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  • थकी हुई आंखें और गहरे काले घेरे बन रहे हैं परेशानी, एक्सपर्ट्स ने बताए कारण और आसान बचाव

    थकी हुई आंखें और गहरे काले घेरे बन रहे हैं परेशानी, एक्सपर्ट्स ने बताए कारण और आसान बचाव

    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम केवल त्वचा पर ही नहीं बल्कि आंखों के आसपास की नाजुक त्वचा पर भी गहरा प्रभाव डालता है। इस दौरान कई लोगों को आंखों के नीचे सूजन, काले घेरे और चेहरे पर लगातार थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर लोग इसे केवल कम नींद का परिणाम मानते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। बढ़ता तापमान, शरीर में पानी की कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और धूप के सीधे संपर्क जैसी स्थितियां आंखों के आसपास की त्वचा को प्रभावित करती हैं।

    आंखों के नीचे मौजूद त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक पतली और संवेदनशील होती है। यही वजह है कि शरीर में होने वाले छोटे बदलाव भी यहां जल्दी दिखाई देने लगते हैं। गर्मियों में अधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है। जब शरीर पर्याप्त रूप से हाइड्रेट नहीं रहता, तब आंखों के आसपास की त्वचा बेजान और थकी हुई दिखाई देने लगती है। इसके साथ ही सूजन की समस्या भी बढ़ सकती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि आंखों के आसपास होने वाली सूजन को चिकित्सकीय भाषा में पेरिऑर्बिटल पफीनेस कहा जाता है। इस स्थिति में आंखों के आसपास के ऊतकों में अतिरिक्त द्रव जमा हो जाता है। अधिक नमक का सेवन, पर्याप्त आराम न मिलना, लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन का उपयोग और मौसम संबंधी प्रभाव इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। कई बार सुबह उठने के बाद यह सूजन अधिक स्पष्ट दिखाई देती है।

    डार्क सर्कल की समस्या भी आज बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है। इसके पीछे केवल थकान ही जिम्मेदार नहीं होती। शरीर में पानी की कमी, अनियमित नींद, तनाव, बढ़ती उम्र और धूप के कारण होने वाला पिगमेंटेशन भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। गर्मियों में तेज अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आने से आंखों के नीचे की त्वचा में मेलानिन का उत्पादन बढ़ सकता है, जिससे काले घेरे अधिक गहरे दिखाई देने लगते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ सरल उपायों को अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। आंखों पर ठंडी सिकाई करने से सूजन कम करने में मदद मिलती है। ठंडे खीरे के टुकड़े, ठंडे चम्मच या ठंडे जेल आई मास्क का उपयोग आंखों को आराम पहुंचा सकता है। इससे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं और सूजन में राहत मिलती है।

    ग्रीन टी या ब्लैक टी बैग्स का उपयोग भी लाभदायक माना जाता है। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और कैफीन आंखों के आसपास की सूजन को अस्थायी रूप से कम करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि इनका उपयोग करने से पहले उन्हें अच्छी तरह ठंडा करना आवश्यक है।

    गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। विशेषज्ञ दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीने और पानी से भरपूर फलों को आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। खीरा, तरबूज, संतरा और नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। इससे त्वचा में नमी बनी रहती है और आंखों के नीचे की थकान कम दिखाई देती है।

    संतुलित आहार और सीमित नमक सेवन भी आंखों की सूजन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अत्यधिक नमक शरीर में द्रव को रोककर सूजन बढ़ा सकता है। इसके अलावा प्रतिदिन सात से आठ घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना भी आवश्यक माना जाता है। पर्याप्त नींद त्वचा की मरम्मत और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करती है।

    धूप से बचाव भी बेहद जरूरी है। बाहर निकलते समय UV सुरक्षा वाले सनग्लासेस और उपयुक्त सनस्क्रीन का उपयोग आंखों के आसपास की त्वचा को नुकसान से बचा सकता है। इससे पिगमेंटेशन और समय से पहले त्वचा की उम्र बढ़ने जैसी समस्याओं का खतरा भी कम होता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि आंखों की सूजन लंबे समय तक बनी रहे, दर्द, लालिमा, खुजली या अचानक एक आंख में अधिक सूजन दिखाई दे तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण किसी एलर्जी, संक्रमण, थायराइड संबंधी परेशानी या अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकते हैं, जिनके लिए चिकित्सकीय सलाह आवश्यक होती है।

  • स्टोर रूम की सफाई से लेकर वन विभाग की मदद तक, बारिश के मौसम में इन जरूरी घरेलू सुरक्षा नियमों का करें पालन

    स्टोर रूम की सफाई से लेकर वन विभाग की मदद तक, बारिश के मौसम में इन जरूरी घरेलू सुरक्षा नियमों का करें पालन


    नई दिल्ली । देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही आम नागरिकों के लिए मौसमी बीमारियों के अलावा एक और बड़ा और गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। भारी बारिश, जलभराव और जमीन के भीतर नमी बढ़ने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले रेंगने वाले जीव अपने प्राकृतिक आवासों यानी बिलों से बाहर निकलने के लिए मजबूर हो जाते हैं। सुरक्षित और सूखी जगहों की तलाश में ये जीव अक्सर इंसानी बस्तियों, घरों के बगीचों, स्टोर रूम और बेसमेंट जैसी जगहों पर शरण ले लेते हैं। इस स्थिति से निपटने और अपने परिवार को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए गृह स्वामियों को कुछ विशेष और महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को अमल में लाने की तत्काल आवश्यकता है।

    घरेलू सुरक्षा के दृष्टिकोण से सबसे पहला और बुनियादी कदम घर के आसपास के बाहरी वातावरण को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखना है। घर के परिसर या बगीचे में जमा होने वाले कचरे, सूखी लकड़ियों के गट्ठर, पुरानी ईंटों के ढेर और बेतरतीब उगी झाड़ियों को तुरंत साफ किया जाना चाहिए, क्योंकि ये स्थान सांप और बिच्छुओं के छिपने के लिए सबसे अनुकूल माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि घर के लॉन या आसपास के मैदान में घास अधिक बढ़ गई है, तो उसकी नियमित रूप से छंटाई कराना अनिवार्य है, ताकि खुले और साफ स्थान पर ये जीव ठहर न सकें।

    सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के अगले चरण में घर के भौतिक ढांचे का बारीकी से निरीक्षण करना आवश्यक है। भवन की दीवारों, खिड़कियों के कोनों, मुख्य दरवाजों के निचले हिस्सों और फर्श में मौजूद किसी भी प्रकार की छोटी-बड़ी दरारों या गैप की सघन जांच की जानी चाहिए। बिच्छू और छोटे सांप बेहद महीन दरारों के रास्ते भी घर के भीतर सुगमता से प्रवेश कर जाते हैं। अतः ऐसी किसी भी संभावित एंट्री पॉइंट या झिरी के दिखाई देने पर उसे अविलंब सीमेंट, सिलिकॉन सीलेंट या अन्य मजबूत निर्माण सामग्री की सहायता से पूरी तरह एयरटाइट बंद कर देना चाहिए।

    बरसात के दिनों में घर के आंतरिक वातावरण को सूखा रखना और वहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना भी सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। स्टोर रूम, बेसमेंट और घर के उन कोनों में जहां हवा और रोशनी कम पहुंचती है, वहां नियमित रूप से सफाई और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए। अक्सर लोग जूते, चप्पल, पुराने कपड़े या कार्डबोर्ड के बक्से लंबे समय तक एक ही स्थान पर रख देते हैं, जो इन जीवों के लिए छिपने का आदर्श स्थान बन जाते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस मौसम में किसी भी रखे हुए सामान, कपड़ों या जूतों का उपयोग करने से पहले उन्हें एक बार अच्छी तरह से झाड़कर और जांचकर ही इस्तेमाल में लाएं।

    इन तमाम सावधानियों के बावजूद यदि कभी घर के भीतर या आसपास कोई जहरीला सांप अथवा अन्य जीव दिखाई दे, तो नागरिकों को अत्यधिक संयम बरतने की आवश्यकता है। ऐसी आपातकालीन स्थिति में जीव को खुद पकड़ने, सहलाने या लाठी-डंडों से मारने का प्रयास बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि भयभीत होने पर ये जीव और अधिक आक्रामक होकर हमला कर सकते हैं। इसके स्थान पर स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों, पशु बचाव दल (एनिमल रेस्क्यू टीम) या किसी प्रमाणित और प्रशिक्षित सर्प विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करना चाहिए, जो आधुनिक उपकरणों की मदद से सुरक्षित रूप से जीव को वहां से रेस्क्यू कर सकें।

  • हफ्ते से ज्यादा खांसी है तो हो जाए सावधान टीबी का संकेत हो सकता है

    हफ्ते से ज्यादा खांसी है तो हो जाए सावधान टीबी का संकेत हो सकता है

    नई दिल्ली:  टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस आज भी भारत में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। बदलते मौसम में खांसी होना आम बात है, लेकिन हर खांसी को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। कई बार साधारण दिखने वाली खांसी किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है

    सामान्य खांसी आमतौर पर 5 से 7 दिनों में ठीक हो जाती है, जो सर्दी, वायरल इंफेक्शन या एलर्जी के कारण होती है। लेकिन अगर खांसी 2 से 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहती है और दवाओं से आराम नहीं मिलता, तो यह टीबी का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है

    टीबी सिर्फ खांसी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है। इसके साथ कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे शाम के समय हल्का बुखार, रात में ज्यादा पसीना आना, बिना कारण वजन कम होना, लगातार थकान महसूस होना और सीने में दर्द

    टीबी के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और दूसरों में भी फैल सकती है। इसलिए अगर खांसी के साथ ये लक्षण नजर आएं, तो देरी न करें और तुरंत जांच कराएं

    विशेषज्ञों के अनुसार, जागरूकता और समय पर इलाज ही टीबी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। अगर शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है
    हर खांसी को नजरअंदाज न करें। अगर यह लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे चेतावनी संकेत मानकर तुरंत मेडिकल सलाह लेना ही समझदारी है