ऐसे लोगों के बच्चों को भी आदेश के दायरे में रखा गया है, जिन्हें ‘एलियन एनिमी’ यानी विदेशी दुश्मन की श्रेणी में रखा गया है।

    इससे पहले भी ट्रंप की कोशिश को झटका लगा था
    जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने की यह ट्रंप प्रशासन की दूसरी कोशिश है। इससे पहले जून में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के 2025 के शुरुआती आदेश को लागू करने की उनकी कोशिश को खारिज कर दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अमेरिका में जन्मे बच्चों को नागरिकता से वंचित करने की कोशिश संविधान के 14वें संशोधन में मौजूद सिटिजनशिप क्लॉज से टकराती है।

    तीन सरकारी एजेंसियों को दखल न देने का आदेश
    ताजा फैसले में जज बोर्डमैन ने अमेरिकी विदेश विभाग, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन जैसी सरकारी एजेंसियों को संबंधित बच्चों की नागरिकता में दखल नहीं देने का निर्देश दिया है।

    एजेंसियां इन बच्चों की नागरिकता को खारिज नहीं कर सकेंगी और न ही उसे मान्यता देने से इनकार कर सकेंगी। इस आदेश के साथ ट्रंप प्रशासन की बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करने की कोशिश को एक बार फिर कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा है।

  • मिशिगन में अब्दुल अल-सईद बने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार, ट्रंप ने इजरायल और यहूदियों पर रुख को लेकर साधा निशाना

    मिशिगन में अब्दुल अल-सईद बने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार, ट्रंप ने इजरायल और यहूदियों पर रुख को लेकर साधा निशाना


    नई दिल्ली। अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव से पहले मिशिगन सीनेट सीट की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में अब्दुल अल-सईद की जीत के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रिपब्लिकन नेता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अल-सईद पर तीखा हमला करते हुए उनके इजरायल संबंधी रुख की आलोचना की, जबकि अल-सईद ने अपने ऊपर लगाए गए यहूदी-विरोधी आरोपों को सिरे से खारिज किया।

    लास वेगास में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अल-सईद इजरायल और यहूदियों के प्रति नकारात्मक सोच रखते हैं। उन्होंने उन पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें “नफरत से भरा व्यक्ति” बताया और दावा किया कि नवंबर में होने वाले चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स उन्हें पराजित करेंगे।

    डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बने अब्दुल अल-सईद
    अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में हेली स्टीवंस को करीबी मुकाबले में हराकर सीनेट उम्मीदवार बनने का अधिकार हासिल किया। अब नवंबर में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से होगा।

    क्या हैं अल-सईद के प्रमुख मुद्दे?
    अब्दुल अल-सईद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’, महंगाई पर नियंत्रण और राजनीति में कॉरपोरेट प्रभाव कम करने जैसे मुद्दों के समर्थक रहे हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर वह अमेरिका द्वारा इजरायल को बिना शर्त दी जाने वाली सैन्य सहायता की आलोचना करते रहे हैं और इसमें बदलाव की मांग कर चुके हैं। अल-सईद मिस्र से अमेरिका आए प्रवासी परिवार से हैं। उनके पिता मोहम्मद मिस्र से अमेरिका आकर बसे थे।

    यहूदी-विरोध के आरोपों का दिया जवाब
    प्राइमरी जीत के बाद अल-सईद ने कहा कि वह यहूदी समुदाय की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हर प्रकार के यहूदी-विरोध (Anti-Semitism) और इस्लामोफोबिया का विरोध करते हैं तथा सभी समुदायों की सुरक्षा और समानता के पक्षधर हैं।

    जोहरान ममदानी ने दी बधाई
    न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने अल-सईद की जीत का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, महंगाई और आम कामकाजी लोगों के मुद्दों पर चुनाव लड़ा। ममदानी ने उन्हें “मिनी ममदानी” कहे जाने से असहमति जताई और कहा कि अल-सईद ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई है।

    मिशिगन का आगामी सीनेट चुनाव डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के लिए अहम माना जा रहा है। अल-सईद की जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जबकि रिपब्लिकन खेमा उनके इजरायल संबंधी विचारों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।