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  • रोजगार संकट की ओर बढ़ रही दुनिया….विश्व बैंक के अध्यक्ष बोले- 10 साल में 80 करोड़ युवा होंगे बेरोजगार

    रोजगार संकट की ओर बढ़ रही दुनिया….विश्व बैंक के अध्यक्ष बोले- 10 साल में 80 करोड़ युवा होंगे बेरोजगार


    बैंकॉक।
    विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा (World Bank President Ajay Banga) ने भविष्य के रोजगार संकट (Employment Crisis) को लेकर चौंकाने वाली चेतावनी जारी की है। बंगा ने अनुमान जताया है कि अगले 10-15 वर्षों में दुनिया भर के लगभग 120 करोड़ कुशल (स्किल्ड) युवा रोजगार बाजार में प्रवेश करेंगे लेकिन रोजगार 40 करोड़ को ही मिल पाएगा।

    बैंकॉक में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) International Monetary Fund – IMF) और विश्व बैंक समूह की वार्षिक बैठकों के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए बंगा ने कहा कि आने वाले समय में लगभग 80 करोड़ युवाओं के सामने बेरोजगारी का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। विश्व बैंक अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि विकासशील देश इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ उन पर विदेशी कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, तो दूसरी तरफ विकास कार्यों के लिए मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता में भारी कमी आई है। इसके साथ ही दुनिया भर में चल रहे लगातार युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक विकास भी प्रभावित हो रहा है। सरकारों के पास विकास योजनाओं और रोजगार सृजन के लिए बजट की भारी कमी है। बंगा ने वैश्विक नेताओं और नीति निर्माताओं से अपील की है कि वे भविष्य को देखते हुए अपनी आर्थिक नीतियों में तत्काल सुधार करें।


    भारतीय उपमहाद्वीप के युवाओं पर दोहरा असर

    भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल) दुनिया के सबसे युवा क्षेत्रों में से है, जहां अकेले भारत के श्रम बाजार में हर साल लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) युवा प्रवेश करते हैं। नीतियों के क्रियान्वयन के आधार पर युवाओं पर इसके दोहरे प्रभाव पड़ सकते हैं। यदि विश्व बैंक के मॉडल के अनुसार निजी क्षेत्र और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ता है, तो बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण नौकरियां पैदा होंगी। इससे युवाओं को वित्तीय स्वतंत्रता और बेहतर जीवन स्तर मिलेगा।

    जहां विकसित देशों की आबादी बूढ़ी हो रही है, वहीं भारतीय उपमहाद्वीप के युवा यदि कौशल के मामले में अपग्रेड हो जाते हैं, तो वे वैश्विक नौकरी बाजार की जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। विश्व बैंक के कार्यक्रमों (जैसे भारत में आईटीआई का आधुनिकीकरण) में कम से कम 25% से 30% महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे युवा महिलाओं को उच्च वेतन वाली नौकरियों में आने का अवसर मिलेगा।


    सार्वजनिक वित्त, निजी निवेश का मॉडल सुझाया

    इस संकट से निपटने के लिए विश्व बैंक के अध्यक्ष ने सार्वजनिक वित्त, निजी निवेश, तकनीक और परोपकार को एक साथ जोड़ने वाला नया विकास मॉडल सुझाया है। विश्व बैंक के अनुसार, 90% नौकरियां निजी क्षेत्र से आती हैं। इसलिए, सरकारों को व्यापार-अनुकूल नियामक सुधार करने चाहिए और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराना चाहिए ताकि वे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर सकें।

    विश्व बैंक ने पांच प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है जो सबसे ज्यादा नौकरियां दे सकते हैं। इसमें बुनियादी ढांचा, मूल्यवर्धित विनिर्माण, तकनीक-संचालित कृषि, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन शामिल है। विश्व बैंक ने पारंपरिक शिक्षा के बजाय युवाओं को डिजिटल तकनीक, एआई और उद्योगों की बदलती मांगों के अनुसार प्रशिक्षित करने पर जोर दिया है। इसके साथ ही दक्षिण एशिया के कार्यबल के लिए पर्यावरण के अनुकूल या ‘ग्रीन जॉब्स’ के लिए मौजूदा कौशलों को थोड़ा अपग्रेड या अनुकूलित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।


    रोजगार अंतर नहीं पाटा गया तो नकारात्मक प्रभाव भी

    दक्षिण एशिया में पहले से ही रोजगार की कमी के चलते युवाओं में असंतोष देखा गया है। यदि इस 80 करोड़ के वैश्विक रोजगार अंतर को पाटने में विफलता मिलती है, तो उपमहाद्वीप में सामाजिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शन बढ़ सकते हैं। स्थानीय स्तर पर सम्मानजनक नौकरियां न मिलने पर युवाओं में विदेशों की ओर पलायन करने (अवैध प्रवासन सहित) का दबाव काफी ज्यादा बढ़ जाएगा। साथ ही डिग्री होने के बावजूद सही हुनर न होने से युवा ‘बेरोजगार’ या ‘अंडर-एम्प्लॉयड’ (योग्यता से कम स्तर का काम करने वाले) रह जाएंगे, जिससे गरीबी का दुष्चक्र बना रहेगा।

  • राष्ट्रपति ने उत्तराखंड समेत 6 राज्यों में की नए राज्यपालों की नियुक्ति

    राष्ट्रपति ने उत्तराखंड समेत 6 राज्यों में की नए राज्यपालों की नियुक्ति


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रपति दौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) ने सोमवार को 6 राज्यों के राज्यपालों (Governors 6 states) की नियुक्ति की घोषणा की। राष्ट्रपति भवन (President’s House) की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ओम प्रकाश माथुर को केरलम, सुधा यादव को कर्नाटक, ब्रज मोहन राम को ओडिशा, दुष्यंत गौतम को सिक्किम, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु और डॉ. ढाल सिंह (Dr. Dhal Singh) को उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों से जुड़े आदेश संबंधित राज्यपालों के अपने-अपने पदों का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगे।


    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपालों की निम्नलिखित नियुक्तियां कीं

    सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया। ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया। डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया। डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। आर्लेकर को तमिलनाडु का पूर्णकालिक राज्यपाल बनाया गया।

    केरलम से स्थानांतरित किए गए राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मार्च से ही तमिलनाडु के राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन कर रहे थे। उस समय आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। ताजा आदेश के बाद आर्लेकर तमिलनाडु के नियमित राज्यपाल होंगे। गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष आर्लेकर हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल के रूप में भी काम कर चुके हैं।

    ओम प्रकाश माथुर उनकी जगह केरलम के राज्यपाल का पद संभालेंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान से पूर्व राज्यसभा सांसद माथुर ने जुलाई 2024 में सिक्किम के राज्यपाल का कार्यभार संभाला था।


    चार राज्यों को मिले नए राज्यपाल

    ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। पलामू से लोकसभा के पूर्व सांसद राम हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे। कंभमपति ने जनवरी 2025 में ओडिशा के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। सुधा यादव कर्नाटक की नई राज्यपाल होंगी। महेंद्रगढ़ से भाजपा की पूर्व सांसद और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की पूर्व सदस्य यादव, थावरचंद गहलोत की जगह लेंगी।

    मध्य प्रदेश के बालाघाट से लोकसभा के पूर्व सांसद ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की जगह लेंगे। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम सिक्किम के नए राज्यपाल होंगे। वह ओम प्रकाश माथुर का स्थान लेंगे। राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में हरि बाबू कंभमपति, थावरचंद गहलोत और गुरमीत सिंह के लिए किसी नई जिम्मेदारी की घोषणा नहीं की गई है।

  • ‘राष्ट्रपति की बात को गलत तरीके से पेश कर रहे राहुल’, BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे

    ‘राष्ट्रपति की बात को गलत तरीके से पेश कर रहे राहुल’, BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे


    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस नेता के उस दावे को झूठा बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति ने चुनाव में धांधली के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बात स्वीकार कर ली। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल पर दुर्भावनापूर्ण राजनीति करने और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। यह विवाद इंडिया ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से मुलाकात और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सौंपे गए ज्ञापन के बाद सामने आया है।

    राहुल के दावे पर भाजपा ने उठाए सवाल

    इंडिया ब्लॉक के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।

    मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह इस बात से हैरान और स्तब्ध हैं कि राष्ट्रपति ने चुनाव में धांधली के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बातों को स्वीकार कर लिया।

    राहुल के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण और अजीब’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं और राष्ट्रपति की बातचीत को अपने तरीके से पेश कर रहे हैं।

    ‘हर संवैधानिक संस्था को राजनीति का शिकार बना रहे’

    सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोप स्वीकार कर लिए, ऐसा दावा करना राहुल गांधी की दुर्भावनापूर्ण राजनीति को दर्शाता है। उनके मुताबिक, राहुल हर संवैधानिक संस्था को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी के बयान के दौरान उनके साथ खड़े नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव भी कई सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल के कथन का सच्चाई से कोई संबंध नहीं दिखता और कांग्रेस नेता का पिछला रिकॉर्ड भी इसी तरह के बयानों का संकेत देता है।

    त्रिवेदी ने आगे कहा कि राहुल का दावा अजीब होने के साथ-साथ तथ्यों से ज्यादा राजनीतिक मंशा से प्रेरित लगता है।

    भाजपा ने राहुल से मांगा सबूत

    भाजपा नेता ने राहुल गांधी से सवाल किया कि राष्ट्रपति ने उनके आरोपों को स्वीकार किया था, इस दावे के समर्थन में उनके पास क्या सबूत हैं। उन्होंने राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक को राजनीतिक मकसद के लिए इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

    इस मामले में फिलहाल भाजपा की ओर से राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद जो दावा किया, उसे लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।

  • आइवरी कोस्ट के राष्ट्रपति से मिले विदेश मंत्री जयशंकर, रक्षा और कृषि में सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा

    आइवरी कोस्ट के राष्ट्रपति से मिले विदेश मंत्री जयशंकर, रक्षा और कृषि में सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा


    अबिदजान।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने कहा कि भारत (India) और आइवरी कोस्ट (Ivory Coast) की साझेदारी आपसी सम्मान पर आधारित है। दोनों देशों की विकास और समृद्धि के लिए साझा प्रतिबद्धता है। जयशंकर ने पश्चिम अफ्रीकी देश की अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अलासाने औटारा (President Alassane Ouattara) से मुलाकात की। वह तीन अफ्रीकी देशों की यात्रा पर हैं। इसमें घाना, आइवरी कोस्ट और इथियोपिया शामिल हैं।

    जयशंकर बुधवार को घाना से आइवरी कोस्ट पहुंचे थे। यह उनकी तीन देशों की यात्रा का दूसरा पड़ाव है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, आइवरी कोसट के राष्ट्रपति अलासाने औटारा से मुलाकात कर सम्मानित महसूस किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत शुभकामनाएं उन्हें दीं।

    विदेश मंत्री ने कहा, भारत-आइवरी कोस्ट साझेदारी आपसी सम्मान और विकास तथा समृद्धि के लिए साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है। उन्होंने राष्ट्रपति औटारा को ‘मजबूत, लंबे समय तक चलने वाली और दोनों के लिए फायदेमंद साझेदारी के अपने दृष्टिकोण को साझा करने’ के लिए धन्यवाद दिया।


    रक्षा सहयोग पर क्या हुई बात?

    बुधवार को जयशंकर ने अबिदजान में आइवरी कोस्ट के उप प्रधानमंत्री तेने बिराहिमा औटारा से भी मुलाकात की। दोनों ने दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर चर्चा की। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा, हमने आपसी भरोसे, क्षमता निर्माण और साझा हितों पर आधारित अपने बढ़ते रक्षा सहयोग पर बात की।

    उन्होंने कहा, हमने रक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग को और बढ़ाने के अवसरों पर विचार साझा किए। इसमें प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संस्थागत स्तर पर बढ़े हुए आदान-प्रदान के जरिए सहयोग शामिल है।

    औटारा आइवरी कोस्ट के रक्षा मंत्री भी हैं। उन्होंने कहा कि जयशंकर के साथ बातचीत आइवरी कोस्ट और भारत के बीच सहयोग मजबूत करने पर केंद्रित रही। औटारा ने सोशल मीडिया पर लिखा, यह बैठक शांति, सुरक्षा और विकास के लिए रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दोहराती है।


    व्यापार और स्वास्थ्य पर भी चर्चा

    जयशंकर ने आइवरी कोस्ट की विदेश मामलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की राज्य मंत्री नियाले काबा से भी बातचीत की। इसमें दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसमें व्यापार, बुनियादी ढांचा, कृषि और स्वास्थ्य सेवा पर खास ध्यान रहा। जयशंकर ने कहा कि काबा के साथ भारत-आइवरी कोस्ट साझेदारी को आगे बढ़ाने पर ‘व्यापक चर्चा’ हुई। इसमें व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचा, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध शामिल हैं।

    उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर कहा, मैंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को केंद्र में रखकर होने वाला हमारा सहयोग कोट द’आइवोर की प्राथमिकताओं के अनुसार आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों पर अपने सहयोग को और गहरा करने पर भी चर्चा की।


    अफ्रीका में क्षमता निर्माण पर जोर

    जयशंकर ने बुधवार को आइवरी कोस्ट में भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग यानी आईटीईसी के पूर्व छात्रों से भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारत की विकास साझेदारी हमेशा से अफ्रीका के साथ उसके संबंधों का अहम हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि भारत का सहयोग उसके अफ्रीकी साझेदारों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुसार होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग यानी आईटीईसी कार्यक्रम 1964 में शुरू हुआ था। यह दूसरे देशों के साथ क्षमता निर्माण और सहयोग के लिए भारत के सबसे महत्वपूर्ण मंचों में से एक बन गया है। जयशंकर ने आइवरी कोस्ट में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत की।

    उनकी यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है। भारत वैश्विक दक्षिण के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। साथ ही व्यापार और निवेश से लेकर क्षमता निर्माण, रक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

  • राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए INDIA गठबंधन ने दो बार भेजा पत्र, 7 से 9 अक्टूबर का समय मांगा, अब तक जवाब नहीं

    राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए INDIA गठबंधन ने दो बार भेजा पत्र, 7 से 9 अक्टूबर का समय मांगा, अब तक जवाब नहीं

    नई दिल्ली । INDIA गठबंधन के नेताओं ने भारत के राष्ट्रपति से मुलाकात करने का अनुरोध किया है। कांग्रेस के मुताबिक, इस संबंध में पहला अनुरोध पत्र 2 अक्टूबर को भेजा गया था। इसके बाद राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से मुलाकात में शामिल होने वाले नेताओं के नाम मांगे गए थे। कांग्रेस का कहना है कि उसने 5 अक्टूबर को नेताओं के नाम के साथ दोबारा अनुरोध भेजा और 7, 8 या 9 अक्टूबर को मुलाकात के लिए समय मांगा, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

    कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि विपक्षी नेता राष्ट्रपति से मुलाकात करना चाहते हैं और इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। पार्टी के अनुसार, पहले पत्र के बाद राष्ट्रपति कार्यालय ने मुलाकात में शामिल होने वाले नेताओं की जानकारी मांगी थी। इसके बाद कांग्रेस ने 5 अक्टूबर को दोबारा पत्र भेजकर संबंधित नेताओं के नाम दिए और मुलाकात के लिए तीन तारीखों का विकल्प भी रखा।

    कांग्रेस का कहना है कि 7, 8 या 9 अक्टूबर में से किसी दिन मुलाकात का समय देने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, 8 अक्टूबर तक राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने की बात कांग्रेस ने कही है। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि वह अगले दिन तक जवाब का इंतजार करेगी। ऐसे में INDIA गठबंधन के नेताओं की राष्ट्रपति से मुलाकात कब होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

    इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों की दूसरी लंच बैठक बुलाई। यह बैठक कनॉट प्लेस में दोपहर करीब पौने दो बजे आयोजित हुई। बैठक में विपक्षी सांसदों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद सभी नेताओं के बस से राजघाट पहुंचने की संभावना भी जताई गई।

    बैठक के दौरान कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने केंद्र की बीजेपी सरकार, केंद्रीय मंत्री और चुनाव आयोग पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अराजकता कौन फैला रहा है, यह सवाल है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि भाजपा, अमित शाह, नरेंद्र मोदी और ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र में अराजकता फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष यहां लोकतंत्र की रक्षा के लिए है और वही काम कर रहा है।

    केसी वेणुगोपाल ने इस लड़ाई को विपक्ष के लिए ‘करो या मरो’ की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि उनका सीधा मकसद देश के आम लोगों और मतदाताओं की रक्षा करना है। उनके मुताबिक, विपक्ष इसी उद्देश्य के साथ काम कर रहा है और उसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी कोशिश जारी रखनी है।

    इसी मामले से जुड़े घटनाक्रम के बीच नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ता जनपथ पर जमा हुए। वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों की दूसरी लंच बैठक आयोजित की। विपक्षी नेताओं की गतिविधियों के बीच राष्ट्रपति से मुलाकात का मुद्दा भी सामने है। INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुलाकात के लिए दो बार अनुरोध भेजा है, लेकिन कांग्रेस के मुताबिक अभी तक जवाब नहीं आया है।

    कांग्रेस की ओर से राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए 7, 8 और 9 अक्टूबर की तारीखों में समय मांगा गया था। 8 अक्टूबर को भी जवाब नहीं मिलने के बाद अब विपक्षी नेता अगले दिन तक इंतजार करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से मुलाकात के लिए कब समय दिया जाता है और INDIA गठबंधन के नेताओं की राष्ट्रपति से मुलाकात कब होती है, इस पर अब नजर बनी हुई है।

  • भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस पर राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री ने देश के वायुवीरों को किया नमन

    भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस पर राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री ने देश के वायुवीरों को किया नमन


    नई दिल्ली।
    भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के 94वें स्थापना दिवस (94th Foundation Day) पर देश के शीर्ष नेताओं ने वीर वायु योद्धाओं (Brave Air Warriors) के साहस, शौर्य और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को सलाम किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi), केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्रालय और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेशों के जरिए वायुसेना के जवानों और उनके परिवारों को बधाई दीं। राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में वायु योद्धाओं के साहस, सटीक कार्रवाई और अभियान संबंधी तैयारियों को प्रदर्शित किया। वहीं, पीएम मोदी ने कहा कि देश को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व है। अमित शाह ने जवानों की अदम्य वीरता और मारक क्षमता की तारीफ की, जबकि योगी आदित्यनाथ ने भारतीय वायुसेना को पूरे देश का गौरव बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायुसेना दिवस पर सभी वायु योद्धाओं, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बधाई दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना ने पेशेवर दक्षता, अनुशासन और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने की अपनी क्षमता के दम पर देश की शानदार सेवा की है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में ऑपरेशन सिंदूर का खास तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में वायुसेना के जवानों के साहस, सटीक कार्रवाई और अभियान संबंधी तैयारियों को साबित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय वायुसेना ने प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट के समय भी महत्वपूर्ण सहायता पहुंचाई है। जवानों का समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणा और गर्व का स्रोत है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि भारतीय वायुसेना सेवा और उत्कृष्टता की अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे भी कायम रखेगी।


    पीएम मोदी बोले- देश को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायुसेना दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर वायु योद्धाओं को नमन किया। उन्होंने देश की हवाई सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के साहस, प्रतिबद्धता और सर्वोच्च बलिदान को याद किया। पीएम मोदी ने लिखा, ‘भारत को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व है। वायुसेना दिवस पर हम अपने आसमान की रक्षा करने वाले उनके साहस और प्रतिबद्धता को सलाम करते हैं!’ प्रधानमंत्री का यह संदेश उन जवानों के प्रति देश की कृतज्ञता जाहिर करता है, जो हर चुनौती का सामना करते हुए भारत की हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।


    ‘पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा वायु योद्धाओं का शौर्य’

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वायुसेना दिवस पर देश के वीर जवानों को सलाम करते हुए उनकी अदम्य वीरता, अचूक निशाने और दुश्मन के ठिकानों पर प्रभावी प्रहार करने की क्षमता की सराहना की। अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय वायुसेना के जवान वास्तविक जीवन के ऐसे बहादुर नायक हैं, जिनकी अद्वितीय वीरता, सटीक निशाने और जबरदस्त मारक क्षमता की गवाही धरती से लेकर दूर अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों तक मिलती है। उन्होंने कहा कि वायु योद्धाओं की देशभक्ति और पेशेवर दक्षता आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी। देश के दुश्मनों के मंसूबे खत्म हो जाने के बाद भी इन जवानों के शौर्य और समर्पण की कहानियां लोगों को प्रेरणा देती रहेंगी। गृह मंत्री ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को भी नमन किया। उनका संदेश भारतीय वायुसेना के जवानों के अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करता है।

    ‘भारतीय वायुसेना के वीर योद्धाओं को सलाम’
    भारतीय वायुसेना दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, ‘सभी साहसी वायु योद्धाओं और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारतीय वायुसेना साहस, शौर्य, अनुशासन और पेशेवर दक्षता का प्रतीक है। हमारे वायु योद्धाओं ने अटूट प्रतिबद्धता के साथ हमेशा देश के आसमान की रक्षा की है और जब भी देश के सामने कोई संकट आया, वे पूरी तत्परता के साथ राष्ट्र की सेवा में डटे रहे हैं। उनकी निष्ठा और समर्पण ने न केवल भारत की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संकल्प की भावना को भी मजबूती दी है। राष्ट्र के प्रति उनके साहस, प्रतिबद्धता और निस्वार्थ सेवा को नमन।’


    ‘देश की संप्रभुता की मजबूत प्रहरी है वायुसेना’

    रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ पर सभी वीर वायु योद्धाओं को नमन किया। मंत्रालय ने कहा कि वायुसेना के जवान ‘अचूक, अभेद्य और सटीक’ की भावना के साथ साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा से देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। मंत्रालय ने अपने संदेश में वायुसेना के ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना ने आकाश की सीमाओं से आगे बढ़कर देश की संप्रभुता और सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी अद्वितीय क्षमता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। रक्षा मंत्रालय का यह संदेश बताता है कि देश की हवाई सुरक्षा में वायुसेना की भूमिका कितनी अहम है। जवानों का अनुशासन, उनकी तैयारी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने की क्षमता भारत की रक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


    ‘भारतीय वायुसेना पूरे देश का गौरव’

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी भारतीय वायुसेना दिवस पर वायु योद्धाओं और उनके परिवारों को हार्दिक बधाई एवं बधाई दीं। योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में वायुसेना के ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आसमान की अनंत ऊंचाइयों से लेकर राष्ट्र की सीमाओं तक शौर्य, सामर्थ्य और संकल्प का पर्याय बनी भारतीय वायुसेना हम सभी का गौरव है। उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘जय हिंद’ के उद्घोष के साथ किया। मुख्यमंत्री का यह संदेश देश की रक्षा में जुटे वायु योद्धाओं के प्रति सम्मान और उनके योगदान पर गर्व की भावना को दर्शाता है।

  • बंगाल: CM शुभेंदु अधिकारी ने राष्ट्रपति द्वारा एंटी-गुंडा बिल लौटाने की खबरों का किया खंडन…?

    बंगाल: CM शुभेंदु अधिकारी ने राष्ट्रपति द्वारा एंटी-गुंडा बिल लौटाने की खबरों का किया खंडन…?


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) ने शुक्रवार को उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने ‘गुंडा रोधी विधेयक’ को पुनर्विचार के लिए राज्य सरकार को वापस भेज दिया है। शुभेंदु ने कहा कि प्रस्तावित कानून फिलहाल गृह मंत्रालय के विचाराधीन है। मीडिया के एक वर्ग में खबर आई थी कि राष्ट्रपति ने विधेयक के एक प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए इसे लौटा दिया है, जो केंद्र के एक मादक पदार्थ रोधी कानून के साथ ओवरलैप कर सकता है।

    शुभेंदु ने देर शाम राज्य सचिवालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह फर्जी खबर है। इसका कोई आधार नहीं है। यह विधेयक अभी राष्ट्रपति तक नहीं पहुंचा है और विचार-विमर्श के लिए गृह मंत्रालय के पास ही है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूद मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक पूर्ण रूप से स्पष्ट है और उन्होंने इसके राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई।

    जून में पारित हुए इस विधेयक का उद्देश्य संगठित अपराध, बार-बार अपराध करने वालों और सार्वजनिक अव्यवस्था पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार को व्यापक अधिकार प्रदान करना है। इस कानून के माध्यम से निवारक हिरासत और संपत्ति जब्ती जैसे उपायों के जरिए सिंडिकेट, जबरन वसूली रैकेट, भूमि कब्जा, अवैध खनन और राजनीतिक हिंसा पर लगाम लगाने का प्रयास किया गया है।

    इससे पहले खबरें आई थीं कि राष्ट्रपति ने एंटी-गुंडा विधेयक राष्ट्रपति द्वारा बिना मंजूरी के वापस लौटा दिया है। ऐसी भी खबरें आई थीं कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बयान दिया है कि अब इसके कानूनी प्रावधानों की जांच करेगी और नए मसौदे पर काम करेगी। इसमें कहा गया था कि एंटी-गुंडा कानून चार अन्य राज्यों में अस्तित्व में है। हम कानूनी तरीकों से काम करेंगे। कोई कठिनाई नहीं होगी।

  • राष्ट्रपति का ADC बनने की राह कितनी कठिन? 14 दिन चलता है इंटरव्यू, ऐसे होता है अधिकारियों का चयन

    राष्ट्रपति का ADC बनने की राह कितनी कठिन? 14 दिन चलता है इंटरव्यू, ऐसे होता है अधिकारियों का चयन


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रपति भवन में महामहिम के साथ साए की तरह नजर आने वाले सैन्य अधिकारियों को देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ये अधिकारी कौन होते हैं और राष्ट्रपति के एडीसी यानी Aide-de-Camp तक कैसे पहुंचते हैं। यह पद भारतीय सेना के सबसे प्रतिष्ठित और जिम्मेदारी वाले पदों में शामिल है। ‘नेशनल क्रश’ के नाम से चर्चित रहे मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के एडीसी पद से अचानक इस्तीफे के बाद एक बार फिर लोगों की दिलचस्पी इस पद की चयन प्रक्रिया को लेकर बढ़ गई है।

    राज शमानी के साथ बातचीत में मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने राष्ट्रपति के एडीसी से जुड़ी चयन प्रक्रिया और इस पद की जिम्मेदारियों के बारे में कई अहम बातें बताई हैं। उन्होंने बताया कि एक सामान्य सैन्य अधिकारी से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने का सफर बेहद कठिन, अनुशासित और कड़े परीक्षणों से होकर गुजरता है।

    कौन बन सकता है राष्ट्रपति का ADC?

    राष्ट्रपति का एडीसी पद किसी सामान्य भर्ती प्रक्रिया के तहत नहीं भरा जाता। आम नागरिक इस पद के लिए सीधे आवेदन नहीं कर सकते। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के कमिशंड अधिकारी ही इसके लिए पात्र होते हैं।

    सेना में कमिशंड अधिकारी बनने के लिए युवाओं को यूपीएससी की NDA या CDS जैसी कठिन परीक्षाओं को पास करना पड़ता है। सैन्य अधिकारी के रूप में करीब 5 से 7 साल की सेवा पूरी करने के बाद उनके सेवा रिकॉर्ड, शारीरिक क्षमता और गोपनीय रिपोर्ट यानी ACR जैसे मानकों के आधार पर एडीसी पद के लिए अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट किए जाते हैं।

    तीनों सेनाओं से कुल मिलाकर करीब 20 से 30 बेहतरीन अधिकारियों को चयन प्रक्रिया के शुरुआती चरण के लिए चुना जाता है। यानी एडीसी बनने की दौड़ में शामिल होने से पहले ही अधिकारी का अपनी यूनिट में बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी होता है।

    पहले सर्विस हेडक्वॉर्टर में इंटरव्यू, फिर राष्ट्रपति भवन की परीक्षा

    एडीसी के चयन की प्रक्रिया बेहद कठिन मानी जाती है। शुरुआती स्क्रीनिंग में चुने गए अधिकारियों को संबंधित सर्विस हेडक्वॉर्टर के इंटरव्यू से गुजरना होता है। इस दौरान करेंट अफेयर्स और सिचुएशनल अवेयरनेस समेत कई विषयों पर उनकी क्षमता परखी जाती है।

    इसके बाद केवल 5 अधिकारियों को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन बुलाया जाता है। यहां चयन प्रक्रिया का सबसे कठिन चरण शुरू होता है, जिसमें लगातार 14 दिनों तक मैराथन इंटरव्यू चलता है।

    14 दिन तक उम्मीदवारों की कमजोरियां तलाशता है पैनल

    मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के मुताबिक राष्ट्रपति भवन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और राष्ट्रपति के सचिव उम्मीदवारों को काफी मानसिक दबाव में परखते हैं। मकसद यह पता लगाना होता है कि दबाव और आपात स्थिति में अधिकारी किस तरह प्रतिक्रिया देगा।

    उन्होंने बताया कि अगर किसी उम्मीदवार की जियोपॉलिटिक्स या किसी अन्य विषय में कमजोरी नजर आती है तो पैनल उसी विषय से जुड़े सवाल बार-बार पूछ सकता है। खास बात यह होती है कि 14 दिनों के दौरान उम्मीदवारों को उनकी कमियों के बारे में सीधे नहीं बताया जाता।

    इसके बजाय यह देखा जाता है कि उम्मीदवार रात में अपनी कमी को समझकर तैयारी करता है या नहीं और अगले दिन उसी विषय पर बेहतर प्रदर्शन कर पाता है या नहीं। इस तरह केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि सीखने की क्षमता और दबाव में खुद को सुधारने की योग्यता भी जांची जाती है।

    ADC बनने के बाद निजी जिंदगी से भी करना पड़ता है समझौता

    मेजर ऋषभ के अनुसार राष्ट्रपति का एडीसी होना जितना प्रतिष्ठित है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। इस पद पर रहते हुए अधिकारी को अपने परिवार और निजी जीवन से काफी हद तक दूरी बनानी पड़ती है।

    राष्ट्रपति के साथ लगातार मौजूद रहने के कारण सामान्य दिनचर्या और निजी जीवन के लिए समय बेहद सीमित हो जाता है। अधिकारी को हर समय सतर्क रहना होता है और देश-दुनिया की घटनाओं से लगातार अपडेट रहना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा होता है।

    शान के पीछे छिपा है कड़ा अनुशासन

    राष्ट्रपति का एडीसी होना सैन्य अधिकारी के लिए बेहद सम्मान और गौरव की बात मानी जाती है। हालांकि इस प्रतिष्ठित जिम्मेदारी तक पहुंचने के लिए कठोर चयन प्रक्रिया, मानसिक दबाव, निरंतर सतर्कता और निजी जीवन से समझौता करना पड़ता है।

    यही वजह है कि राष्ट्रपति के एडीसी का पद केवल प्रोटोकॉल निभाने या राष्ट्रपति के साथ चलने तक सीमित नहीं है। यह ऐसी जिम्मेदारी है, जिसमें अधिकारी को हर पल राष्ट्रपति की सुरक्षा, जरूरतों और परिस्थितियों के प्रति पूरी तरह सजग रहना होता है।

  • मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया राष्ट्रपति के ADC पद से रिटायरमेंट का कारण, परिवार को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता

    मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया राष्ट्रपति के ADC पद से रिटायरमेंट का कारण, परिवार को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता

    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एड-डी-कैंप मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने 30 साल की उम्र में सेना से समय से पहले रिटायरमेंट लेने के फैसले के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय किसी निजी असंतुष्टि की वजह से नहीं, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया था। सेना की वर्दी पहनना उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि लंबे समय से देखा गया सपना था।

    मेजर ऋषभ ने बताया कि उन्होंने कभी सेना छोड़ने के बारे में नहीं सोचा था। उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय इस सपने को पूरा करने और सैन्य जीवन को जीने में बिताया। इसके बावजूद एक समय ऐसा आया जब उन्हें अपने व्यक्तिगत करियर और माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियों के बीच किसी एक को चुनना पड़ा।

    उनके मुताबिक, उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षाओं के बजाय माता-पिता के साथ रहने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि एक बेटे के तौर पर उनकी कुछ जिम्मेदारियां और वादे हैं, जिन्हें उन्हें पूरा करना है। उनके सामने खुद को चुनने या माता-पिता को प्राथमिकता देने का विकल्प था और वह ऐसा फैसला नहीं लेना चाहते थे, जिसके बारे में बाद में उन्हें पछतावा हो।

    मेजर ऋषभ ने स्पष्ट किया कि सेना छोड़ने का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया गया। उन्होंने परिवार के साथ बातचीत करने के बाद यह फैसला किया। उनके लिए यह कदम भावनात्मक रूप से कठिन था, लेकिन उन्होंने इसे जरूरी त्याग माना। सैन्य करियर उम्मीद से पहले खत्म होने के बावजूद उन्हें देश की सेवा में बिताए हर पल पर गर्व है।

    राष्ट्रपति के ADC के तौर पर अपनी भूमिका को लेकर भी उन्होंने कई बातें बताईं। उनके अनुसार इस पद पर रहते हुए सख्त प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है और इसका असर निजी जीवन पर भी पड़ता है। ADC के कार्यकाल के दौरान शादी करने की अनुमति नहीं होने की बात भी उन्होंने बताई।

    मेजर ऋषभ ने अपनी शादी को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्होंने शादी नहीं की है और फिलहाल शादी करने की उनकी कोई योजना भी नहीं है। इस तरह उन्होंने उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें उनकी रिटायरमेंट को शादी की योजना से जोड़कर देखा जा रहा था।

    उन्होंने यह भी बताया कि ADC के तौर पर जिम्मेदारियों के कारण निजी जीवन काफी सीमित हो जाता है। परिवार से लंबे समय तक दूर रहना पड़ता है और निजी जिंदगी के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। सार्वजनिक जिम्मेदारियों की लगातार मांग के कारण उन्हें कई ऐसे सामान्य अनुभवों का त्याग करना पड़ा, जिन्हें आम जीवन का हिस्सा माना जाता है।

    मेजर ऋषभ ने इस अनुभव को केवल कठिनाइयों के तौर पर नहीं देखा। उनके मुताबिक, सीमित निजी जीवन और लगातार जिम्मेदारियों के बीच यह समय आत्मचिंतन का अवसर भी रहा। उन्होंने अपने फैसले को परिवार के प्रति जिम्मेदारी और जरूरी त्याग के रूप में प्रस्तुत किया।

    सेना छोड़ने के बावजूद उनके बयान में सैन्य सेवा के प्रति सम्मान साफ नजर आया। उन्होंने देश की सेवा में बिताए समय को गर्व के साथ याद किया और बताया कि परिवार से बातचीत के बाद लिया गया यह फैसला उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्हें लगा कि इस समय माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • कोटा की 5 महिलाओं ने की किडनी ट्रांसप्लांट की मांग… राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति

    कोटा की 5 महिलाओं ने की किडनी ट्रांसप्लांट की मांग… राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति


    कोटा।
    राजस्थान (Rajasthan) के कोटा में बच्चे के जन्म के बाद किडनी फेलियर (Kidney failure) से जूझ रही पांच महिलाओं ने डायलिसिस करवाने से इनकार कर दिया है। ये महिलाएं किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney transplant) की मांग कर रही हैं। उनके परिवारों ने अब राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा है कि अगर सरकार उनके सही इलाज का इंतजाम नहीं कर सकती तो इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। इन महिलाओं ने जिला अधिकारियों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।


    70 से ज्यादा दिनों से अस्पताल में हैं

    उधर, न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (एनएमसीएच) के अधिकारियों का कहना है कि उनका इलाज चल रहा है और सभी मरीजों की हालत स्थिर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, धन्नी सुमन, रागिनी मीणा, सुशीला महावर, पिंकी एयरवाल और आरती चौबदार नाम की महिलाओं की सेहत मई की शुरुआत में बच्चे के जन्म के बाद बिगड़ने के बाद से अब तक 32 बार डायलिसिस हो चुका है। वे 70 से ज्यादा दिनों से अस्पताल में हैं। इसके अलावा, कोटा के एनएमसीएच और जेके लोन हॉस्पिटल में सी-सेक्शन सर्जरी के बाद हुई दिक्कतों की वजह से पांच और महिलाओं की मौत हो गई थी।


    डायलिसिस शब्द से ही डरने लगी हैं

    मई के पहले हफ्ते से भर्ती सुमन के पति मोहन लाल ने बताया कि उनकी पत्नी अब डायलिसिस शब्द से ही डरने लगी हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के एक घंटे के अंदर ही उसे उल्टी होने लगती है। वह बुरी तरह कांपने लगती हैं और बुखार आ जाता है। वहीं, रागिनी ने कहा कि डायलिसिस की प्रक्रिया बहुत दर्दनाक होती है। लंबे समय तक इलाज के बावजूद उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ है।

    पिंकी और आरती डायलिसिस से इनकार करते हुए अस्पताल से बाहर चली गईं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। रागिनी के पति लोकेश मीना ने दावा किया कि वार्ड स्टाफ उन पर रोजाना डिस्चार्ज लेने का दबाव डाल रहा है।


    राष्ट्रपति को चिट्ठी

    बुधवार को इन पांचों महिलाओं के परिवारों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर या तो किडनी ट्रांसप्लांट या फिर मौत की मांग की। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि अगर किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पाता है तो उन्हें इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) की इजाजत दी जाए। यह कदम महिलाओं द्वारा जिला अधिकारियों को किडनी ट्रांसप्लांट पक्का करने के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के खत्म होने के बाद उठाया गया।


    चलती-फिरती लाशों की तरह जी रहीं

    मोहन लाल ने कहा था कि हम उन्हें इस तरह तड़पते हुए और नहीं देख सकते। अगर हमें 48 घंटे के अंदर किडनी ट्रांसप्लांट का लिखित आश्वासन नहीं मिला तो हम उन्हें डायलिसिस के लिए लाना बंद कर देंगे और उन्हें मरने देंगे। वे तो चलती-फिरती लाशों की तरह जी रही हैं।


    डायलिसिस से मना करना जानलेवा हो सकता है

    एनएमसीएच के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि सभी पांच महिलाओं का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर है। उन्होंने कहा कि उन्हें 20 दिन पहले ही डिस्चार्ज करने की मंजूरी मिल गई थी और वे डायलिसिस सेशन के लिए अस्पताल आ सकती हैं। उन्होंने चेताया कि डायलिसिस से इनकार करना जानलेवा हो सकता है।


    प्रशासन को समस्या बताना चाहिए

    उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों के लिए डॉक्टर पहले तीन महीने तक इलाज के जरिए किडनी की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। उसके बाद ही कोई स्पेशलिस्ट तय करता है कि ट्रांसप्लांट की जरूरत है या नहीं। अस्पताल प्रशासन पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए प्रिंसिपल जैन ने कहा कि मरीजों को अपनी समस्याओं के बारे में प्रशासन को बताना चाहिए ताकि उनका समाधान निकाला जा सके।