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  • ट्रंप की ईरान को ‘नेस्तनाबूद’ करने की धमकी पर तेहरान का जवाब, कहा- हमला हुआ तो देंगे और भी कड़ा जवाब

    ट्रंप की ईरान को ‘नेस्तनाबूद’ करने की धमकी पर तेहरान का जवाब, कहा- हमला हुआ तो देंगे और भी कड़ा जवाब


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं होता है तो अमेरिका उसके खिलाफ और कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इसके जवाब में ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने संयुक्त बयान जारी कर किसी भी हमले की स्थिति में बेहद कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।

    ईरानी सैन्य कमांड ने ट्रंप के UNGA भाषण को ‘प्रोपेगेंडा’ बताया और कहा कि अमेरिकी धमकियों से ईरान की सैन्य तैयारी या उसके आकलन में कोई बदलाव नहीं आएगा। बयान के मुताबिक, किसी नए हमले की स्थिति में ईरान हमलावरों के खिलाफ पहले से अधिक गंभीर, विनाशकारी और अप्रत्याशित जवाब देने के लिए तैयार है।

    ट्रंप ने UNGA में क्या कहा?

    ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान को लेकर उनके सामने एक बड़ा फैसला है। उन्होंने एक समझौते की संभावना का जिक्र करते हुए कहा कि अगर डील होती है तो ईरान के पुनर्निर्माण का रास्ता खुल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक को ‘नेस्तनाबूद’ करने की धमकी दी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश का आरोप भी लगाया। ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान पर दबाव बनाए रखने और बातचीत के जरिए समझौते की संभावना दोनों का संकेत दिया।

    धमकी के बीच बातचीत का रास्ता भी खुला

    एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हुई है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक संपर्क भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने मंगलवार को ईरानी प्रतिनिधियों के साथ करीब तीन घंटे बातचीत की। यह वार्ता संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मध्यस्थों के जरिए हुई। विटकॉफ ने कहा कि मध्यस्थ पूरे दिन दोनों पक्षों के बीच संपर्क कराते रहे और बातचीत को रचनात्मक एवं उम्मीद जगाने वाला बताया।

    ट्रंप ने भी इस बैठक को ‘बहुत अच्छी’ बताया, हालांकि उन्होंने कहा कि इसमें ईरान की ओर से उच्चतम स्तर के अधिकारी शामिल नहीं थे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा था कि ट्रंप ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात के लिए तैयार हैं, बशर्ते बातचीत से सकारात्मक नतीजे की संभावना हो।

    ईरानी राष्ट्रपति के UNGA संबोधन पर नजर

    ईरानी सैन्य बयान में अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव का भी जिक्र किया गया। तेहरान ने इन कदमों को आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश बताया और कहा कि ऐसी धमकियों से उसका रुख नहीं बदलेगा।

    इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान UNGA में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। ऐसे में उनके संबोधन पर भी नजर है। अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की चेतावनी और दूसरी तरफ मध्यस्थों के जरिए चल रही बातचीत ने ईरान-अमेरिका टकराव के बीच कूटनीतिक प्रयासों को भी अहम बना दिया है।

  • UNGA से पहले ट्रंप-ममदानी की ग्रेसी मैन्शन में मुलाकात, एक घंटे चली बैठक, जाने क्‍या हुई चर्चा ?

    UNGA से पहले ट्रंप-ममदानी की ग्रेसी मैन्शन में मुलाकात, एक घंटे चली बैठक, जाने क्‍या हुई चर्चा ?


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात की। दोनों की बैठक ममदानी के आधिकारिक आवास ग्रेसी मैन्शन में करीब एक घंटे चली। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया से बातचीत की और न्यूयॉर्क में आवास तथा शहर को कामकाजी वर्ग के लिए अधिक किफायती बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जानकारी दी।

    ट्रंप ने ग्रेसी मैन्शन पहुंचने के बाद न्यूयॉर्क के मेयर के आधिकारिक आवास से जुड़ी अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि इस इमारत में उन्होंने पहले भी कई मेयरों के साथ समय बिताया है और यहां कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं। UNGA के लिए दुनिया के कई नेता इस समय न्यूयॉर्क में मौजूद हैं और ट्रंप मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं।

    क्वींस में 12 हजार घर और 30 हजार नौकरियों पर चर्चा

    बैठक में न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में Sunnyside Yards के संभावित पुनर्विकास पर विशेष चर्चा हुई। ममदानी के मुताबिक इस परियोजना से करीब 12 हजार घर और 30 हजार नौकरियां पैदा हो सकती हैं। दोनों पक्षों ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए न्यूयॉर्क सिटी हॉल और व्हाइट हाउस की हाउसिंग तथा ऑपरेशंस टीमों के बीच समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।

    ट्रंप ने कहा कि Sunnyside Yards का विकास लंबे समय से चर्चा में है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संघीय स्तर पर मंजूरी और फंडिंग की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित विकास में कम और मध्यम आय वाले लोगों के लिए पर्याप्त आवास शामिल होना चाहिए।

    महंगाई और शहर को किफायती बनाने पर भी बात

    मुलाकात के दौरान न्यूयॉर्क में बढ़ती जीवन-यापन लागत और कामकाजी वर्ग के लिए शहर को अधिक किफायती बनाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। ममदानी ने कहा कि उनका फोकस न्यूयॉर्कवासियों के लिए रहने का खर्च कम करने और ज्यादा आवास उपलब्ध कराने पर है।

    ममदानी ने मुलाकात के बाद कहा कि ट्रंप के साथ उनके राजनीतिक मतभेद हैं, लेकिन वह शहर के लोगों को राहत दिलाने की दिशा में काम करने वाले सभी पक्षों के साथ बातचीत जारी रखेंगे। उन्होंने बैठक को उपयोगी बताया और कहा कि दोनों पक्षों के बीच आवास से जुड़े मुद्दों पर आगे भी बातचीत होगी।

    ट्रंप और ममदानी की तीसरी आमने-सामने मुलाकात

    ग्रेसी मैन्शन में हुई यह मुलाकात ट्रंप और ममदानी की तीसरी आमने-सामने बैठक थी और पहली बार दोनों न्यूयॉर्क में मिले। इससे पहले नवंबर 2025 में ममदानी ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी। इसके बाद फरवरी में भी ममदानी ने वॉशिंगटन जाकर ट्रंप के साथ न्यूयॉर्क में आवास विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।

    इस बार की बैठक में दोनों नेताओं ने अपने मतभेदों के बावजूद न्यूयॉर्क से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। ट्रंप ने ममदानी के साथ मीडिया के सामने सकारात्मक लहजे में बात की और न्यूयॉर्क के लिए उनके काम करने की उम्मीद जताई।

  • ट्रंप बोले- चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो हम भी करते हैं, जिनपिंग की यात्रा से पहले बड़ा बयान

    ट्रंप बोले- चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो हम भी करते हैं, जिनपिंग की यात्रा से पहले बड़ा बयान


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगले सप्ताह होने वाली अमेरिका यात्रा से पहले दोनों देशों के रिश्तों और जासूसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो संभव है कि अमेरिका भी चीन की जासूसी करता हो। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और उनकी आगामी मुलाकात अच्छी रहने की उम्मीद है।

    ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शी जिनपिंग अगले सप्ताह अमेरिका आएंगे। उन्होंने चीन के साथ अमेरिका के संबंधों को भी अच्छा बताया। ट्रंप के मुताबिक, जिनपिंग के साथ उनकी अच्छी रिलेशनशिप है और उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अलग-अलग समझौते होने की संभावना है।

    टैरिफ से चीन को हो रहा नुकसान

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन से जुड़े व्यापारिक मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि चीन अमेरिका को काफी टैरिफ दे रहा है। ट्रंप के अनुसार, इन टैरिफ की वजह से चीन को काफी नुकसान हो रहा था और वह ऐसा नहीं करना चाहते थे।

    चीन की कथित जासूसी को लेकर सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि किसी ने उनसे कहा था कि चीन अमेरिका की जासूसी करता है। इस पर उन्होंने कहा कि शायद चीन ऐसा करता हो, लेकिन अमेरिका भी चीन की जासूसी करता है।

    एयरपोर्ट पर जिनपिंग का स्वागत कर सकते हैं ट्रंप

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि ट्रंप अगले सप्ताह वॉशिंगटन डीसी के बाहर जॉइंट बेस एंड्रयूज पहुंचने पर शी जिनपिंग का एयरपोर्ट पर स्वागत करने की योजना बना रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि किसी विदेशी नेता का अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा एयरपोर्ट पर स्वागत किया जाना दुर्लभ है।

    अधिकारियों के मुताबिक, शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस में स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद रोज गार्डन में सैन्य समीक्षा और शाम को स्टेट डिनर का कार्यक्रम भी शामिल होगा।

    डिनर में टेक कंपनियों के CEO भी होंगे शामिल

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, स्टेट डिनर में कई बड़ी टेक कंपनियों के CEO के शामिल होने की संभावना है। इनमें Amazon के जेफ बेजोस, Alphabet के सुंदर पिचाई, OpenAI के सैम ऑल्टमैन, Apple के टिम कुक, Tesla के एलन मस्क, Nvidia के जेनसन हुआंग और Dell Technologies के माइकल डेल शामिल हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि जिनपिंग की यात्रा के दौरान अमेरिका और चीन के बीच व्यापार के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में रेयर अर्थ की आपूर्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यात्रा को दोनों देशों के बीच व्यापार और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • ट्रंप को कोर्ट से झटका: बर्थराइट सिटिजनशिप सीमित करने वाले आदेश पर रोक

    ट्रंप को कोर्ट से झटका: बर्थराइट सिटिजनशिप सीमित करने वाले आदेश पर रोक


    नई दिल्ली। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बर्थराइट सिटिजनशिप यानी अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता देने के नियम को सीमित करने के मामले में बड़ा झटका लगा है। मैरीलैंड की संघीय जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को ट्रंप प्रशासन के नए आदेश के अमल पर रोक लगा दी। यह रोक प्रवासी अधिकार संगठनों की मांग पर लगाई गई है।

    जज बोर्डमैन ने कहा कि संबंधित क्लास एक्शन मुकदमे के दायरे में आने वाले बच्चों पर ट्रंप का नया आदेश लागू करना लगभग निश्चित तौर पर असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस वर्ग में शामिल बच्चे जन्म के समय अमेरिकी नागरिक हैं।

    ट्रंप प्रशासन की दलील भी नहीं मानी
    ट्रंप प्रशासन ने कोर्ट में दलील दी थी कि मुकदमा जल्दबाजी में दाखिल किया गया है, क्योंकि नए आदेश को लागू करने के लिए संबंधित सरकारी एजेंसियों की विस्तृत गाइडलाइन अभी जारी नहीं हुई है। सरकार के मुताबिक यह गाइडलाइन शनिवार तक जारी होने की उम्मीद थी।

    हालांकि, जज बोर्डमैन ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि आदेश की भाषा को देखते हुए उसके अमल पर तत्काल रोक लगाना जरूरी है। साथ ही एजेंसियों को आदेश के क्रियान्वयन से जुड़ी गाइडलाइन तैयार करने की अनुमति दी गई है।

    बर्थ टूरिज्म को निशाना बनाता है आदेश
    राष्ट्रपति ट्रंप ने 6 अगस्त को नया कार्यकारी आदेश जारी किया था। इसका मुख्य निशाना बर्थ टूरिज्म था। इसमें ऐसी महिलाएं अमेरिका आती हैं जो वहां बच्चे को जन्म देकर बच्चे को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता दिलाना चाहती हैं।

    आदेश में उन बच्चों को भी नागरिकता से वंचित करने की कोशिश की गई है, जिनके माता-पिता में से कोई अमेरिका में किसी विदेशी सरकार के लिए काम करता है। इसके अलावा धोखाधड़ी या किसी व्यावसायिक लेनदेन के जरिए नागरिकता हासिल करने की कोशिश वाले मामलों और कुछ ऐसे लोगों के बच्चों को भी आदेश के दायरे में रखा गया है, जिन्हें ‘एलियन एनिमी’ यानी विदेशी दुश्मन की श्रेणी में रखा गया है।

    इससे पहले भी ट्रंप की कोशिश को झटका लगा था
    जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने की यह ट्रंप प्रशासन की दूसरी कोशिश है। इससे पहले जून में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के 2025 के शुरुआती आदेश को लागू करने की उनकी कोशिश को खारिज कर दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अमेरिका में जन्मे बच्चों को नागरिकता से वंचित करने की कोशिश संविधान के 14वें संशोधन में मौजूद सिटिजनशिप क्लॉज से टकराती है।

    तीन सरकारी एजेंसियों को दखल न देने का आदेश
    ताजा फैसले में जज बोर्डमैन ने अमेरिकी विदेश विभाग, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन जैसी सरकारी एजेंसियों को संबंधित बच्चों की नागरिकता में दखल नहीं देने का निर्देश दिया है।

    एजेंसियां इन बच्चों की नागरिकता को खारिज नहीं कर सकेंगी और न ही उसे मान्यता देने से इनकार कर सकेंगी। इस आदेश के साथ ट्रंप प्रशासन की बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करने की कोशिश को एक बार फिर कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा है।

  • मिशिगन में अब्दुल अल-सईद बने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार, ट्रंप ने इजरायल और यहूदियों पर रुख को लेकर साधा निशाना

    मिशिगन में अब्दुल अल-सईद बने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार, ट्रंप ने इजरायल और यहूदियों पर रुख को लेकर साधा निशाना


    नई दिल्ली। अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव से पहले मिशिगन सीनेट सीट की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में अब्दुल अल-सईद की जीत के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रिपब्लिकन नेता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अल-सईद पर तीखा हमला करते हुए उनके इजरायल संबंधी रुख की आलोचना की, जबकि अल-सईद ने अपने ऊपर लगाए गए यहूदी-विरोधी आरोपों को सिरे से खारिज किया।

    लास वेगास में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अल-सईद इजरायल और यहूदियों के प्रति नकारात्मक सोच रखते हैं। उन्होंने उन पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें “नफरत से भरा व्यक्ति” बताया और दावा किया कि नवंबर में होने वाले चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स उन्हें पराजित करेंगे।

    डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बने अब्दुल अल-सईद
    अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में हेली स्टीवंस को करीबी मुकाबले में हराकर सीनेट उम्मीदवार बनने का अधिकार हासिल किया। अब नवंबर में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से होगा।

    क्या हैं अल-सईद के प्रमुख मुद्दे?
    अब्दुल अल-सईद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’, महंगाई पर नियंत्रण और राजनीति में कॉरपोरेट प्रभाव कम करने जैसे मुद्दों के समर्थक रहे हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर वह अमेरिका द्वारा इजरायल को बिना शर्त दी जाने वाली सैन्य सहायता की आलोचना करते रहे हैं और इसमें बदलाव की मांग कर चुके हैं। अल-सईद मिस्र से अमेरिका आए प्रवासी परिवार से हैं। उनके पिता मोहम्मद मिस्र से अमेरिका आकर बसे थे।

    यहूदी-विरोध के आरोपों का दिया जवाब
    प्राइमरी जीत के बाद अल-सईद ने कहा कि वह यहूदी समुदाय की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हर प्रकार के यहूदी-विरोध (Anti-Semitism) और इस्लामोफोबिया का विरोध करते हैं तथा सभी समुदायों की सुरक्षा और समानता के पक्षधर हैं।

    जोहरान ममदानी ने दी बधाई
    न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने अल-सईद की जीत का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, महंगाई और आम कामकाजी लोगों के मुद्दों पर चुनाव लड़ा। ममदानी ने उन्हें “मिनी ममदानी” कहे जाने से असहमति जताई और कहा कि अल-सईद ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई है।

    मिशिगन का आगामी सीनेट चुनाव डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के लिए अहम माना जा रहा है। अल-सईद की जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जबकि रिपब्लिकन खेमा उनके इजरायल संबंधी विचारों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।