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  • PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता

    PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ईरान (Iran) के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन (President Dr. Masoud Pezeshkian) से मंगलवार को टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पश्चिम एशिया (West Asia) की हालिया घटनाओं और आगे की दिशा की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। पीएम मोदी ने समझौते का स्वागत करते हुए भारत की स्थिर नीति को दोहराया कि क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। इस दौरान समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता और वाणिज्य की सुरक्षा को बनाए रखने के महत्व को भी सामने रखा गया।

    पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के बारे में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात हुई। बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि लगातार कोशिशों से इस इलाके में स्थायी शांति आएगी। भारत और दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही की आजादी के महत्व को फिर से दोहराया।’ इससे पहले, पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। खामेनेई का अंतिम संस्कार समारोह अगले सप्ताह आयोजित होने वाला है। खबरों के मुताबिक, सरकार भारत के प्रतिनिधि के तौर पर बिहार के राज्यपाल अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा को इन समारोह में भेजने की योजना बना रही है। अंतिम संस्कार की रस्में 5 से 9 जुलाई तक होंगी।


    भारत-ईरान के रिश्ते में उतार-चढ़ाव

    भारत और ईरान के मौजूदा संबंध काफी जटिल और रणनीतिक महत्व वाले रहे हैं। दोनों देशों के बीच सभ्यतागत और ऐतिहासिक गहराई है, लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2024 में भारत ने चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को 10 वर्षों के लिए ऑपरेट करने का समझौता किया, जिसमें 120 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल था। 2026 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने पोर्ट पर अपनी गतिविधियां कम कीं और वादा किया राशि का भुगतान पूरा कर लिया।

    होर्मुज स्ट्रेट संकट के दौरान भारत ने ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ाया, जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री स्तर पर बातचीत हुई। ईरान के सुप्रीम लीडर की मृत्यु पर भारत ने शोक व्यक्त किया और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग जारी रखा। ऊर्जा आयात लगभग बंद हो गया है, लेकिन कनेक्टिविटी, अफगानिस्तान और मध्य एशिया पहुंच के लिए चाबहार अभी भी अहम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच संबंध रणनीतिक स्वायत्तता और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित हैं। भारत ईरान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी मानता है, जबकि ईरान भारत को बड़े बाजार और निवेशक के रूप में देखता है।

  • MP के 5 दिन के दौरे पर आ रही हैं राष्ट्रपति मुर्मू, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कूनो का करेंगी भ्रमण

    MP के 5 दिन के दौरे पर आ रही हैं राष्ट्रपति मुर्मू, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कूनो का करेंगी भ्रमण


    भोपाल।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) आगामी 18 से 22 जून तक मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय दौरे (Madhya Pradesh, five-day visit) पर आ रही हैं। वे यहां ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कूनों नेशनल पार्क के भ्रमण करने के साथ बैतूल और जबलपुर में भी विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। इसे लेकर प्रदेश के प्रशासनिक और सुरक्षा अमले ने अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं।

    श्योपुर जिले में तय दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार, 21 जून दोपहर 3 बजे राष्ट्रपति वायुसेना के विशेष विमान से पहले ग्वालियर पहुंचेंगी. वहां से वे सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा सीधे कूनो नेशनल पार्क आएंगी. 21 जून की पूरी रात कूनो नेशनल पार्क में ही बिताएंगी. उनके विश्राम के लिए कूनो में विशेष और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. वहीं, 22 जून सुबह 10 बजे कूनो नेशनल पार्क में सुबह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद राष्ट्रपति अगले गंतव्य के लिए प्रस्थान कर जाएंगी।


    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने परखी सुरक्षा

    राष्ट्रपति के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हैं. बुधवार को मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित प्रोटोकॉल की बारीकी से समीक्षा की. मुख्य सचिव ने साफ निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा, आवागमन, संचार, स्वास्थ्य सेवाओं और वीवीआईपी प्रोटोकॉल से जुड़े सभी इंतजाम समय सीमा के भीतर अचूक तरीके से पूरे किए जाएं।

    माना जा रहा है कि बोत्सवाना से भारत लाए गए शेष चीतों को राष्ट्रपति के हाथों ही कूनो के खुले जंगल में आजाद किया जा सकता है. दरअसल, जब बोत्सवाना सरकार ने भारत के लिए इन खास चीतों का चयन किया था, तब प्रतीकात्मक रूप से इन्हें खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ही सौंपा गया था. यही वजह है कि कूनो प्रबंधन और वन्यजीव विशेषज्ञ इस पल को लेकर बेहद उत्साहित हैं।


    इंदौर, ओंकारेश्वर और जबलपुर भी जाएंगी राष्ट्रपति

    अपने पांच दिवसीय प्रवास के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मध्य प्रदेश के कई प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भी रुख करेंगी. वे श्योपुर और ग्वालियर के अलावा इंदौर, बैतूल में स्थित प्रसिद्ध श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और जबलपुर का भी भ्रमण करेंगी, जिसे लेकर इन सभी जिलों में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।

  • पद्म पुरस्कार 2026 में कला, सिनेमा और संस्कृति जगत के दिग्गजों को मिलेगा सर्वोच्च सम्मान

    पद्म पुरस्कार 2026 में कला, सिनेमा और संस्कृति जगत के दिग्गजों को मिलेगा सर्वोच्च सम्मान


    नई दिल्ली।
    देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार समारोह आज राजधानी में पूरे गरिमामय वातावरण के बीच आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं बल्कि उन महान हस्तियों के योगदान को सम्मान देने का अवसर भी माना जाता है, जिन्होंने अपने कार्यों से देश और समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हर वर्ष की तरह इस बार भी विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा, जिनके कार्यों ने समाज पर गहरी और सकारात्मक छाप छोड़ी है।

    राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाला यह विशेष समारोह देश के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व का एक अहम हिस्सा माना जाता है। इस अवसर पर कला, साहित्य, संगीत, सिनेमा, खेल, समाज सेवा और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा। समारोह को लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है क्योंकि यह मंच उन लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देता है जिन्होंने वर्षों की मेहनत और समर्पण से अपनी अलग पहचान बनाई है।

    इस वर्ष पुरस्कारों की सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने लंबे समय तक अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया है। खासतौर पर मनोरंजन और कला जगत से जुड़े कई दिग्गजों के नामों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। कुछ महान हस्तियों को मरणोपरांत सम्मान दिए जाने की घोषणा ने इस समारोह को और भावुक बना दिया है। यह सम्मान केवल पुरस्कार नहीं बल्कि उनके जीवनभर के योगदान और विरासत को याद करने का एक माध्यम भी माना जा रहा है।

    देश के फिल्म और संगीत जगत से जुड़े कई लोकप्रिय चेहरों को भी इस बार सम्मान सूची में स्थान मिला है। दशकों तक लोगों के दिलों पर राज करने वाले कलाकारों से लेकर अपनी कला के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाले व्यक्तित्वों तक, इस बार कई बड़े नाम सम्मान प्राप्त करने जा रहे हैं। इन हस्तियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर देश को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई है।

    पद्म पुरस्कारों को भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में गिना जाता है और यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां हासिल की हों। इस सम्मान का उद्देश्य केवल उपलब्धियों का जश्न मनाना नहीं बल्कि समाज में प्रेरणा और उत्कृष्टता की भावना को बढ़ावा देना भी है। यही कारण है कि हर वर्ष देशभर के लोग इस समारोह का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

    आज होने वाला यह आयोजन केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह देश की उन प्रेरणादायक कहानियों का उत्सव भी बनेगा, जिन्होंने मेहनत, संघर्ष और समर्पण से नई ऊंचाइयों को छुआ है। सम्मानित होने वाली हस्तियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी और उनके कार्य समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

  • राष्ट्रपति के पास जा रहे राघव चड्ढा समेत 3 सांसद, 5 मई को होगी मुलाकात; निशाने पर पंजाब सरकार

    राष्ट्रपति के पास जा रहे राघव चड्ढा समेत 3 सांसद, 5 मई को होगी मुलाकात; निशाने पर पंजाब सरकार


    नई दिल्‍ली। आम आदमी पार्टी (AAP) से हाल ही में नाता तोड़ने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अब अपनी पुरानी पार्टी और पंजाब सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। सांसद चड्ढा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा था, जिसे राष्ट्रपति भवन द्वारा मंजूर कर लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह अहम मुलाकात 5 मई को सुबह 10:40 बजे होगी। इस दौरान राघव चड्ढा के साथ तीन अन्य सांसद भी मौजूद रहेंगे, जिन्होंने हाल ही में AAP का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है।
    क्या है मुलाकात का मुख्य एजेंडा?

    समाचार एजेंसी के हवाले से लिखा है कि इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति को पंजाब की भगवंत मान सरकार की कथित ‘बदले की राजनीति’ से अवगत कराना है। राघव चड्ढा और अन्य बागी सांसदों का आरोप है कि पंजाब सरकार अपनी शक्तियों और सरकारी मशीनरी का घोर दुरुपयोग कर रही है। उनका दावा है कि जिन नेताओं ने हाल ही में AAP से इस्तीफा देकर BJP के साथ विलय किया है, पंजाब सरकार अब उन्हें जानबूझकर ‘टार्गेट’ कर रही है और उन पर अनुचित कार्रवाई कर रही है। इस मुलाकात में ये सांसद राष्ट्रपति से पंजाब सरकार की इन कथित दमनकारी नीतियों और राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे।
    आप छोड़ भाजपा में गए राघव चड्ढा

    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पंजाब में राजनीतिक घमासान चरम पर है। 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा समेत सात AAP राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा में विलय का ऐलान किया था। इनमें छह पंजाब से चुने गए सांसद शामिल हैं। AAP ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है, जबकि चड्ढा गुट ने पंजाब सरकार पर दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

    AAP छोड़ने वालों में राघव चड्ढा के अलावा, संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी तथा स्वाति मालीवाल शामिल हैं। चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि AAP मूल सिद्धांतों से भटक गई है। दो-तिहाई बहुमत होने के कारण इन सांसदों का भाजपा में विलय राज्‍यसभा सभापति ने स्वीकार भी कर लिया है।
    संदीप पाठक के खिलाफ मुकदमा

    बता दें कि आम आदमी पार्टी छोड़कर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब पुलिस ने प्राथमिकियां दर्ज की हैं। सूत्रों ने बताया कि पाठक के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

    हालांकि, प्राथमिकी के बारे में अब तक कोई अन्य जानकारी सामने नहीं आई है। पाठक उन सात राज्यसभा सदस्यों में शामिल हैं, जिन्होंने ‘आप’ छोड़कर भाजपा का दामन थामा है।

    पंजाब पुलिस की एक टीम दिल्ली गई लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही पाठक एक एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) में सवार होकर अपने घर से निकल चुके थे। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में पाठक अपने घर से निकलते हुए दिख रहे हैं और कुछ संवाददाता उनसे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के बारे में संपर्क करने की कोशिश रहे हैं।

    दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व प्रोफेसर पाठक को आम आदमी पार्टी (आप) की चुनाव एवं प्रचार रणनीति तैयार करने और पार्टी संगठन को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है। कभी ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले पाठक ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    यह घटनाक्रम 30 अप्रैल को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ट्राइडेंट लिमिटेड के परिसर पर की गई छापेमारी के तुरंत बाद सामने आया है। राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गुप्ता इस कंपनी के मानद चेयरमैन हैं। गुप्ता उन सात सांसदों में से एक हैं जिन्होंने पिछले महीने ‘आप’ छोड़ दी थी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। इससे पहले पंजाब पुलिस ने सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस ले ली थी।
  • अमेरिका: रूस से तेल खरीदने की छूट पर घर में घिरे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, सांसद बोले- शर्मनाक कदम

    अमेरिका: रूस से तेल खरीदने की छूट पर घर में घिरे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, सांसद बोले- शर्मनाक कदम

    वाशिंगटन। अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने एक फैसले से घर में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप ने रूस से पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की अनुमति देने वाली छूट की अवधि को एक माह के लिए बढ़ा दिया है, जबकि कुछ दिन पूर्व उन्होेंने यह विशेष राहत आगे न बढ़ाने की बात कही थी। अमेरिकी डेमोक्रेट सांसदों ने रूस से तेल खरीदी को दोबारा छूट देना ट्रंप प्रशासन का 180 डिग्री यू-टर्न और शर्मनाक कदम बताया है। सीनेट में भी इसका विरोध हुआ।

    अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात आदेश जारी कर रूसी तेल पर लगी पाबंदी से छूट की अवधि 16 मई तक बढ़ा दी।

    डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि एक तरफ रूस की ओर से यूक्रेन पर बड़े हमले जारी हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका उसे आर्थिक लाभ पहुंचा रहा है। डेमोक्रेटिक नेता जीन शाहीन, चक शूमर और एलिजाबेथ वॉरेन ने साझा बयान जारी कर ‘रूस जनरल लाइसेंस 134’ को फिर से लागू करने की निंदा की। यह लाइसेंस उन कंपनियों को सजा से बचाता है जो रूसी तेल खरीद रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 15 अप्रैल को व्हाइट हाउस में कहा था कि सरकार रूस-ईरान के तेल पर पाबंदी में और ढील नहीं देगी। लेकिन सिर्फ दो दिन में सरकार ने फैसला बदल लिया।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने कई वैश्विक विवादों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। इसी दावे के साथ, उन्होंने ट्रुथ सोशल पर ट्रंप वॉर रूम की एक पोस्ट में एक डिजिटल पोस्टर दिखाया, जिसमें ट्रंप को शांति के राष्ट्रपति के तौर पर बताया गया है। ट्रुथ सोशल के हैंडल ने कहा, ट्रंप पर भरोसा करें।

    घबराने वालों पर नहीं। इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत आठ युद्धों को खत्म कराने पर अपनी भूमिका याद दिलाई।

    ट्रंप ने जोर देकर कहा, मेरे दखल से बड़े पैमाने पर जानमाल की क्षति रोकने में मदद मिली। एरिजोना के फीनिक्स में टर्निंग प्वाइंट यूएसए कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय विवादों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, मैं शांतिदूत हूं। मैं ही वह व्यक्ति हूं जिसने आठ युद्धों को सुलझाया। मैंने भारत-पाकिस्तान के बीच एक ऐसे युद्ध को सुलझाया जिसमें 3-5 करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। एजेंसी

    नई समयसीमा और भारत पर असर…
    अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अधिकृत दस्तावेज के मुताबिक, अब 17 अप्रैल तक जहाजों पर लोड हुए रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को 16 मई तक खरीदी की मंजूरी मिल गई है। पिछली छूट 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी। नए फैसले का लाभ भारत समेत उन तमाम देशों को मिलेगा जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर हैं।

    सरकार का तर्क है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें न बढ़ें, इसलिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि, अमेरिका में विपक्षी सांसद इस तर्क से सहमत नहीं हैं।

    दूसरे दौर की वार्ता की तैयारी में पाकिस्तान
    होर्मुज पर जारी तनाव के बावजूद मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका और ईरान के बीच 22 अप्रैल की युद्धविराम की समयसीमा से पहले समझौता हो जाएगा। विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई प्रमुख मुद्दा था। पाकिस्तान अगले सप्ताह की शुरुआत में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी करेगा।

    नए अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे: ईरान
    ईरान ने कहा कि वह अमेरिका की ओर से भेजे गए नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने हाल ही में तेहरान दौरे के दौरान ईरान को ये प्रस्ताव सौंपे थे। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता अच्छी चल रही है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है, लेकिन उसने यह बताने से इन्कार कर दिया कि प्रस्ताव में क्या है।

  • क्यूबा के राष्ट्रपति की दो टूक…. बोले- US ने सैन्य कार्रवाई की तो उनका देश जवाब देने को तैयार….

    क्यूबा के राष्ट्रपति की दो टूक…. बोले- US ने सैन्य कार्रवाई की तो उनका देश जवाब देने को तैयार….


    हवाना।
    क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल (Cuban President Miguel Diaz-Canel) ने गुरुवार को कहा कि क्यूबा (Cuba) नहीं चाहता कि अमेरिका (America) उस पर सैन्य कार्रवाई करे। उन्होंने कहा, अगर ऐसा होता है तो उनका देश लड़ने के लिए तैयार है। डियाज-कैनेल ने यह बात एक रैली में कही, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। यह रैली क्यूबा की क्रांति के 65 साल पूरे होने पर आयोजित की गई थी, जब क्यूबा ने खुद को समाजवादी देश घोषित किया था।

    डियाज-कैनेल ने कहा, यह बेहद चुनौतीपूर्ण समय है और हमें एक बार फिर गंभीर खतरों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, जैसे 16 अप्रैल 1961 को थे। इन खतरों में (संभावित) सैन्य हमला भी शामिल है। हम यह नहीं चाहते, लेकिन इससे बचने के लिए तैयारी करना हमारा कर्तव्य है और अगर यह टालना संभव न हो, तो हमें इसे हराना होगा।


    अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या चेतावनी दी?

    उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही, जब दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। अमेरिका की ऊर्जा नाकेबंदी के कारण क्यूबा का संकट और गहरा गया है। इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ जंग खत्म होने के बाद उनका प्रशासन क्यूबा पर फोकस कर सकता है। उन्होंने कहा, हम इसे खत्म करने के बाद क्यूबा की ओर भी जा सकते हैं। उन्होंने क्यूबा को ‘विफल देश’ बताया और कहा कि यह लंबे समय से खराब तरीके से चलाया जा रहा है।

    जनवरी के शुरुआत में ट्रंप ने पहले भी क्यूबा में दखल की धमकी दी थी, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला किया और वहां से आने वाले तेल की आपूर्ति रोक दी। कुछ हफ्तों बाद ट्रंप ने उन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी, जो क्यूबा को तेल बेचते हैं या उपलब्ध कराते हैं। ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माता-पिता 1950 के दशक में क्रांति से पहले क्यूबा से प्रवास कर गए थे। दोनों ने क्यूबा की सरकार को अक्षम और दमनकारी बताया है।

    डियाज-कैनेल ने उन पर आरोप लगाया कि वे एक ऐसा ‘कहानी’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा, क्यूबा असफल देश नहीं है। क्यूबा एक घिरा हुआ देश है। क्यूबा एक ऐसा देश है, जो कई तरह के हमलों का सामना कर रहा है। इनमें आर्थिक युद्ध, कड़ी नाकेबंदी और ऊर्जा नाकेबंदी शामिल हैं।

    उन्होंने कहा, क्यूबा एक ऐसा देश है जिसे धमकाया जाता रहा है, लेकिन वह झुकता नहीं है। हर चीज के बावजूद समाजवाद की वजह से क्यूबा एक ऐसा देश है, जो संघर्ष करता है, आगे बढ़ता है और याद रखिए, यह देश जीतकर रहेगा।

    क्यूबा और अमेरिका दोनों ने माना है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत चल रही है। लेकिन इसके बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। क्यूबा के राष्ट्रपति ने क्रांति से मिली उपलब्धियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि देश की समाजवादी व्यवस्था के कारण निशुल्क शिक्षा मिली है, जिससे हजारों पेशेवर तैयार हुए। लेकिन अब संकट के कारण उनमें से कई लोगों को देश छोड़ना पड़ा है।

  • मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद

    मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 (महाकुंभ) से पहले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद सामने आया है। इस पद पर दो दावे किए जा रहे हैं। 13 अखाड़े दो गुट में बंटे नजर आ रहे हैं। एक धड़ा निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मानता है, जबकि दूसरा महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को अध्यक्ष बता रहा है। एक जैसा नाम होने से असमंसज की स्थिति बनी है।

    दरअसल, उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर जहां एक और सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी पिछले छह महीनों से अध्यक्ष के रूप में उज्जैन आते-जाते रहे हैं। इस दौरान प्रशासन ने उन्हें शिप्रा नदी प्रोजेक्ट सहित मेले की तैयारियों की जानकारी भी दी, लेकिन अब साधु संतों में दो फाड़ दिखाई दे रही है। देश के 13 अखाड़े में से आठ अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है।

    रविवार को उज्जैन में मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़ा में संतों का समागम हुआ। इसमें बड़ी संख्या में संत मौजूद रहे। संतों के इस समागम में 13 में से आठ अखाड़ों के साधु संत शामिल हुए। खास बात यह रही कि यहां हरिद्वार से पहली बार आए महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव संत रविंद्र पुरी महाराज स्वागत सम्मान हुआ। ढोल-नगाड़ों के बीच संतों में उत्साह नजर आया। कार्यक्रम में महंत सत्यानंद महाराज (बड़ा उदासीन), महंत मंगलदास जी (नया अखाड़ा), महंत विनीत गिरी (महानिर्वाणी), महंत रामेश्वर दास, भगवान दास और दिग्विजय दास सहित विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत शामिल हुए।

    कार्यक्रम के बाद रविंद्र पुरी महाराज ने मीडिया से कहा कि वे खुद वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ में निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव हैं। उन्हें लिखित और चयनित दोनों रूपों में 13 में से आठ अखाड़े का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद चार संप्रदाय से मिलकर बनी है। इसमें संन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल शामिल है। इन चारों संप्रदाय के अखाड़े उनके नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद में शामिल हैं। इसीलिए वे खुद अखाड़ा परिषद के चुने गए अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 मे सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। सिंहस्थ कुंभ के आयोजन को लेकर हमारी समय समय पर अधिकारियों से सूक्ष्म चर्चा होती रहती है। हम लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे।


    इन अखाड़ों का समर्थन बताया

    देश के 13 अखाड़े में से 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है। इन अखाड़ों में 1- महानिर्वाणी अखाड़ा, 2- अटल अखाड़ा, 3-निर्मल अखाड़ा, 4- नया उदासी अखाड़ा, 5- बड़ा उदासीन अखाड़ा, 6-निर्वाणी अणि अखाड़ा, 7- दिगंबर अणि अखाड़ा और 8-निर्मोही अणि अखाड़ा शामिल है। इस प्रकार बहुमत के आधार पर अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज ही होंगे।

    इधर निरंजनी अखाड़े से जुड़े रविंद्र पूरी महाराज ने कहा कि कुम्भ आ रहा है, ऐसे कई संत अपने आप को अध्यक्ष बताएंगे। सर्वसम्मति से मुझे अध्यक्ष बनाया गया था। जब मैंने इस्तीफा दिया नहीं तो महानिर्वाणी वाले रविंद्र पूरी कैसे अध्यक्ष बन सकते है।

  • विकसित भारत 2047’ की यात्रा में दिव्यांगजन समान भागीदार : राष्ट्रपति

    विकसित भारत 2047’ की यात्रा में दिव्यांगजन समान भागीदार : राष्ट्रपति


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार को दिव्यांगजनों की प्रतिभा, उपलब्धियों और आकांक्षाओं का उत्सव मनाने के लिए ‘पर्पल फेस्ट’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में दिव्यांगजन समान भागीदार हैं।

    राष्ट्रपति भवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान दिनभर चले उत्सव में 8 हजार से अधिक दिव्यांगजन अमृत उद्यान पहुंचे, जिसे विशेष रूप से उनके लिए खोला गया था। इस दौरान विभिन्न संगठनों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से दिव्यांगजनों ने खेल, सीखने और मनोरंजन से जुड़ी कई गतिविधियों में भाग लिया।

    शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी ने राष्ट्रपति भवन स्थित ओपन एयर थिएटर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी अवलोकन किया, जिसमें दिव्यांग कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।

    राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी देश या समाज की पहचान केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह समाज के वंचित वर्गों के प्रति कितनी संवेदनशीलता दिखाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास और संस्कृति में संवेदनशीलता, समावेशिता और सामंजस्य की भावना हमेशा से प्रमुख रही है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सामाजिक न्याय, समानता और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा के आदर्शों को स्थापित करता है। राज्य के नीति निदेशक तत्वों के माध्यम से दिव्यांगजनों को शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सहायता का अधिकार भी प्रदान किया गया है।

    राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी समाज के निर्माण के लिए दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है। यह केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति और संस्था की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

    उन्होंने दिव्यांगजनों से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार और समाज उनके साथ खड़े हैं। उनका समर्पण, मेहनत और लगन न केवल उनके लिए प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि अन्य नागरिकों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

    उल्लेखनीय है कि ‘पर्पल फेस्ट’ का आयोजन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने किया, जिसका उद्देश्य विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में दिव्यांगजनों के प्रति समझ, स्वीकृति और समावेशन को प्रोत्साहित करना है।

  • ईरान-इजरायल-अमेरिका पर सवाल; फिनलैंड के राष्ट्रपति बोले- तोड़ा अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ा

    ईरान-इजरायल-अमेरिका पर सवाल; फिनलैंड के राष्ट्रपति बोले- तोड़ा अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ा

    नई दिल्‍ली। पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज होने के बीच फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा कि ईरान और इजरायल-अमेरिका दोनों ही पक्षों ने ‘अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर’ काम किया है। बात करते हुए स्टब ने यह भी कहा कि इजरायल-अमेरिका के हमलों के जवाब में खाड़ी देशों पर हमला करके ईरान ने ‘रणनीतिक गलती’ की है, क्योंकि अब खाड़ी देश एकजुट होकर देखेंगे कि वे ईरान के साथ क्या कर सकते हैं।

    पश्चिम एशिया में संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किये गए सैन्य हमलों के बाद शुरू हुआ जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई। इसके बाद, ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों में इजराइली और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर सिलसिलेवार हमलों को अंजाम दिया है।
    मिडिल ईस्ट में बढ़ गया है संघर्ष

    दरअसल, पिछले कुछ दिनों में, दोनों पक्षों के हमलों और जवाबी हमलों के साथ संघर्ष काफी बढ़ गया है। स्टब से पूछा गया कि वह ईरान पर किये गए हमले को किस तरह से देखते हैं।

    उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल है। मैं फिनलैंड से आता हूं, जिसकी रूस के साथ 1,340 किलोमीटर लंबी सीमा लगी हुई है। इसलिए, सुरक्षा के दृष्टिकोण से मेरी मुख्य चिंता यूक्रेन में मौजूदा स्थिति है।

    स्टब ने कहा कि मैं खुद को विशेषज्ञ तो नहीं कह सकता। लेकिन, अगर मैं विशेषज्ञों की बात सुनूं, तो इस हमले के कारणों के बारे में आमतौर पर चार तर्क दिए जाते हैं- पहला परमाणु हथियार, दूसरा मिसाइलें, तीसरा हमास, हूती और हिजबुल्लाह जैसे आतंकवादी संगठनों के माध्यम से हमले, और चौथा सत्ता परिवर्तन। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का अंत कैसे होगा, मुझे नहीं लगता कि कोई जानता है।
    कानून के दायरे से बाहर किया काम

    उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का हमेशा समर्थन करने वाले व्यक्ति के रूप में, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ईरान, इजरायल और अमेरिका तीनों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर जाकर काम किया। आमतौर पर इस तरह के हमलों के मामले में दो में से एक तरीका अपनाया जाता है, या तो संयुक्त राष्ट्र की सहमति ली जाए, या फिर ‘इच्छुक देशों का गठबंधन’ बनाया जाए।

    फिनलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि लेकिन अब, ईरान ने जब खाड़ी देशों पर हमला कर दिया है, तो ‘इच्छुक देशों का गठबंधन’ उभरता हुआ दिखाई देने लगा है तथा फ्रांस और ब्रिटेन जैसे यूरोप के बड़े देश सामने आ रहे हैं।

    दुनिया भर में बढ़ते संघर्षों के बीच, स्टब से पूछा गया कि क्या नियम-आधारित व्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है? उन्होंने जवाब दिया, ”हां और ना। नियम-आधारित व्यवस्था लगभग 80 साल पहले बनी थी, और इस समय यह दबाव का सामना कर रही है। इस पर दो तरह के विचार हैं- एक तो यह कि पुरानी व्यवस्था समाप्त हो गई है।

    वहीं, दूसरा, जिससे मैं सहमत हूं, कहता है कि यह परिवर्तन के दौर से गुजर रही है।
    भारत जैसे देश तय करेंगे दुनिया किस दिशा में बढ़ेगी
    स्टब ने कहा कि इसने 80 से अधिक वर्षों तक हमारी अच्छी सेवा की है। और, संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक को बनाए रखने के लिए हमें ग्लोबल साउथ को अधिक अधिकार और शक्ति देनी होगी, यही इसका समाधान है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत जैसे देश ही ”यह तय करेंगे कि दुनिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।”
    उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला न किया होता तो फिनलैंड कभी नाटो में शामिल न होता और उन्होंने मॉस्को के इस कदम को “रणनीतिक गलती” करार दिया क्योंकि इससे “नाटो मजबूत हुआ।” उनसे जब पूछा गया कि क्या नाटो अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है, तो स्टब ने कहा, ”नहीं, बिल्कुल नहीं। हम नाटो 3.0 का उदय देख रहे हैं।”

    यह पूछे जाने पर कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व को कैसे देखते हैं, तो उन्होंने कहा, ”आइए (अमेरिका के साथ) संबंधों को लेकर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएं, यह समझें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सौदा करने वाले नेता हैं। मतभेदों के बारे में ईमानदार और खुले रहें… आपको अमेरिका के साथ मिलकर काम करना होगा।”

  • दक्षिण अमेरिकी देशों पर कब्जे की तैयारी में ट्रंप? अब क्यूबा को भी मिली धमकी

    दक्षिण अमेरिकी देशों पर कब्जे की तैयारी में ट्रंप? अब क्यूबा को भी मिली धमकी

    वॉशिंगटन। वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने के बाद अब अमेरिका की ट्रंप सरकार के हौसलें बुलंद हैं और अब वे दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों को भी धमकाने पर उतर आए हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा के नेता को चेतावनी देते हुए कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद अगर मैं क्यूबा की सरकार में होता तो यकीनन मुझे चिंता होती।

    मार्को रुबियो ने क्यूबा को दी चेतावनी
    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘क्यूबा पूरी तरह से तबाह है। इसे पूरी तरह से अयोग्य सरकार और इसे एक वृद्ध व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा है। इसकी कोई अर्थव्यवस्था नहीं बची है। यह पूरी तरह से तबाह देश हैं। मादुरो की सुरक्षा में लगे सभी गार्ड भी क्यूबा के थे। क्यूबा ने कुछ मामलों में वेनेजुएला पर कब्जा किया हुआ है। क्यूबा ने वेनेजुएला को अपनी कालोनी बनाने की कोशिश की। अगर हम सुरक्षा के लिहाज से देखें तो अगर मैं हवाना में रह रहा होता और मैं सरकार में होता तो में घटनाक्रम से थोड़ा चिंतित तो जरूर होता।’

    अमेरिका और क्यूबा के बीच रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण हैं। दोनों देशों के संबंधों में तनाव 1960 के दशक से है, जब फिदेल कास्त्रों की सरकार के साथ अमेरिका के संबंध बिगड़े और अमेरिका ने क्यूबा पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। बराक ओबामा के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध सुधारने की कोशिश हुई, लेकिन ट्रंप और बाइडन सरकार में फिर से संबंध तनावपूर्ण हो गए।

    ट्रंप ने भी दिए संकेत
    गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी क्यूबा की आलोचना की और इसे एक असफल राष्ट्र बताया। ट्रंप ने कहा कि क्यूबा के नागरिकों और क्यूबा छोड़ चुके लोगों की मदद करना अमेरिका का लक्ष्य है। ट्रंप ने कहा, ‘क्यूबा एक रोचक मामला है। क्यूबा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। क्यूबा के लोग वर्षों से परेशानी झेल रहे हैं। मुझे लगता है कि क्यूबा एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर हम आगे चर्चा करेंगे क्योंकि क्यूबा एक असफल राष्ट्र है। हम क्यूबा के लोगों की मदद करना चाहते हैं।’

    अमेरिका की खुफिया एजेंसियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर शनिवार को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किया और उन्हें अमेरिका ले जाया गया है। अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पाम बोन्डी ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, नशीली दवाओं की तस्करी और नार्को आतंकवाद की साजिश रचने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया है।