Tag: Prime Minister Narendra Modi

  • US-Iran संघर्ष के बीच PM मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात

    US-Iran संघर्ष के बीच PM मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तेजी से बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष (US-Iran conflict) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French President Emmanuel Macron) से टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर भारत और फ्रांस की साझा चिंताओं पर विस्तार से चर्चा हुई, साथ ही संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बात की है। भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता की बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयासों को मजबूती से समर्थन दे रहा है, ताकि यह संघर्ष और व्यापक न हो सके।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की। हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर अपनी साझा चिंताओं और संवाद एवं कूटनीति की ओर लौटने की आवश्यकता पर चर्चा की। हम क्षेत्र में शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए घनिष्ठ रूप से जुड़े रहेंगे और प्रयासों का समन्वय करेंगे।

    दरअसल, यह फोन कॉल ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व का संघर्ष तेजी से फैल रहा है और अब यह भारत के निकटवर्ती क्षेत्रों तक पहुंच गया है। बुधवार को श्रीलंका के तट से कुछ दूर अंतरराष्ट्रीय जल में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को टॉरपीडो से नष्ट कर दिया। इस हमले में कम से कम 80 से अधिक नाविकों की मौत हो गई, जबकि श्रीलंका की नौसेना ने 32 लोगों को बचाया। जहाज में कुल 180 लोग सवार थे। बता दें कि यह ईरानी फ्रिगेट कुछ दिन पहले ही भारत में हुए अंतरराष्ट्रीय नौसेना अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा था।

    बता दें कि ईरान इजरायल और अमेरिका संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों से हुई, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर जवाबी हमलों की शुरूआत की, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। पिछले कुछ दिनों में दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर जारी है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने श्रीलंका तट पर हुए हमले की कड़ी निंदा की और इसे ‘बिना किसी चेतावनी के अत्याचार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस मिसाल पर गहरा अफसोस होगा।

  • शिक्षा के विस्तार के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ाव आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    शिक्षा के विस्तार के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ाव आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शिक्षा का विस्तार होना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने यह विचार शुक्रवार शाम गांधी नगर स्थित सागर पब्लिक स्कूल के रजत जयंती समारोह में व्यक्त किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्कूल के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और सेवाभावी पदाधिकारियों का सम्मान भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी बनने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्हें श्रेष्ठ शिक्षक, समर्पित जनप्रतिनिधि, कुशल व्यापारी और अच्छे किसान बनने की भावना भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ऐसे प्रकल्पों से जुड़ें, जिससे वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें।

    डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीक के उपयोग के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़े रहना हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्रगति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज गूगल और अन्य वैश्विक संस्थाओं में भारतीय उच्च पदों पर कार्यरत हैं और देश का नाम रौशन कर रहे हैं।

    इस अवसर पर डॉ. यादव ने सागर समूह के स्कूल सहित सातवें शिक्षण संस्थान के शुभारंभ पर बधाई दी और समूह की शिक्षा क्षेत्र में 25 वर्ष की उपलब्धियों को सराहा। समारोह में उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा निर्मित विज्ञान मॉडल—जैसे प्लांट्स द्वारा जल प्रदूषण रोकना, विंड मिल और लाइव गार्ड मैनेजमेंट—का अवलोकन किया। साथ ही मिट्टी के शिल्प निर्माण करने वाले बच्चों से संवाद कर उनकी प्रतिभा की प्रशंसा की।

    मुख्यमंत्री ने कक्षा 10 वीं में अंशुमन मौर्य को भी सम्मानित किया, जिन्होंने 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया में तीसरी रैंक हासिल की।

    कार्यक्रम को रामेश्वर शर्मा ने भी संबोधित किया। समारोह की शुरुआत में सागर समूह के प्रमुख सुधीर अग्रवाल, सिद्धार्थ अग्रवाल और सागर अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों का स्वागत किया।

    डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संस्कार, मूल्य और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव का मार्ग भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में श्रेष्ठता, नैतिक मूल्यों और समाज के लिए योगदान देने की प्रेरणा दी।

  • भारत सेशेल्स साझेदारी को नई ऊँचाई 175 मिलियन डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा

    भारत सेशेल्स साझेदारी को नई ऊँचाई 175 मिलियन डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति श्री अर्मिनी और उनके प्रतिनिधिमंडल का भारत आगमन पर हार्दिक स्वागत किया तथा राष्ट्रपति चुने जाने पर 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति अर्मिनी की यह पहली भारत यात्रा ऐसे महत्वपूर्ण वर्ष में हो रही है जब सेशेल्स अपना 50वां स्वतंत्रता दिवस तथा भारत सेशेल्स राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ मना रहा है जो दोनों देशों की मित्रता की गहराई को दर्शाता है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और सेशेल्स के संबंध केवल राजनयिक दायरे तक सीमित नहीं हैं बल्कि हिंद महासागर के माध्यम से सदियों पुराने ऐतिहासिक सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों पर आधारित हैं। एक समुद्री पड़ोसी और विश्वसनीय साझेदार के रूप में सेशेल्स भारत के ‘महासागर विज़न’ का अभिन्न हिस्सा है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि आज की वार्ताओं में आर्थिक सहयोग को और सुदृढ़ करने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने फिनटेक और डिजिटल समाधान के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। विकास साझेदारी को भारत सेशेल्स संबंधों की मजबूत नींव बताते हुए उन्होंने सेशेल्स की प्राथमिकताओं के अनुरूप 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की। यह पैकेज सामाजिक आवास ई-मोबिलिटी व्यावसायिक प्रशिक्षण स्वास्थ्य रक्षा तथा समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में परियोजनाओं को समर्थन देगा जिससे युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर सृजित होंगे।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि सेशेल्स की क्षमता निर्माण में भारत के आईटीईसी कार्यक्रम की अहम भूमिका रही है। इस दिशा में सेशेल्स के सिविल सेवकों के प्रशिक्षण हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके साथ ही डिजिटल परिवर्तन स्वास्थ्य सहयोग किफायती औषधियों की आपूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु अनुकूल समाधानों में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति बनी है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्लू इकोनॉमी समुद्री अनुसंधान क्षमता निर्माण और डेटा साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग स्वाभाविक है। रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए उन्होंने कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन में पूर्ण सदस्य के रूप में सेशेल्स के शामिल होने का स्वागत किया।

    प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को सबसे बड़ी ताकत बताते हुए पर्यटन शिक्षा संस्कृति और खेल के माध्यम से युवा आदान-प्रदान बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज जारी किया जा रहा भारत सेशेल्स संयुक्त दृष्टि-पत्र आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग का मार्गदर्शक बनेगा।

  • "परीक्षा पे चर्चा": लेसन प्लान विद्यार्थियों के साथ पूर्व से ही साझा करें : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

    "परीक्षा पे चर्चा": लेसन प्लान विद्यार्थियों के साथ पूर्व से ही साझा करें : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी


    भोपाल ! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में विद्याथिर्यों से संवाद कर परीक्षा से जुड़े तनाव और शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट विद्यालय, जबलपुर के छात्र श्री आयुष तिवारी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी से प्रश्न किया कि कई बार वे शिक्षकों की पढ़ाने की गति से तालमेल नहीं बिठा पाते हैं, उसे कैसे मैच करें? इस पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विद्यार्थियों को समझाते हुए शिक्षकों से भी आग्रह किया कि अपने अध्‍यापन की स्‍पीड विद्यार्थियों के सीखने की गति के अनुरूप रखें। लेसन प्‍लान विद्याथिर्यों के साथ पूर्व से ही साझा करें। विद्यार्थी वह चेप्‍टर पहले से पढें, अध्‍ययन करें जो शिक्षक भविष्‍य में कक्षा में पढाने वाले हैं। उन्‍होंने कहा कि शिक्षकों की गति से सामंजस्‍य बैठाने का सबसे अच्‍छा तरीका यह है कि पहले अपने को जोड़ो, फिर मन को जोड़ो। उसके बाद पढाई के विषय शुरू करो। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि मन को जोड़ने का अर्थ है, विषय की तमाम जानकारियां जुटाना और जोड़ने का अर्थ है, एकाग्रता बनाए रखना। इससे आपकी समझ मजबूत होगी और आप एक कदम आगे चलेंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विद्यार्थियों के साथ आयोजित ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में तनावमुक्त जीवन, समय प्रबंधन, अनुशासन, जीवन कौशल एवं व्यवसायिक विकास के महत्वपूर्ण मंत्र दिए। इसके साथ ही उन्‍होंने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    2018 से लगातार हो रहा आयोजन

    प्रधानमंत्री श्री मोदी वर्ष 2018 से परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान परीक्षाओं के तनाव को दूर करने के लिए विद्यार्थियों से संवाद करते हैं। इस वर्ष यह कार्यक्रम का 9 वां संस्करण था। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश भर से आये विद्यार्थियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर किया गया।

    जिसने समय का सही प्रबंधन कर लिया, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता- शिक्षा मंत्री श्री सिंह

    परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में स्‍कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा कन्या उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्री श्री मोदी के परीक्षा मंत्र सुने। मंत्री श्री सिंह ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से प्रधानमंत्री के द्वारा दिए गए सूत्रों और विचारों को आत्‍मसात कर परीक्षाओं की तैयारी करने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, अनुशासन को मजबूत करने और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। जिसने समय का सही प्रबंधन कर लिया, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। समय अनुशासन सिखाता है और अनुशासन के साथ जिया गया जीवन ही सफलता की सच्ची पहचान है। जब तक असंभव को करने का प्रयास नहीं किया जाएगा, तब तक असाधारण उपलब्धियां संभव नहीं हैं।

    शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय भोपाल में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम

    परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का भोपाल के शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय में राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम हुआ। यहां पर स्‍कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल ने विशिष्‍ट जनों, वरिष्‍ठ अधिकारी, अभिभावक और विद्यार्थियों के साथ सजीव प्रसारण में सहभागिता की। संचालक लोक शिक्षण श्री केके द्व‍िवेदी सहि‍त कार्यक्रम के नोडल अधिकारी संयुक्‍त संचालक श्री एच.एन. नेमा भी उपस्थित रहे।

    प्रदेश में राज्य शैक्षिक अनुसंधान, प्रशिक्षण परिषद (SCERTS), सभी जिला शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थानों (DIETS) और प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय एवं शासन से अनुदान प्राप्‍त विद्यालयों में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम को समारोह पर्वूक आयोजित किया गया। उक्‍त कार्यक्रम के लाइव प्रसारण में विद्यार्थियों ने उत्‍साहपूर्वक सहभागिता की। प्रदेश के स्‍कूलों में टीवी प्रसारण के अलावा, इंटरनेट एक्सेस डिवाइस (कंप्यूटर, लैपटॉप इत्यादि) पर भी कार्यक्रम देखने की सुविधा स्‍थापित की गई थी।

    9 फरवरी को होगा अगला प्रसारण

    परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का अगला प्रसारण 9 फरवरी 2026 को होगा। जिसमें प्रधानमंत्री श्री मोदी देश के विभिन्‍न अंचलों के विद्यार्थियों के साथ चर्चा करेंगे। यह कार्यक्रम विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर सुबह 10 बजे से प्रसारित किया जायेगा। प्रदेश के विद्यालयों में उक्‍त कार्यक्रम के सजीव प्रसारण की व्‍यवस्‍थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

  • PM मोदी 7–8 फरवरी को जाएंगे मलेशिया, रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत

    PM मोदी 7–8 फरवरी को जाएंगे मलेशिया, रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत


    नई दिल्‍ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 और 8 फरवरी 2026 को मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर मलेशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर यह प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया की तीसरी यात्रा होगी, वहीं दूसरी ओर अगस्त 2024 में भारत मलेशिया संबंधों को समग्र रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिए जाने के बाद उनकी यह पहली मलेशिया यात्रा होगी। ऐसे में इस दौरे से दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    विदेश मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस बातचीत में भारत-मलेशिया संबंधों के सभी अहम पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। दोनों नेता न केवल अब तक हुए सहयोग की समीक्षा करेंगे, बल्कि भविष्य में आपसी हितों के लिए सहयोग की नई रूपरेखा भी तय करेंगे।

    द्विपक्षीय वार्ता के साथ विविध कार्यक्रम

    प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी। वे मलेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगे। मलेशिया में भारतीय प्रवासियों की बड़ी और प्रभावशाली आबादी है, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री उद्योग और व्यापार जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे, जिससे व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    इस यात्रा के दौरान 10वां भारत-मलेशिया सीईओ फोरम आयोजित किया जाना भी तय है। यह मंच दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट नेताओं को एक साथ लाएगा, जहां वे निवेश के नए अवसरों, व्यापारिक साझेदारियों और आर्थिक सहयोग को लेकर विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फोरम भारत-मलेशिया आर्थिक संबंधों को और मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों की मजबूत नींव

    भारत और मलेशिया के रिश्ते केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे ऐतिहासिक, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों की गहरी नींव है। सदियों पुराने संपर्कों के चलते दोनों देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास का स्तर हमेशा ऊंचा रहा है। मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दुनिया में भारतीय प्रवासियों का तीसरा सबसे बड़ा समुदाय है। यह प्रवासी समुदाय दोनों देशों के रिश्तों को सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाता है।
    भारतीय मूल के लोग मलेशिया की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि भारत और मलेशिया के रिश्तों में पीपल-टू-पीपल कॉन्टैक्ट एक केंद्रीय तत्व रहा है।

    बहुआयामी और विस्तारशील संबंध

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत-मलेशिया संबंध बहुआयामी हैं और समय के साथ लगातार विस्तार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस आगामी यात्रा के दौरान व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा सहयोग, समुद्री सहयोग, डिजिटल और वित्तीय प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा की जाएगी।

    खासतौर पर रक्षा और समुद्री सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत और मलेशिया का सहयोग बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा डिजिटल तकनीक, फिनटेक और स्टार्टअप जैसे उभरते क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।

    भविष्य की दिशा तय करेगी यात्रा

    प्रधानमंत्री मोदी की यह मलेशिया यात्रा न केवल मौजूदा सहयोग की समीक्षा का अवसर होगी, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भारत-मलेशिया संबंधों की दिशा और प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट करेगी। अगस्त 2024 में संबंधों को समग्र रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद यह यात्रा दोनों देशों के लिए उस साझेदारी को जमीन पर उतारने का एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके साहस और विरासत को किया नमन

    पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके साहस और विरासत को किया नमन


    नई दिल्ली । पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाने वाली नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अडिग साहस अटल संकल्प और राष्ट्र के प्रति अद्वितीय योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निडर नेतृत्व और अटूट देशभक्ति भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नेताजी बोस का जीवन उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी हमेशा प्रेरणा देता रहा है। उन्होंने वर्ष 2009 को स्मरण करते हुए बताया कि 23 जनवरी को गुजरात के आईटी क्षेत्र को रूपांतरित करने वाली अग्रणी ई-ग्राम विश्वग्राम योजना की शुरुआत की गई थी। यह योजना हरिपुरा से लॉन्च की गई थी, जिसका नेताजी बोस के जीवन में विशेष महत्व रहा है। प्रधानमंत्री ने हरिपुरा के लोगों द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत और उसी ऐतिहासिक मार्ग पर आयोजित शोभायात्रा को भी याद किया, जिस पर कभी नेताजी सुभाष चंद्र बोस चले थे।

    प्रधानमंत्री ने वर्ष 2012 में अहमदाबाद में आयोजित आज़ाद हिंद फौज दिवस समारोह को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस भव्य आयोजन में नेताजी बोस से प्रेरित अनेक लोग उपस्थित थे, जिनमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्री पी. ए. संगमा भी शामिल थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन नेताजी की विचारधारा और उनके संघर्ष की जीवंत अभिव्यक्ति था।

    बीते दशकों पर चिंतन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के गौरवपूर्ण योगदान को लंबे समय तक उचित सम्मान नहीं मिला और उन्हें भुलाने के प्रयास किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान दृष्टिकोण भिन्न है और उनकी सरकार ने हर संभव अवसर पर नेताजी के जीवन, संघर्ष और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम नेताजी बोस से जुड़ी फाइलों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 ऐतिहासिक रहा, जब लाल किले पर आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई और उन्हें तिरंगा फहराने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने आईएनए के वरिष्ठ नेता ललती राम जी के साथ हुई बातचीत को भी याद किया। इसी वर्ष अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्रीविजयपुरम में नेताजी द्वारा तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ पर ध्वजारोहण किया गया और रॉस द्वीप सहित तीन द्वीपों के नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखे गए।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि लाल किले स्थित क्रांति मंदिर संग्रहालय में नेताजी बोस और इंडियन नेशनल आर्मी से जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री संजोई गई है, जिसमें नेताजी द्वारा पहनी गई टोपी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि नेताजी के सम्मान में उनकी जयंती को पराक्रम दिवस घोषित किया गया है और 2021 में उन्होंने कोलकाता स्थित नेताजी भवन का दौरा भी किया, जहाँ से नेताजी ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा प्रारंभ की थी। औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के संकल्प का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इंडिया गेट के समीप राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के निर्णय को उनकी विरासत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

  • बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके दूरदर्शी नेतृत्व और योगदान को किया स्मरण

    बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके दूरदर्शी नेतृत्व और योगदान को किया स्मरण


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और महाराष्ट्र के सामाजिक-राजनीतिक जीवन में दिए गए अमूल्य योगदान को भावपूर्ण स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ऐसी महान हस्ती थे जिन्होंने अपने विचारों, कार्यशैली और जनसंवाद के माध्यम से महाराष्ट्र के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से आकार दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने बालासाहेब ठाकरे को कुशाग्र बुद्धि, दमदार भाषण कला और अडिग विश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका जनमानस से जुड़ाव असाधारण था। वे जिस स्पष्टता और दृढ़ता के साथ अपने विचार रखते थे, वह उन्हें जननेता के रूप में विशिष्ट बनाती थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि बालासाहेब केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे जनता की भावनाओं को समझने और उन्हें स्वर देने वाले विचारक भी थे।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि राजनीति से इतर बालासाहेब ठाकरे की संस्कृति, साहित्य और पत्रकारिता में गहरी रुचि थी। एक कार्टूनिस्ट के रूप में उनका करियर समाज के प्रति उनके सूक्ष्म अवलोकन, तीक्ष्ण दृष्टि और विभिन्न मुद्दों पर उनकी निडर टिप्पणी को दर्शाता है। उनके कार्टून सामाजिक सच्चाइयों को सरल, किंतु प्रभावशाली ढंग से सामने रखते थे और आम जन को सोचने के लिए प्रेरित करते थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे का जीवन साहस, स्पष्ट विचार और सांस्कृतिक चेतना का संगम था। उनका दृष्टिकोण केवल समकालीन राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे महाराष्ट्र के दीर्घकालीन विकास और गौरव को लेकर स्पष्ट विजन रखते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे स्वयं महाराष्ट्र की प्रगति के लिए बालासाहेब ठाकरे के विजन से अत्यंत प्रेरित हैं और उस विजन को साकार करने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी बालासाहेब ठाकरे को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि बालासाहेब का जीवन और कार्य हमें निडरता, आत्मविश्वास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की सीख देता है।बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर देशभर में उनके योगदान को स्मरण करते हुए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रधानमंत्री का यह संदेश न केवल एक महान नेता को श्रद्धांजलि है, बल्कि उनके विचारों और विजन को आगे बढ़ाने के संकल्प की भी अभिव्यक्ति है।

  • बसंत पंचमी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएँ, माँ सरस्वती से किया आशीर्वाद की कामना

    बसंत पंचमी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएँ, माँ सरस्वती से किया आशीर्वाद की कामना


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बसंत पंचमी के पावन और उल्लासपूर्ण अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने इस पर्व को प्रकृति की सुंदरता, दिव्यता और नवचेतना से जुड़ा हुआ बताते हुए इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने ज्ञान, विद्या और कला की देवी माँ सरस्वती से समस्त नागरिकों पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बसंत पंचमी का पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा नवीन आरंभ और बौद्धिक चेतना का प्रतीक है। यह दिन विद्या विवेक और सृजनशीलता के महत्व को स्मरण कराने वाला होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि माँ सरस्वती के आशीर्वाद से प्रत्येक नागरिक का जीवन ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो और समाज में विवेक, सद्भाव तथा रचनात्मकता का विस्तार हो।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि बसंत पंचमी न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है, बल्कि यह मन, विचार और कर्म में नई ऊर्जा का संचार करती है। यह पर्व हमें शिक्षा, कला और संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव विकसित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कामना की कि देवी सरस्वती की कृपा से देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और युवा पीढ़ी ज्ञान व बुद्धि के बल पर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी बसंत पंचमी के अवसर पर अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा आप सभी को प्रकृति की सुंदरता और दिव्यता को समर्पित पावन पर्व बसंत पंचमी की अनेकानेक शुभकामनाएं। ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का आशीर्वाद हर किसी को प्राप्त हो। उनकी कृपा से सबका जीवन विद्या, विवेक और बुद्धि से सदैव आलोकित रहे, यही कामना है।

    प्रधानमंत्री के इस संदेश को देशभर में लोगों ने सराहा और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भी एक-दूसरे को बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ दीं। शैक्षणिक संस्थानों सांस्कृतिक संगठनों और धार्मिक स्थलों पर माँ सरस्वती की आराधना की गई और ज्ञान कला व संस्कृति के महत्व को स्मरण किया गया। प्रधानमंत्री का यह संदेश बसंत पंचमी के अवसर पर जनमानस में उत्साह, आस्था और सकारात्मकता का संचार करता नजर आया।

  • पीएम मोदी का ब्लॉग 1000 साल बाद भी अडिग खड़ा है सोमनाथ विध्वंस नहीं पुनरुत्थान की गाथा

    पीएम मोदी का ब्लॉग 1000 साल बाद भी अडिग खड़ा है सोमनाथ विध्वंस नहीं पुनरुत्थान की गाथा


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में सोमनाथ मंदिर के इतिहास को याद करते हुए इसे भारत की आस्था संस्कृति और संघर्ष का प्रतीक बताया। 1026 में गजनी के महमूद द्वारा सोमनाथ पर किया गया आक्रमण जिसने मंदिर को ध्वस्त कर दिया था आज से एक हजार साल पहले हुआ था। इस आक्रमण का उद्देश्य केवल मंदिर को नष्ट करना नहीं था बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति को भी नष्ट करना था। हालांकि इस आक्रमण के बावजूद आज भी सोमनाथ मंदिर पूरे गर्व और गौरव के साथ खड़ा है और यह भारत की अडिग आस्था और संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा सोमनाथ शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। यह मंदिर भारत के आत्मगौरव का शाश्वत प्रतीक है जो न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की अमिट छाप भी छोड़ता है।

    सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व

    गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान रखता है। शास्त्रों के अनुसार सोमनाथ के दर्शन से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है और उसे आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व ने इसे कई बार विदेशी आक्रमणों का निशाना बना दिया। विशेष रूप से 1026 में महमूद गजनवी द्वारा किया गया आक्रमण इस मंदिर के इतिहास का एक काला अध्याय था जिसने सोमनाथ को ध्वस्त कर दिया था।

    आक्रमण के बावजूद पुनर्निर्माण

    प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि 1026 में सोमनाथ पर आक्रमण के बाद भी मंदिर का पुनर्निर्माण लगातार होता रहा। 1951 में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप 11 मई 1951 को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। यह घटना भारतीय आस्था और संस्कृति की विजयी गाथा बन गई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुए इस पुनर्निर्माण समारोह का उल्लेख किया और बताया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीय स्वाभिमान और आस्था की एक शक्तिशाली मिसाल है।

    सरदार पटेल का योगदान

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को भी याद किया। 1947 में दीवाली के समय सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए दृढ़ संकल्प लिया था। यह उनका सपना था कि इस पवित्र मंदिर को फिर से खड़ा किया जाए और श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर सकें। उनका यह प्रयास भारतीय इतिहास का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

    सोमनाथ की प्रेरणा

    पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में कहा कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण हमें यह सिखाता है कि भारत कभी नहीं हारता। उन्होंने यह भी बताया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण केवल एक शारीरिक संरचना का पुनर्निर्माण नहीं था बल्कि यह भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान का प्रतीक था। उन्होंने कहा सोमनाथ हमें यह संदेश देता है कि आस्था में शक्ति होती है जबकि घृणा और कट्टरता में विनाश की ताकत।

    भविष्य के लिए संदेश

    प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि अगर एक खंडित मंदिर को पुनर्निर्मित किया जा सकता है तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव को पुनः प्राप्त कर सकता है। उन्होंने इस प्रेरणा के साथ नए संकल्प के साथ एक विकसित भारत के निर्माण की बात की। मोदी ने यह भी कहा कि सोमनाथ आज भी हमारे विश्वास और आस्था का सबसे मजबूत आधार है जो हमें आगे बढ़ने और सफलता की ओर प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की गाथा को याद करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि यह भारतीय संस्कृतिस्वाभिमान और संघर्ष का प्रतीक है। 1026 के आक्रमण के बाद आज तक सोमनाथ ने हमें यह सिखाया है कि हमारी आस्था को न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही इसे झुका जा सकता है। यही संदेश भारत को दुनिया भर में हर कठिनाई से निपटने की प्रेरणा देता है।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की गाथा को याद करते हुए कहा- यह भारतीय सभ्यता और साहस का प्रतीक है

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की गाथा को याद करते हुए कहा- यह भारतीय सभ्यता और साहस का प्रतीक है


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमनाथ मंदिर के विध्वंस और पुनर्निर्माण की गाथा को याद किया और इसे भारतीय सभ्यता की अमर चेतना का प्रतीक बताया। यह वही मंदिर है जिस पर आज से ठीक एक हजार वर्ष पहले यानी 1026 में गजनी के महमूद ने पहला भीषण आक्रमण किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से बात करते हुए इसे भारत की आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक बताया।

    सोमनाथ मंदिर का महत्व

    सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित एक अत्यधिक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है और यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है। शास्त्रों के अनुसार इस मंदिर के दर्शन से पापों से मुक्ति और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। इसी आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व के कारण यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों का लक्ष्य बन चुका है लेकिन इसके बावजूद यह सदैव अपने स्थान पर अडिग खड़ा रहा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि “जय सोमनाथ! 2026 में हम उस पवित्र स्थल के पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने का स्मरण कर रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। यह मंदिर भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सर्वोपरि रही।”

    गजनी के महमूद द्वारा आक्रमण

    जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था जिसका उद्देश्य केवल मंदिर को तोड़ना नहीं था बल्कि भारतीय आस्था और संस्कृति को नष्ट करना था। यह आक्रमण भारतीय इतिहास का एक अत्यधिक कष्टकारी क्षण था लेकिन इसके बावजूद सोमनाथ के प्रति भारतीयों की आस्था और विश्वास कभी कम नहीं हुआ।

    सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद से यह भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बन गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस महत्वपूर्ण क्षण को याद करते हुए कहा कि यह गाथा केवल मंदिर के विध्वंस की नहीं बल्कि संघर्ष बलिदान और पुनर्निर्माण की कहानी है। यह मंदिर आज भी दुनिया को यह संदेश देता है कि आस्था को न तो समाप्त किया जा सकता है और न ही उसे झुकाया जा सकता है।

    सोमनाथ का पुनर्निर्माण और वर्तमान स्थिति

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीयों की न केवल आस्था बल्कि उनकी संकल्पशक्ति को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि एक खंडित मंदिर फिर से खड़ा हो सकता है तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव के साथ पुनः दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।

    आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश

    प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि सोमनाथ की यह कहानी केवल भारत के इतिहास से जुड़ी नहीं है बल्कि यह भारत के पुनर्निर्माण और सामर्थ्य की भी गाथा है। वह मानते हैं कि आज के समय में जब भारत पुनः अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर गर्व महसूस करता है सोमनाथ मंदिर से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि अपनी आस्था और संस्कृति के साथ आगे बढ़ना कितना महत्वपूर्ण है।

    सोमनाथ के द्वारा दिया गया संदेश
    आज भी सोमनाथ मंदिर लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय समाज के अदम्य साहस संघर्ष और पुनर्निर्माण की जीवंत मिसाल भी प्रस्तुत करता है। पीएम मोदी ने अपनी ब्लॉग पोस्ट में इस तथ्य का उल्लेख किया कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के अदम्य साहस आत्मविश्वास और संस्कृति के प्रति आस्थाओं की महत्ता को दर्शाता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के महत्व को एक नए दृष्टिकोण से पेश किया जो केवल आस्था का केंद्र नहीं है बल्कि यह भारत की ताकत सामर्थ्य और संघर्ष की भी गाथा है। मोदी ने यह संदेश दिया कि जैसे सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ वैसे ही भारत अपनी गौरवशाली संस्कृति और सभ्यता के साथ पुनः उठ सकता है और दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।